StudyOSStudyOS CBSE Study Material, Class 5–12

Shirish Ke Phool

NCERT Class 12 · Hindi Based on NCERT Class 12 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Everything you need to ace this chapter, in one place.
Notes · Mind Map · Quiz · Assertion-Reason · Case Studies · Question Bank · Past Papers

Get Full Study Kit →
Studying with friends? Send them this chapter.

Chapter Notes

हजारी प्रसाद द्विवेदी : 'शिरीष के फूल' - सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स

---

लेखक परिचय : हजारी प्रसाद द्विवेदी

**जन्म एवं जीवन परिचय**

  • जन्म : सन् 1907 ई., आरत दुबे का छपरा, बलिया (उत्तर प्रदेश)
  • मृत्यु : सन् 1979 ई., दिल्ली में
  • द्विवेदी जी बहुआयामी प्रतिभा संपन्न विद्वान थे - निबंधकार, आलोचक, इतिहासकार, संपादक
  • हिंदी, संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, बांग्ला भाषाओं का गहन ज्ञान
  • **प्रमुख रचनाएँ**

  • निबंध संग्रह : अशोक के फूल, कल्पलता, विचार और विवर्क, आलोक पर्व, प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद
  • उपन्यास : बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचंद्रलेख, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा
  • आलोचना और साहित्य-इतिहास : सूर-साहित्य, कबीर, मध्यकालीन बोध का स्वरूप, नाथ संप्रदाय, कालिदास की लालित्य-योजना, हिंदी साहित्य का आदिकाल, हिंदी साहित्य की भूमिका
  • संपादन कार्य : संदेश रासक, पृथ्वीराजरासो, नाथ-सिद्धों की बानियाँ, विश्व भारती पत्रिका
  • **पुरस्कार एवं सम्मान**

  • साहित्य अकादेमी द्वारा 'आलोक पर्व' पर पुरस्कृत
  • भारत सरकार द्वारा 'पद्मभूषण' से सम्मानित
  • लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा डी. लिट्
  • **साहित्य दर्शन**

    द्विवेदी जी का मानना है कि : "मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षधर हूँ। जो वाग्जाल मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षता से बचा न सकें, जो उसकी आत्मा को तेजोद्दीप्त न बना सकें, जो उसके ह्रदय को परदुःखकातर और संवेदनशील न बना सकें, उसे साहित्य कहने में मुझे संकोच होता है।"

    **साहित्य कर्म की विशेषताएँ**

  • द्विवेदी जी का संपूर्ण साहित्य कर्म भारतवर्ष के सांस्कृतिक इतिहास की रचनात्मक परिणति है
  • वे ज्ञान को बोध और पांडित्य की सदृयता में ढालकर एक सजीव रचना-संसार प्रस्तुत करते हैं
  • उनकी रचनाओं में विचार की तेजस्विता, कथन की लालित्य और बंध की शास्त्रीयता का संगम है
  • कबीर, राधानाथ और तुलसी जैसे महान कवि उनके साहित्य में एकाकार हो उठते हैं
  • **मानवतावादी दृष्टिकोण**

  • द्विवेदी जी लोकधर्मी रोमांटिक धारा में विश्वास रखते हैं
  • भारतीय संस्कृति के प्रति उनका दृष्टिकोण समावेशवादी है - संस्कृति किसी एक जाति की देन नहीं, बल्कि समय-समय पर उपस्थित विभिन्न जातियों के श्रेष्ठ साधनांशों के मिश्रण से विकसित हुई है
  • संस्कृति की मूल चेतना विराट मानववाद है
  • कला और साहित्य के माध्यम से संपूर्ण जीवन सौंदर्य और आनंद से परिपूर्ण हो सकता है
  • **सामाजिक चिंतन**

  • सभी उपन्यासों में जाति-पांति के विभाजन और महिलाओं के दुःख को सांस्कृतिक संकट के रूप में पहचानते हैं
  • नारी को सामाजिक अन्याय का सबसे बड़ा शिकार मानते हैं
  • मानवता और लोक से विमुख कोई भी विज्ञान, तंत्र-मंत्र, विश्वास या सिद्धांत उन्हें ग्राह्य नहीं
  • मानववादी साहित्यकार और समीक्षक के रूप में प्रतिष्ठित हैं
  • **आलोचक का व्यक्तित्व**

  • हिंदी-चिंतन धारा की सहज लोक-परंपरा को पहचानते हैं
  • नाथ-सिद्धों और कबीर से हिंदी की साहित्य-परंपरा को जोड़कर प्रगतिशील मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं
  • भक्तिकाल को भारतीय चिंतन-धारा का सहज विकास मानते हैं
  • इतिहासकार के रूप में उनकी भूमिका ऐतिहासिक महत्व रखती है
  • **निबंध-साहित्य की विशेषता**

  • साहित्य-दर्शन और समाज-व्यवस्था संबंधी द्विवेदी जी की मौलिक उद्भावनाएँ मूलतः निबंधों में ही मिलती हैं
  • यह विचार-सामग्री पांडित्य के बोझ से अभिभूत न होकर बोध से अभिव्यक्त है
  • अपने लेखन द्वारा निबंध-विधा को सृजनात्मक साहित्य की कोटि में ले आते हैं
  • ये निबंध व्यक्तित्व-व्यंजना और आत्मीय शैली से युक्त हैं
  • ---

    पाठ का परिचय : 'शिरीष के फूल'

    **पाठ-स्रोत**

  • यह ललित निबंध द्विवेदी जी के निबंध-संग्रह **'कल्पलता'** से संकलित है
  • प्रकाशक : संदर्भ स्पष्ट करता है कि यह आधुनिक भारतीय साहित्य का एक सर्वश्रेष्ठ निबंध माना जाता है
  • **पाठ का महत्व और उद्देश्य**

    द्विवेदी जी इस निबंध में शिरीष पुष्प को केंद्र बनाकर मनुष्य की अजेय जिजीविषा, कठिन परिस्थितियों में अविचल रहने की शक्ति, और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था को प्रतिपादित करते हैं। यह केवल एक वनस्पति-वर्णन नहीं है, बल्कि मानवीय मूल्यों, दर्शन और संस्कृति का गहन अध्ययन है।

    ---

    निबंध के मुख्य विषय और विस्तार

    1. शिरीष पुष्प का भौतिक विवरण और प्रकृति

    **शिरीष के वृक्ष की विशेषताएँ**

  • शिरीष (सिरिस) बड़े और छायादार वृक्ष होते हैं
  • यह एक पुरानी परंपरा का वृक्ष है जिसे प्राचीन भारत के राज्यों में उद्यानों की सुशोभा के लिए लगाया जाता था
  • संस्कृत-साहित्य में इसका उल्लेख अशोक, अरिष्ट और पुन्नाग जैसे वृक्षों के साथ मिलता है
  • आकार में विशाल, शाखाएँ सुदृढ़, छाया घनी और सुखद
  • **शिरीष पुष्प की विशेषताएँ**

  • ज्येष्ठ माह की तीव्र गर्मी में फूलते हैं - जब धरती आग के कुंड जैसी हो जाती है
  • इसलिए इन्हें **'शीतपुष्प'** (ठंडी पुष्प) भी कहा जाता है
  • इन पुष्पों की कोमलता अद्भुत होती है
  • कर्णिकार और आरग्वध के समान कोमल नहीं होते, किंतु अत्यंत कोमल अवश्य हैं
  • पुरानी परंपरा में कहा जाता है कि शिरीष पुष्प केवल भ्रमरों (भौंरों) के पदों की कोमलता सहन कर सकता है, पक्षियों की नहीं
  • **महान कवि कालिदास का मत**

  • कालिदास को शिरीष पुष्प पर विशेष आस्था थी (लेखक को भी है)
  • कालिदास की प्रसिद्ध उक्ति : "पिंड सहस्य भ्रमरस्य पेलवम् शिरीष पुष्पं न पुनः पत्त्रिणाम्" (शिरीष पुष्प केवल भ्रमरों के पदों की कोमलता सहन कर सकता है, पक्षियों की नहीं)
  • परवर्ती कवियों ने गलत समझा कि शिरीष का सब कुछ कोमल है, जबकि वास्तव में केवल पुष्प कोमल होते हैं
  • **यह भ्रम था** - शिरीष के फल अत्यंत मजबूत होते हैं
  • **शिरीष फल की दृढ़ता**

  • फल इतने मजबूत होते हैं कि नए फल-पत्तों के निकलने तक भी वे अपना स्थान नहीं छोड़ते
  • नई पत्तियाँ और फल नए फूलों को तोड़-मरोड़कर बाहर निकालते हैं - तब तक पुराने फल निकलते हैं
  • वसंत ऋतु के आने समय जब समस्त वनस्पति पुष्प-पत्र से ममर्जित होती है, तब भी शिरीष के पुराने फल खड़खड़ाते हैं
  • **लेखक द्वारा अवलोकन**

  • इन खड़खड़ाते फलों को देखकर लेखक को उन आँखों की याद आती है जो किसी भी प्रकार की शर्माने की शर्म नहीं जानतीं
  • जब तक नई पौध की लोग उन्हें धक्का देकर निकाल नहीं देते, तब तक वे जमे रहते हैं
  • यह **सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन की प्रक्रिया** का प्रतीक है
  • पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के द्वंद्व का संकेत
  • ---

    2. शिरीष की अविचल मनोदशा और अजेय जिजीविषा

    **अविचलता का अर्थ**

    लेखक शिरीष को एक **अद्भुत अवधूत (साधु)** मानते हैं जो :

  • दुःख हो या सुख - कोई भी परिस्थिति उसे हार नहीं मनवा सकती
  • न उच्च का लेना, न मध्य का देना
  • कठोर गर्मी (ताप), वर्षा, आँधी, ठंड - किसी को भी भय से स्वीकार नहीं करता
  • **शिरीष की शक्ति का रहस्य**

  • जब धरती और आकाश जलते रहते हैं, तब भी यह पुष्प अपना रल (रस) खींचते रहता है
  • आठों याम (दिन-रात चौबीस घंटे) मस्त रहता है
  • **वायुमंडल से अपना रल खींचना** - यह इसकी विशिष्ट प्रकृति है
  • इसी कारण बाहरी विपत्तियाँ इसे व्यथित नहीं कर सकतीं
  • **आध्यात्मिक दर्शन**

    एक वनस्पतिविद ने बताया कि शिरीष उस श्रेणी का वृक्ष है जो **वायुमंडल से अपना रल (पोषण) खींचता है**। इसीलिए :

  • भयंकर गर्मी और सूखे में भी इतनी कोमल, सुंदर रचना उगा सकता है
  • यह भौतिक संसार की मार को सहते हुए भी आंतरिक रूप से संपूर्ण और संतुष्ट रहता है
  • **महात्मा गाँधी से तुलना**

  • गाँधी जी भी वायुमंडल से रल खींचकर ऐसी ही दृढ़ता और कोमलता दोनों को धारण कर सके थे
  • वे भारत के एक **बुज़ुर्ग रह सके** (देश को दिशा देते रहे)
  • लेखक को हर बार शिरीष देखते समय हूक उठती है - "हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!"
  • ---

    3. पुरातनता का अधिकार-लिप्सु पकड़ और नई पीढ़ी का संघर्ष

    **समस्या का विवरण**

    शिरीष के पुराने फलों की खड़खड़ाहट में एक गहरा सामाजिक और राजनीतिक संदेश छिपा है :

  • पुरानी पीढ़ी **अधिकार-लिप्सु** (अधिकार से चिपकी हुई) रहती है
  • नई पीढ़ी उन्हें बाहर निकालने के लिए संघर्ष करती है
  • यह प्रक्रिया **दुःखद** होती है, किंतु **अपरिहार्य** भी
  • **जीवन का सार्वभौमिक नियम**

    लेखक का विचार है कि :

  • **जरा और मृत्यु** - ये दोनों ही जगत के अपरिचित और अप्रमाणिक सत्य हैं
  • तुलसीदास ने इसे इन शब्दों में दर्ज किया : "धरा को प्रमाण यही तुलसी जो फरा सो झरा, जो बरा सो बुताना!"
  • अर्थात् : जो विकसित हुआ वह गिरेगा; जो बुरा है वह बर्बाद होगा
  • **पुरानों के प्रति संदेश**

    लेखक शिरीष के फलों को देखकर पूछता है :

  • "क्यों नहीं फलते ही समझ लेते कि झड़ना निश्चित है?"
  • जब तुम फलते ही हो, तो यह अहंकार क्यों कि हम यहीं चिपके रहेंगे?
  • काल का महान नियम सर्वत्र क्रिया-व्यापार में है
  • **सार्वभौमिक संघर्ष**

    लेखक का चिंतन है कि :

  • दुर्जय प्राणधारा (जीवन शक्ति) और सर्वव्यापी कालाग्नि का संघर्ष निरंतर चलता है
  • कठोर प्राण-धारा और सर्वव्यापी विनाश का संघर्ष हर पल हो रहा है
  • मूर्ख समझते हैं कि जहाँ बने हैं, वहीं देर तक बने रहें तो काल-देवता की आँख बच जाएगी
  • **गतिशीलता की प्राणवत्ता**

  • "भोले हैं वे! हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो तो कोड़े की मार से बच भी सकते हो। ते मर जाओ!" (ठहरे रहो = निश्चित मृत्यु)
  • **गति ही जीवन है** - यह लेखक का मूल दर्शन है
  • स्थिर रहना = काल के कोड़े की मार = निश्चित विनाश
  • ---

    4. शिरीष एक अद्भुत अवधूत : समन्वय और साधकता

    **अवधूत का अर्थ और विशेषताएँ**

    लेखक शिरीष को एक **अद्भुत अवधूत** (त्यागी साधु) कहते हैं जो :

  • दुःख हो या सुख - दोनों को समान भाव से स्वीकार करता है
  • न कभी हार मानता है, न विषाद मनाता है
  • न उच्च से भय, न नीच से शर्म
  • **बाह्य परिवर्तनों का वास्तविक अर्थ**

    लेखक प्रश्न उठाते हैं :

  • क्या ये बाहरी परिवर्तन (धूप, वर्षा, आँधी, ठंड) स्वयं में सत्य नहीं हैं?
  • भारत-भूमि के ऊपर से मार-काट, अग्नि-दाह, लूट-पाट, खून-खच्चर का जो बवंडर बह गया है, उसके बीच क्या स्थिर रहा जा सकता है?
  • **भारत का सांस्कृतिक संकट**

  • देश की राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, सामाजिक विघटन - सभी कुछ अंदर से खोखले किए जा रहे हैं
  • इन सब के बीच भी शिरीष **जीवित रहा है**
  • यह **मनोविज्ञान की समझ** दर्शाता है कि जो आंतरिक शक्ति है, वही वास्तविक सहारा है
  • **शिरीष की आंतरिक शक्ति**

  • शिरीष वायुमंडल से अपना पोषण खींचता है - **भौतिक संसार पर निर्भर नहीं**
  • इसलिए बाहरी विपत्तियों से अप्रभावित रहता है
  • **गाँधी और शिरीष की साझेदारी** : दोनों ही वायुमंडल से रल खींचते हैं
  • ---

    5. कवि और साहित्यकार के लिए आवश्यक गुण

    **अनासक्ति का अर्थ**

    लेखक का मत है कि **सत्कवि** होने के लिए आवश्यक है :

  • **योगी की अनासक्त शून्यता** (आसक्तिरहित ज्ञान)
  • **प्रेमी की सरल पूर्णता** (प्रेम-भरी समग्रता)
  • दोनों गुण **एक साथ** उपलब्ध होना चाहिए।

    **कवि के लिए मानदंड**

    ऐसा कवि ही :

  • समस्त प्राकृतिक और मानवीय वैभव में निमज्जित हो सकता है
  • फिर भी निरंतर आगे बढ़ते जाने की प्रेरणा देता है
  • भौतिकता से परे रहते हुए मानवीयता को स्पर्श कर सकता है
  • **अधूरे कवि का उदाहरण**

  • जो कवि **अनासक्त नहीं रह सकता** - जो कर्मबंध में उलझ जाता है
  • जो **लेख-जोखा** (व्यावहारिक गणना) में पड़ जाता है
  • वह कवि कहलाने के लायक नहीं है
  • **कालिदास का उदाहरण**

  • कालिदास **योगी की स्थिर-प्रज्ञता** और **प्रेमी का ह्रदय** दोनों रखते थे
  • इसलिए वे **महान कवि** बन सके
  • मेघदूत जैसी अनासक्त रचना उसी ह्रदय से निकल सकती है
  • **अधूरे कवि की निंदा**

    लेखक का कहना है :

  • "कवि बनना है मेरे दोस्तों, तो फक्कड़ बनो!" (अनासक्त, निरपेक्ष रहो)
  • शिरीष की मस्ती को देखो
  • किंतु अनुभव सिखाता है कि "कोई किसी की सुनता नहीं। मरने दो!"
  • ---

    6. शकुंतला का उदाहरण : कालिदास की साहित्यिक महत्ता

    **शकुंतला की सुंदरता**

  • शकुंतला बहुत सुंदर थी, किंतु केवल सौंदर्य से क्या होता है?
  • महत्व यह है कि **कितने सुंदर ह्रदय** से यह सौंदर्य निकाला गया?
  • शकुंतला कालिदास के ह्रदय से निकली थी
  • **राजा दुष्यंत की असफलता**

  • राजा दुष्यंत भी प्रेमी थे, कला में कुशल थे
  • उन्होंने शकुंतला का चित्र बनाया था
  • किंतु उनका ह्रदय **बार-बार खीझता रहता था** - कुछ अधूरा रह गया
  • **गाँधी के उदाहरण से समझ**

    दुष्यंत को बाद में समझ आया कि :

  • शकुंतला के कानों में **शिरीष का पुष्प** (जो गंध-स्थान तक लटका था) रख दिया गया था - यह अब नहीं है
  • रह गया है **शर्मचंद की किरणों के समान कोमल और शुभ्र मृणाल का हार**
  • **सांकेतिक अर्थ**

  • कालिदास **बाहरी सौंदर्य को भेदकर भीतर तक पहुँच सके** - दुःख हो या सुख
  • वे **अनासक्त ह्रदय** की तरह सौंदर्य को अवशोषित करते हैं जैसे **निर्दलित ईख (गन्ना) से रस निकाला जाता है**
  • **कालिदास की महानता**

    कालिदास महान थे क्योंकि :

  • वे **अनासक्त ही रहे सके** - किसी व्यावहारिक बंधन में न पड़े
  • भाव-रल को उस प्रकार खींच सके जिससे मेघदूत जैसी कविता रची जा सकी
  • ---

    7. अवधूतों की परंपरा और आधुनिक संदर्भ

    **कबीर की परंपरा**

    लेखक कबीर को उदाहरण देते हैं :

  • कबीर भी **अवधूत** (त्यागी) थे - मस्त और बेपरवाह
  • किंतु वे साथ ही **सरल और मनकारी** (प्रभावशाली) भी थे
  • उनकी परंपरा **मस्त और ज्ञान से भरी** दोनों थी
  • **अनुभव की व्यथा**

    लेखक कहते हैं :

  • "अनुभव ने मुझे बताया है कि कोई किसी की सुनता नहीं।"
  • यह एक **निराशात्मक सत्य** है कि आदर्श और यथार्थ में अंतर है
  • मृत्यु तक यह अंतराल बना रहता है
  • ---

    8. शिरीष और गाँधी का आंतरिक संबंध

    **आध्यात्मिक समानता**

    लेखक की गहन अनुभूति है कि :

  • शिरीष **वायुमंडल से अपना रल (जीवन शक्ति) खींचता है**
  • गाँधी भी **वायुमंडल से रल खींचकर** इतने कोमल और इतने कठोर दोनों बने
  • गाँधी **भारत के एक बुज़ुर्ग रह सके** - मार-काट, अग्नि-दाह, लूट-पाट के बीच भी
  • **वर्तमान का संकट**

  • गाँधी के जाने के बाद लेखक को हर बार शिरीष देखते समय पीड़ा होती है
  • "हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!"
  • यह **आध्यात्मिक अकाल** है - वैसे नेतृत्व का
  • MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार साहित्य की सबसे आवश्यक शर्त क्या है?

    • A. साहित्य वह हो जो मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षिता से बचाए और आत्मा को तेजोदीप्त बनाए ✓
    • B. साहित्य केवल मनोरंजन का साधन हो
    • C. साहित्य सभी को समान विचार सिखाए
    • D. साहित्य केवल भाषाई सौंदर्य को प्रदर्शित करे

    Answer: A — द्विवेदी जी का मानना है कि साहित्य मनुष्य को नैतिक और सामाजिक बुराइयों से बचाने का माध्यम है।

    Q2. शिरीष के फूल निबंध में शिरीष के पेड़ का प्रतीकार्थ क्या व्यक्त करता है?

    • A. राजनीतिक शक्ति और सैन्य वर्चस्व
    • B. मनुष्य की अदम्य जीजीविषा और कठोर परिस्थितियों में सौंदर्य बनाए रखने की शक्ति ✓
    • C. धार्मिक अनुष्ठानों की आवश्यकता
    • D. केवल प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन

    Answer: B — शिरीष लेखक की दृष्टि में जीवन की चुनौतियों में भी आशा और गरिमा बनाए रखने का प्रतीक है।

    Q3. कालिदास ने शिरीष के फूल के बारे में क्या कहा था?

    • A. शिरीष का फूल सभी प्राणियों के स्पर्श को सहन कर सकता है
    • B. शिरीष का फूल केवल भ्रमरों के पदों की कोमलता दबाव सह सकता है, पक्षियों का नहीं ✓
    • C. शिरीष के फूल का कोई विशेष महत्त्व नहीं है
    • D. शिरीष का फूल केवल वर्षा ऋतु में ही खिलता है

    Answer: B — यह कालिदास की उद्धृत पंक्ति है जो शिरीष के फूल की विशेष कोमलता को दर्शाती है।

    Q4. द्विवेदी जी के निबंधों में पांडित्य के साथ क्या विशेषता रहती है?

    • A. पांडित्य ही मुख्य उद्देश्य होता है
    • B. पांडित्य को बोध में ढाला जाता है और व्यक्तिगत अनुभव से युक्त किया जाता है ✓
    • C. पांडित्य को पूरी तरह अलग रखा जाता है
    • D. पांडित्य का कोई महत्त्व नहीं होता

    Answer: B — द्विवेदी जी का मानना है कि निबंध में पांडित्य को सुलभ बोध में रूपांतरित करना चाहिए ताकि वह सबको समझ आए।

    Q5. भारतीय संस्कृति के विकास के संबंध में द्विवेदी जी की कौन सी धारणा है? - यह कथन गलत है।

    • A. संस्कृति एक ही जाति द्वारा निर्मित हुई है ✓
    • B. संस्कृति विभिन्न जातियों के श्रेष्ठ साधनांशों के संयोग से विकसित हुई है
    • C. संस्कृति वैदिक काल में पूर्ण विकसित थी
    • D. संस्कृति केवल ब्राह्मणों द्वारा रची गई है

    Answer: A — द्विवेदी जी मानते हैं कि भारतीय संस्कृति बहुजातीय और समावेशी है, किसी एक जाति की देन नहीं।

    Q6. सत्कवि होने के लिए द्विवेदी जी के अनुसार कौन सी दो शर्तें आवश्यक हैं?

    • A. राजनीतिक शक्ति और आर्थिक समृद्धि
    • B. योगी की अनासक्त शून्यता और प्रेमी की सरल पूर्णता दोनों एक साथ ✓
    • C. केवल भाषा पर कुशलता
    • D. धार्मिक ज्ञान और रूढ़ि-पालन

    Answer: B — द्विवेदी जी कहते हैं कि सत्कवि में साधु की विरक्ति और प्रेमी की करुणा दोनों होनी चाहिए।

    Q7. शिरीष अन्य फूल-पेड़ों की तुलना में कितने समय तक फूलता है? (निबंध के आधार पर)

    • A. केवल 10 दिन तक
    • B. पूरे वर्ष भर
    • C. वसंत से आषाढ़ तक निश्चित रूप से ✓
    • D. केवल बसंत ऋतु में

    Answer: C — निबंध में लेखक स्पष्ट करते हैं कि शिरीष वसंत के आगमन के साथ फूलना शुरू करता है और आषाढ़ तक निश्चित रूप से फूलता रहता है।

    Q8. द्विवेदी जी गांधीजी की याद में क्या बात कहना चाहते हैं?

    • A. गांधीजी केवल राजनीतिज्ञ थे
    • B. शारीरिक शक्ति ही सब कुछ है
    • C. आत्मबल और नैतिक शक्ति शारीरिक शक्ति से ऊपर है - यह गांधीजी की परीक्षा थी ✓
    • D. गांधीजी आधुनिक विचारों के विरोधी थे

    Answer: C — लेखक का आशय है कि गांधीजी ने सिद्ध किया कि आत्मबल और मानवीय मूल्य शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

    Q9. निबंध के अंतिम भाग में लेखक किस द्वंद्व को संकेतित करते हैं?

    • A. भारत और विदेश के बीच संघर्ष
    • B. प्राचीन भारत (अशोक) और नई पीढ़ी (शिरीष) के बीच सांस्कृतिक द्वंद्व - नई पीढ़ी का स्वागत करना चाहिए ✓
    • C. धर्म और विज्ञान के बीच विरोध
    • D. पूंजीवाद और समाजवाद का संघर्ष

    Answer: B — निबंध में पुरानी पीढ़ी (अशोक के फूल) और नई पीढ़ी (शिरीष) के बीच परिवर्तन और नवीनता को स्वीकार करने का संदेश है।

    Q10. द्विवेदी जी के साहित्य-दर्शन में 'ज्ञान को बोध में ढालना' का क्या अर्थ है?

    • A. ज्ञान को भूलना और केवल भावनाओं पर ध्यान देना
    • B. पांडित्य से भरे लेखन को व्यक्तिगत अनुभव और सरल भाषा में प्रस्तुत करना ताकि सबको समझ आए ✓
    • C. केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना
    • D. धार्मिक शिक्षा को प्रचारित करना

    Answer: B — द्विवेदी जी का मानना है कि जटिल विचारों को सहज बोध और आत्मनिष्ठ शैली में प्रस्तुत करना चाहिए।

    Flashcards

    हजारीप्रसाद द्विवेदी का साहित्य दर्शन क्या था?

    साहित्य वह होना चाहिए जो मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षिता से बचाए, उसकी आत्मा को तेजोदीप्त बनाए और हृदय को परदुःखकातर व संवेदनशील बनाए।

    शिरीष के फूल निबंध में शिरीष के पेड़ का प्रतीकार्थ क्या है?

    शिरीष मनुष्य की अदम्य जीजीविषा, आशावाद और कठोर परिस्थितियों में भी अपना सौंदर्य और महत्त्व बनाए रखने की शक्ति का प्रतीक है।

    द्विवेदी जी ने सत्कवि के लिए कौन सी दो शर्तें आवश्यक बताई हैं?

    योगी की अनासक्त शून्यता और प्रेमी की सरल पूर्णता दोनों एक साथ उपलब्ध होना सत्कवि होने की एकमात्र शर्त है।

    शिरीष के फूल किन दिनों तक फूलते हैं?

    शिरीष के फूल वसंत के आगमन के साथ फूलना शुरू करते हैं और आषाढ़ तक निश्चित रूप से फूलते रहते हैं।

    कालिदास का शिरीष के फूलों के बारे में क्या कथन था?

    कालिदास का कहना था कि शिरीष का फूल केवल भ्रमरों (भौंरों) के पदों का कोमलता दबाव सह सकता है, पक्षियों का नहीं।

    द्विवेदी जी के निबंध-साहित्य की मुख्य विशेषता क्या है?

    निबंध में पांडित्य के बोझ से मुक्त होकर व्यक्तित्व-व्यंजना और आत्मनिष्ठ शैली के माध्यम से जटिल विचारों को रोचक रूप में प्रस्तुत करना।

    भारतीय संस्कृति के विकास के बारे में द्विवेदी जी की मूल मान्यता क्या थी?

    भारतीय संस्कृति किसी एक जाति की देन नहीं, बल्कि समय-समय पर विभिन्न जातियों के श्रेष्ठ साधनांशों के लय-नीर संयोग से विकसित हुई है।

    शिरीष के फूल को न भूलाए जाने की बात से लेखक का क्या तात्पर्य है?

    जैसे अशोक के फूलों को इतिहास ने भुला दिया, वैसे ही शिरीष को भी भुलाया जा सकता है, इसलिए साहित्य को उसके महत्त्व को स्थापित करना चाहिए।

    द्विवेदी जी के अनुसार वह कौन सी परिस्थिति है जिसमें भी शिरीष फूल देता है?

    जब मन रम गया तो भरे भादों में भी निर्घात फूलता रहता है, अर्थात् मानसिक संतुष्टि और आशावाद से ही जीवन समृद्ध रहता है।

    द्विवेदी जी ने बकुल के पेड़ों की तुलना में शिरीष को क्यों श्रेष्ठ माना?

    बकुल पूरे वर्ष नहीं फूलता जबकि शिरीष लंबी अवधि तक फूलता है और अपनी कोमलता व सौंदर्य से आशावाद का संदेश देता है।

    Important Board Questions

    द्विवेदी जी के अनुसार साहित्य की मूल परिभाषा क्या है? (2 अंक) [2 marks]

    साहित्य की परिभाषा में तीन प्रमुख तत्व हैं - मनुष्य को दुर्गति से बचाना, आत्मा को तेजोदीप्त बनाना, हृदय को संवेदनशील बनाना। इन तीनों को संक्षेप में बताएँ।

    शिरीष के फूल निबंध में लेखक किस माध्यम से मनुष्य की अदम्य जीजीविषा का संदेश देते हैं? निबंध से उदाहरण देकर समझाएँ। (5 अंक) [5 marks]

    निबंध में शिरीष के फूल का वर्णन कैसे किया गया है - तेज धूप, गर्मी के बावजूद खिलना; वसंत से आषाढ़ तक फूलना; भावदृष्टि से यह किस मानवीय गुण का प्रतीक है। अपने उत्तर में कम से कम एक प्रत्यक्ष उद्धरण दें।

    भारतीय संस्कृति के विकास के संबंध में द्विवेदी जी का दृष्टिकोण क्या है? यह दृष्टिकोण उनके साहित्य-दर्शन से कैसे जुड़ा है? निबंध के संदर्भ में विस्तृत उत्तर दें। (6 अंक) [6 marks]

    द्विवेदी जी मानते हैं कि संस्कृति विभिन्न जातियों के श्रेष्ठ साधनांशों का संयोग है - यह अखंडता और विविधता दोनों को दर्शाता है। इसे मानवतावादी दृष्टिकोण से कैसे जोड़ा जा सकता है? निबंध के अंतिम भाग में दी गई व्याख्या को संदर्भित करें जहाँ लेखक नई पीढ़ी के स्वागत की बात करते हैं।

    Assertion-Reason Questions for Shirish Ke Phool

    Q1. Assertion (A):

    द्विवेदी जी के अनुसार वह साहित्य जो मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षिता से बचा न सके, साहित्य कहलाने योग्य है।

    Reason (R):

    क्योंकि साहित्य का उद्देश्य मनुष्य की आत्मा को तेजोदीप्त करना और उसके हृदय को संवेदनशील बनाना है।

    Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है क्योंकि द्विवेदी जी कहते हैं कि जो साहित्य इन बातों से नहीं बचाता, वह साहित्य नहीं है। किंतु कारण बिलकुल सही है कि साहित्य का वास्तविक उद्देश्य मानवीय उन्नयन है। इस लिए कथन गलत और कारण सही है।

    Q2. Assertion (A):

    शिरीष का पुष्प गर्मी और कठोर परिस्थितियों में भी खिलता है और लंबे समय तक मस्त बना रहता है।

    Reason (R):

    क्योंकि यह योगी की अनासक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है जो किसी भी परिस्थिति में धैर्य बनाए रखता है।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन और कारण बिलकुल सही हैं। निबंध में स्पष्ट किया गया है कि शिरीष की यह विशेषता ही इसे मानवीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। जेठ की गर्मी में भी यह फूल खिला रहता है जो धैर्य, संघर्ष और अडिगता का प्रतीक है। कारण पूर्णतः सही विवरण प्रदान करता है।

    Q3. Assertion (A):

    कालिदास ने कहा है कि शिरीष का पुष्प केवल भंवरों के दबाव को सहन कर सकता है, पक्षियों का नहीं।

    Reason (R):

    क्योंकि शिरीष का पुष्प बहुत ही कोमल और नाजुक होता है।

    Answer: B — Both A and R are true, but R is NOT the correct explanation of A — दोनों कथन तकनीकी दृष्टि से सही हो सकते हैं, किंतु कारण पूरी तरह उचित व्याख्या नहीं देता। लेखक का विरोध यह है कि शिरीष केवल कोमल नहीं बल्कि कठोर भी है। कारण अधूरा और आंशिक रूप से गलत है क्योंकि यह पुष्प की द्वैत प्रकृति को नहीं दर्शाता।

    Unlock more Assertion-Reason questions in Premium — unlock →

    Case-Based Questions (CBQ) for Shirish Ke Phool

    Case Study:

    जहां बैठकर ये पंक्तियां लिख रहा हूं, उसके आगे-पीछे, दाएं-बाएं शिरीष के अनेक पेड़ हैं। जेठ की जलती धूप में, जबकि धरित्री निर्धुम अग्निकुंड बनी हुई थी, शिरीष नीचे से ऊपर तक पुष्पों से लद गया था। कम पुष्प इस प्रकार की गर्मी में पुष्प सकने की हिम्मत करते हैं। इस अंश में लेखक शिरीष के पुष्प की किस मुख्य विशेषता को उजागर करते हैं?

    Q1. लेखक कहां से शिरीष के बारे में लिख रहा है?

    • A. एक बाग में
    • B. शहर के मध्य में
    • C. एक ऐसी जगह जहां चारों तरफ शिरीष के पेड़ हैं ✓
    • D. एक पुस्तकालय में

    Answer: C

    Q2. जेठ की गर्मी में शिरीष वृक्ष की क्या स्थिति रहती है?

    • A. वह सूख जाता है
    • B. वह पुष्पों से भरा हुआ रहता है ✓
    • C. उसके सभी पत्ते गिर जाते हैं
    • D. वह फल देना बंद कर देता है

    Answer: B

    Q3. लेखक अन्य पुष्पों की तुलना में शिरीष को क्यों विशेष मानते हैं?

    • A. क्योंकि इसमें अधिक सुगंध होती है
    • B. क्योंकि कम पुष्प ऐसी कठोर गर्मी में खिलने की हिम्मत करते हैं ✓
    • C. क्योंकि यह महंगा होता है
    • D. क्योंकि इसका आकार बड़ा होता है

    Answer: B

    Next chapterShram Vibhajan aur Jati Pratha →
    Found this useful? Share it with your class group.

    You've seen the free preview. Open the full interactive study kit — mind map, instant-graded quiz, progress tracking — free, no sign-in required.

    Open Full Study Kit — Free →

    Premium unlocks the full Question Bank, Daily Practice Papers, Chapter Quiz and Full Mock Papers for every chapter.