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Kya Likhu

NCERT Class 9 · Hindi Based on NCERT Class 9 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी — संपूर्ण अध्ययन नोट्स

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**लेखक परिचय: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी**

**जीवन परिचय**

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव (तत्कालीन मध्य प्रदेश में स्थित, अब छत्तीसगढ़) में हुआ था। वे एक बहुमुखी साहित्यकार थे, जिन्होंने हिंदी साहित्य को कई महत्वपूर्ण कृतियाँ दीं।

**साहित्य में योगदान और प्रतिष्ठा**

बख्शी की ख्याति निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रतिष्ठित है—

  • **कुशल आलोचक** — साहित्य की समीक्षा और विश्लेषण में माहिर
  • **कवि** — काव्य रचना में निपुण
  • **निबंधकार** — विशेष रूप से निबंध लेखन के लिए प्रसिद्ध
  • **हास्य-व्यंग्यकार** — सामाजिक विषयों पर व्यंग्य लेखन
  • **पत्रिका संपादक** — सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन किया
  • **प्रमुख रचनाएँ**

    निबंध संग्रह: पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने

    काव्य रचनाएँ: अश्रुदल, शतदल

    कहानी संग्रह: झलमला, त्रिवेणी

    आलोचनात्मक कृतियाँ: विश्व साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श, हिंदी उपन्यास साहित्य

    **लेखकीय विशेषताएँ**

    बख्शी की रचनाओं की मुख्य विशेषताएँ थीं—

  • **अध्यात्मिक विचार** — आध्यात्मिक दर्शन का समावेश
  • **समाज-सुधार की भावना** — सामाजिक विसंगतियों का विश्लेषण
  • **लोकजीवन का महत्व** — आम जनता के जीवन को प्रमुख स्थान
  • **तार्किक विश्लेषण** — भारतीय कृषि और सामाजिक संबंधों का गहन मूल्यांकन
  • **पूर्व-पश्चिम समन्वय** — भारतीय और पाश्चात्य साहित्य सिद्धांतों का सामंजस्य
  • **मृत्यु और विरासत**

    बख्शी का निधन सन् 1971 में हुआ। उन्होंने हिंदी साहित्य को एक समृद्ध विरासत छोड़ी, विशेषकर निबंध विधा में उनका योगदान अतुलनीय है।

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    **'क्या लिखूँ?' निबंध का परिचय और प्रयोजन**

    **निबंध का विषय और उद्देश्य**

    'क्या लिखूँ?' निबंध में पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने **निबंध की रचना प्रक्रिया को व्यावहारिक तरीके से समझाया है**। यह निबंध निबंध लेखन की कठिनाइयों, विभिन्न तरीकों और आदर्श निबंध लिखने की कला को दर्शाता है।

    **निबंध में आए दो प्रमुख विषय**

    1. **दूर के ढोल सुहावने होते हैं** — एक प्रसिद्ध लोकोक्ति पर आधारित

    2. **समाज-सुधार** — एक गंभीर सामाजिक विषय

    **निबंध की शैली विशेषताएँ**

  • **आत्मपरक शैली** — लेखक सीधे पाठकों से संवाद करता है
  • **रोचक और सरल ढंग** — जटिल विचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है
  • **साहित्यिक संदर्भ** — महत्वपूर्ण साहित्यकारों और विद्वानों के विचारों का प्रभावी उपयोग
  • **सांस्कृतिक संदर्भ** — भारतीय संस्कृति और विचार परंपरा का उल्लेख
  • **जीवंत और आत्मीय** — पाठकों के साथ सीधा और व्यक्तिगत संबंध
  • ---

    **निबंध लेखन की प्रेरणा और मानसिक स्थिति**

    **ए.जी. गार्डिनर का विचार**

    अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक ए.जी. गार्डिनर के अनुसार—

    लिखने की एक **विशेष मानसिक स्थिति** होती है जिसमें:

  • मन में उमंग उठती है
  • हृदय में स्फूर्ति आती है
  • मस्तिष्क में आवेग उत्पन्न होता है
  • तब **लेख लिखना पड़ता है** (अनिवार्य हो जाता है)
  • **गार्डिनर का महत्वपूर्ण सिद्धांत**: विषय की चिंता न करके लेखक को अपने हृदय के आवेग को ही प्रमुख माना जाना चाहिए।

    **उदाहरण**: हैट को टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है। असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं। इसी प्रकार लेखन में असली वस्तु है **मन के भाव**, न कि विषय।

    **लेखक की अलग राय**

    बख्शी को गार्डिनर के इस सिद्धांत से सहमति नहीं है। उनके अनुसार—

  • वह उस मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं करते
  • उन्हें **सोचना, चिंता करना, परिश्रम करना पड़ता है**
  • तब कहीं वे एक निबंध लिख सकते हैं
  • प्रतिभा से ज्यादा **परिश्रम और चिंता** उनके लिए आवश्यक है
  • ---

    **निबंध लेखन की कठिनाइयाँ**

    **नमिता और अमिता का अनुरोध**

    लेखक को दो छात्राओं की ओर से दो विषयों पर निबंध लिखने का कार्य दिया गया—

    1. **नमिता** — 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' विषय पर निबंध

    2. **अमिता** — 'समाज-सुधार' विषय पर निबंध

    दोनों विषय **परीक्षा में आ चुके हैं** और दोनों पर **आदर्श निबंध** लिखने हैं।

    **लेखक की व्यावहारिक समस्याएँ**

    1. **विषय की अपर्याप्तता**: क्या दूर के ढोल सुहावने होते हैं — यह विषय पाँच पेज के लिए पर्याप्त है?

    2. **विषय की जटिलता**: समाज-सुधार एक अनादिकाल से चली आ रही बहस है, जिसमें बड़े विद्वानों में भी विरोध है। इसे पाँच पेज में कैसे निबद्ध किया जाए?

    3. **समय की कमी**: लेखक को केवल दो घंटे में दोनों निबंध तैयार करने हैं।

    4. **संसाधनों की कमी**: न तो विश्वकोश उपलब्ध है, न ही प्रासंगिक ग्रंथ। केवल **अपने ज्ञान पर विश्वास** करना होगा।

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    **निबंधशास्त्र के आचार्यों के विचार**

    **विद्वानों द्वारा सुझाई गई निबंध लेखन की विधि**

    लेखक ने निबंधशास्त्र के विभिन्न आचार्यों के विचारों को संदर्भित किया—

    **१. निबंध की लंबाई**

    विद्वान का मत: **निबंध छोटा होना चाहिए**

    तर्क:

  • छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है
  • बड़े निबंध में रचना की सुंदरता नष्ट हो जाती है
  • लेखक को यह सुझाव अनुकूल लगता है
  • **२. निबंध के दो प्रधान अंग**

    विद्वान का मत: निबंध के दो मुख्य अंग हैं—

  • **सामग्री** — विषय से संबंधित विचार, तथ्य, उदाहरण, ज्ञान
  • **शैली** — भाषा का प्रवाह, वाक्य-संरचना, अभिव्यक्ति का तरीका
  • **सामग्री संग्रह की प्रक्रिया**

  • विषय का गहन अध्ययन करना आवश्यक है
  • विचार-समूह एकत्र करने के लिए **मनन** करना चाहिए
  • जो व्यक्ति किसी विषय का अच्छा अध्ययन करता है, उसके मस्तिष्क में उस विषय के विचार आते हैं
  • **शैली निर्धारण**

    विद्वान का सुझाव:

  • **भाषा में प्रवाह** होना चाहिए
  • **वाक्य छोटे-छोटे हों** पर एक-दूसरे से संबद्ध
  • **स्पष्टता** से विचार प्रकट हों
  • **३. रूपरेखा निर्माण**

    विद्वान का सुझाव: निबंध लिखने से पहले **रूपरेखा (आउटलाइन) बनानी चाहिए**

    लेखक की आपत्ति:

  • निबंध लिखने के बाद सारांश लिखा जा सकता है
  • पर **निबंध लिखने से पहले** सार दस-पाँच शब्दों में कैसे लिखा जाए?
  • यहाँ तक कि ए.जी. गार्डिनर को भी निबंधों के शीर्षक बनाने में सबसे अधिक कठिनाई होती थी
  • **ए.जी. गार्डिनर का उदाहरण**: शेक्सपीयर को नाटक लिखने में जितनी कठिनाई नहीं हुई, उतनी ही नाटकों का नाम रखने में हुई। इसीलिए तो एक नाटक का नाम 'जैसा तुम चाहो' रखा गया।

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    **विद्वता और भाषा शैली की समस्या**

    **परंपरागत (संस्कृत) पद्धति की समस्या**

    लेखक के रूप में मास्टर को एक समस्या का सामना है—

    **अस्पष्टता और दुर्बोधता की परंपरा**

    परंपरागत विद्वान बताते हैं कि—

  • वाक्यों में **अस्पष्टता** होनी चाहिए
  • यह दुर्बोधता ही **गांभीर्य** ला देती है
  • वाक्य **आधे पृष्ठ में समाप्त** हों (जैसे बाणभट्ट की कादंबरी में)
  • **अलंकार, मुहावरे और लोकोक्तियों** का अत्यधिक समावेश
  • इसी से **विद्वता का प्रदर्शन** होता है
  • **ऐतिहासिक उदाहरण**:

  • **श्रीहर्ष** (संस्कृत कवि) — जानबूझकर काव्य में ऐसी गुत्थियाँ डालते थे जो अज्ञों से न सुलझ सकें
  • **सेनापति** — अपनी कविता को इच्छापूर्वक दुर्बोध बनाते थे
  • **लेखक की आपत्ति**: क्या मास्टर को अपनी विद्वता प्रदर्शित करने के लिए ऐसी जटिलता आवश्यक है? यह तो **पाठकों से दूरी** बढ़ाता है।

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    **माँटेन की पद्धति: आधुनिक और प्रभावी दृष्टिकोण**

    **अंग्रेजी निबंधकारों का नया तरीका**

    अंग्रेजी निबंध साहित्य में एक नई पद्धति अपनाई गई है, जिसके जन्मदाता **माँटेन** माने जाते हैं।

    **माँटेन की पद्धति का सारांश**

    माँटेन ने अपने निबंधों में **जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को लिपिबद्ध कर दिया**।

    **इस पद्धति की विशेषताएँ**

    1. **स्वच्छंद रचना** — मन की स्वतंत्र रचना

    2. **प्रामाणिकता** — लेखक की सच्ची अनुभूति

    3. **ईमानदारी** — सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति

    4. **उल्लास** — रचना में जीवंतता और खुशी

    5. **व्यक्तिगत दृष्टि** — संसार को अपनी दृष्टि से देखना

    **इस पद्धति में क्या नहीं होता**

  • कवि की **उदात्त कल्पना** नहीं होती (यानी कल्पना को अत्यधिक महत्व नहीं)
  • आख्यायिका-लेखक की **सूक्ष्म दृष्टि** नहीं होती
  • विज्ञों की **गंभीर तार्किक विवेचना** नहीं होती
  • **मानसिक स्थिति का विवरण**

    ये निबंध उस मानसिक स्थिति में लिखे जाते हैं, जिसमें—

  • ज्ञान की गरिमा नहीं रहती
  • कल्पना की महिमा नहीं रहती
  • **जीवन का गौरव भूलकर हम अपने में ही लीन हो जाते हैं**
  • **हम संसार को अपनी हीं दृष्टि से देखते हैं**
  • हम संसार को अपने हीं भाव से ग्रहण करते हैं
  • **महत्व**: यह पद्धति अधिक **मानवीय, सरल और प्रभावशाली** है।

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    **अमीर खुसरो की कहानी और व्यावहारिक समाधान**

    **कहानी का संदर्भ**

    अमीर खुसरो (प्रसिद्ध कवि और संगीतकार) एक बार प्यास से व्याकुल होकर एक कुएँ के पास पहुँचे।

    **कहानी का विवरण**

    वहाँ चार महिलाएँ पानी भर रही थीं। जब अमीर खुसरो ने पानी माँगा, तो—

    1. **पहली महिला** — खीर के बारे में कविता सुनना चाहती थी

    2. **दूसरी महिला** — चरखे पर कविता चाहती थी

    3. **तीसरी महिला** — कुत्ते पर कविता चाहती थी

    4. **चौथी महिला** — ढोल पर कविता चाहती थी

    **अमीर खुसरो का समाधान**

    प्रतिभावान खुसरो ने **एक ही पद्य में चारों की इच्छाओं की पूर्ति कर दी**—

    **खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।**

    **आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।**

    **इस कहानी का व्यावहारिक प्रयोग**

    लेखक ने इसी पद्धति को अपनाने का निर्णय लिया—

  • एक निबंध में **दोनों विषयों का समावेश** कर देंगे
  • 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' — दोनों को एक साथ संबोधित करेंगे
  • इससे **कठिनाई आधी रह जाएगी**
  • ---

    **'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' — विषय का विश्लेषण**

    **लोकोक्ति का अर्थ**

    "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" एक प्रसिद्ध हिंदी लोकोक्ति है।

    **शब्दार्थ**:

  • **दूर के** — दूरी पर स्थित
  • **ढोल** — ढोल वाद्य यंत्र
  • **सुहावने होते हैं** — सुंदर, मधुर लगते हैं
  • **लोकोक्ति का सामान्य अर्थ**: दूर से देखी या सुनी गई चीजें वास्तविकता से भिन्न और अधिक सुंदर प्रतीत होती हैं। निकट आने पर उनकी कठोर यथार्थता सामने आ जाती है।

    ---

    **'दूर के ढोल सुहावने' का भावार्थ और विश्लेषण**

    **ध्वनि की कठोरता और मधुरता में अंतर**

    **समीपस्थ व्यक्तियों का अनुभव**:

  • ढोल के बिल्कुल पास बैठे लोगों के **कानों के पर्दे फटते रहते हैं**
  • कर्कश, तेज और कष्टदायक ध्वनि
  • संगीत की कोई सुंदरता नहीं
  • **दूरस्थ व्यक्तियों का अनुभव**:

  • किसी नदी के तट पर संध्या समय
  • **दूर की वही ध्वनि मधुरता का संचार करती है**
  • यह मधुर, सुंदर और रोमांचक लगती है
  • **मानसिक चित्रण की प्रक्रिया**

    दूरस्थ श्रोता —

  • ढोल की ध्वनि सुनकर **विवाहोत्सव का चित्र** अपने हृदय में अंकित कर लेता है
  • **नवविवाहिता का नूतन रूप** अपने मन में कल्पित करता है
  • **कोलाहल से पूर्ण घर के कोने में बैठी लज्जाशील नव-वधू** की कल्पना करता है
  • **नव-वधू के मनोविज्ञान का प्रभाव**

    नव-वधू के हृदय में —

  • **प्रेम** की भावना
  • **उल्लास** (खुशी)
  • **संकोच** (शर्माना)
  • **आशंका** (भय)
  • **विषाद** (उदासी) का मिश्रण
  • ये सभी भावनाएँ ढोल की **कर्कश ध्वनि को मधुर बना देती हैं**।

    **निष्कर्ष**: ढोल की कठोर ध्वनि + मनोविज्ञान की सुंदर व्याख्या = मधुर अनुभव

    ---

    **दूरी का प्रभाव: यथार्थता और कल्पना**

    **दूर रहने से यथार्थता की कठोरता का अभाव**

    "दूर रहने से हमें यथार्थता की कठोरता का अनुभव नहीं होता।"

    **युवा/तरुण वर्ग पर दूरी का प्रभाव**

    **तरुण विशेषताएँ**:

  • **संसार के जीवन-संग्राम से दूर** होते हैं
  • उन्हें संसार का चित्र **बड़ा ही मनमोहक** प्रतीत होता है
  • **भविष्य के स्वप्न** देखते हैं
  • **क्रांति के समर्थक** होते हैं
  • **कारण**: वास्तविक कष्टों का अनुभव नहीं होता; केवल सुंदर भविष्य की कल्पना

    **वृद्ध/बुजुर्ग वर्ग पर दूरी का प्रभाव**

    **वृद्ध विशेषताएँ**:

  • **बाल्यावस्था और तरुणावस्था से दूर** हो गए हैं
  • उन्हें **अतीतकाल की स्मृति बड़ी सुखद** लगती है
  • **अतीत का ही स्वप्न देखते हैं**
  • **अतीत-गौरव के संरक्षक** होते हैं
  • **कारण**: दूर की यादें सुंदर और सुखद प्रतीत होती हैं; वर्तमान कष्ट भूल जाते हैं

    ---

    **वर्तमान काल में असंतोष का कारण**

    **तरुण और वृद्ध दोनों वर्तमान से असंतुष्ट**

    हालाँकि दोनों की असंतुष्टि के **अलग-अलग कारण** हैं—

    **तरुणों की असंतुष्टि**:

  • **भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं**
  • वर्तमान समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन चाहते हैं
  • **नई सोच, नई व्यवस्था** के समर्थक
  • **वृद्धों की असंतुष्टि**:

  • **अतीत को वर्तमान में खींचकर देखना चाहते हैं**
  • पुरानी परंपराओं को पुनः स्थापित करना चाहते हैं
  • **अतीत के मानदंडों के अनुसार** वर्तमान को परखते हैं
  • **परिणाम**: **वर्तमान काल सदैव क्लुब्ध रहता है** और इसी कारण **वर्तमान सदैव सुधारों का काल बना रहता है**।

    ---

    **समाज-सुधार: अनंत प्रक्रिया**

    **मानव इतिहास में सुधारों की अनिवार्यता**

    "मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।"

    **कारण**:

  • **नए-नए दोष** निरंतर उत्पन्न होते जाते हैं
  • **नए-नए सुधार** होते जाते हैं
  • न दोषों का अंत है, न सुधारों का
  • **भारत के प्रमुख सुधारक**

    1. **बुद्ध** — धार्मिक और सामाजिक सुधार

    2. **महावीर स्वामी** — धार्मिक और नैतिक सुधार

    3. **नागार्जुन** — दार्शनिक सुधार

    4. **शंकराचार्य** — धार्मिक और आध्यात्मिक सुधार

    5. **कबीर** — सामाजिक एवं धार्मिक सुधार

    6. **नानक** — सिख धर्म के संस्थापक, सामाजिक सुधारक

    7. **राजा राममोहन राय** — आधुनिक भारत के पहले महान सुधारक

    8. **स्वामी दयानंद** — आर्य समाज के संस्थापक

    9. **महात्मा गांधी** — राजनीतिक और सामाजिक सुधारक

    **सुधारों की निरंतरता**

  • **सुधारकों का दल** नगर-नगर और गाँव-गाँव में होता है
  • **जो कभी सुधार थे, वहीं आज दोष हो गए हैं**
  • उन पुराने सुधारों का **फिर नया सुधार किया जाता है**
  • **उदाहरण**:

  • कभी महिलाओं की शिक्षा एक सुधार था, आज उसका आवश्यकता से अधिक व्यावहारीकरण नई समस्याएँ पैदा कर रहा है
  • **प्रगतिशीलता का अर्थ**

    "तभी तो यह जीवन प्रगतिशील माना गया है।"

    यानी —

  • **सुधार और विकास एक **अनंत प्रक्रिया** है
  • समाज कभी स्थिर नहीं रहता
  • नई समस्याओं का निवारण = नया आशा का संच
  • MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लिखने की विशेष मानसिक स्थिति में निम्नलिखित में से क्या होता है?

    • A. मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग ✓
    • B. केवल बुद्धि का उपयोग और तार्किक विचार
    • C. दुःख और पीड़ा की अनुभूति
    • D. विषय के बारे में पहले से विस्तृत ज्ञान

    Answer: A — गार्डिनर के अनुसार लेखन में एक विशेष मानसिक स्थिति में उमंग, स्फूर्ति और आवेग का संयोजन आवश्यक है।

    Q2. लेखक के अनुसार 'दूर के ढोल सुहावने' पर पाँच पन्नों का निबंध लिखना मुश्किल क्यों है?

    • A. विषय में पर्याप्त गहराई और विस्तार के लिए सामग्री नहीं है ✓
    • B. पुस्तकालय में इस विषय पर कोई किताब नहीं है
    • C. लेखक के पास पर्याप्त समय नहीं है
    • D. हिंदी में इस विषय पर कोई विद्वान ने नहीं लिखा है

    Answer: A — लेखक सोचता है कि यह मुहावरा इतना सामान्य है कि इस पर पाँच पन्नों तक कोई उल्लेखनीय विचार नहीं लिखे जा सकते।

    Q3. निबंधशास्त्र के अनुसार निबंध के कौन-से दो प्रधान अंग हैं?

    • A. शीर्षक और निष्कर्ष
    • B. सामग्री और शैली ✓
    • C. परिचय और विस्तार
    • D. प्रस्तावना और समापन

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि निबंध के दो प्रधान अंग हैं—सामग्री (विचार) और शैली (भाषा-प्रस्तुति)।

    Q4. निबंध में प्रवाह लाने के लिए वाक्य कैसे होने चाहिए? निम्नलिखित में से कौन सही है?

    • A. बहुत लंबे और जटिल वाक्य जो एक-दूसरे से संबंधित न हों
    • B. छोटे-छोटे वाक्य पर एक-दूसरे से संबद्ध और संगत होने चाहिए ✓
    • C. बहुत छोटे वाक्य जो एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हों
    • D. लंबे वाक्य जिनमें कई विचार हों पर कोई क्रम न हो

    Answer: B — पाठ में निबंधशास्त्री का कथन है कि वाक्य छोटे-छोटे हों पर एक-दूसरे से संबद्ध होने चाहिए।

    Q5. लेखक अपनी विद्वता दिखाने के लिए किन तकनीकों का समर्थन करता है?

    • A. सरल भाषा और स्पष्ट विचार
    • B. लंबे वाक्य, अस्पष्टता और दुर्बोधता ✓
    • C. केवल तथ्यों का वर्णन
    • D. पाठकों से सीधा संवाद

    Answer: B — लेखक स्वीकार करता है कि वह अपनी विद्वता प्रदर्शन के लिए लंबे वाक्य, अस्पष्टता और जटिल शब्दावली का प्रयोग करना चाहता है।

    Q6. निबंध लिखने से पहले रूपरेखा बनाने में लेखक को क्या समस्या है?

    • A. रूपरेखा बनाना सरल है और वह आसानी से बना सकता है
    • B. निबंध लिखने से पहले उसका सार दस-पाँच शब्दों में लिखना बहुत कठिन है ✓
    • C. उसके पास कागज नहीं है
    • D. उसे हिंदी व्याकरण नहीं आता

    Answer: B — लेखक कहता है कि निबंध लिखने के पहले उसका सार कुछ शब्दों में कैसे लिखा जाए, यह समझ में नहीं आता।

    Q7. माँटेन की निबंध-पद्धति की मुख्य विशेषता है—

    • A. शास्त्रीय नियमों का सख्त पालन और जटिल भाषा का प्रयोग
    • B. कवि की कल्पना और विज्ञों का तार्किक विवेचन
    • C. व्यक्तिगत अनुभव, सच्ची अनुभूति और स्वच्छंद मन की रचना ✓
    • D. विदेशी विद्वानों के विचारों का आभास

    Answer: C — पाठ में स्पष्ट है कि माँटेन ने जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को निबंध में लिपिबद्ध किया।

    Q8. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

    • A. शेक्सपियर को नाटक लिखने से ज्यादा कठिनाई नाटकों को नाम देने में होती थी
    • B. माँटेन का निबंध संसार को अपनी ही दृष्टि से देखने पर आधारित है
    • C. बाणभट्ट की कादंबरी में सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग किया गया है ✓
    • D. गार्डिनर अपने लेखों के शीर्षक के लिए अपने मित्र पर निर्भर रहते थे

    Answer: C — पाठ कहता है कि बाणभट्ट ने कादंबरी में जटिल और लंबे वाक्य लिखे थे, सरल नहीं।

    Q9. अमीर खुसरो ने एक ही पद्य में चार औरतों की अलग-अलग इच्छाओं की पूर्ति क्यों कर सकी? इससे क्या संदेश मिलता है?

    • A. अमीर खुसरो को सभी विषयों का गहन ज्ञान था
    • B. चारों औरतें बहुत मूर्ख थीं
    • C. प्रतिभावान लेखक किसी भी विषय को एक साथ संभाल सकता है और लेखक अपनी कल्पना से कई विचारों को एक में पिरो सकता है ✓
    • D. अमीर खुसरो को केवल खीर पकाना पसंद था

    Answer: C — यह कहानी दर्शाती है कि एक प्रतिभावान लेखक विभिन्न विषयों को एक ही कृति में समन्वित कर सकता है।

    Q10. पाठ के संदर्भ में, लेखक अपनी समस्या का समाधान करने के लिए किस पद्धति को अपनाने का विचार करता है?

    • A. गार्डिनर और अन्य विद्वानों के सभी नियमों का पालन करना
    • B. माँटेन की पद्धति को अपनाना जो व्यक्तिगत अनुभूति और स्वच्छंद रचना पर आधारित है ✓
    • C. बाणभट्ट जैसी जटिल शैली में निबंध लिखना
    • D. संस्कृत के कवियों की तरह कविता लिखना शुरू कर देना

    Answer: B — लेखक कहता है कि माँटेन की इस पद्धति को स्वीकार करने से उसकी कठिनाई आधी रह जाएगी और वह दोनों निबंध लिख पाएगा।

    Flashcards

    ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लेखन के लिए कौन-सी मानसिक स्थिति आवश्यक है?

    मन में एक विशेष उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग होना चाहिए जिससे लेखन प्रक्रिया स्वाभाविक और सहज हो।

    लेखक को 'दूर के ढोल सुहावने' विषय पर निबंध लिखने में क्या कठिनाई है?

    इतने सामान्य विषय पर पाँच पन्नों का निबंध लिखना मुश्किल है क्योंकि विषय में पर्याप्त गहराई नहीं है।

    निबंधशास्त्र के आचार्यों के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग कौन-से हैं?

    सामग्री (विचारों का संचयन) और शैली (भाषा की प्रस्तुति) निबंध के दोनों प्रधान अंग हैं।

    लेखक अपनी विद्वता प्रदर्शन के लिए कौन-सी तकनीक अपनाना चाहता है?

    लेखक लंबे और जटिल वाक्य, अस्पष्टता और दुर्बोधता का प्रयोग करना चाहता है जैसे बाणभट्ट और श्रीहर्ष करते थे।

    माँटेन के निबंधों की मुख्य विशेषता क्या है?

    माँटेन के निबंध व्यक्तिगत अनुभूति, सच्चे भावों और आत्मपरक शैली पर आधारित होते हैं जो कृत्रिम नियमों से मुक्त हैं।

    निबंध में प्रवाह लाने के लिए किस प्रकार के वाक्य होने चाहिए?

    वाक्य छोटे-छोटे होने चाहिए लेकिन एक-दूसरे से संबद्ध और संगत होने चाहिए।

    ए.जी. गार्डिनर को अपने लेखों में सबसे अधिक कठिनाई किसमें होती थी?

    लेखों के लिए उपयुक्त शीर्षक रखने में गार्डिनर को सबसे अधिक कठिनाई होती थी।

    शेक्सपियर को किस कार्य में सबसे अधिक कठिनाई हुई थी?

    शेक्सपियर को नाटक लिखने की अपेक्षा नाटकों के नामकरण में सबसे अधिक कठिनाई हुई थी।

    अमीर खुसरो की कहानी में चार औरतें किस कारण अलग-अलग चीजें माँग रही थीं?

    चार औरतें पानी देने के बदले में अमीर खुसरो की प्रतिभा को आजमाना चाहती थीं और अलग-अलग विषयों पर कविता सुनना चाहती थीं।

    निबंध-लेखन में पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की व्यक्तिगत समस्या क्या है?

    लेखक को गार्डिनर जैसी वह विशेष मानसिक स्थिति नहीं मिलती जिसमें भाव अपने आप उत्पन्न हों, इसलिए उसे सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है।

    Important Board Questions

    'क्या लिखूँ?' निबंध में लेखक को 'दूर के ढोल सुहावने' विषय पर पाँच पन्नों का निबंध लिखना मुश्किल क्यों लगता है? [2 marks]

    लेखक को लगता है कि यह विषय बहुत सामान्य और छोटा है। इस मुहावरे में पर्याप्त गहराई और विस्तार के लिए सामग्री नहीं है जो पाँच पन्नों को भर सके।

    निबंधशास्त्रियों की परंपरागत सलाहों और माँटेन की निबंध-पद्धति में क्या मुख्य अंतर है? समझाइए। [3 marks]

    परंपरागत विद्वान जटिलता, अस्पष्टता और शब्दाडंबर को महत्व देते हैं जबकि माँटेन व्यक्तिगत अनुभूति, सरलता और आत्मपरक शैली को महत्व देते हैं। माँटेन की पद्धति में लेखक की सच्ची अनुभूति और स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रमुख है।

    पाठ के आधार पर विश्लेषण करें कि लेखक एक लेखक के रूप में अपनी विद्वता प्रदर्शन करना चाहता है, लेकिन साथ ही उसे यह भी समझ आता है कि सरल और सच्ची अभिव्यक्ति अधिक प्रभावी है। इस द्वंद्व को स्पष्ट करते हुए बताइए कि लेखक इस समस्या का कौन-सा समाधान खोज निकालता है। [5 marks]

    लेखक दो विचारधाराओं के बीच द्वंद्व में है—परंपरागत भारतीय शैली (जटिलता और विद्वता प्रदर्शन) और आधुनिक पाश्चात्य शैली (सरलता और सच्ची अनुभूति)। अमीर खुसरो की कहानी के माध्यम से लेखक यह सीखता है कि प्रतिभा और अनुभूति से ही एक लेखक अपनी सीमाएँ पार कर सकता है, चाहे नियम कुछ भी हों।

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