**गिरिधर कविराय** अठारहवीं सदी के प्रसिद्ध कवि थे। वे अपनी **कुंडलियों** के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। कुंडली एक विशेष प्रकार की काव्य रचना है जिसमें जीवन की सीखें और नीति-बातें सरल भाषा में कही जाती हैं। गिरिधर कविराय की कविताएँ कहावतों की तरह उपयोग होती हैं। उदाहरण के लिए, "बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय" - यह कहावत आज भी लोग कहते हैं।
इस पाठ में हमें **दो कुंडलियाँ** दी गई हैं जो जीवन में सोच-समझकर काम करने की शिक्षा देती हैं।
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**पहली पंक्ति समूह:**
**बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।**
**काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥**
**अर्थ:** जो व्यक्ति बिना सोच-विचार के कोई काम करता है, उसे बाद में पछतावा होता है। वह अपना काम बर्बाद कर देता है और दुनिया में उसके बारे में लोग हँसते हैं।
**व्याख्या:**
**उदाहरण:** अगर कोई विद्यार्थी बिना सोचे-समझे कक्षा में किसी दूसरे विद्यार्थी को चोट पहुँचा दे, तो उसे शिक्षक की डाँट, माता-पिता की प्रताड़ना और साथियों के मजाक का सामना करना पड़ता है।
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**दूसरी पंक्ति समूह:**
**जग में होत हँसाय िच° में चैन न पावै।**
**खान पान सन्मान राग रंग मनिहं न भावै॥**
**अर्थ:** जब कोई बिना सोचे काम करता है, तो भले ही उसके पास अच्छा खाना-पीना, सम्मान और जीवन की सारी खुशियाँ हों, फिर भी उसका मन शांत नहीं रह पाता। उसे हमेशा एक खटके की अनुभूति होती है।
**मुख्य शब्दों का अर्थ:**
**व्याख्या:**
यह बहुत महत्वपूर्ण सीख है। भौतिक सुख (पैसा, खाना, कपड़े) कभी-कभी आंतरिक शांति नहीं दे पाते। अगर हमारा अंतरात्मा शांत नहीं है, तो सब कुछ बेकार है। इसलिए सही काम करना चाहिए।
**उदाहरण:** एक बच्चा परीक्षा में नकल करके पास हो जाता है। उसे अच्छे अंक भी मिलते हैं, माता-पिता को खुशी भी होती है, लेकिन उसके मन में लगातार यह डर रहता है कि अगर कोई जान गया तो क्या होगा। उसे सच्ची खुशी नहीं मिलती।
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**तीसरी पंक्ति समूह:**
**कह गिरधर कविराय दुःख कछु टरत न टारे।**
**खटकत है िजय मािहं िकयो जो बिना बिचारे॥**
**अर्थ:** गिरिधर कविराय कहते हैं कि बिना सोचे किए गए काम का दुःख कभी खत्म नहीं होता। वह हमेशा हमारे दिल में चुभता रहता है और हमें परेशान करता रहता है।
**मुख्य शब्दों का अर्थ:**
**व्याख्या:**
यह पंक्ति बहुत गहरा अर्थ देती है। जब हम गलत काम करते हैं, तो उसका पछतावा सारी जिंदगी हमें परेशान करता है। भले ही कोई दूसरा व्यक्ति उस गलती के बारे में न जानता हो, लेकिन हम अपने आप को जानते हैं। यह अपराध-बोध (guilt) लंबे समय तक मन को पीड़ित करता है।
**उदाहरण:** अगर कोई अपने दोस्त की किताब चोरी करके बेच देता है, और दोस्त को पता नहीं चलता, तब भी चोर को हर बार अपने दोस्त को देखते हुए शर्मिंदगी महसूस होगी।
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**पहली पंक्ति समूह:**
**बीती तािह िबसारु दे आगे कì सुिध लेइ।**
**जो बिन आवै सहज में ताही में िचत देइ॥**
**अर्थ:** अतीत की बातों को भूल जाओ और भविष्य की चिंता करो। जो काम आसानी से हो सके, उसी पर ध्यान दो।
**मुख्य शब्दों का अर्थ:**
**व्याख्या:**
कविता का यह भाग हमें **तीन महत्वपूर्ण सीखें** देता है:
1. **अतीत को भूल जाना:** पिछली गलतियों पर अधिक सोचने से कोई फायदा नहीं। हमें अपनी गलतियों से सीखना चाहिए, लेकिन उनमें उलझे नहीं रहना चाहिए।
2. **भविष्य पर ध्यान देना:** भविष्य को सुधारने की ओर ध्यान दें। आगे आने वाले समय के लिए योजना बनाएँ।
3. **सहज जीवन जीना:** बहुत मुश्किल काम की चिंता मत करो। जो आसानी से हो सकता है, उसी पर ध्यान दो। जीवन सरल रखो।
**उदाहरण:** एक छात्र को पिछली परीक्षा में बहुत कम अंक आए। अब उसके पास दो रास्ते हैं - (क) पिछली असफलता पर रोना-धोना (ख) अब से मेहनत करना और अगली परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करना। सही रास्ता (ख) है।
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**दूसरी पंक्ति समूह:**
**ताही में िचत देइ बात जोई बिन आवै।**
**दुजर्न हँसै न कोइ िच° में खता न पावै॥**
**अर्थ:** सरल और आसान काम पर ध्यान दो। इस तरह कोई बुरा आदमी तुम पर हँसेगा नहीं और तुम्हारे मन में कोई गुनाह या अपराध-बोध नहीं रहेगा।
**मुख्य शब्दों का अर्थ:**
**व्याख्या:**
जब हम सहज और सही तरीके से काम करते हैं:
**उदाहरण:** अगर कोई विद्यार्थी अपनी मेहनत से अच्छे अंक लाता है, तो उसे कोई शर्मिंदगी नहीं होती। सब उसकी तारीफ करते हैं, और उसका मन बिल्कुल शांत रहता है।
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**तीसरी पंक्ति समूह:**
**कह गिरधर कविराय यहै करु मन परतीती।**
**आगे को सुख होइ समुिझ बीती सो बीती॥**
**अर्थ:** गिरिधर कविराय कहते हैं - अपने मन को यह विश्वास दिलाओ कि अगर तुम अतीत को भूलकर सही तरीके से आगे बढ़ो, तो भविष्य में तुम्हें खुशी मिलेगी। जो बीत गया, वह बीत गया।
**मुख्य शब्दों का अर्थ:**
**व्याख्या:**
यह कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है। कविता हमें सिखाती है:
**उदाहरण:** किसी का जीवन साथी उसे छोड़ गया। वह बहुत दुःखी है, लेकिन अगर वह अतीत के बारे में सोचना बंद कर दे और भविष्य के लिए योजना बनाए, तो धीरे-धीरे वह फिर से खुश हो सकता है।
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**काल क्या होता है?** काल का अर्थ है समय। हम जो भी काम करते हैं, वह तीन समय में हो सकते हैं:
#### **1. भूतकाल (Past Tense)**
यह वह समय होता है जो पहले से ही बीत चुका है।
**पहचान के तरीके:**
**इस पाठ में उदाहरण:**
**अपने जीवन में उदाहरण:**
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#### **2. वर्तमान काल (Present Tense)**
यह वह समय होता है जो अभी चल रहा है, अभी घटित हो रहा है।
**पहचान के तरीके:**
**इस पाठ में उदाहरण:**
**अपने जीवन में उदाहरण:**
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#### **3. भविष्य काल (Future Tense)**
यह वह समय होता है जो अभी नहीं आया, लेकिन आने वाला है।
**पहचान के तरीके:**
**इस पाठ में उदाहरण:**
**अपने जीवन में उदाहरण:**
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**परिभाषा:** जिन शब्दों से किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण या भाव का नाम पता चले, उन्हें संज्ञा कहते हैं।
**इस पाठ में संज्ञा के उदाहरण:**
| संज्ञा | प्रकार | अर्थ |
|--------|--------|------|
| गिरिधर | व्यक्तिवाचक | कवि का नाम |
| काम | द्रव्यवाचक | कोई भी काम या कार्य |
| जग | स्थानवाचक | दुनिया, संसार |
| खान-पान | भाववाचक | खाना-पीने की क्रिया |
| सम्मान | भाववाचक | मान-प्रतिष्ठा |
| दुःख | भाववाचक | पीड़ा, दर्द |
| चैन | भाववाचक | शांति, आराम |
| हँसाय | क्रियावाचक | हँसने की क्रिया |
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**परिभाषा:** जो शब्द संज्ञा के बदले आते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।
**इस पाठ में सर्वनाम:**
**उदाहरण से समझें:**
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**परिभाषा:** जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताएँ, उन्हें विशेषण कहते हैं।
**इस पाठ में विशेषण:**
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**परिभाषा:** जो शब्द किसी कार्य या गतिविधि को बताएँ, उन्हें क्रिया कहते हैं।
**इस पाठ में क्रिया:**
**क्रिया के काल के साथ उदाहरण:**
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अलंकार का अर्थ है - सजावट। जैसे कपड़ों को गहनों से सजाया जाता है, वैसे ही काव्य को भी अलंकारों से सजाया जाता है।
**परिभाषा:** जब एक ही वर्ण (अक्षर) या ध्वनि की बार-बार पुनरावृत्ति होती है, तो उसे अनुप्रास अलंकार कहते हैं।
**इस पाठ में उदाहरण:**
**पंक्ति:** "खान पान सन्मान"
**अन्य उदाहरण:**
**साधारण उदाहरण:**
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**परिभाषा:** जब दो विपरीत या विरोधी विचार एक साथ रखे जाएँ, तो उसे विरोधाभास अलंकार कहते हैं।
**इस पाठ में उदाहरण:**
**पंक्ति:** "खान पान सन्मान राग रंग मनिहं न भावै"
**अन्य उदाहरण:**
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**परिभाषा:** जब दो भिन्न वस्तुओं में एक तरह की समानता दिखाई जाए, तो उसे रूपक कहते हैं।
**इस पाठ में संभावित उदाहरण:**
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**कुंडली क्या होती है?** कुंडली एक विशेष प्रकार की काव्य रचना है जिसमें समाज को नीति-बातें सिखाई जाती हैं। इसमें 6 पंक्तियाँ होती हैं।
**1. दोहा-सोरठा का संयोजन**
**2. लय और संगीत**
**3. पहली पंक्ति का अंतिम शब्द = दूसरी पंक्ति का पहला शब्द**
**उदाहरण:**
```
"बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥"
```
यहाँ पहली पंक्ति का अंतिम शब्द है "पछिताय" और दूसरी पंक्ति शुरू हो सकती है इसी प्रकार के शब्द से।
```
"जग में होत हँसाय िच° में चैन न पावै।"
```
यहाँ "हँसाय" से अगली पंक्ति शुरू होती है।
**4. दो-दो पंक्तियों में पूरा विचार**
**5. नीति और शिक्षा**
**6. आम भाषा का प्रयोग**
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| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|-------|------|--------|
| **बिना बिचारे** | बिना सोचे-समझे | बिना बिचारे कदम उठाना गलत है। |
| **पछिताय** | पछतावा करना, खेद व्यक्त करना | गलती करने के बाद वह पछिताय। |
| **काम बिगारे** | काम को बर्बाद करना | लापरवाही से काम बिगारे। |
| **जग** | दुनिया, संसार | सारा जग हँस रहा है। |
| **होत हँसाय** | लोग हँसते हैं, मजाक उड़ाते हैं | उसकी गलती पर होत हँसाय। |
| **चैन** | शांति, आराम | उसे चैन नहीं मिलता। |
| **खान-पान** | भोजन, खाने-पीने की चीजें | राजा के घर अच्छा खान-पान है। |
| **सम्मान** | सम्मान, मान-प्रतिष्ठा | समाज में सम्मान पाना चाहिए। |
| **राग-रंग** | संगीत, मनोरंजन, खुशी | जीवन में राग-रंग भी जरूरी है। |
| **मनिहं न भावै** | मन को पसंद नहीं आता | यह काम उसे मनिहं न भावै। |
| **दुःख** | पीड़ा, दर्द, कष्ट | गलती से हमे
Q1. बिना विचार किए काम करने से क्या परिणाम होते हैं?
Answer: B — कुंडली में स्पष्ट कहा है कि बिना विचार के काम करने से अपना काम बिगड़ता है और जग में हँसाई होती है।
Q2. आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे स्कूल छोड़ने का निर्णय ले लिया। गिरिधर की सीख के अनुसार उसे क्या सलाह दोगे?
Answer: B — बिना विचार किए निर्णय नहीं लेना चाहिए। समझदारों से सलाह लेकर ही महत्वपूर्ण फैसले करने चाहिए।
Q3. अतीत की असफलताओं को याद रखते हुए भविष्य में सफल होना — यह कौन-सी सीख है?
Answer: B — बीती तािह बिसारु दे का मतलब है अतीत को भूलो पर उससे सीखो, ताकि भविष्य सुखी हो।
Q4. खान-पान, सम्मान और राग-रंग न भाने का क्या कारण है?
Answer: C — कुंडली में कहा है कि जब मन में चैन नहीं होता तो खान-पान जैसी बाहरी खुशियाँ भी मन को संतुष्ट नहीं कर पातीं।
Q5. जो बिन आवै सहज में ताही में चित देइ — इस पंक्ति के द्वारा कौन-सा जीवन-सत्य बताया गया है?
Answer: B — यह पंक्ति सहज जीवन जीने की सीख देती है — अपने स्वभाव और क्षमता के अनुसार काम करना चाहिए।
Q6. मान लीजिए आपने किसी को गलती से ठेस पहुँचा दी। अब आप लगातार इसी बात में खोए रहते हैं। गिरिधर की सीख के अनुसार आप क्या करेंगे?
Answer: B — बीती तािह बिसारु दे की सीख के अनुसार गलती स्वीकार करके क्षमा माँगनी चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।
Q7. गिरिधर किवराय की कुंडलियों में कौन-सी विशेषता है?
Answer: B — कुंडली एक पारंपरिक काव्य-रूप है जिसमें पहला या दूसरा शब्द अंतिम शब्द भी होता है।
Q8. आपके समाज में एक बुजुर्ग हमेशा अपनी पुरानी गलतियों पर पछताते रहते हैं। गिरिधर की कुंडली के आधार पर उन्हें क्या सुझाव दोगे?
Answer: B — गिरिधर कहते हैं कि अतीत को भूलना चाहिए और वर्तमान में अच्छे काम करने पर ध्यान देना चाहिए।
Q9. हर किसी के लिए यह सीख लागू हो सकती है — यह बताता है कि किस विषय की कुंडली है?
Answer: C — गिरिधर की कुंडलियाँ लोकनीति और सामान्य जीवन-व्यवहार की बातें कहती हैं जो सभी के लिए उपयोगी हैं।
Q10. दुजर्न हँसै न कोई चित्त में खता न पावै — इन दोनों बातों में क्या संबंध है?
Answer: C — जब हम सच्चरित्र और विवेकपूर्ण कार्य करते हैं तो बुरे लोगों को हँसने का कोई कारण नहीं रहता और मन भी निर्दोष रहता है।
बिना विचार किए काम करने का सबसे बड़ा नुकसान क्या है?
मन में लंबे समय तक दर्द और खटकाव रहता है और शांति नहीं मिलती।
बीती तािह बिसारु दे आगे की सुिध लेइ — इसका अर्थ
अतीत की गलतियों को भूलकर भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
खान-पान, सम्मान, राग-रंग न भाने का कारण
जब बिना सोचे किए कार्य करते हैं तो बाहरी खुशियाँ भी मन को संतुष्ट नहीं कर पातीं।
कुंडली की मुख्य विशेषता क्या है?
कुंडली का पहला और अंतिम शब्द एक जैसा होता है।
गिरिधर किवराय कौन थे?
18वीं सदी में जन्मे नीति-कवि जो सरल और लोकप्रिय कुंडलियाँ लिखते थे।
जो बिन आवै सहज में ताही में चित देइ — अर्थ
जो काम सहज और आसान हो उसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
भूतकाल, वर्तमान काल, भविष्य काल के उदाहरण शब्द
भूतकाल — बीती, कल, पहले; वर्तमान — अब, आज, अभी; भविष्य — आगे, परसों, कल।
दुजर्न हँसै न कोई — इसका क्या मतलब है?
ऐसा कार्य करो कि बुरे लोगों को तुम पर हँसने का कोई कारण न मिले।
खटकत है जिय मािहं किया जो बिना बिचारे — किसका संकेत है?
बिना सोचे-समझे किए गए कार्य का दीर्घकालीन दर्द और मानसिक पीड़ा।
मन की चैन न पाना किस कारण होता है?
बिना विचार किए किए गए कार्य की पश्चाताप और लज्जा से।
बिना विचार किए काम करना हानिकारक क्यों है? उदाहरण देकर समझाइए। [1 mark]
कुंडली की पहली पंक्ति को याद करो — जल्दबाजी में निर्णय = पश्चाताप और मन का दर्द।
भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल को समझाते हुए 'बीती तािह बिसारु दे आगे की सुिध लेइ' का अर्थ बताइए। [2 marks]
बीती = भूतकाल (पुरानी बातें), आगे = भविष्य। अतीत से सीखो, पर आगे की ओर देखो। व्यावहारिक उदाहरण दो।
गिरिधर की दोनों कुंडलियों में कौन-कौन सी समानताएँ और विभिन्नताएँ हैं? काव्य-सौंदर्य के आधार पर समझाइए। [3 marks]
समानता — दोनों में नीति है, कुंडली-रूप है, कवि का नाम है। विभिन्नता — पहली में नकारात्मक नीति, दूसरी में सकारात्मक सलाह। लयबद्धता का कोई उदाहरण दो।
गिरिधर किवराय की कुंडलियों की सीख को अपने दैनिक जीवन में कैसे लागू करोगे? कम से कम चार उदाहरण देते हुए विस्तार से समझाइए। [5 marks]
स्कूल में निर्णय, मित्रता, परिवार के साथ, साइबर सुरक्षा या खेल-कूद में। हर उदाहरण में दिखाओ कि कैसे बिना सोचे काम करना गलत है और विवेकपूर्ण कार्य सही है। अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा कर सकते हो।
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