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Nahi Hona Bimaar

NCERT Class 7 · Hindi Based on NCERT Class 7 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

नहीं होना बीमार - संपूर्ण अध्ययन सामग्री (NCERT Malhaar, Class 7)

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पाठ परिचय

यह पाठ लेखक **स्वयं प्रकाश** द्वारा रचित एक रोचक और शिक्षाप्रद कहानी है। इसमें एक बालक की कहानी बताई गई है जो स्कूल से बचने के लिए बीमार पड़ने का बहाना बनाता है, लेकिन इस बहाने के कारण उसे असली बीमारी का अनुभव होता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि झूठ और बहाने के पीछे की कीमत क्या होती है।

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पाठ बोध (Gadya Pariprekshya - गद्य का संदर्भ और अर्थ)

मुख्य कहानी का सार

**पहली घटना - अस्पताल का दृश्य:**

बालक पहली बार अपनी नानीजी के साथ अस्पताल जाता है। वहाँ पड़ोसी सुधाकर काका को देखने जाता है जो बीमार हैं। अस्पताल का साफ-सुथरा, शांत और हरियाली से भरा वातावरण बालक को बहुत अच्छा लगता है। उसे देखकर सुधाकर काका खुश हो जाते हैं। नानीजी उन्हें साबूदाने की खीर खिलाती हैं। इस दृश्य को देखकर बालक सोचता है - "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" अर्थात् बीमार लोगों को कितनी अच्छी सुविधाएँ मिलती हैं।

**दूसरी घटना - झूठ का बहाना:**

कुछ दिन बाद बालक के स्कूल न जाने का मन नहीं करता क्योंकि उसने होमवर्क नहीं किया। उसे स्कूल से सजा मिलने का डर है। तब उसे एक विचार आता है - क्यों न वह बीमार हो जाए? इस तरह उसे स्कूल नहीं जाना पड़ेगा और साथ ही खूब आराम और अच्छा खाना भी मिलेगा।

बालक रजाई में ही पड़ा रहता है और नानाजी को कहता है कि उसे सिरदर्द, पेट दर्द और बुखार है। नानाजी उसके माथे को छूते हैं, पेट देखते हैं और नब्ज लेते हैं। बालक थर्मामीटर लगवाने के लिए कहता है, लेकिन घर में थर्मामीटर नहीं मिलता।

**तीसरी घटना - बहाने का नकारात्मक परिणाम:**

नानाजी बालक को कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय दे देते हैं। वे कहते हैं कि उसे पूरे दिन कुछ न खिलाया जाए ताकि उसके विकार (बीमारी के कारण) निकल जाएँ। बालक को पूरा दिन भूखा रहना पड़ता है।

घर में सब लोग अपने काम पर चले जाते हैं। बालक अकेला रह जाता है। वह घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता है - छोटे मामा का नहा-धोकर निकलना, कुसुम मौसी का कॉलेज जाना, मुन्नू का जूता ढूँढ़ना। धीरे-धीरे बालक को भूख लगने लगती है।

**चौथी घटना - खाने की लालसा:**

दोपहर को मुन्नू स्कूल से लौटता है। बालक को खाने की बहुत तीव्र इच्छा होती है। वह सोचता है कि अगर वह स्कूल गया होता तो रिसेस में अमरूद खा सकता था। लेकिन घर में सब कुछ धीमी आवाज से हो रहा है। फिर बालक को खाने की खुशबू आती है - दाल-चावल, हरी मिर्च का तड़का, नीबू आदि। उसके मन में लालसा जागती है।

बालक दबे पाँव दरवाजे तक जाता है और रसोई में झाँकता है। वह देखता है कि मुन्नू आम चूस रहा है (जो बंबई से आए थे)। इस दृश्य को देखकर बालक को ईष्या और गुस्सा आता है। वह रजाई में लौट जाता है।

**पाँचवीं घटना - सीख और निर्णय:**

पूरे दिन भूखे रहने के बाद बालक को समझ आ जाता है कि बीमारी एक अच्छी चीज नहीं है। वास्तविक बीमारी में न तो आराम होता है, न अच्छा खाना, और न ही कोई मजा। उसे एहसास होता है कि स्कूल जाना कितना अच्छा था।

कहानी के अंत में बालक यह निर्णय लेता है कि वह भविष्य में कभी भी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा। इस घटना से उसे एक महत्वपूर्ण जीवन पाठ मिल जाता है।

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मुख्य पात्र और उनका परिचय

**बालक (कहानी का वर्णनकर्ता)**

यह कहानी का मुख्य पात्र है। वह:

  • स्कूल में पढ़ता है
  • बुद्धिमान और चतुर है
  • अपने घर के साथ रहता है
  • स्कूल जाने से बचना चाहता है
  • खाने-पीने का शौकीन है
  • धीरे-धीरे बहाने की गलती को समझ जाता है
  • **नानाजी और नानीजी**

    ये बालक के दादा-दादी हैं:

  • बहुत प्रेमपूर्ण हैं
  • बालक की देखभाल में पूरी तरह लगे हुए हैं
  • पारंपरिक तरीकों में विश्वास करते हैं (उपवास से विकार निकलना)
  • अनुशासन प्रिय हैं
  • बालक के भले के लिए कड़े निर्णय भी ले सकते हैं
  • **नानीजी विशेषताएँ:**

  • पड़ोसियों के यहाँ जाती हैं (सुधाकर काका को देखने)
  • साबूदाने की खीर बनाती हैं
  • बालक को पाल-पोसकर बड़ा करती हैं
  • **सुधाकर काका**

  • पड़ोसी हैं
  • अस्पताल में भर्ती हैं
  • नानीजी के आने से खुश हो जाते हैं
  • इस पाठ के माध्यम से दिखाया जाता है कि असली बीमारी कैसी होती है
  • **छोटे मामा, कुसुम मौसी, मुन्नू**

  • घर के अन्य सदस्य हैं
  • अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं
  • बालक को अकेलेपन का अनुभव करवाते हैं
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    पाठ की प्रमुख घटनाएँ और क्रमबद्धता

    | घटना | विवरण |

    |------|--------|

    | **अस्पताल दर्शन** | नानीजी के साथ बालक अस्पताल जाता है, सुधाकर काका को देखता है |

    | **बीमारी की कल्पना** | बालक को बीमार होने का विचार आता है, स्कूल जाने से बचने का षड्यंत्र |

    | **बहाना** | बालक नानाजी को बताता है कि उसे सिरदर्द, पेट दर्द और बुखार है |

    | **दवाई और प्रतिबंध** | नानाजी दवाई देते हैं, उसे कुछ खाने को मना कर देते हैं |

    | **अकेलापन और भूख** | बालक घर में अकेला रह जाता है, भूख से तड़पता है |

    | **खाने की इच्छा** | खाने की खुशबू और मुन्नू को आम चूसते देखना |

    | **सबक और सीख** | बालक को समझ आता है कि झूठ बुरा है, स्कूल अच्छा है |

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    पाठ की मुख्य थीम्स (विषय-वस्तु)

    **1. झूठ बोलने के परिणाम**

    बालक का झूठ उसे भारी पड़ता है। वह सोचता है कि बीमार होना मजेदार होगा, लेकिन असली स्थिति अलग निकलती है। यह पाठ सिखाता है कि झूठ के फायदे की बजाय नुकसान ही होता है।

    **2. कल्पना और वास्तविकता में अंतर**

    बालक सोचता है कि बीमार लोगों को कितना मजा आता है - साफ बिस्तर, साबूदाने की खीर, पूरा दिन आराम। लेकिन वास्तविकता में वह भूखा, अकेला और दुःखी रहता है।

    **3. माता-पिता/अभिभावकों की समझदारी**

    नानाजी-नानीजी बालक की बीमारी को समझते हैं, लेकिन वे पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का पालन करते हैं। उन्हें शायद संदेह है, पर वे बालक को सबक सीखने देते हैं।

    **4. बचपन की निरर्थकता**

    बालक के हल्के-फुल्के विचार (खीर खाना, स्कूल न जाना) दिखाते हैं कि बचपन में कभी-कभी हम गलत निर्णय लेते हैं।

    **5. स्कूल और शिक्षा का महत्व**

    कहानी के अंत में बालक को समझ आता है कि स्कूल जाना कितना अच्छा है - वहाँ मित्र हैं, खेल है, खाना है, और जीवन की गति है।

    **6. अकेलापन**

    घर में अकेले रहने का दर्द कहानी में स्पष्ट दिखाया गया है। बालक को अपने परिवार, अपने मित्रों की कमी खलती है।

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    शब्दार्थ और महत्वपूर्ण शब्द

    **सामान्य शब्द**

    | शब्द | अर्थ | वाक्य में प्रयोग |

    |------|------|-------------------|

    | **वाडर्** | अस्पताल का एक बड़ा कमरा जहाँ कई रोगी एक साथ रहते हैं | अस्पताल के वाडर् में कई पलंग लगे थे |

    | **नसर्** | रोगियों की देखभाल करने वाली महिला | नसर् ने नानीजी को अभिवादन किया |

    | **साबूदाना** | एक मोतियों जैसा खाद्य पदार्थ जो पानी में डालकर पकाया जाता है | नानीजी साबूदाने की खीर बनाकर लाईं |

    | **रजाई** | जाड़े में सोते समय ओढ़ने का गर्म बिस्तर | मैं रजाई से निकला ही नहीं |

    | **थर्मामीटर** | बुखार नापने का यंत्र | थर्मामीटर लगाकर देखिए |

    | **काढ़ा** | जड़ी-बूटियों को उबालकर बना पेय | नानाजी ने काढ़े जैसी चाय दी |

    | **कड़वी पुड़िया** | औषधि के रूप में दी जाने वाली कड़वी गोली | बालक को कड़वी पुड़िया खानी पड़ी |

    | **विकार** | बीमारी या दोष | इससे सारे विकार निकल जाएँगे |

    | **ड्राइक्लीनर** | नाजुक कपड़े साफ करने वाला | चंदूभाई ड्राइक्लीनर क्या कर रहे हैं |

    | **अरहर की दाल** | एक प्रकार की दाल | अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार |

    **संवेदनशील/भावात्मक शब्द**

    | शब्द | अर्थ |

    |------|------|

    | **चहल-पहल** | हलचल, आवाजाही, जीवंतता |

    | **गुनगुन** | धीमी-धीमी आवाजें |

    | **झपकी** | नींद का छोटा-सा झलक |

    | **कराहते हुए** | दर्द से आवाज निकालते हुए |

    | **गुस्से और कुढ़न में** | नाराजगी और असंतोष के साथ |

    | **रुआँसा हो गया** | रोने जैसी स्थिति में आ गया |

    | **ईष्या** | किसी के पास कुछ होने से असंतोष, जलन |

    | **बोरियत** | नीरसता, ऊब |

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    व्याकरण (Vyakaran)

    **1. संज्ञा (Sangya)**

    संज्ञा वे शब्द हैं जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या गुण का नाम बताते हैं।

    **इस पाठ में संज्ञाएँ:**

    **व्यक्तिवाचक संज्ञा (किसी विशेष व्यक्ति का नाम):**

  • नानाजी, नानीजी
  • सुधाकर काका
  • चंदूभाई, तेजराम, महेश
  • नानीजी, मुन्नू
  • **जातिवाचक संज्ञा (एक जाति के सभी सदस्यों के लिए):**

  • बालक, बच्चा
  • नसर्, डॉक्टर
  • पड़ोसी
  • मामा, मौसी, चाचा
  • दोस्त
  • **द्रव्यवाचक संज्ञा (वे पदार्थ जिन्हें गिना नहीं जा सकता):**

  • खीर, दाल, दूध, घी
  • चाय, काढ़ा
  • धूल, कीचड़
  • रुई
  • **भाववाचक संज्ञा (किसी भाव या गुण को व्यक्त करता है):**

  • खुशी, दुःख, ईष्या
  • अकेलापन, भूख
  • शांति, शोरगुल
  • **उदाहरण:**

    "अस्पताल का वाडर् साफ-सुथरा था।" - यहाँ 'अस्पताल' और 'वाडर्' व्यक्तिवाचक हैं।

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    **2. सर्वनाम (Sarvanam)**

    सर्वनाम वे शब्द हैं जो संज्ञा के स्थान पर आते हैं।

    **प्रमुख सर्वनाम इस पाठ में:**

    | सर्वनाम | अर्थ | वाक्य |

    |---------|------|-------|

    | **मैं** | वक्ता (बालक) | मैं रजाई से निकला ही नहीं |

    | **मुझे** | बालक के लिए | मुझे साथ लेकर नानीजी गईं |

    | **वह/वे** | दूसरा व्यक्ति | वे अस्पताल में भर्ती थे |

    | **उन्हें** | किसी के लिए | उन्हें देखकर काका खुश हो गए |

    | **यह** | निकट वस्तु/व्यक्ति | यह मेरा पहला अवसर था |

    | **वो** | दूर वस्तु/व्यक्ति | वो खाना खा रहे हैं |

    | **जो** | संबंध सर्वनाम | जो चीजें उपवास में बनती हैं |

    | **जिन्हें** | संबंध सर्वनाम | जिन्हें पढ़कर मुस्कान आई |

    | **अपना/अपनी** | स्वामित्व | अपनी गली की चहल-पहल देखना |

    **विशेष:**

  • "मैं बीमार हूँ" - यहाँ 'मैं' व्यक्तिवाचक सर्वनाम है
  • "उसके लिए" - यहाँ 'उसके' स्वामित्व सर्वनाम है
  • ---

    **3. विशेषण (Visheshan)**

    विशेषण वे शब्द हैं जो संज्ञा की विशेषता बताते हैं।

    **इस पाठ के महत्वपूर्ण विशेषण:**

    **गुणवाचक विशेषण (किसी की गुणवत्ता):**

  • **साफ** - साफ दीवारें
  • **ऊँची** - ऊँची छत
  • **हरे** - हरे परदे, हरे-हरे पेड़
  • **चमकता हुआ** - फर्श एकदम चमकता हुआ
  • **धीमी-धीमी** - धीमी-धीमी गुनगुन
  • **शांत** - एकदम शांति
  • **सफेद** - सफेद कपड़े, सफेद चादर
  • **लाल** - लाल कंबल
  • **कड़वी** - कड़वी पुड़िया
  • **तेज़** - तेज़ इच्छा
  • **अकेला** - अकेले रह गया
  • **परिमाणवाचक विशेषण (संख्या/परिमाण):**

  • **कई** - कई एक जैसे पलंग
  • **बहुत** - बहुत अच्छा लग रहा था
  • **कुछ** - कुछ देर बाद
  • **पूरा** - पूरा दिन
  • **उदाहरण से समझिए:**

    "बड़े-बड़े पलंग" - यहाँ 'बड़े-बड़े' विशेषण है जो पलंग की विशेषता बताता है।

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    **4. क्रिया (Kriya)**

    क्रिया वे शब्द हैं जो किसी कार्य या काम को प्रदर्शित करते हैं।

    **इस पाठ में मुख्य क्रिया:**

    | क्रिया | अर्थ | वाक्य |

    |--------|------|-------|

    | **लेना** | साथ में लाना | साथ लेकर नानीजी गईं |

    | **देखना** | नजर डालना | सुधाकर काका को देखने गईं |

    | **लेटना** | बिस्तर पर आना | पलंग पर लेटे हुए थे |

    | **फेरना** | धीरे-धीरे हाथ चलाना | नानीजी ने सिर पर हाथ फेरा |

    | **पूछना** | जानना चाहना | हालचाल पूछने लगीं |

    | **आना** | पहुँचना | नसर् आई |

    | **हिलाना** | गति देना | नसर् ने सिर हिलाया |

    | **खिलाना** | खाना देना | काका को दवा खिलाई |

    | **निकलना** | बाहर आना | रजाई से निकला ही नहीं |

    | **उठाना** | ऊपर लाना | नानीजी उठाने आईं |

    | **कहना** | बोलना | मैंने कहा |

    | **दुखना** | पीड़ा होना | पेट दुख रहा है |

    | **होना** | अस्तित्व | मुझे बुखार है |

    | **लगना** | आना, शुरू होना | भूख लगी |

    | **देखना** | नजर रखना | देखा जाए |

    | **सोचना** | विचार करना | मैंने सोचा |

    | **पड़ना** | लेटा रहना | बीमार पड़ जाते हैं |

    | **जाना** | किसी स्थान को लाना | घर चले गए |

    **काल के अनुसार क्रियाएँ:**

    **वर्तमान काल (Present Tense):**

  • "पलंग पर सुधाकर काका लेटे हैं"
  • **भूत काल (Past Tense):**

  • "नानीजी ने हाथ फेरा"
  • "नसर् आई"
  • **भविष्य काल (Future Tense):**

  • "शाम को देखेंगे"
  • ---

    **5. काल (Tense)**

    काल से हमें पता चलता है कि कोई काम कब हुआ - भूत में, वर्तमान में या भविष्य में।

    **इस पाठ में काल का प्रयोग:**

    **भूत काल (Past Tense):**

    **सामान्य भूत (Simple Past):**

  • "नानीजी हमारे पड़ोसी सुधाकर काका को देखने गईं"
  • "अस्पताल जाने का यह मेरा पहला अवसर था"
  • **आसन्न भूत (Perfect Past):**

  • "नानीजी ने हाथ फेरा है"
  • "नसर् खीर खिला चुकी है"
  • **वर्तमान काल (Present Tense):**

    **सामान्य वर्तमान:**

  • "सुधाकर काका लेटे हैं"
  • "नसर् आती है"
  • **निरंतर वर्तमान:**

  • "हरे-हरे पेड़ झूम रहे हैं"
  • "लोग धीरे-धीरे बातचीत कर रहे हैं"
  • **भविष्य काल (Future Tense):**

    **सामान्य भविष्य:**

  • "शाम को देखेंगे"
  • "कब बीमार पड़ूँगा?"
  • ---

    **6. वाच्य (Vachya)**

    वाच्य से यह पता चलता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसे प्रधानता दी गई है।

    **कर्तृवाच्य (Active Voice) - कर्ता को प्रधानता:**

  • "नानीजी ने काका को खीर खिलाई" (यहाँ नानीजी = कर्ता)
  • "मैं बीमार हूँ" (मैं = कर्ता)
  • **कर्मवाच्य (Passive Voice) - कर्म को प्रधानता:**

  • "नानीजी द्वारा काका को खीर खिलाई गई"
  • "अस्पताल जाया गया"
  • **भाववाच्य (Impersonal Voice) - भाव को प्रधानता:**

  • "मेरे लिए बीमारी अच्छी नहीं थी"
  • "बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर नहीं मिला"
  • ---

    **7. संधि (Sandhi)**

    संधि दो शब्दों या ध्वनियों के मिलने से बनने वाली प्रक्रिया है।

    **इस पाठ में संधि के उदाहरण:**

    **स्वर संधि:**

    | संधि | घटक | नियम |

    |------|------|------|

    | **इसलिए** | इस + लिए | इकार + ल = ई (ईकार संधि) |

    | **एकदम** | एक + दम | एकार + द = ए (एकार संधि) |

    | **अकेला** | अक + एला | कार + ए = े (ए संधि) |

    | **चहल-पहल** | चहल + पहल | ल + प = ल् + प (व्यंजन संधि) |

    | **रोशनी** | रो + शनी | ओ + श = ो (ओकार संधि) |

    **व्यंजन संधि:**

    | संधि | घटक | विवरण |

    |------|------|--------|

    | **अतःक्रिया** | अतः + क्रिया | विसर्ग संधि |

    | **तत्पश्चात्** | तत् + पश्चात् | विसर्ग + प = प् |

    | **संवाद** | सम् + वाद | नुम् + व = न्व |

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    **8. समास (Compound Words)**

    समास दो या अधिक शब्दों के मिलने से बनने वाली प्रक्रिया है।

    **इस पाठ के महत्वपूर्ण समास:**

    | समास | प्रकार | विग्रह | विवरण |

    |--------|--------|--------|---------|

    | **गली-चहल** | द्वंद्व समास | गली और चहल-पहल | दो समान पदों का योग |

    | **हरे-हरे पेड़** | द्वंद्व समास | हरे और हरे पेड़ | विशेषण की पुनरावृत्ति |

    | **बड़े-बड़े खिड़कियाँ** | द्वंद्व समास | बड़

    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. बच्चे ने अपने आप को बीमार कहने का मुख्य कारण क्या था?

    • A. वह सच में बुखार से पीड़ित था।
    • B. स्कूल न जाने के लिए और सजा से बचने के लिए। ✓
    • C. अस्पताल में जाकर सुधाकर काका को देखने के लिए।
    • D. नानाजी से दवाई लेने के लिए।

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था और स्कूल जाने पर सजा मिलने वाली थी, इसलिए बीमार होने का बहाना बनाया।

    Q2. सुधाकर काका को देखकर बच्चे के मन में क्या विचार आया?

    • A. बीमार लोगों को बहुत कष्ट होता है।
    • B. बीमार होना बहुत बुरा है और उन्हें दवाई लेनी पड़ती है।
    • C. बीमार लोग आराम से ठाठ के साथ साबूदाने की खीर खाते हैं। ✓
    • D. अस्पताल बहुत डरावना स्थान है।

    Answer: C — कहानी में बच्चे ने सोचा, 'क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!' क्योंकि वह सुधाकर काका को साबूदाने की खीर खाते हुए देख रहा था।

    Q3. नानाजी ने बच्चे को खाना क्यों नहीं दिया?

    • A. घर में खाना बचा नहीं था।
    • B. बीमार व्यक्ति को भूखा रखने से सारे विकार निकल जाते हैं। ✓
    • C. नानाजी को बच्चे से गुस्सा था।
    • D. वह बच्चे को सजा देना चाहते थे।

    Answer: B — पाठ में नानाजी कहते हैं, 'तबियत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे।'

    Q4. कहानी में 'अनुमान लगाता रहा' का क्या अर्थ है?

    • A. बच्चा सो गया।
    • B. बच्चा घर की घटनाओं का अंदाजा लगाकर सोच रहा था। ✓
    • C. बच्चा घर की सभी चीजों को देख रहा था।
    • D. बच्चा रो रहा था।

    Answer: B — जब बच्चा बिस्तर पर पड़ा था तो वह घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा — छोटे मामा का नहाना, कुसुम मौसी का कॉलेज जाना आदि।

    Q5. कहानी के किस भाग से पता चलता है कि बच्चा खुद अपनी गलती समझ गया?

    • A. जब नानाजी ने उसे दवाई दी।
    • B. जब वह भूख से तड़पा और मुन्नू को खाना खाते देखा। ✓
    • C. जब नानीजी उसे देखने आईं।
    • D. जब वह स्कूल जाने के लिए तैयार हो गया।

    Answer: B — भूख, अकेलापन, स्कूल की याद और मुन्नू को आम चूसते देखने से बच्चे को अहसास हुआ कि झूठ बोलना सही नहीं था।

    Q6. अगर आप बच्चे के स्थान पर होते और अस्पताल में साफ-सफाई देखते तो आपको कौन सी जगह सबसे अच्छी लगती?

    • A. डॉक्टर का कक्ष।
    • B. दवाइयों की दुकान।
    • C. साफ-सुथरा वार्ड, हरे पेड़ और शांति। ✓
    • D. नर्स का स्टेशन।

    Answer: C — कहानी में बच्चे को अस्पताल में शांति, साफ-सफाई, बड़ी खिड़कियाँ और हरे-हरे पेड़ सबसे अच्छे लगे।

    Q7. भारतीय परिवारों में नानाजी और नानीजी जैसे बड़े सदस्य बच्चों को कड़ी दवाई और भूखा रखने का क्या मतलब है?

    • A. वे बच्चों से प्यार नहीं करते।
    • B. वे क्रूर और निर्दयी होते हैं।
    • C. वह परंपरागत चिकित्सा पद्धति है जो प्रेम से भरी होती है। ✓
    • D. यह बच्चों को सजा देने का तरीका है।

    Answer: C — भारतीय परिवारों में बड़े-बुजुर्ग बच्चों की सेहत के लिए कड़ी दवाई और भूखा रखना प्रेम और देखभाल का ही रूप है।

    Q8. जब बच्चा अकेला घर में पड़ा था तो खाने की खुशबू आने पर उसका मन क्या करने लगा?

    • A. वह शांत रहा।
    • B. वह रजाई फेंककर खड़ा हो गया और झाँककर देखा। ✓
    • C. वह सो गया।
    • D. वह नानीजी को पुकारने लगा।

    Answer: B — पाठ में लिखा है कि जब रहा नहीं गया तो बच्चा रजाई फेंककर खड़ा हो गया और दबे पाँव दरवाजे तक गया।

    Q9. कहानी में 'विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ' — इस कथन से बच्चे का क्या भाव व्यक्त होता है?

    • A. वह नानाजी से सहमत है।
    • B. वह भूख से व्यथित है और नानाजी की सख्ती पर क्रोध कर रहा है। ✓
    • C. वह खुश है कि उसे भूखा रखा जा रहा है।
    • D. वह सो रहा है।

    Answer: B — यह कथन बच्चे के आंतरिक गुस्से और दर्द को दर्शाता है। वह नानाजी की सख्ती से परेशान है।

    Q10. कहानी का निष्कर्ष यह है कि स्कूल जाना स्वर्ग के समान है और घर में बीमार होना नरक। इस कथन के बारे में आप क्या सोचते हैं?

    • A. यह पूरी तरह सही है।
    • B. यह गलत है क्योंकि स्कूल में हमेशा खुशी ही रहती है।
    • C. बच्चे को वास्तविकता का अनुभव हुआ कि झूठ से मिला दर्द और भूख सच्चाई से बेहतर है। ✓
    • D. कहानी का कोई निष्कर्ष नहीं है।

    Answer: C — कहानी सिखाती है कि झूठ बोलने की चाहत स्वाभाविक हो सकती है, लेकिन उसके परिणाम गंभीर होते हैं — अकेलापन, भूख और पश्चाताप।

    Flashcards

    बच्चे ने बीमार पड़ने का बहाना क्यों बनाया?

    क्योंकि उसे स्कूल नहीं जाना था, होमवर्क नहीं किया था और सजा मिलने वाली थी।

    साबूदाने की खीर बच्चे को कहाँ से दिखाई दी?

    सुधाकर काका के अस्पताल के बिस्तर पर जब नानीजी ने उन्हें यह खीर खिलाई।

    'ठाठ' शब्द का अर्थ इस कहानी में क्या है?

    आराम, शानदारी और सुविधाओं की बहुतायत को दर्शाता है।

    नानाजी ने बच्चे को क्या दवा दी?

    कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय दी और खाना खाने से मना कर दिया।

    कहानी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है?

    झूठ बोलने से अस्थायी सुख नहीं मिलता बल्कि पीड़ा और अफसोस ही मिलता है।

    बच्चा घर में अकेले रहकर क्या सोच रहा था?

    वह घर की सभी गतिविधियों का अनुमान लगा रहा था और बाहर खेलने की इच्छा कर रहा था।

    अस्पताल में बच्चे को सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा?

    शांति, साफ-सफाई, हरे पेड़, कोई शोरगुल नहीं और ट्रैफिक की आवाज नहीं लगना।

    बच्चे को अपनी गलती का एहसास कब हुआ?

    जब वह भूख से तड़पा, घर में अकेला रहा और मुन्नू को आम चूसते देखा।

    'विकार' शब्द का अर्थ इस पाठ में क्या है?

    शरीर में मौजूद रोग या बीमारी के कारण पैदा होने वाली गंदगी।

    कहानी के अंत में बच्चे का क्या फैसला रहा?

    उसने कभी भी स्कूल से छुट्टी मारने के लिए बीमारी का बहाना नहीं बनाया।

    Important Board Questions

    बच्चे ने अपने आप को बीमार कहना क्यों जरूरी समझा? [1 mark]

    दो कारण लिखो — होमवर्क और सजा से संबंधित।

    अस्पताल में सुधाकर काका को देखकर बच्चे के मन में क्या सोच आई? इस सोच को अपने शब्दों में लिखो। [2 marks]

    साबूदाने की खीर, आराम, साफ-सफाई — ये तीनों बातें लिखो। इसका क्या नतीजा हुआ, यह भी बता।

    बच्चा घर में अकेला पड़ा था तो उसके मन में किन-किन भाव आ रहे थे? कम से कम तीन भाव लिखो और समझाओ। [3 marks]

    भाव = क्रोध, ईष्या, खुशी, अकेलापन, भूख, पश्चाताप। कम से कम तीन भाव और उदाहरण दो।

    इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है? समझाइए कि झूठ बोलना और बीमार होने का नाटक करना क्यों गलत है। कहानी के आधार पर विस्तार से बताइए। [5 marks]

    बिंदु — झूठ से तुरंत खुशी नहीं, लंबे समय की पीड़ा आती है। भूख असली सजा है। अकेलापन और अफसोस। कहानी के अंत में बच्चे का फैसला। भारतीय परिवारों में बड़ों की सख्ती का प्रेम। कम से कम ये पाँचों बातें अपने शब्दों में लिखो।

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