**धर्मवीर भारती** (जन्म 1926, इलाहाबाद - मृत्यु 1997)
धर्मवीर भारती आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख रचनाकार हैं। उनकी रचनाएं व्यक्ति स्वातंत्र्य, मानवीय संकट और रोमानी चेतना की समीक्षा करती हैं।
**प्रमुख रचनाएं:**
**प्रमुख पुरस्कार:**
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यह संस्मरण धर्मवीर भारती की आत्मकथात्मक रचना है जिसमें बचपन की एक गहन घटना का वर्णन है। पाठ **विज्ञान और विश्वास के द्वंद्व**, **लोकप्रचलित परंपराओं का सामाजिक महत्व**, और **बालमन की तार्किकता बनाम भावनात्मक जुड़ाव** के बीच के द्वंद्व को प्रस्तुत करता है। लेखक ने अपने दादी (दीदी) से जुड़ी घटनाओं के माध्यम से सूखे के समय इंद्र सेना द्वारा किए जाने वाले पानी का वितरण और संबंधित लोकविश्वास को चित्रित किया है।
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इस पाठ का मूल विषय लोकविश्वास और वैज्ञानिक सोच के बीच का संघर्ष है।
**विश्वास की भूमिका:**
**विज्ञान का तर्क:**
**पाठ का दृष्टिकोण:** लेखक न तो विश्वास को पूरी तरह खारिज करते हैं और न ही विज्ञान को। वे दोनों के बीच संतुलन की संभावना दिखाते हैं।
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**इंद्र सेना की पहचान:**
**मेढक-मंडली शब्द के कारण:**
**जयकारा:**
**खेलगीत:**
कालेमेघा पानी दे,
गगरी फूटी बैल प्यासा,
पानी दे, गुड़धानी दे,
कालेमेघा पानी दे।
इस गीत में गगरी (पानी का बर्तन), बैल (पशु) और गुड़धानी (मिठाई) का जिक्र है जो सूखे के समय की कमियों को दर्शाता है।
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**गीत गाते समय अभिनय:**
**सूखे की परिस्थितियाँ:**
**विकल्प के रूप में धार्मिक कार्य:**
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**बारिश के बादलों के स्वामी:**
**पानी की आशा:**
**लेखक का तर्क:**
लेखक को समझ में नहीं आता है कि जब चारों ओर पानी की इतनी कमी है, तो लोग घर में सूखे से बचाकर रखे हुए पानी को बाल्टी भरकर इन गंदी इंद्र सेना पर क्यों फेंकते हैं?
**लेखक के प्रश्न:**
**लेखक का निष्कर्ष:**
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**लेखक की पृष्ठभूमि:**
**समस्या:**
**दीदी की भूमिका:**
**समस्या का तीव्र रूप:**
**दीदी का आशीर्वाद:**
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**लेखक का अस्वीकार:**
**दीदी की आज्ञा का परिणाम:**
**दीदी की प्रारंभिक प्रतिक्रिया:**
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**पहली व्याख्या - पानी का अर्थ:**
दीदी के तर्क का सार यह है कि:
"तू इसे पानी की बर्बादी समझता है, पर यह बर्बादी नहीं है। यह पानी का अर्थ चढ़ाते हैं, जो चीज़ मनुष्य चाहता है, उसे पहले न दो तो नहीं पाएगा। इसीलिए ऋषि-मुनियों ने दान को सबसे ऊँचा स्थान दिया है।"
**लेखक की आपत्ति:**
"ऋषि-मुनियों को कहे बदनाम करती हो दीदी? क्या उन्होंने कहा था कि जब आदमी बूँद-बूँद पानी को तरसे, तब पानी कीचड़ में बहाओ?"
**दीदी का दूसरा तर्क - त्याग का वास्तविक अर्थ:**
दीदी ने थोड़ी देर चुप रहीं, फिर मठरी लेकर लेखक के मुँह में डालते हुए बोलीं:
"देख, बिना त्याग के दान नहीं होता। अगर तेरे पास लाखों-करोड़ों रुपये हैं और उसमें से तू दो-चार रुपये किसी को दे दे, तो यह क्या त्याग हुआ? त्याग तो वह होता है कि जो चीज़ तेरे पास भी कम है, जिसकी तुझको भी जरूरत है, तो अपनी जरूरत पीछे रखकर दूसरे के कल्याण के लिए उसे दे, तो त्याग है। दान है। उसी का फल मिलता है।"
**लेखक का खुला विरोध:**
"फल-वल कुछ नहीं मिलता, सब ढकोसला है।"
यह कहते हुए भी लेखक को अपने तकों का किला पस्त होने लगा। पर वह भी जिद पर अड़ा था।
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**दीदी की शिक्षा:**
"देख, तू तो अभी से पढ़-लिख गया है। मैंने तो गाँव के मदरसे का भी मुँह नहीं देखा। पर एक बात देखी है कि अगर तीस-चालीस मन गेहूँ उगाना है, तो किसान पाँच-छह सेर अच्छा गेहूँ अपने पास से लेकर जमीन में क्यारियाँ बना देता है। इसे बुवाई कहते हैं। यह जो सूखे में हमारे घर का पानी इन पर फेंकते हैं, वह भी बुवाई है।"
**अगली व्याख्या:**
"यह पानी गली में बोएँगे तो सारे शहर, कस्बे, गाँव पर पानीवाले बादलों की फसल आ जाएगी। हम बीज बनाकर पानी देते हैं, फिर काले मेघा से पानी माँगते हैं। सब ऋषि-मुनि कह गए हैं कि पहले खुद दो, तब देवता तुम्हें चौगुना-अठगुना करके लौटाएँ। भैया, यह तो हर आदमी का आचरण है, जिससे सबका आचरण बनता है।"
**यथा राजा तथा प्रजा का अर्थ:**
"'यथा राजा तथा प्रजा' - सिर्फ़ यही सच नहीं है। सच यह भी है कि 'यथा प्रजा तथा राजा'। यही तो गाँधी जी महाराज कहते हैं।"
**दीदी की राष्ट्रीय चेतना:**
दीदी के एक लड़के ने राष्ट्रीय आंदोलन में पुलिस की लाठी खाई थी। उसके बाद से दीदी गाँधी जी महाराज की बात अक्सर करने लगी थीं।
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**पचास से ज्यादा बरस बाद भी:**
**प्रश्न: क्या दिया है हमने देश को?**
आज के संदर्भ में दीदी की बातें और भी प्रासंगिक हो जाती हैं:
**अंतिम प्रश्न:**
काले मेघा दिन-दिन उमड़ते हैं, पानी झमझम बरसता है, पर:
**अंतिम सवाल:** आखिर कब बदलेगी यह स्थिति?
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पाठ यह नहीं कहता कि विज्ञान गलत है या विश्वास गलत है। दीदी के माध्यम से यह सुझाव दिया जाता है कि:
दीदी के तर्क से स्पष्ट होता है कि:
दीदी कहती हैं:
यह संदेश है कि व्यक्तिगत सुधार से ही सामाजिक सुधार संभव है।
पाठ सुझाता है कि:
आज के संदर्भ में यह संदेश:
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| शब्द | अर्थ | संदर्भ में प्रयोग |
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| **इंद्र सेना** | बारिश के देवता इंद्र की सेना (लोकविश्वास) | बच्चों का समूह जो पानी माँगता था |
| **मेढक-मंडली** | मेढकों की तरह उछल-कूद करने वाले | इंद्र सेना को दी गई तिरस्कृत संज्ञा |
| **जयकारा** | जीत का घोषणा, विजय गीत | "बोल गंगा मैया की जय" |
| **दसपहर** | दिन का सबसे गर्म समय | गर्मी की तीव्रता |
| **आषाढ़** | वर्षा ऋतु का पहला महीना | बारिश की संभावना |
| **ल्यू** | गर्म हवा | सूखे की गंभीरता |
| **निर्मम** | निष्ठुर, कठोर | पानी की बर्बादी |
| **अर्थ चढ़ाना** | समर्पित करना, अर्पित करना | पानी को देवता को समर्पित करना |
| **बुवाई** | बीज बोना, निवेश | दीदी का प्रतीकात्मक तर्क |
| **यथा राजा तथा प्रजा** | जैसा राजा, वैसी प्रजा | सामाजिक प्रभाव का सिद्धांत |
| **आयुष्मती** | दीर्घायु, लंबी आयु वाली | दीदी के जीवन का विवरण |
| **कुमार-सुधार** | बालकों का सुधार, समाज सुधार | सामाजिक सुधार आंदोलन |
| **अनुष्ठान** | धार्मिक कार्य, विधि | पूजा-पाठ |
| **फसल** | खेत की उपज | दीदी के तर्क में परिणाम |
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पाठ लेखक की व्यक्तिगत स्मृति का वर्णन है। इसमें:
**उदाहरण:** "ये सब अंधविश्वास नहीं है। यह पानी का अर्थ चढ़ाते हैं..."
दीदी और लेखक के बीच का संवाद पाठ को जीवंत बनाता है:
कई शब्द प्रतीकात्मक हैं:
पाठ में लेखक विश्वास और विज्ञान के बीच गहन विश्लेषण करता है:
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| प्रतीक | अर्थ |
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| **पानी** | त्याग, परोपकार, जीवन |
| **गगरी** | मानवीय आवश्यकताएँ |
| **बैल** | असहाय जनता |
| **बादल** | दिव्य कृपा |
| **बुवाई** | सामाजिक निवेश |
| **फसल** | भविष्य का संकेत |
Q1. इंद्र सेना के लड़कों की पहली जयकारी क्या होती थी?
Answer: A — पाठ में स्पष्ट लिखा है कि इंद्र सेना की अगवानी जयकारी 'बोल गंगा मैया की जय' से होती थी।
Q2. लेखक को पानी की बर्बादी निर्मम क्यों लगती थी?
Answer: B — लेखक को विज्ञान-सम्मत तर्क से लगता था कि गरीब किसानों के सूखे खेतों के लिए पानी जरूरी है, इसलिए घरों के पानी को इंद्र सेना पर बर्बाद करना अन्यायपूर्ण था।
Q3. धर्मवीर भारती को सबसे ज्यादा प्रेम किससे मिला?
Answer: C — पाठ में लेखक स्वयं कहते हैं कि 'मुझे बचपन में जिससे सबसे ज्यादा प्रेम मिला वे थीं दादी।'
Q4. आषाढ़ का पहला पखवाड़ा बीत जाने के बाद गांव की क्या स्थिति होती थी?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट वर्णन है कि आषाढ़ का पहला पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी बारिश न होने से भीषण सूखा पड़ता था और खेतों की मिट्टी पत्थर हो जाती थी।
Q5. लेखक के अनुसार अंधविश्वास को तुरंत मिटा देने में क्या खतरा है?
Answer: B — लेखक कहते हैं कि विश्वास की रचनात्मक भूमिका हो सकती है — निराशा दूर करने, अधीरता को थामने के लिए। अगर हम बिना विकल्प के सभी विश्वास मिटा दें, तो सांस्कृतिक रिक्तता का खतरा है।
Q6. क्या वह विश्वास, जो वैज्ञानिक नहीं है किंतु समाज के लिए हानिकारक भी नहीं है, उसे क्या कहा जाए?
Answer: C — पाठ में लेखक स्पष्ट करते हैं कि उन्होंने कोई निर्णय नहीं दिया है, क्योंकि विश्वास की भी रचनात्मक भूमिका हो सकती है।
Q7. इंद्र सेना के लड़के घरों से पानी लेने पर उसे कैसे इस्तेमाल करते थे?
Answer: C — पाठ में वर्णित है कि भीगे बदन इंद्र सेना के लड़े मिट्टी में लोट लगाते, गंदे पानी में लथपथ होते, फिर हांक लगाते और आगे के घर की ओर चल पड़ते थे।
Q8. यह कथन पढ़ें: (1) विज्ञान का सत्य बड़ा है। (2) लेखक ने इंद्र सेना को पूरी तरह अंधविश्वास माना। इन दोनों कथनों के बारे में क्या कहा जा सकता है?
Answer: B — लेखक विज्ञान के महत्त्व को स्वीकार करते हैं (कथन 1), किंतु इंद्र सेना को सरलता से अंधविश्वास नहीं कहते, क्योंकि वह समाज की सामूहिक चेतना को जोड़ने का काम करती है।
Q9. लेखक के अनुसार, किसी बचपन के संस्कार और सामाजिक कर्तव्य में अंतर्द्वंद्व होने पर क्या करना चाहिए?
Answer: C — लेखक कहते हैं कि थी की संतुष्टि और अपने प्रति उनका सद्भाव बचाए रखने के लिए वह तेमें रीति-रिवाजों को (भले ही उपरी तौर पर ही) अपनाते थे, जो बचपन के प्रेम को महत्त्व देता है।
Q10. लेखक बचपन में अपने किशोर मस्तिष्क को कैसा मानते हैं?
Answer: B — लेखक के अनुसार उनका किशोर मन तर्कशील तो था, किंतु दादी के प्रेम और बचपन के संस्कारों के कारण पूरी तरह विद्रोही नहीं हो सकता था, जिससे वह द्विविधा में रहते थे।
इंद्र सेना या मेढक-मंडली किसे कहते थे?
जल की कमी वाले दिनों में बारिश के लिए नंगे शरीर में गंदे पानी में लोटते, पुकारते दस-अठारह साल के लड़कों की टोली को इंद्र सेना कहते थे।
इंद्र सेना की पुकार क्या होती थी?
काले मेघा पानी दे, गगरी फूटी बैल प्यासा, पानी दे, गुड़धानी दे — यह गीत-सदृश पुकार होती थी।
आषाढ़ का पहला पखवाड़ा बीतने के बाद क्या होता था?
भीषण सूखा पड़ता था, क्योंकि अभी तक बारिश नहीं होती, खेतों की मिट्टी पत्थर हो जाती, और जल संकट गंभीर हो जाता था।
लेखक को सबसे ज्यादा प्रेम किससे मिला?
लेखक को बचपन में दादी (थी) से सबसे ज्यादा प्रेम और आचरण-संस्कार मिले, जिनकी संतुष्टि के लिए वह रीति-रिवाज अपनाते थे।
लेखक को पानी की बर्बादी कैसी दिखती थी?
लेखक को बारिश न होने पर पानी की बर्बादी निर्मम और अन्यायपूर्ण दिखती थी, जो गरीब किसानों और सूखे खेतों के लिए अनुचित था।
'अंध विश्वास' को लेखक क्यों सरल शब्द में परिभाषित नहीं करते?
क्योंकि लेखक मानते हैं कि कुछ विश्वास वैज्ञानिक न होकर भी समाज को संतुष्ट करते, निराशा दूर करते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत अंध विश्वास नहीं कहा जा सकता।
क्या विज्ञान से शिक्षित व्यक्ति के पास भी 'अंध विश्वास' नहीं रहते?
लेखक का विचार है कि विज्ञान में दीर्घकाल तक शिक्षा पाने के बाद भी भारतीय समाज में वैज्ञानिक दृष्टि का अभाव है, जिससे अंधविश्वास बने रहते हैं।
'आषाढ़ का पहला पखवाड़ा' मुहावरे का क्या अर्थ है?
यह मुहावरा वर्षा ऋतु के आरंभ में भी जल संकट और निराशा की स्थिति को दर्शाता है, जब किसान और समाज सूखे से पीड़ित होते हैं।
गांव में जल संकट शहर से अधिक गंभीर क्यों था?
गांवों में जहां कृषि के लिए जल जरूरी था, वहां खेतों की मिट्टी पत्थर हो जाती, नहर में पानी नहीं आता, और मनुष्य आधे रास्ते में ही प्यास से गिर पड़ते थे।
पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
विज्ञान की सत्यता बड़ी है, पर सामूहिक विश्वास और प्रेम का भी अपना रस है — दोनों के बीच संतुलन बनाना ही मानव समाज के लिए आवश्यक है।
संस्मरण 'काले मेघा पानी दे' में इंद्र सेना किसे कहा जाता था? उनके आचरण का एक उदाहरण दीजिए। [2 marks]
इंद्र सेना = नंगे शरीर वाले दस-अठारह साल के लड़कों की टोली। उदाहरण = घर-घर से पानी लेकर गंदे पानी में लोटना, मिट्टी में लथपथ होना, पुकारते हुए घूमना।
लेखक को पानी की बर्बादी क्यों निर्मम लगती थी? इस विचार में उनकी किस प्रकार की चेतना प्रतिफलित होती है? (पाठ के आधार पर समझाइए।) [5 marks]
कारण = आषाढ़ का सूखा, गरीब किसानों का संकट, खेतों की मिट्टी का पत्थर होना। चेतना = वैज्ञानिक दृष्टि (तर्कसंगत विचार), सामाजिक चेतना (असमानता की समझ), परंतु बचपन के संस्कार से द्विविधा।
धर्मवीर भारती लोक-विश्वास और वैज्ञानिक सत्य के बीच किस प्रकार का संतुलन सुझाते हैं? 'काले मेघा पानी दे' संस्मरण के आधार पर विस्तार से समझाइए। [6 marks]
विज्ञान का सत्य बड़ा है, किंतु विश्वास की रचनात्मक भूमिका (निराशा दूर, सामूहिक चेतना) भी है। सांस्कृतिक रिक्तता का खतरा। लेखक की अनिश्चितता — कोई पक्का उत्तर नहीं देते। दादी के प्रेम को सतही रीति-रिवाज अपनाकर बचाए रखना = व्यावहारिक संतुलन का उदाहरण।
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