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**जन्म:** आजमगढ़, उत्तर प्रदेश
**प्रमुख रचनाएँ:**
**विशेषता:** हरिऔध जी बच्चों के लिए रोचक और शिक्षाप्रद कविताएँ लिखते थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध बाल कविता है — "उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।"
**साहित्य का योगदान:** हरिऔध जी आधुनिक हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण कवि हैं। उन्होंने खड़ी बोली को काव्य में सम्मानजनक स्थान दिलवाया।
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**विषय:** इस कविता में कवि ने **फूल** और **काँटे** का उदाहरण देकर मनुष्यों के अलग-अलग स्वभावों के बारे में बात की है। फूल और काँटा एक ही पौधे पर पाए जाते हैं, लेकिन उनके स्वभाव, कार्य और प्रभाव बिलकुल अलग हैं।
**कविता का मुख्य संदेश:**
फूल और काँटा **प्रतीक** हैं। यह कविता सिखाती है कि:
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**पंक्तियाँ:**
"हैं जनम लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।"
**अर्थ और व्याख्या:**
**शिक्षा:** यह दिखाता है कि सभी लोग समान परिवार, समान परिस्थितियों में पैदा होते हैं।
**पंक्तियाँ:**
"मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।"
**अर्थ और व्याख्या:**
**शिक्षा:** समान अवसर मिलने पर भी लोग अलग-अलग काम करते हैं।
**पंक्तियाँ:**
"छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर बसन।
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भौंर का है बेध देता श्याम तन।"
**अर्थ और व्याख्या:**
**शब्दों की व्याख्या:**
**शिक्षा:** काँटा हानिकारक और दर्दनाक होता है। यह दूसरों को पीड़ा पहुँचाता है।
**पंक्तियाँ:**
"फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली जी खिला।"
**अर्थ और व्याख्या:**
**शब्दों की व्याख्या:**
**शिक्षा:** फूल सुखद, प्रेमपूर्ण और सबको खुशियाँ देने वाला होता है।
**पंक्तियाँ:**
"है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।"
**अर्थ और व्याख्या:**
**शब्दों की व्याख्या:**
**मुख्य संदेश:** असली बड़प्पन **कुल (जन्म) से नहीं** बल्कि **गुणों, आचरण और कर्मों से** आता है।
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**पद्य शैली:** यह एक **आधुनिक हिंदी कविता** है।
**छंद/लय:** कविता में नियमित लय है। हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द **तुकांत** (मेल खाने वाले) है।
**उदाहरण:**
**1. उपमा अलंकार** (तुलना करना)
**2. प्रतीकवाद** (प्रतीक का प्रयोग)
**3. मानवीकरण अलंकार** (प्राकृतिक वस्तुओं को मानवीय गुण देना)
**4. विरोधाभास** (विरुद्ध बातों को साथ रखना)
**5. अनुप्रास अलंकार** (एक ही अक्षर की पुनरावृत्ति)
**1. संयुक्त शब्द:**
**2. विषम उच्चारण:**
कविता में "और" को "औ" लिखा गया है ताकि कविता की लय बेहतर रहे।
**3. रचनात्मक शब्द चयन:**
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**परिभाषा:** संज्ञा किसी व्यक्ति, वस्तु, जानवर, स्थान, गुण या भाव के नाम को कहते हैं।
**कविता में संज्ञाओं के उदाहरण:**
| संज्ञा | प्रकार | वाक्य में प्रयोग |
|-------|-------|-----------------|
| फूल | जातिवाचक संज्ञा | "फूल लेकर तितलियों को..." |
| काँटा | जातिवाचक संज्ञा | "छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ" |
| चाँद | व्यक्तिवाचक संज्ञा | "रात में उन पर चमकता चाँद भी" |
| तितली | जातिवाचक संज्ञा | "प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर" |
| भौंर | जातिवाचक संज्ञा | "भौंर को अपना अनूठा रस पिला" |
| सुगंध | भाववाचक संज्ञा | "निज सुगंधों औ निराले रंग से" |
| आँख | जातिवाचक संज्ञा | "है खटकता एक सब की आँख में" |
| कुल | जातिवाचक संज्ञा | "किस तरह कुल की बड़ाई काम दे" |
| बड़प्पन | भाववाचक संज्ञा | "जो किसी में हो बड़प्पन की कसर" |
**परिभाषा:** सर्वनाम संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किया जाता है।
**कविता में सर्वनामों के उदाहरण:**
| सर्वनाम | वाक्य में प्रयोग | अर्थ |
|-------|-----------------|-----|
| उन्हें | "एक ही पौधा उन्हें है पालता" | फूल और काँटे को |
| उन | "रात में उन पर चमकता चाँद" | फूल और काँटे पर |
| किसी | "छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ" | किसी मनुष्य की |
| कì | "का संक्षिप्त रूप — "सब की आँख में" | सभी की |
**परिभाषा:** विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, माप) बताता है।
**कविता में विशेषणों के उदाहरण:**
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य | अर्थ |
|-------|--------|--------|------|
| "एक ही जगह" | एक ही | जगह | समान स्थान |
| "प्यार-डूबी तितलियाँ" | प्यार-डूबी | तितलियाँ | प्रेम से परिपूर्ण |
| "श्याम तन" | श्याम | तन | काला शरीर |
| "अनूठा रस" | अनूठा | रस | विशेष, अद्वितीय |
| "निराले रंग" | निराले | रंग | अलग, विचित्र |
| "सुर शीश" | सुर | शीश | देवताओं के |
**विशेषण के प्रकार (कविता में):**
1. **गुणवाचक:** प्यार-डूबी, अनूठा, निराले, श्याम
2. **संख्यावाचक:** एक, एक ही
3. **परिमाणवाचक:** सी (समान)
**परिभाषा:** क्रिया किसी कार्य को व्यक्त करती है।
**कविता में क्रियाओं के उदाहरण:**
| क्रिया | पंक्ति में प्रयोग | काल | अर्थ |
|-------|-----------------|-----|------|
| जनम लेते | "हैं जनम लेते जगह में" | वर्तमान | पैदा होना |
| पालता | "एक ही पौधा उन्हें है पालता" | वर्तमान | पालन-पोषण करना |
| चमकता | "रात में उन पर चमकता चाँद" | वर्तमान | चमक डालना |
| डालता | "एक ही सी चाँदनी है डालता" | वर्तमान | देना, फैलाना |
| बरसता | "मेह उन पर है बरसता एक सा" | वर्तमान | बरसना, पड़ना |
| बही | "एक सी उन पर हवायें हैं बही" | भूतकाल | बहना |
| दिखाता | "यह दिखाता है हमें" | वर्तमान | दिखलाना |
| छेद कर | "छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ" | वर्तमान | छिद्र करना |
| फाड़ देता | "फाड़ देता है किसी का वर बसन" | वर्तमान | फाड़ना |
| कतर | "प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर" | वर्तमान | काट देना |
| बेध देता | "भौंर का है बेध देता श्याम तन" | वर्तमान | छिद्र करना |
| लेकर | "फूल लेकर तितलियों को गोद में" | वर्तमान | लेना |
| पिला | "भौंर को अपना अनूठा रस पिला" | वर्तमान | पिलाना |
| देता | "है सदा देता कली जी खिला" | वर्तमान | देना |
| खटकता | "है खटकता एक सब की आँख में" | वर्तमान | बुरा लगना |
| सोहता | "दूसरा है सोहता सुर शीश पर" | वर्तमान | सुशोभित होना |
| काम दे | "कुल की बड़ाई काम दे" | वर्तमान | लाभ देना |
**काल (Tense):** पूरी कविता में **वर्तमान काल** का प्रयोग है क्योंकि यह सार्वकालिक (हर समय सच) सत्य को व्यक्त करती है।
**परिभाषा:** वचन से पता चलता है कि संज्ञा या क्रिया एक हैं या बहुत।
**कविता में वचन के उदाहरण:**
| शब्द | वचन | वाक्य में प्रयोग |
|-----|------|-----------------|
| जगह | एकवचन | "एक ही जगह में" |
| पौधा | एकवचन | "एक ही पौधा उन्हें है पालता" |
| चाँद | एकवचन | "रात में उन पर चमकता चाँद" |
| हवायें | बहुवचन | "एक सी उन पर हवायें हैं बही" |
| उँगलियाँ | बहुवचन | "किसी की उँगलियाँ छेद कर" |
| तितलियों | बहुवचन | "प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर" |
| आँख | एकवचन/बहुवचन | "सब की आँख में" |
**परिभाषा:** लिंग से पता चलता है कि संज्ञा पुल्लिंग है, स्त्रीलिंग है या नपुंसक।
**कविता में लिंग के उदाहरण:**
| शब्द | लिंग | उदाहरण |
|-----|------|--------|
| फूल | पुल्लिंग | "फूल लेकर तितलियों को" |
| काँटा | पुल्लिंग | "छेद कर काँटा किसी की" |
| पौधा | पुल्लिंग | "एक ही पौधा उन्हें है पालता" |
| चाँद | पुल्लिंग | "चमकता चाँद भी" |
| हवायें | स्त्रीलिंग | "हवायें हैं बही" |
| तितली | स्त्रीलिंग | "प्यार-डूबी तितलियों का" |
| भौंर | पुल्लिंग | "भौंर को अपना रस पिला" |
| आँख | स्त्रीलिंग | "सब की आँख में" |
| कली | स्त्रीलिंग | "कली जी खिला" |
| कुल | पुल्लिंग | "कुल की बड़ाई" |
**परिभाषा:** काल से किसी क्रिया का समय पता चलता है कि वह भूतकाल, वर्तमान काल या भविष्य काल में घटित हुई है।
**इस कविता में काल:**
1. **वर्तमान काल:** पूरी कविता वर्तमान काल में है क्योंकि ये सार्वभौमिक सत्य हैं।
**उदाहरण:**
2. **भूतकाल का संकेत:**
**परिभाषा:** वाच्य से पता चलता है कि क्रिया कर्ता के साथ किस तरह का संबंध रखती है।
**कविता में वाच्य:**
| पंक्ति | वाच्य | कारण |
|-------|-------|------|
| "फूल लेकर तितलियों को गोद में" | कर्तृवाच्य | फूल (कर्ता) क्रिया करता है |
| "छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ" | कर्तृवाच्य | काँटा (कर्ता) क्रिया करता है |
| "है सदा देता कली जी खिला" | कर्तृवाच्य | फूल/कली (कर्ता) क्रिया करता है |
**सभी क्रियाएँ कर्तृवाच्य में हैं** क्योंकि फूल और काँटा स्वयं अपनी क्रियाएँ करते हैं।
**परिभाषा:** दो शब्दों के जुड़ने से उन के अंत और शुरुआत के वर्णों में परिवर्तन को संधि कहते हैं।
**कविता में संधि के उदाहरण:**
| संधि शब्द | मूल शब्द | संधि का नाम | व्याख्या |
|---------|---------|----------|---------|
| "औ" (और) | और | स्वर संधि | "र" को छोड़ा गया है |
| "प्यार-डूबी" | प्यार + डूबी | समास जैसा | दो शब्दों का संयोजन |
**परिभाषा:** दो या दो से अधिक शब्दों को आपस में मिलाकर एक नया शब्द बनाना समास कहलाता है।
**कविता में समास के उदाहरण:**
| समास शब्द | विग्रह (खोलना) | समास का प्रकार | अर्थ |
|----------|-------------|----------|------|
| "प्यार-डूबी" | प्यार से डूबी | कर्मधारय समास | प्रेम से परिपूर्ण |
| "तितलियों का पर" | तितलियों के पंख | संबंध तत्पुरुष | संबंधसूचक |
| "सुर शीश" | देवताओं का शीश | तत्पुरुष समास | देवताओं के सिर |
| "श्याम तन" | काला शरीर | कर्मधारय समास | विशेषणात्मक |
| "निराले रंग" | नए/अलग रंग | विशे
Q1. किवता में फूल और काँटा किस प्रकार की चीजें हैं?
Answer: B — किवता में फूल अच्छाई, प्रेम और सुख का प्रतीक है, जबकि काँटा कठोरता और बुराई का प्रतीक है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी बात किवता में सत्य नहीं है?
Answer: C — किवता में कहा गया है कि काँटा हानिकारक है, वह फूल को आकर्षित नहीं करता।
Q3. किवता में 'मेह' शब्द का अर्थ क्या है?
Answer: A — 'मेह' वर्षा या मेघ को कहते हैं, जो पौधों पर बरसता है।
Q4. 'है खटकता एक सब की आँख में' — इस पंक्ति में 'एक' किसे संकेत करता है?
Answer: B — यह पंक्ति काँटे के बारे में कही गई है कि वह सबको खटकता (बुरा लगता) है।
Q5. यदि एक व्यक्ति उच्च कुल में जन्मा है किंतु उसके गुण बुरे हैं, तो किवता के अनुसार उसका बड़प्पन कैसा होगा?
Answer: B — किवता में कहा गया है कि 'किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।' यानी कुल अकेला काफी नहीं है।
Q6. भारतीय संदर्भ में, किवता का संदेश किस प्राचीन सिद्धांत से मेल खाता है?
Answer: C — भारतीय दर्शन में कहा गया है कि अच्छे-बुरे कर्मों का फल मिलता है, जन्म नहीं।
Q7. 'प्यार-डूबी तितलियों' में व्यंजक शब्द संरचना क्या है?
Answer: A — 'प्यार-डूबी' एक मिश्र विशेषण है जो 'तितलियों' (संज्ञा) की विशेषता बताता है।
Q8. किवता में काँटे के कौन-कौन से नुकसानदेह कार्य बताए गए हैं?
Answer: C — किवता में तीनों काम बताए गए हैं: उँगलियाँ छेदना, वस्त्र फाड़ना और भौंर के शरीर में बेध लगाना।
Q9. फूल के कौन-कौन से गुण किवता में प्रशंसित हैं?
Answer: B — किवता में फूल अपनी सुगंध, निराले रंग और तितलियों-भौंरों को रस देकर परोपकार करता है।
Q10. यदि आप किवता का संदेश आधुनिक भारतीय समाज में लागू करें तो सबसे महत्वपूर्ण बात क्या होगी?
Answer: C — किवता का मुख्य संदेश है कि कुल, धन या जन्म नहीं, बल्कि व्यक्ति के कर्म और गुण ही सच्चा बड़प्पन लाते हैं।
फूल और काँटा कहाँ से जन्म लेते हैं?
एक ही जगह, एक ही पौधे से।
किवता में फूल किन प्राणियों को आकर्षित करता है?
तितलियों और भौंरों को, अपनी सुगंध और रस से।
काँटा किसे नुकसान पहुँचाता है?
उँगलियों को छेदता है और कपड़ों को फाड़ता है।
किवता के अनुसार बड़प्पन किसमें होता है?
व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों में।
'श्याम तन' में विशेषण कौन-सा है?
श्याम विशेषण है, जो तन की विशेषता बताता है।
किवता में 'औ' शब्द का अर्थ क्या है?
'और' का संक्षिप्त रूप है, किवता की लय बनाए रखने के लिए।
फूल सदा किससे देता कली को खिला?
अपनी सुगंध और निराले रंग से।
किवता में कौन-सी प्राकृतिक चीजें समान रूप से बरसती हैं?
चाँद की चाँदनी, हवा और मेह सभी समान रूप से।
'तुकांत' का अर्थ क्या है?
जब दो शब्दों की अंतिम ध्वनि मिलती-जुलती हो।
किवता का मुख्य संदेश क्या है?
एक ही कुल में जन्मे लोगों का स्वभाव अलग-अलग होता है और बड़प्पन गुणों से आता है।
किवता का शीर्षक 'फूल और काँटा' क्यों रखा गया है? [1 mark]
ये प्रतीक हैं किसके लिए? किवता में असली विषय क्या है?
किवता में यह बताया गया है कि फूल और काँटे की परिस्थितियाँ समान हैं फिर भी उनका स्वभाव अलग-अलग होता है। इसे समझाइए। [2 marks]
एक ही जमीन, चाँद, हवा, मेह — फिर क्यों अलग ढंग? यह मानवीय स्वभाव की क्या सीख देता है?
किवता की निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ समझाइए: 'किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।' [3 marks]
कुल का अर्थ? बड़प्पन का अर्थ? कसर का मतलब? उदाहरण से समझाइए।
किवता 'फूल और काँटा' का यह संदेश आपके जीवन में कैसे लागू हो सकता है? इसे विस्तार से लिखिए कि आप अपने आचरण में फूल के गुण कैसे अपना सकते हैं और काँटे जैसी बुराइयों से कैसे बच सकते हैं। [5 marks]
फूल के गुण — सुगंध, सुख, प्रेम, परोपकार। काँटे के दुर्गुण — कठोरता, पीड़ा देना। अपने दैनिक जीवन में कम से तीन उदाहरण दीजिए।
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