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Varsha-Bahar

NCERT Class 7 · Hindi Based on NCERT Class 7 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

वषार्-बहार — संपूर्ण अध्ययन नोट्स

अध्याय का परिचय

**वषार्-बहार** मुकुटधर पाण्डेय द्वारा रचित एक सुंदर मनोरम काव्य है जिसमें वषार् ऋतु के रंग-बिरंगे दृश्यों, सुगंधों, आवाजों और प्राकृतिक सौंदर्य का मनोलोभन वर्णन किया गया है। यह काव्य केवल वषार् का वर्णन नहीं करता, बल्कि यह दिखाता है कि वषार् आने से समस्त प्रकृति कैसे जीवंत, आनंदित और नई ऊर्जा से भर जाती है।

कवि परिचय — मुकुटधर पाण्डेय

**जन्म और जीवन:** मुकुटधर पाण्डेय का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में हुआ था। वे सन् 1895 से 1989 तक जीवित रहे।

**साहित्यिक योगदान:**

  • प्रकृति-सौंदर्य उनकी रचनाओं का मुख्य विषय था
  • किशोरावस्था में ही उन्होंने काव्य और लेख लिखना शुरू कर दिया था
  • उनकी रचनाएं सरस्वती और माधुरी जैसी प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होती थीं
  • हिंदी साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें **पद्मश्री** पुरस्कार से सम्मानित किया
  • **साहित्य शैली:** मुकुटधर पाण्डेय की कविताएं सरल भाषा, सजीव बिंब और प्रकृति के गहन अवलोकन से युक्त होती हैं।

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    काव्य का संपूर्ण पाठ एवं भावार्थ

    पहला दोहा

    **पाठ:**

    _वषार्-बहार सब के, मन को लुभा रही है_

    _नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है।_

    **शब्दार्थ:**

  • **वषार्-बहार:** वषार् ऋतु की सुंदरता
  • **लुभा रही है:** आकर्षित कर रही है, मोहित कर रही है
  • **नभ:** आकाश
  • **छटा:** चमक, सौंदर्य, दीप्ति
  • **अनूठी:** अद्भुत, अनोखी, अतुलनीय
  • **घनघोर:** गहरे-गहरे बादल, सघन बादल
  • **भावार्थ:** वषार् ऋतु की मनमोहक सुंदरता सभी का मन आकर्षित कर रही है। आकाश में छाए हुए गहरे-गहरे बादलों की अद्भुत और अतुलनीय छटा देखते ही बनती है। बादलों की इस अद्भुत सुंदरता से पूरी प्रकृति आच्छादित हो गई है।

    दूसरा दोहा

    **पाठ:**

    _बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं_

    _पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं।_

    **शब्दार्थ:**

  • **बिजली:** विद्युत, चमकती रोशनी
  • **गरज:** गड़गड़ाहट की आवाज करना
  • **पानी बरस रहा है:** वर्षा हो रही है
  • **झरने:** पर्वत से बहने वाली धाराएँ, जलप्रपात
  • **भावार्थ:** वषार् का आरंभ हो गया है। बिजली आकाश में चमक रही है और बादल गर्जना कर रहे हैं। पूरी तरह पानी बरस रहा है और पहाड़ों के झरने भी जोरों से बह रहे हैं। वषार् की संपूर्ण गतिविधि एक साथ प्रकट हो रही है।

    तीसरा दोहा

    **पाठ:**

    _चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब_

    _बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब।_

    **शब्दार्थ:**

  • **चलती हवा:** बहती हुई वायु
  • **ठंडी:** शीतल, ताजगी भरी
  • **डालियाँ:** पेड़ों की शाखाएँ
  • **मालिनें:** बागों की रक्षक महिलाएँ, बागवानें
  • **गीत सुंदर:** प्यारे गीत, मधुर संगीत
  • **भावार्थ:** वषार् के आने से ठंडी-ठंडी हवा चलने लगी है जो पेड़ों की सभी डालियों को हिलाती है। इस आनंद में बागों की महिलाएं सुंदर गीत गाती हैं। वषार् का आगमन सभी को खुशी देता है।

    चौथा दोहा

    **पाठ:**

    _तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते_

    _फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते।_

    **शब्दार्थ:**

  • **तालों में:** तालाबों में
  • **जीव जलचर:** जल में रहने वाले प्राणी, मछलियाँ और जलीय जीव
  • **अति हैं प्रसन्न होते:** बहुत खुश हो जाते हैं
  • **फिरते लखो:** देखो वे घूमते हैं
  • **पपीहे:** एक पक्षी (कोयल जैसा), जो गर्मी में तकलीफ पाता है
  • **ग्रीष्म ताप:** गर्मी की तपन
  • **खोते:** भूल जाते हैं, छुटकारा पा लेते हैं
  • **भावार्थ:** तालाबों में रहने वाली मछलियाँ और जलीय जीव वषार् से अत्यंत खुश हो जाते हैं। पपीहे पक्षी जो गर्मी में बहुत कष्ट पाते हैं, अब वषार् आने से अपनी गर्मी से मुक्ति पा जाते हैं। वषार् सभी के लिए राहत लाती है।

    पाँचवाँ दोहा

    **पाठ:**

    _करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे_

    _मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे।_

    **शब्दार्थ:**

  • **नृत्य:** नाच, तांडव करना
  • **वन में:** जंगल में
  • **मोर:** मयूर, भारत का राष्ट्रीय पक्षी
  • **मेंढक:** एक जलीय प्राणी
  • **लुभा रहे हैं:** मोहित कर रहे हैं, आकर्षित कर रहे हैं
  • **सुगीत:** मधुर संगीत, प्यारा गीत
  • **भावार्थ:** वषार् की खुशी में वन के मोर अपनी सुंदर नृत्य करते हैं। मेंढक अपना मधुर संगीत गाकर सभी को मोहित कर देते हैं। प्रकृति का हर जीव-जंतु वषार् के आगमन पर उत्सव मनाने लगता है।

    छठा दोहा

    **पाठ:**

    _खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है_

    _बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है।_

    **शब्दार्थ:**

  • **खिलता गुलाब:** खुलता हुआ फूल
  • **कैसा:** कितना, कितनी सुंदरता से
  • **सौरभ:** सुगंध, खुशबू
  • **उड़ा रहा है:** फैला रहा है, चारों ओर प्रसारित कर रहा है
  • **आमोद:** आनंद, खुशी, प्रसन्नता
  • **छा रहा है:** व्याप्त हो रहा है, फैल रहा है
  • **भावार्थ:** वषार् के बाद खिले हुए गुलाब की सुंदरता अद्भुत होती है और उनकी खुशबू चारों ओर फैल जाती है। बागों में सर्वत्र खुशियाँ और आनंद व्याप्त हो जाता है। वषार् के बाद का यह दृश्य प्रकृति को स्वर्ग में बदल देता है।

    सातवाँ दोहा

    **पाठ:**

    _चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर_

    _गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।_

    **शब्दार्थ:**

  • **हंस:** एक सुंदर जलपक्षी
  • **कतार:** पंक्ति, कतार में
  • **सुंदर:** मनोरम, आकर्षक
  • **गीत:** गाना, संगीत
  • **किसान:** खेतों में काम करने वाला
  • **मनहर:** मन को हर लेने वाले, मनमोहक
  • **भावार्थ:** हंसों की सुंदर पंक्तियाँ आकाश में उड़ती हैं। वषार् के आगमन पर किसान अपने खेतों में काम करते समय मधुर गीत गाते हैं। ये गीत सभी का मन हर लेते हैं और खेतों में खुशियाँ बिखेरते हैं।

    आठवाँ दोहा (अंतिम दोहा)

    **पाठ:**

    _इस भाँति है अनोखी, वषार् बहार भू पर_

    _सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर।_

    **शब्दार्थ:**

  • **इस भाँति:** इस तरीके से, इस प्रकार
  • **अनोखी:** अद्भुत, अतुलनीय
  • **वषार् बहार:** वषार् ऋतु की सुंदरता
  • **भू पर:** पृथ्वी पर
  • **जगत:** विश्व, संसार
  • **शोभा:** सुंदरता, चमक
  • **निर्भर है:** आश्रित है, पर निर्भर है
  • **भावार्थ:** इस प्रकार वषार् ऋतु की सुंदरता अद्भुत और अद्वितीय है। पूरी पृथ्वी और समस्त जगत की सुंदरता और समृद्धि वषार् पर ही निर्भर है। बिना वषार् के कोई जीवन संभव नहीं है। यह काव्य का मूल संदेश है।

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    काव्य का समग्र भाव

    यह काव्य वषार् ऋतु का एक संपूर्ण चित्रण प्रस्तुत करता है। इसमें:

    **प्राकृतिक दृश्य:** बादल, बिजली, पानी, झरने, हवा

    **जीव-जंतु:** मोर, मेंढक, पपीहे, हंस, मछलियाँ, जलीय जीव

    **वनस्पति:** फूल, गुलाब, पेड़ों की डालियाँ

    **मानवीय क्रियाएँ:** गीत गाना, नृत्य करना, काम करना

    **समग्र संदेश:** वषार् सभी के लिए खुशी, आनंद और जीवन लाती है

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    काव्य के प्रमुख विषय (Themes)

    1. वषार् की सर्वांगीण सुंदरता

    वषार् ऋतु की प्रकृति, दृश्य और गंध का विस्तृत वर्णन काव्य के केंद्र में है। बादल, बिजली, पानी सभी अपनी सुंदरता प्रदर्शित कर रहे हैं।

    2. सभी जीवों में आनंद

    वषार् के आगमन से सभी प्राणी खुश हो जाते हैं — मोर नाचते हैं, मेंढक गीत गाते हैं, जलीय जीव उल्लास मनाते हैं, मनुष्य गीत गाता है।

    3. प्रकृति की जीवंतता

    सूखे, गरम मौसम के बाद वषार् सब कुछ को जीवंत, ताजा और हरा-भरा बना देती है।

    4. जीवन का आधार

    अंतिम दोहे में कवि कहता है कि समस्त पृथ्वी और जगत की सुंदरता, समृद्धि तथा जीवन वषार् पर ही निर्भर है। वषार् के बिना कोई जीवन संभव नहीं।

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    व्याकरण — विस्तृत अध्ययन

    विशेषण (Adjectives)

    **परिभाषा:** वह शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, विशेषण कहलाता है।

    **काव्य में प्रयुक्त विशेषण:**

    | **पंक्ति** | **विशेषण** | **विशेष्य** | **अर्थ** |

    |-----------|-----------|-----------|---------|

    | नभ में छटा अनूठी | अनूठी | छटा | अद्भुत, अतुलनीय सुंदरता |

    | चलती हवा है ठंडी | ठंडी | हवा | शीतल, ताजगी भरी |

    | हिलती हैं डालियाँ सब | सब | डालियाँ | सभी शाखाएँ |

    | बागों में गीत सुंदर | सुंदर | गीत | मनोरम, मधुर |

    | सुगीत प्यारे | प्यारे | सुगीत | मंजुल, मनभावन |

    | चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | सुंदर | कतार | आकर्षक पंक्ति |

    | खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है | खिलता | गुलाब | खुलता हुआ फूल |

    **विशेषण के प्रकार:**

  • **गुणवाचक विशेषण:** छटा को 'अनूठी', हवा को 'ठंडी', गीत को 'सुंदर' कहना
  • **परिमाणवाचक विशेषण:** 'सब' (सभी डालियाँ)
  • संज्ञा (Nouns)

    **परिभाषा:** किसी भी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या विचार का नाम संज्ञा है।

    **काव्य में प्रयुक्त संज्ञाएँ:**

    **व्यक्तिवाचक संज्ञा:** (विशेष व्यक्ति, स्थान)

  • छत्तीसगढ़, बिलासपुर, मुकुटधर पाण्डेय
  • **जातिवाचक संज्ञा:** (समूह का नाम)

  • वषार्, बहार, नभ, बादल, बिजली, पानी, झरने, हवा, डालियाँ, बाग, गीत, मालिनें, तालें, जीव, जलचर, पपीहे, मोर, मेंढक, गुलाब, सौरभ, हंस, किसान, भू, जगत, शोभा
  • **भाववाचक संज्ञा:** (गुण, भाव, अवस्था)

  • आनंद, खुशी, प्रसन्नता, आमोद, सुख, ताप, शोभा
  • क्रिया (Verbs)

    **परिभाषा:** जो शब्द किसी कार्य, गतिविधि या अवस्था को व्यक्त करे, वह क्रिया है।

    **काव्य में प्रयुक्त क्रियाएँ:**

    | **क्रिया** | **पंक्ति में प्रयोग** | **अर्थ** |

    |----------|-------------------|---------|

    | लुभा रही है | वषार्-बहार सब के, मन को लुभा रही है | आकर्षित करना, मोहित करना |

    | छा रही है | घनघोर छा रही है | व्याप्त करना, छा जाना |

    | चमक रही है | बिजली चमक रही है | चमकना, दीप्तिमान होना |

    | गरज रहे हैं | बादल गरज रहे हैं | गड़गड़ाहट करना |

    | बरस रहा है | पानी बरस रहा है | वर्षा करना, गिरना |

    | बहे हैं | झरने भी ये बहे हैं | बहना, प्रवाहित होना |

    | चलती है | चलती हवा है ठंडी | गतिशील होना |

    | हिलती हैं | हिलती हैं डालियाँ सब | हिलना, झूलना |

    | गाती हैं | गाती हैं मालिनें अब | गीत गाना, संगीत करना |

    | होते | अति हैं प्रसन्न होते | बनना, पड़ना |

    | फिरते | फिरते लखो पपीहे | घूमना, भ्रमण करना |

    | खोते | हैं ग्रीष्म ताप खोते | भूल जाना, छुटकारा पाना |

    | करते हैं | करते हैं नृत्य वन में | करना, संपादित करना |

    | खिलता | खिलता गुलाब कैसा | खुलना, विकसित होना |

    | उड़ा रहा है | सौरभ उड़ा रहा है | फैलना, प्रसारित करना |

    | चलते हैं | चलते हैं हंस कहीं पर | जाना, गतिशील होना |

    | गाते हैं | गाते हैं गीत कैसे | गीत गाना |

    | लेते | लेते किसान मनहर | ग्रहण करना, महसूस करना |

    **काल (Tense):** सभी क्रियाएँ **वर्तमान काल** में हैं, जिससे काव्य में तत्कालीनता और तुरंतता की अनुभूति होती है।

    सर्वनाम (Pronouns)

    **परिभाषा:** संज्ञा की जगह प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम हैं।

    **काव्य में प्रयुक्त सर्वनाम:**

  • **ये (यह):** "देखो ये मोर सारे" — निकटवर्ती सूचक सर्वनाम
  • **इसके (इसका):** "निर्भर है इसके ऊपर" — संबंधवाचक सर्वनाम
  • ---

    काव्य के अलंकार (Literary Devices)

    अलंकार की परिभाषा

    काव्य को सुंदर, प्रभावी और रोचक बनाने के लिए प्रयुक्त साधन को अलंकार कहा जाता है।

    1. अनुप्रास अलंकार (Alliteration)

    **परिभाषा:** एक ही वर्ण की आवृत्ति जब काव्य में सौंदर्य और संगीतात्मकता लाए, तो वह अनुप्रास है।

    **उदाहरण:**

  • **"ब"** की आवृत्ति: "बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं / पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं"
  • **"छ"** की आवृत्ति: "नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है"
  • **"च"** की आवृत्ति: "चलती हवा है ठंडी, चलते हैं हंस कहीं पर"
  • **"ग"** की आवृत्ति: "गीत सुंदर, गाती हैं / गाते हैं गीत / गरज रहे"
  • **"म"** की आवृत्ति: "मन को लुभा / मोर / मालिनें / मनहर"
  • **प्रभाव:** इससे काव्य में संगीतात्मकता और लय का निर्माण होता है।

    2. उपमा अलंकार (Simile)

    **परिभाषा:** दो भिन्न वस्तुओं के बीच समानता दिखाना उपमा है।

    **उदाहरण:**

  • **"मोर नृत्य करते हैं"** — यह मनुष्य के नृत्य जैसा दृश्य प्रस्तुत करता है
  • **"हंस कतार बाँधते हैं"** — यह एक सैन्य दल की व्यवस्था जैसा प्रतीत होता है
  • 3. मानवीकरण (Personification)

    **परिभाषा:** निर्जीव वस्तुओं को मानव के समान गुण देना मानवीकरण है।

    **उदाहरण:**

  • **"बिजली चमक रही है"** — बिजली को मानव क्रिया दी गई है (चमकना)
  • **"बादल गरज रहे हैं"** — बादलों को गर्जन करने वाले मानव जैसे बनाया गया है
  • **"पानी बरस रहा है"** — पानी को सजीव बनाया गया है
  • **"झरने बहे हैं"** — झरनों को गतिशील मानव जैसा दिखाया गया है
  • **"हवा चलती है"** — हवा को चलने वाली गति दी गई है
  • **"डालियाँ हिलती हैं"** — पेड़ों की डालियों को हिलने की क्रिया दी गई है
  • **"गुलाब सौरभ उड़ा रहा है"** — फूल को सुगंध फैलाने की मानवीय क्रिया दी गई है
  • 4. रूपक अलंकार (Metaphor)

    **परिभाषा:** जहाँ उपमेय और उपमान में कोई अंतर न रहे, वहाँ रूपक होता है।

    **उदाहरण:**

  • **"वषार् बहार"** — वषार् को बहार (बसंत) की तरह जीवंतता देना
  • 5. पुनरुक्ति प्रकाश (Repetition for Emphasis)

    **परिभाषा:** किसी शब्द या भाव की पुनरावृत्ति से अर्थ में गहराई आए।

    **उदाहरण:**

  • **"गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें / गाते हैं गीत कैसे"** — 'गीत' और 'गाते' की पुनरावृत्ति
  • 6. विरोधाभास (Paradox)

    **परिभाषा:** परस्पर विरोधी बातों को एक साथ प्रस्तुत करना।

    **उदाहरण:**

  • **"ठंडी हवा"** और **"ग्रीष्म ताप"** — दोनों का एक साथ वर्णन (गर्मी के बाद ठंडक)
  • 7. दृश्य बिंब (Visual Imagery)

    **परिभाषा:** ऐसी काव्य भाषा जो पाठक के मन में जीवंत दृश्य उपस्थित करे।

    **उदाहरण:**

  • **"बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं"** — चमकती बिजली का दृश्य
  • **"खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है"** — खिले फूल का सजीव चित्र
  • **"चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर"** — हंसों की सुंदर पंक्ति का दृश्य
  • 8. श्रृंगार रस (Aesthetic Sentiment)

    काव्य में वषार् की सुंदरता, प्रकृति की शोभा और आनंद का वर्णन है, जो पाठक के मन में सौंदर्य-बोध जगाता है।

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    संधि (Word Combinations)

    **परिभाषा:** दो वर्णों के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं।

    काव्य में संधि के उदाहरण:

    1. **हिमालय = हिम + आलय** (दीर्घ संधि)

  • काव्य में सीधे नहीं, लेकिन इसी तरह के शब्द संभव हैं
  • 2. **भू + पर = भूपर** (लोप संधि का विलोम)

    3. **अनूठी** — इसमें अनु +

    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. किवता 'वषार्-बहार' में मुख्य भाव क्या है?

    • A. दुख और निराशा
    • B. आनंद और प्रसन्नता ✓
    • C. भय और चिंता
    • D. क्रोध और विरोध

    Answer: B — किवता में वषार् ॠतु की सुंदरता, प्रकृति की खुशी और सभी जीव-जंतुओं की प्रसन्नता का वर्णन है।

    Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पंक्ति में 'विशेषण' शब्द है?

    • A. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं
    • B. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब ✓
    • C. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते
    • D. करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे

    Answer: B — 'ठंडी' विशेषण है जो 'हवा' की विशेषता बताता है और 'ठंडक' गुण को दर्शाता है।

    Q3. किवता में पपीहे किससे राहत पाते हैं?

    • A. सर्दी से
    • B. भूख से
    • C. ग्रीष्म ताप से ✓
    • D. शरद से

    Answer: C — पंक्ति 'फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते' से साफ है कि पपीहे गर्मी से छुटकारा पाते हैं।

    Q4. 'नभ में छटा अनूठी' — इस पंक्ति में 'छटा' का अर्थ क्या है?

    • A. बिजली की चमक
    • B. आकाश की सुंदरता ✓
    • C. बादलों की भीड़
    • D. पानी की बूँदें

    Answer: B — 'छटा' का अर्थ है चमक, चाकचौंध या सौंदर्य; यहाँ बादलों से ढके आकाश की विशेष सुंदरता को दर्शाता है।

    Q5. किवता में कौन-से जीव 'कतार' (पंक्ति) में चलते हैं?

    • A. मोर
    • B. हंस ✓
    • C. पपीहे
    • D. मेंढक

    Answer: B — पंक्ति 'चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर' में हंस अनुशासित रूप से पंक्ति में चलते हैं।

    Q6. आपके क्षेत्र में वषार् के समय कौन-सी ॠतु आती है?

    • A. ग्रीष्म ॠतु (मई-जून)
    • B. वषार् ॠतु (जुलाई-अगस्त) ✓
    • C. शरद ॠतु (सितंबर-अक्तूबर)
    • D. शिशिर ॠतु (जनवरी-फरवरी)

    Answer: B — भारत में वषार् ॠतु मुख्यतः जुलाई-अगस्त में आती है जब बादल घिरते हैं और वर्षा होती है।

    Q7. किवता के अनुसार 'सारे जगत की शोभा' किस पर निर्भर है?

    • A. सूरज पर
    • B. चाँद पर
    • C. वषार् पर ✓
    • D. बादलों पर

    Answer: C — अंतिम पंक्ति 'सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर' — यहाँ 'इसके' का अर्थ वषार् है क्योंकि वषार् से ही धरती पर जीवन संभव है।

    Q8. किवता में 'बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है' — इस पंक्ति से क्या बोध होता है?

    • A. बागों में डर का माहौल है
    • B. बागों में दुख की स्थिति है
    • C. बागों में सर्वत्र खुशी और आनंद फैला है ✓
    • D. बागों में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा

    Answer: C — 'आमोद' का अर्थ आनंद है; इस पंक्ति से वषार् ॠतु में बागों में व्याप्त सार्वभौमिक खुशी और सुख दिखाई देता है।

    Q9. किसान किस समय गीत गाते हैं और क्यों (किवता के अनुसार)?

    • A. सर्दी में, खेत तैयार करने के लिए
    • B. गर्मी में, शीतलता के लिए
    • C. वषार् में, खुशी और मनोरंजन के साथ काम करने के लिए ✓
    • D. शरद में, फसल काटते समय

    Answer: C — पंक्ति 'गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर' से साफ है कि वषार् में किसान खुशी से और मन लगाकर गीत गाते हैं।

    Q10. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'वषार्' ॠतु से सबसे अधिक संबंधित है और किवता में भी आया है?

    • A. तपन (गर्मी)
    • B. हिमपात (बर्फ)
    • C. रिमझिम (बूँदों की बरसात) ✓
    • D. कड़ाके की ठंड

    Answer: C — 'रिमझिम' वषार् की मधुर ध्वनि को दर्शाता है और किवता की भावना में भी पूरी तरह फिट है, जहाँ प्रकृति सुखद है।

    Flashcards

    मुकुटधर पाण्डेय का जन्म कहाँ हुआ था?

    मुकुटधर पाण्डेय का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था।

    किवता में 'अनूठी' शब्द किसकी विशेषता बता रहा है?

    'अनूठी' शब्द 'छटा' (आकाश की सुंदरता) की विशेषता बता रहा है और विशेषण है।

    'वषार्-बहार' शीर्षक का क्या अर्थ है?

    वषार् ॠतु की सुंदरता और उसमें आने वाली खुशी और प्रसन्नता को दर्शाता है।

    किवता में कौन-से जीव-जंतु का उल्लेख है?

    किवता में मोर, मेंढक, पपीहे, हंस और जलचर जीवों का उल्लेख है।

    'पपीहे ग्रीष्म ताप खोते हैं' का अर्थ क्या है?

    वषार् आने से पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं और उन्हें शांति मिलती है।

    किवता में 'विशेष्य' शब्द किसे कहा जाता है?

    विशेष्य वह संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है, जैसे 'गीत' सुंदर है।

    भारत में कुल कितनी ॠतुएँ होती हैं?

    भारत में छह ॠतुएँ होती हैं: वसंत, ग्रीष्म, वषार्, शरद, हेमंत और शिशिर।

    किवता की अंतिम पंक्ति में क्या संदेश दिया गया है?

    सारे जगत की शोभा वषार् पर निर्भर है और वषार् जीवन का मुख्य स्रोत है।

    'सुगीत प्यारे' में कौन-सा मेल है?

    'सु' + 'गीत' और 'प्यारे' विशेषण है जो 'गीत' (मेंढकों के गीत) की सुंदरता बताता है।

    किवता में 'आमोद' शब्द का अर्थ क्या है?

    'आमोद' का अर्थ है आनंद, खुशी, हषर् और प्रसन्नता।

    Important Board Questions

    किवता का शीर्षक 'वषार्-बहार' क्यों रखा गया है? एक वाक्य में लिखिए। [1 mark]

    बहार = खुशी, सुंदरता; वषार् = जीवन का स्रोत। दोनों को एक साथ लिखें।

    'पपीहे ग्रीष्म ताप खोते हैं' — इस पंक्ति से पपीहों की क्या विशेषता पता चलती है? (2 वाक्य में उत्तर दीजिए) [2 marks]

    ग्रीष्म = गर्मी; ताप = तापमान। पपीहे गर्मी से कैसे परेशान होते हैं और वषार् से कैसे राहत पाते हैं — यह लिखें।

    किवता में वर्णित वषार् ॠतु के पाँच दृश्यों को क्रम से लिखिए और समझाइए कि ये दृश्य प्रकृति में कैसे खुशी फैलाते हैं। (3 वाक्य में उत्तर दीजिए) [3 marks]

    बादल गरजना, बिजली चमकना, पानी बरसना, हवा चलना, पेड़ों की डालियाँ हिलना। हर दृश्य के बाद लिखें कि यह जीव-जंतुओं को कैसे खुश करता है।

    किवता के अंतिम पंक्ति 'सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर' को समझाइए। इसका संदेश क्या है? वषार् के बिना पृथ्वी पर क्या-क्या समस्याएँ हो सकती हैं? (5 वाक्य में विस्तारित उत्तर दीजिए) [5 marks]

    यहाँ 'इसके' = वषार्। समझाएँ: (1) वषार् कैसे जीवन का स्रोत है (2) बिना वषार् के हरियाली नहीं, पानी नहीं (3) फसलें नष्ट हो जातीं (4) जानवर और पक्षी बेघर हो जाते (5) मनुष्य का जीवन मुश्किल हो जाता।

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