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Do Bailon Ki Katha

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Chapter Notes

दो बैलों की कथा — संपूर्ण अध्ययन नोट्स

प्रेमचंद — लेखक परिचय

**जन्म और जीवन:** प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की, लेकिन असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह लेखन कार्य के प्रति समर्पित हो गए।

**साहित्यिक योगदान:** प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। उनके प्रमुख उपन्यास हैं— सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि और गोदान। उन्होंने हंस, जागरण, माधुरी पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

**विषय और शैली:** प्रेमचंद जिस गाँव और शहर के परिवेश को देखा और जिया, उसकी अभिव्यक्ति उनके कथा साहित्य में मिलती है। किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वतंत्रता आंदोलन आदि उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं। उनकी भाषा सरल, जीवंत एवं मुहावरेदार है तथा लोक प्रचलित शब्दों का प्रयोग कुशलतापूर्वक किया है। सन् 1936 में प्रेमचंद का निधन हो गया।

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कहानी का परिचय और महत्व

**कहानी की परिभाषा:** प्रेमचंद के अनुसार, कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।

**'दो बैलों की कथा' की विशेषताएँ:**

  • इस कहानी में प्रेमचंद ने किसानों के जीवन और पशुओं के साथ उनके भावनात्मक संबंधों को मार्मिक ढंग से दिखाया है
  • स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है— यह संदेश परोक्ष रूप से यह कहानी स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़ी है
  • प्रेमचंद ने 'पंचतंत्र' और 'हितोपदेश' जैसी कहानियों की परंपरा को अपनाया और आगे बढ़ाया है
  • पशु-पक्षियों को आत्मीयता प्रदान करना प्रेमचंद की विशेषता है
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    गधे और बैल के स्वभाव का विश्लेषण

    **गधे का स्वभाव:** आमतौर पर गधे को सबसे बुद्धिहीन माना जाता है। जब किसी को बेवकूफ कहना होता है तो उसे गधा कहते हैं। लेकिन वास्तव में गधा बेवकूफ नहीं है, बल्कि उसका सीधापन, निरापद सहिष्णुता और शांत स्वभाव ही उसे यह पदवी देता है।

    **गधे की विशेषताएँ:**

  • गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना या देखा जाता
  • चाहे कितना भी पीटो, खराब या सड़ी घास दो, उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया नहीं दिखती
  • उसके चेहरे पर एक स्थायी विषाद रहता है
  • सुख-दुख, हानि-लाभ में कभी बदलता नहीं है
  • ऋषियों-मुनियों के सभी गुण उसमें पाए जाते हैं, फिर भी आदमी उसे बेवकूफ कहता है
  • **सीधापन संसार के लिए अनुपयुक्त:** लेखक कहते हैं कि सीधापन संसार में काम नहीं आता। भारतवासी अफ्रीका और अमेरिका में भी दुर्दशा भोग रहे हैं क्योंकि वे न शराब पीते हैं, न लड़ाई-झगड़ा करते हैं। जापान ने एक विजय से ही सभ्य कहलवा लिया, लेकिन सीधे लोग बदनाम हैं।

    **बैल का स्वभाव:** बैल गधे से कम गधा है क्योंकि कभी-कभी बैल मारता भी है, अड़ियल बैल भी देखने में आता है, और अपना असंतोष विभिन्न तरीकों से प्रकट करता है।

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    हीरा और मोती — पात्र परिचय

    **परिचय:** झूरी के दोनों बैलों के नाम थे हीरा और मोती। दोनों पछाऊ जाति के थे— देखने में सुंदर, काम में चौकस, डील में ऊँचे।

    **आपसी संबंध और भावनाएँ:**

  • बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था
  • दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे
  • एक दूसरे के मन की बात कैसे समझ जाता था, यह अज्ञात था
  • उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है
  • **प्रेम और स्नेह का प्रदर्शन:**

  • दोनों एक-दूसरे को चाटकर और सूँघकर अपना प्रेम प्रकट करते थे
  • कभी-कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे— विग्रह के नाते से नहीं, केवल विनोद के भाव से
  • जब हल या गाड़ी में जोते जाते, तो हरेक की यही चेष्टा होती कि ज्यादा-से-ज्यादा बोझ मेरी ही गरदन पर रहे
  • दिन-भर के बाद दोपहर या संध्या को दोनों खुलते, तो एक-दूसरे को चाटकर अपनी थकान मिटा लिया करते
  • **संयुक्त भोजन:** नाँद में खली-भूसा पड़ जाने के बाद दोनों साथ उठते, साथ नाँद में मुँह डालते और साथ ही बैठते थे। एक मुँह हटाता तो दूसरा भी हटा लेता था।

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    कहानी का सारांश — भाग 1

    **झूरी का निर्णय:** संयोग की बात, झूरी ने एक बार गोइ (गोवर्धन पर्वत का पुत्र— मजदूर) को ससुराल भेज दिया। बैलों को समझ आ गया कि मालिक ने उन्हें बेच दिया। झूरी के साले गया को घर तक गोई ले जाने में दाँतों पसीना आ गया क्योंकि दोनों बैल भागने का प्रयास करते रहे।

    **भावनात्मक प्रतिक्रिया:** यदि ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो वे झूरी से पूछते— "तुम हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो? हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी। हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था।"

    **नई जगह का दर्द:** संध्या समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे। दिन-भर के भूखे थे, लेकिन जब नाँद में लगाए गए, तो एक ने भी उसमें मुँह न डाला। दिल भारी हो रहा था। जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वह आज उनसे छूट गया था।

    **पलायन:** जब गाँव में सो गया, तो दोनों ने जोर मारकर पगहे तुड़ा डाले और घर की तरफ चले। पगहे बहुत मजबूत थे, लेकिन इन दोनों में इस समय दूनी शक्ति आ गई थी। एक-एक झटके में रस्सियाँ टूट गईं।

    **झूरी की प्रतिक्रिया:** प्रातःकाल झूरी सोकर उठा, तो देखा कि दोनों बैल चरनी पर खड़े हैं। दोनों की गरदनों में आधा-आधा गराँव लटक रहा है। घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया और दौड़कर उन्हें गले लगा लिया।

    **गाँव के बच्चों का स्वागत:** घर और गाँव के लड़के जमा हो गए और तालियाँ बजाकर उनका स्वागत करने लगे। बाल-सभा ने निश्चय किया कि दोनों पशु-वीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए। कोई अपने घर से रोटियाँ लाया, कोई गुड़, कोई चोकर, कोई भूसी।

    **बच्चों की प्रशंसा:** एक बालक ने कहा— "ऐसे बैल किसी के पास न होंगे।" दूसरा ने कहा— "इतनी दूर से दोनों अकेले चले आए।" तीसरा बोला— "बैल नहीं हैं वे, उस जन्म के आदमी हैं।"

    **झूरी की पत्नी का आक्षेप:** परंतु झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। बोली— "कैसे नमक-हराम बैल हैं कि एक दिन वहाँ काम न किया; भाग खड़े हुए।" झूरी अपने बैलों पर यह आक्षेप न सुन सका और उनका बचाव किया।

    **सजा:** वही हुआ। मजदूर को बड़ी ताकीद कर दी गई कि बैलों को खाली सूखा भूसा दिया जाए। बैलों ने नाँद में मुँह डाला, तो फीका-फीका। न कोई चिकनाहट, न कोई रस। दोनों आशा-भरी आँखों से द्वार की ओर ताकने लगे।

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    कहानी का सारांश — भाग 2

    **गया के हाथों यातना:** दूसरे दिन झूरी का साला गया फिर आया और बैलों को ले चला। दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया क्योंकि वह ज्यादा सहनशील था।

    **अपमान और पीड़ा:** संध्या-समय घर पहुँचकर गया ने दोनों को मोटी रस्सियों से बाँधा और कल की शरारत का मजा चखाया। फिर वही सूखा भूसा डाल दिया। दोनों बैलों का ऐसा अपमान कभी न हुआ था। झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। यहाँ मार पड़ी। आहत सम्मान की व्यथा के साथ सूखा भूसा भी मिला।

    **हल में विद्रोह:** दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी। वह मारते-मारते थक गया; पर दोनों ने पाँव न उठाया। जब गया ने हीरा की नाक पर खूब डंडे जमाए, तो मोती का गुस्सा काबू के बाहर हो गया। हल लेकर भागा। हल, रस्सी, जुआ, जोत सब टूट-ताटक कर बराबर हो गया।

    **दर्शन और नैतिकता:** गया दो आदमियों के साथ दौड़ा आ रहा है। मोती ने कहा— "कहो तो दिखा दूँ कुछ मजा मैं भी। लाठी लेकर आ रहा है।" लेकिन हीरा ने समझाया— "नहीं भाई! खड़े हो जाओ।" मोती ने कहा— "मुझे मारेगा, तो मैं भी एक-दो को गिरा दूँगा!" हीरा ने जवाब दिया— "नहीं। हमारी जाति का यह धर्म नहीं है।"

    **सहानुभूति और सहायता:** आज दोनों के सामने फिर वही सूखा भूसा लाया गया। घर के लोग भोजन करने लगे। उस वक्त एक छोटी-सी लड़की दो रोटियाँ लिए निकली और दोनों के मुँह में देकर चली गई। उस एक रोटी से भूख तो शांत न होती, लेकिन दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया। लड़की भैरो की थी। उसकी माँ मर चुकी थी और सौतेली माँ उसे मारती रहती थी, इसलिए इन बैलों से उसे आत्ममीयता हो गई थी।

    **दैनिक संघर्ष:** दोनों दिन-भर जोते जाते, डंडे खाते, अड़ते। शाम को थान पर बाँध दिए जाते और रात को वही बालिका उन्हें दो रोटियाँ खिला जाती। प्रेम के इस प्रसाद की बरकत थी कि दो-दो गाल सूखा भूसा खाकर भी दोनों दुर्बल न होते थे। लेकिन दोनों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।

    **पलायन की योजना:** एक दिन मोती ने कहा— "अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" "क्या करना चाहते हो?" "एकाध को सींगों पर उठाकर फेंक दूँगा।" लेकिन हीरा ने समझाया कि वह प्यारी लड़की, जो रोटियाँ खिलाती है, उसी की लड़की है। यह बेचारी अनाथ न हो जाएगी। मोती ने सुझाव दिया— "तुड़ाकर भाग चलें।" हीरा ने कहा— "हाँ, यह मैं स्वीकार करता, लेकिन इतनी मोटी रस्सी टूटेगी कैसे?" मोती ने कहा— "इसका एक उपाय है। पहले रस्सी को थोड़ा-सा चबा लो। फिर एक झटके में टूट जाती है।"

    **लड़की की मदद:** रात को जब बालिका रोटियाँ खिलाकर चली गई, तो दोनों रस्सियाँ चबाने लगे, पर मोटी रस्सी मुँह में न आती थी। सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। उसने उनके माथे सहलाए और कहा— "खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ, नहीं तो यहाँ लोग तुम्हें मार डालेंगे। आज घर में सलाह हो रही है कि इनकी नाकों में नाथ डाल दी जाएँ।" उसने गराँव खोल दिया, लेकिन दोनों चुपचाप खड़े रहे।

    **आत्मबलिदान की भावना:** मोती ने पूछा— "अब चलते क्यों नहीं?" हीरा ने कहा— "चलें तो, लेकिन कल इस अनाथ पर आफत आएगी। सब इसी पर संदेह करेंगे।" तब लड़की ने चिल्लाया— "दोनों फूफावाले बैल भागे जा रहे हैं। ओ दादा! दादा! दोनों बैल भागे जा रहे हैं, जल्दी दौड़ो।"

    **सफल पलायन:** गया हड़बड़ाकर भीतर से निकला और बैलों को पकड़ने चला। वे दोनों भागे। गया ने पीछा किया। वह और भी तेज हुए। गया ने शोर मचाया। फिर गाँव के कुछ आदमियों को भी साथ लेने के लिए लौटा। दोनों मित्रों को भागने का मौका मिल गया। सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा।

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    कहानी का सारांश — भाग 3

    **भूखे रहना और भूमि का सदुपयोग:** दोनों भूख से व्याकुल हो रहे थे। खेत में मटर खड़ी थी। चरने लगे। रह-रहकर आहट ले लेते थे, कोई आता तो नहीं है। जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया, तो मस्त होकर उछलने-कूदने लगे।

    **भाईचारे का खेल:** पहले दोनों ने डकार ली। फिर सींग मिलाए और एक-दूसरे को ठेलने लगे। मोती ने हीरा को कई कदम पीछे हटा दिया, यहाँ तक कि वह एक खाई में गिर गया। तब उसे भी क्रोध आया। संभलकर उठा और फिर मोती से भिड़ गया। मोती ने देखा कि खेल में झगड़ा हुआ चाहता है, तो किनारे हट गया।

    **साँड़ का आगमन:** सहसा एक साँड़ डौंकता चला आया। दोनों मित्र बगलें झाँक रहे हैं। साँड़ पूरा हाथी है। उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है। दोनों के लिए न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती।

    **रणनीति और साहस:** मोती ने कहा— "बुरे फँसे। जान बचेगी? कोई उपाय सोचो।" हीरा ने चिंतित स्वर में कहा— "अपने घमंड में भूला हुआ है। आरजू-विनती न सुनेगा।" मोती ने कहा— "भाग क्यों न चलें?" हीरा ने जवाब दिया— "भागना कायरता है। उपाय यही है कि उस पर दोनों जने एक साथ चोट करें। मैं आगे से रगेदता हूँ, तुम पीछे से रगेदो, दोहरी मार पड़ेगी, तो भाग खड़ा होगा। मेरी ओर झपटे, तुम बगल से उसके पेट में सींग घुसेड़ देना। जान जोखिम है; पर दूसरा उपाय नहीं है।"

    **संयुक्त प्रयास की विजय:** दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। साँड़ को भी संगठित शत्रुओं से लड़ने का तजुर्बा न था। ज्योंही हीरा पर झपटा, मोती ने पीछे से दौड़ाया। साँड़ उसकी ओर मुड़ा, तो हीरा ने रगेदा। आखिर बेचारा जख्मी होकर भागा और दोनों मित्रों ने दूर तक उसका पीछा किया। यहाँ तक कि साँड़ बेदम होकर गिर पड़ा।

    **विजय पश्चात् नैतिकता:** दोनों मित्र विजय के नशे में झूमते चले जाते थे। मोती ने कहा— "मेरा जी तो चाहता था कि बच्चा को मार ही डालूँ।" लेकिन हीरा ने तिरस्कार किया— "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।"

    **खतरनाक सिद्धांत:** लेकिन मोती ने कहा— "यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।" हीरा ने समझाया— "अब घर कैसे पहुँचेंगे, वह सोचो।" मोती ने कहा— "पहले कुछ खा लें, तो सोचें।"

    **दूसरी बार पकड़े जाना:** सामने मटर का खेत था। मोती उसमें घुस गया। हीरा मना करता रहा, पर उसने एक न सुनी। अभी दो ही चार ग्रास खाए थे कि दो आदमी लाठियाँ लिए दौड़ पड़े और दोनों को घेर लिया। हीरा तो मेड़ पर था, निकल गया। मोती सींचे हुए खेत में था। उसके खुर कीचड़ में धँसने लगे। न भाग सका। पकड़ लिया गया। हीरा ने देखा, संगी संकट में है, तो लौट पड़ा। फँसेंगे तो दोनों फँसेंगे। प्रातःकाल दोनों मित्र काँजीहौस में बंद कर दिए गए।

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    कहानी का सारांश — भाग 4

    **काँजीहौस की भयावहता:** दोनों मित्रों को जीवन में पहली बार ऐसा साबिका पड़ा कि सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। यहाँ कई भैंसें थीं, कई बकरियाँ, कई घोड़े, कई गधे; लेकिन किसी के सामने चारा न था। सब जमीन पर मुर्दों की तरह पड़े थे। कई तो इतने कमजोर हो गए थे कि खड़े भी न हो सकते थे।

    **निरर्थक कोशिशें:** सारा दिन दोनों मित्र फाटक की ओर ताकते रहे; पर कोई चारा लेकर आता न दिखाई दिया। तब दोनों ने दीवार की नमकीन मिट्टी चाटनी शुरू की, पर इससे क्या तृप्ति होती।

    **पहली बार का विद्रोह:** रात को भी जब कुछ भोजन न मिला, तो हीरा के दिल में विद्रोह की ज्वाला दहक उठी। मोती से बोला— "अब तो नहीं रहा जाता मोती!" मोती ने सिर लटकाए हुए जवाब दिया— "मुझे तो मालूम होता है, प्राण निकल रहे हैं।"

    **साहस और संकल्प:** हीरा ने कहा— "बहुत मार पड़ेगी। लोग समझ जाएँगे यह तुम्हारी शरारत है।" मोती ने गर्व से कहा— "जिस अपराध के लिए तुम्हारे गले में बंधन पड़ा, उसके लिए अगर मुझ पर मार पड़े, तो क्या चिंता

    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. प्रेमचंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

    • A. १८८० में लमही, वाराणसी ✓
    • B. १८९० में दिल्ली
    • C. १८७० में आगरा
    • D. १८८५ में लखनऊ

    Answer: A — प्रेमचंद का जन्म १८८० में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था।

    Q2. कहानी के अनुसार, गधे को 'बेवकूफ' कहने का वास्तविक कारण क्या है?

    • A. गधा वास्तव में बुद्धिहीन जानवर है
    • B. गधे का सीधापन और निरापद सहिष्णुता उसे यह नाम दिलवाते हैं ✓
    • C. गधा कभी क्रोध नहीं करता इसलिए कमजोर है
    • D. गधा बिल्कुल काम नहीं करता

    Answer: B — लेखक स्पष्ट करते हैं कि गधे के गुणवान सद्गुण (सीधापन, सहिष्णुता) ही उसे गलती से बेवकूफ का नाम दे देते हैं।

    Q3. हीरा और मोती एक-दूसरे को समझने की विधि कौन-सी थी?

    • A. बातचीत करके
    • B. आँखों के संकेत से
    • C. मूक-भाषा (चाटना, सूँघना, सींग मिलाना) से ✓
    • D. सीटी बजाकर

    Answer: C — कहानी में कहा गया है कि दोनों बैल मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे, जो मनुष्य में नहीं होती।

    Q4. नए स्थान पर पहुँचने के बाद बैलों ने खाना क्यों नहीं खाया?

    • A. खाना खराब था
    • B. उन्हें भूख नहीं थी
    • C. दिल भारी था क्योंकि वह नया घर अजनबी लगता था ✓
    • D. मालिक ने खाना खिलाने से मना कर दिया

    Answer: C — कहानी में स्पष्ट है कि दिन-भर के भूखे होने पर भी बैलों का दिल भारी था क्योंकि उनका अपना घर छूट गया था।

    Q5. बैलों की गरदन में क्या लटक रहा था जब वे सुबह घर लौटे?

    • A. घंटी
    • B. आधा-आधा गराँव (पगहे की रस्सी का टूटा हुआ हिस्सा) ✓
    • C. जंजीर
    • D. फूलों की माला

    Answer: B — जब बैल घर लौटे तो उनकी गरदनों में आधा-आधा गराँव (मजबूत पगहों के टूटे हुए टुकड़े) लटक रहे थे।

    Q6. झूरी की पत्नी बैलों के भागने के बारे में क्या कहती है? (निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उसके विचार से मेल नहीं खाता?)

    • A. बैल कामचोर हैं और भाग निकले
    • B. नए मालिक ने बैलों को सहलाया नहीं, बस रगड़कर जोते
    • C. झूरी ही सही तरीके से बैलों को खिलाता है
    • D. बैलों को भागने में पूरा अधिकार था क्योंकि उन्हें बेचा गया ✓

    Answer: D — झूरी की पत्नी बैलों को दोषी मानती है और उनके भागने को गलत कहती है; वह यह नहीं मानती कि बेचे जाने का उन्हें अधिकार था।

    Q7. 'दो बैलों की कथा' में प्रेमचंद किस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं?

    • A. महाभारत की परंपरा
    • B. रामायण की परंपरा
    • C. पंचतंत्र और हितोपदेश जैसी जानवरों की कहानियों की परंपरा ✓
    • D. आधुनिक उपन्यास की परंपरा

    Answer: C — लेखक ने स्पष्ट किया कि प्रेमचंद ने पंचतंत्र और हितोपदेश जैसी परंपरा को अपनाया और आगे बढ़ाया है।

    Q8. गाँव के बालकों का मत था कि हीरा और मोती कौन हैं? (HOTS)

    • A. साधारण बैल जो भाग निकले
    • B. देवता जो बैल का रूप धारण किए हुए हैं
    • C. उस जन्म के आदमी जिन्हें देह ने बैल का रूप दे दिया है ✓
    • D. जादुई शक्तियों वाले पशु

    Answer: C — बालकों का कथन कि 'बैल नहीं हैं वे, उस जनम के आदमी हैं' यह दर्शाता है कि वे बैलों की बुद्धि, भावना और निष्ठा को मानवीय गुण मानते हैं।

    Q9. कहानी में भारतीय किसानों के प्रति क्या संदेश छिपा है?

    • A. किसान बिल्कुल शक्तिहीन हैं
    • B. किसानों का सीधापन और सहनशीलता उन्हें विश्व में सम्मानित बनाता है
    • C. किसानों का सीधापन उन्हें शोषण का शिकार बनाता है, पर संघर्ष से वे स्वतंत्र हो सकते हैं ✓
    • D. किसानों को चाहिए कि हमेशा सीधेपन का पालन करें

    Answer: C — कहानी परोक्ष रूप से दिखाती है कि भारतीय किसानों का सीधापन उन्हें शोषण के लिए तैयार करता है, पर हीरा-मोती की तरह वे भी संघर्ष से स्वतंत्र हो सकते हैं।

    Q10. जब झूरी की पत्नी बैलों को सूखा भूसा देने का निर्णय लेती है, तो यह दृश्य क्या दर्शाता है?

    • A. बैलों का पोषण सही तरीके से किया जा रहा है
    • B. झूरी की पत्नी बैलों की देखभाल के बारे में नहीं सोचती
    • C. मनुष्य के क्रोध और पूर्वाग्रह से निर्दोष प्राणियों को दंड मिलता है ✓
    • D. यह सामान्य ग्रामीण जीवन का हिस्सा है

    Answer: C — यह दृश्य दिखाता है कि मनुष्य अपने पूर्वाग्रह में पड़कर निर्दोष पशुओं को कैसे दंड देते हैं, जो सामाजिक अन्याय का प्रतीक है।

    Flashcards

    प्रेमचंद का मूल नाम क्या था?

    प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय था और वे १८८० में लमही, वाराणसी में पैदा हुए थे।

    गधे को बेवकूफ कहने का सही कारण क्या है?

    गधे का सीधापन, निरापद सहिष्णुता और गुणवान स्वभाव ही उसे गलत नाम दिलवाता है, वास्तव में वह बेवकूफ नहीं है।

    हीरा और मोती एक-दूसरे से कैसे संवाद करते थे?

    हीरा और मोती मूक-भाषा (चाटना, सूँघना, सींग मिलाना) से एक-दूसरे की भावनाएँ समझते थे जो मनुष्य में नहीं होती।

    हल या गाड़ी में जोते जाते समय बैलों की क्या चेष्टा रहती थी?

    हर बैल यह चाहता था कि ज्यादा-से-ज्यादा बोझ उसकी गरदन पर रहे, अर्थात् वह दूसरे को हल्का करना चाहता था।

    झूरी के साले गया को बैलों को ले जाने में क्या परेशानी आई?

    बैल पीछे से हाँकने पर दाएँ-बाएँ भागते थे, आगे से खींचने पर पीछे जोर लगाते थे और मारने पर सींग नीचे करके हुँकारते थे।

    'दो बैलों की कथा' में प्रेमचंद का मुख्य संदेश क्या है?

    परोक्ष रूप से यह कहानी बताती है कि स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।

    नए स्थान पर पहुँचने के बाद बैलों का व्यवहार कैसा था?

    नाँद में खाना देखकर भी बैलों ने मुँह नहीं डाला क्योंकि उनका दिल भारी था और वह नया घर अजनबी लगता था।

    बैलों ने पगहे को कैसे तोड़ा?

    रात को जब गाँव सो गया, तो दोनों ने मिलकर जोर-जोर से झटके मारकर मजबूत पगहों को तोड़ डाला।

    झूरी की पत्नी बैलों को 'नमक-हराम' क्यों कहती है?

    झूरी की पत्नी बैलों को 'नमक-हराम' इसलिए कहती है क्योंकि उन्होंने एक दिन भी काम नहीं किया और भाग गए।

    गाँव के बालकों ने बैलों के बारे में क्या निर्णय लिया?

    गाँव के बालकों का मत था कि ये बैल नहीं, बल्कि उस जन्म के आदमी हैं जिन्हें देह ने बैल का रूप दे दिया है।

    Important Board Questions

    कहानी में लेखक गधे के बारे में क्या कहना चाहते हैं? उसके गुणों को समझाइए। [2 marks]

    गधे के सीधापन, निरापद सहिष्णुता और ऋषि-मुनि जैसे गुणों पर ध्यान दें; यह देखें कि संसार में सीधापन अनुपयुक्त क्यों है।

    हीरा और मोती के बीच किस प्रकार का रिश्ता था? उनके परस्पर व्यवहार से यह कैसे प्रकट होता है? [3 marks]

    मूक-भाषा, आमने-सामने बैठना, काम के समय ज्यादा बोझ लेने की चेष्टा, और एक-दूसरे की थकान मिटाना — इन सभी उदाहरणों से भाईचारे को समझाएँ।

    नए स्थान से बैलों के भागने की घटना किस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़ी है? विस्तार से समझाइए। [5 marks]

    बैलों का अपने घर, मालिक और परिवार से जुड़ाव, नए मालिक के दुर्व्यवहार से संघर्ष, और पगहे तोड़कर घर लौटना — यह सब भारतीय किसानों और स्वतंत्रता आंदोलन के साथ समानता दिखाएँ; परोक्ष अर्थ और परंपरा का संदर्भ दें।

    Assertion-Reason Questions for Do Bailon Ki Katha

    Q1. Assertion (A):

    प्रेमचंद की कहानी दो बैलों की कथा जानवरों के माध्यम से स्वतंत्रता का संदेश देती है।

    Reason (R):

    बैल अपने मालिक के घर से जबरदस्ती बेचे गए और फिर अपने प्रयास से वापस लौट आए, जो संघर्ष और स्वतंत्रता की भावना को दर्शाता है।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण कथन को सही तरीके से समझाता है। बैलों की वापसी स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष का प्रतीक है।

    Q2. Assertion (A):

    प्रेमचंद के अनुसार गधा बिल्कुल बेवकूफ जानवर है।

    Reason (R):

    गधा कभी क्रोध नहीं करता, हर प्रकार का दुर्व्यवहार सहन करता है और सद्गुणों से भरा हुआ है।

    Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है क्योंकि प्रेमचंद वास्तव में गधे के गुणों की प्रशंसा करते हैं। कारण सही है, जो गधे के गुणों को दर्शाता है, लेकिन ये गुण उसे बेवकूफ नहीं बनाते।

    Q3. Assertion (A):

    हीरा और मोती के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता था।

    Reason (R):

    वे एक-दूसरे को चाटते, सूँघते, सींग भी मिलाते थे और एक-दूसरे की थकान दूर करते थे।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण को समझाता है। उनके बीच का भाईचारा और आत्मीयता पाठ में स्पष्ट दिखाई देती है।

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    Case-Based Questions (CBQ) for Do Bailon Ki Katha

    Case Study:

    जिस वक्‍त ये दोनों बैल हल या गाड़ी मेें जोत दिए जाते और गरदन हिला-हिलाकर चलते, उस वक्‍त हरएक की यही चेष््‍टटाटा होती थी कि ज्यादा-से-ज्यादा बोझ मेरी ही गरदन पर रहे। दिन-भर के बाद दोपहर या संध्या को दोनों खुलते, तो एक-दूसरे को चाटट-चूटटकर अपनी थकान मिटटा लिया करते।

    Q1. ऊपर दिए गए अंश में बैलों की कौन सी विशेषता उजागर होती है?

    • A. वे केवल अपने बारे में सोचते थे
    • B. वे एक-दूसरे के लिए अधिक से अधिक बोझ लेना चाहते थे ✓
    • C. वे आलसी थे और थकान से बचना चाहते थे
    • D. वे मालिक की खुशामद करना चाहते थे

    Answer: B

    Q2. बैलों का थकान मिटाने का तरीका उनके किस भाव को दर्शाता है?

    • A. आपस में प्रतिद्वंद्विता
    • B. परस्पर प्रेम और सहानुभूति ✓
    • C. समय बर्बादी की आदत
    • D. मालिक से डर

    Answer: B

    Q3. बैलों का अधिक बोझ अपने ऊपर लेना किस जीवन-मूल्य को दर्शाता है?

    • A. स्वार्थपरता
    • B. कर्तव्य, त्याग और परोपकार ✓
    • C. कमजोरी और असहायता
    • D. मालिक की सेवा में लालच

    Answer: B

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