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यह अध्याय एक **साक्षात्कार (Interview)** के रूप में प्रस्तुत है जिसमें पद्मविभूषण श्री **िबरजू महाराज** से बातचीत की गई है। िबरजू महाराज भारत के सबसे प्रसिद्ध कथक नृत्य कलाकार थे। यह साक्षात्कार उनके जीवन, संघर्ष, कथक नृत्य की परंपरा, और कला के प्रति उनके दृष्टिकोण के बारे में है।
**अध्याय का उद्देश्य:**
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**परिभाषा:** िबरजू महाराज भारत के सबसे महान कथक नृत्य कलाकार, संगीतकार और नृत्य शिक्षक थे।
**मुख्य विशेषताएँ:**
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**पहले का समय (सुख-समृद्धि):**
**बाद का समय (संकट और संघर्ष):**
**आर्थिक दुविधाएँ:**
**माँ की भूमिका:**
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**परिभाषा:** कथक संस्कृत के "कथा" शब्द से बना है, जिसका अर्थ है **कहानी**। यह कथा कहने की परंपरा है।
**ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:**
**घराना क्या है?**
**परिभाषा:** घराना एक संगीत परिवार होता है जो संगीत-नृत्य की विशेष शैली और परंपरा को आगे बढ़ाता है। यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता है।
**प्रमुख घराने:**
1. **लखनऊ घराना** (िबरजू महाराज का घराना)
2. **जयपुर घराना** (लखनऊ के बाद विकसित)
3. **बनारस घराना** (बाद में विकसित)
4. **रायगढ़ की अपनी अलग शैली** (महाराज चक्रधर की शैली)
**कहानी:**
**लोकप्रसिद्ध पद:**
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बैरिगया नाला जुलुम जोर,
नौ कथक नचावें तीन चोर।
जब तबला बोले धीन-धीन,
तब एक-एक पर तीन-तीन।
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**अर्थ:** यह पद कला की सामर्थ्य को दर्शाता है - कैसे 9 कथकों के नृत्य ने 3 डाकुओं को भी आकृष्ट कर लिया।
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**गंडा बाँधने की रस्म:**
**परिभाषा:** कथक की तालीम (शिक्षा) शुरू करते समय गुरु शिष्य को गंडा (ताबीज़) बाँधते हैं। यह एक **पवित्र रिश्ता** होता है।
**परंपरागत प्रक्रिया:**
**िबरजू महाराज का परिवर्तन:**
**प्रमुख गुरु:**
1. **अच्छन महाराज** (पिता)
2. **शंभू महाराज** (चाचा)
3. **लच्छू महाराज** (चाचा)
**औपचारिक शिक्षा से पहले:**
**पहली शिक्षा (बचपन से):**
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**परिभाषा:** गाना, बजाना और नाचना - ये तीनों **संगीत का अभिन्न अंग** हैं।
**संगीत में लय का महत्व:**
**लय (Rhythm) क्या है?**
**लय का महत्व:**
1. **शरीर में संतुलन बनाता है:** लय हर कार्य में समन्वय लाता है
2. **अनुशासन सिखाता है:** नियमितता और व्यवस्था सिखाता है
3. **सुरक्षा देता है:** गलत लय से काम बिगड़ सकता है
**उदाहरण:**
घसियारा घास को हाथ से पकड़कर उस पर हँसिया मारता है, फिर घास हटाता है। इस **मारने और हटाने की लय** में ज़रा भी गड़बड़ी हुई नहीं कि उसका हाथ चला जाता है।
**नृत्य का अर्थ:**
**नृत्य को समझना:**
नृत्य करना एक तरह से **अदृश्य शक्ति को निमंत्रण देना है** - "कृष्ण, मेरे अंदर समाओ और नाचो।"
**आवश्यकता:**
**प्रभाव:**
अगर सुर-ताल की समझ है तो नतर्क जान पाएगा कि:
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**िबरजू महाराज का दृष्टिकोण:**
**1. भाव-भंिगमाओं का समावेश:**
**2. तीनों गुरुओं की शिक्षा को एकत्रित करना:**
**3. आधुनिक साहित्य का समावेश:**
**पहले का तरीका:**
**अब का तरीका:**
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**प्रश्न:** अलग-अलग भाषाओं के कवियों की रचनाओं को लेकर कथक कैसे बनाया?
**िबरजू महाराज का उत्तर:**
**"भाषाएँ अलग-अलग होती हैं पर इंसान तो सब जगह एक-से होते हैं।"**
**उदाहरण:**
फ्रांस में एक दर्शक ने पूछा: "यशोदा कौन है?"
**जवाब:** इस धरती पर सब माँएँ यशोदा हैं और सब नन्हें बच्चे कृष्ण हैं।
**तर्क:**
**रूपक (Metaphor):**
परंपरा एक **वृक्ष के समान** होती है जो:
**नया पौधा लगाना:**
वृक्ष से लिया गया बीज बोएँ तो:
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**परिभाषा:** लोक नृत्य **सामूहिक** होता है।
**विशेषताएँ:**
1. **सामूहिक कार्य:** कई लोग मिलकर नृत्य करते हैं
2. **उद्देश्य:** दिनभर की मेहनत के बाद थकान दूर करना, मनोरंजन
3. **नर्तकों के लिए:** नाचने वालों के अपने मन बहलाव के लिए
4. **समय:** विशेष अवसरों पर (फसल कटाई, त्योहार आदि)
**परिभाषा:** शास्त्रीय नृत्य में **एक नतर्क अकेला ही काफी होता है**।
**विशेषताएँ:**
1. **व्यक्तिगत:** एक व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत
2. **दर्शकों के लिए:** दर्शकों के लिए प्रस्तुत किया जाता है
3. **व्यवस्थित:** शास्त्रों के नियमों पर आधारित
4. **विकास:** लोक नृत्य से धीरे-धीरे विकसित हुआ
1. **शुरुआत:** कथावाचक भी लोक नतर्क था
2. **विकास:** धीरे-धीरे खास शैली और रूप निश्चित होता गया
3. **अंत में:** शास्त्रीय नृत्य का रूप ले लिया
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**1. कथक (Kathak)**
**2. भरतनाट्यम (Bharatanatyam)**
**3. ओड़िसी (Odissi)**
**4. मणिपुरी (Manipuri)**
**5. कथकली (Kathakali)**
**6. कुचिपुड़ी (Kuchipudi)**
**7. मोहिनीअट्टम (Mohiniyattam)**
**कथक और भरतनाट्यम में अंतर:**
| विशेषता | कथक | भरतनाट्यम |
|---------|------|-----------|
| **भाव-भंिगमा** | दैनिक जीवन से | मूर्तिकला से |
| **भाव प्रयोग** | बारी-बारी से | दोनों एक साथ |
| **गदर्न** | हल्के से हिलाई जाती है | और अधिक गति |
**कथक में विशेषताएँ:**
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**कुछ वर्ष पहले:**
**आजकल:**
**संदेश:**
"वह संगीत सुनो-देखो, लेकिन अपनी परंपरा की गहराई को भी समझो, अनुभव करो।"
**महत्व:**
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**प्रश्न:** क्या पढ़ाई के साथ-साथ संगीत और नृत्य जारी रखना संभव है?
**उत्तर:** हाँ, यह सामर्थ्य पर निर्भर करता है।
**शोभना नारायण:**
**िबरजू महाराज का अनुभव:**
**चाचा की चेतावनी:**
"तुम नौकरी में बँट जाओगे। तुम्हारे अंदर का नतर्क पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।"
**उनका संकल्प:**
"'महाराज' बनना है तो मेहनत भी करनी होगी।"
**संदेश:** कला को सिद्ध करने के लिए:
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**पहले:**
**अब का दृष्टिकोण:**
**आवश्यकता:**
लड़कियों के पास शिक्षा या कोई-न-कोई हुनर अवश्य होना चाहिए
**लाभ:**
1. **आत्मनिर्भरता:** आत्मनिर्भर बन सकें
2. **सुरक्षा:** हुनर एक ऐसा खज़ाना है जिसे कोई नहीं छीन सकता
3. **व्यावहारिकता:** वक्त पड़ने पर काम आता है
**परिभाषा:** हुनर = कला में दक्षता, कौशल
**िबरजू महाराज का कथन:**
"हुनर ऐसा खज़ाना है, िजसे कोई नहीं छीन सकता और वक्त पड़ने पर काम आता है।"
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**िबरजू महाराज का संदेश बच्चों को:**
"बच्चो, तुम लोग संगीत सीखते हो? यिद नहीं तो ज़रूर सीखो।"
**1. मानसिक शांति:**
**2. अनुशासन:**
**3. संतुलन:**
**4. सहयोग:**
**5. सामूहिक प्रयास:**
Q1. साक्षात्कार में बिरजू महाराज ने अपने बचपन में किस बात के बारे में बताया?
Answer: B — बिरजू महाराज ने स्पष्ट कहा कि बाबूजी के देहांत के बाद आर्थिक परेशानियाँ बढ़ने लगीं।
Q2. बिरजू महाराज के गुरु कौन थे?
Answer: B — बिरजू महाराज ने बताया कि उनके गुरु पिता, चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज थे।
Q3. कथक नृत्य की परंपरा किस गाँव से शुरू हुई थी?
Answer: C — पाठ में स्पष्ट लिखा है कि हरिया गाँव में नौ कथिकों के घर हुआ करते थे।
Q4. बैरिगया नाला की कथा का मुख्य संदेश क्या है? (माध्यम प्रश्न)
Answer: B — कहानी यह बताती है कि कथक की कला में इतना दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर कथक में मग्न हो गए।
Q5. लय का क्या महत्व है जैसा बिरजू महाराज ने समझाया? (माध्यम प्रश्न)
Answer: B — बिरजू महाराज ने घसियारे की कहानी देते हुए यह समझाया कि लय हर गतिविधि में महत्वपूर्ण है।
Q6. शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य में मुख्य अंतर क्या है? (माध्यम प्रश्न)
Answer: B — पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि शास्त्रीय नृत्य में एक नर्तक दर्शकों के लिए नाचता है जबकि लोक नृत्य सामूहिक होता है।
Q7. बिरजू महाराज ने अपनी बेटियों को कथक क्यों सिखाया? (कठिन प्रश्न)
Answer: B — बिरजू महाराज ने कहा कि लड़कियों के पास कोई न कोई हुनर होना चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर हो सकें।
Q8. अगर कोई बच्चा नृत्य सीखना चाहे पर घर वाले न चाहें तो बिरजू महाराज की सलाह क्या थी? (कठिन प्रश्न)
Answer: B — बिरजू महाराज का विचार था कि लय के साथ खेलना एक खेल है जिसमें संतुलन और समय का अंदाजा सीखने को मिलता है।
Q9. कथक में गर्दन और उँगलियों को कैसे हिलाया जाता है?
Answer: B — पाठ में बिरजू महाराज ने कहा कि गर्दन चिराग की लौ के समान हल्के से हिलाई जाती है।
बिरजू महाराज के बाबूजी का क्या हुआ था जिससे आर्थिक परेशानियाँ बढ़ीं?
बाबूजी का देहांत हो गया था, जिससे नवाब के घर की संपत्ति खाली पड़ने लगी।
गंडा बाँधने की परंपरा में बिरजू महाराज ने क्या बदलाव किया?
कई वर्षों तक नृत्य सिखाने के बाद जब शिष्य में सच्ची लगन दिखे तभी गंडा बाँधने लगे।
कथक कला कहाँ से शुरू हुई थी?
कथक की परंपरा बनारस-इलाहाबाद के बीच हरिया गाँव से शुरू हुई थी जहाँ नौ कथिक रहते थे।
लय का क्या महत्व है नृत्य में?
लय नृत्य को संतुलन और सुंदरता प्रदान करती है और हर गतिविधि में समन्वय बनाए रखती है।
शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य में मुख्य अंतर क्या है?
शास्त्रीय नृत्य एक नर्तक द्वारा दर्शकों के लिए किया जाता है जबकि लोक नृत्य सामूहिक और मनोरंजन के लिए होता है।
कथक की भाव-भंगिमा किससे ली जाती है?
कथक की भाव-भंगिमा दैनिक जीवन से ली जाती है, जैसे घूँघट उठाना, घास काटना आदि।
भारत में आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य कौन-कौन से हैं?
कथक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथकली, मोहिनीअट्टम, ओडिसी, मणिपुरी और छऊ भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य हैं।
बिरजू महाराज की माँ ने संघर्ष के समय क्या किया?
माँ पुरानी ज़री साड़ियों को जलाकर सोने-चाँदी के तार बेचती थीं और कहती थीं कि खाना न मिले पर अभ्यास ज़रूर करो।
बिरजू महाराज किन विषयों में निपुण थे?
बिरजू महाराज नृत्य, गायन, वादन के साथ-साथ चित्रकला और मशीनों की मरम्मत में भी रुचि रखते थे।
परंपरा को बिरजू महाराज ने किसके रूप में समझाया है?
बिरजू महाराज ने परंपरा को एक वृक्ष के समान बताया है जो सभी को समान छाया और आश्रय देता है।
बिरजू महाराज के जीवन में कौन-सी घटना उनके लिए मोड़ साबित हुई? [1 mark]
बाबूजी की मृत्यु और उसके बाद का संघर्ष। एक ही वाक्य में बताओ।
गंडा बाँधने की परंपरा में बिरजू महाराज ने किस तरह परिवर्तन किया और क्यों? [2 marks]
पहले भेंट देने पर गंडा बाँधते थे, अब लगन देखकर गंडा बाँधते हैं। शिष्य के समपर्ण भाव को परखने के लिए यह परिवर्तन किया।
पाठ के अनुसार, कथक नृत्य की शुरुआत कहाँ से हुई और इसका विकास कैसे हुआ? किन्हीं दो घरानों का नाम लिखो। [3 marks]
हरिया गाँव (बनारस-इलाहाबाद के बीच) से शुरुआत। लखनऊ घराना, जयपुर घराना, बनारस घराना, रायगढ़ घराना — किन्हीं दो का नाम लिखो। बैरिगया नाला की कथा का जिक्र कर सकते हो।
बिरजू महाराज के अनुसार परंपरा क्या है और वह एक समाज में कैसी भूमिका निभाती है? अपने विचार से कोई उदाहरण भी दो। [5 marks]
परंपरा एक वृक्ष के समान है जो सभी को छाया और आश्रय देती है। नई शाखाएँ उगती हैं पर जड़ें पुरानी रहती हैं। उदाहरण: टैगोर, त्यागराज की रचनाएँ कथक में आ सकती हैं। यशोदा-कृष्ण की कथा सार्वभौमिक है, हर देश समझता है। अपना कोई भारतीय उदाहरण दो।
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