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**जन्म:** 29 नवंबर 1905, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)
**मृत्यु:** 1990
**साहित्यिक पहचान:** हिंदी के सबसे महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक कथाकार के रूप में स्थापित। प्रेमचंद के बाद हिंदी कथा साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया।
**प्रमुख रचनाएँ:**
**पुरस्कार:** साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत-भारती सम्मान, पद्मभूषण (भारत सरकार द्वारा)
**विचारधारा:** प्रगतिशील गांधीवादी दृष्टिकोण। सामाजिक, आर्थिक, नैतिक और दार्शनिक प्रश्नों को सहज किंतु गहरे विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करते हैं।
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**विधा:** विचारप्रधान निबंध (विचार निबंध)
**मूल विषय:** बाज़ार का मनोविज्ञान, उपभोक्तावाद की आलोचना, मनुष्य की इच्छा और संतुष्टि के बीच संबंध, और वास्तविक सुख की खोज।
**लेखन शैली:** सरल, अनौपचारिक, किंतु गहरी दार्शनिक चेतना से युक्त। व्यक्तिगत अनुभव, मित्रों की कहानियों, और सामान्य जीवन उदाहरणों के माध्यम से अमूर्त विचारों को मूर्त करते हैं।
**पाठ का महत्व:** आधुनिक उपभोक्तावादी समाज की आलोचना और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का संदेश। CBSE बोर्ड परीक्षा में यह पाठ निबंध और दर्शन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
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बाज़ार सिर्फ एक व्यावसायिक स्थान नहीं है, बल्कि एक **मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक शक्ति** है जो मनुष्य की इच्छाओं को जगाता है और उसे क्रय के लिए प्रेरित करता है। यह मनुष्य की कमजोरियों का लाभ उठाता है।
**मुख्य बिंदु:**
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जब कोई बाज़ार चौपाल में खड़ा होता है, तो उसे अनुभव होता है कि:
**परिणाम:** निरंतर असंतुष्टि, तृष्णा और ईष्या का जन्म होता है।
**उदाहरण:** एक व्यक्ति मोटरकार को देखकर (जिसे वह कभी कल्पना में भी नहीं सोचता था) अचानक वंचित महसूस करने लगता है। बाज़ार की दृश्यमान समृद्धि मन में एक तीव्र व्यंग्य-शक्ति पैदा करती है।
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**विशेषताएँ:**
**परिणाम:** बाज़ार का जादू उन पर काम नहीं करता। वे सीमित खरीदारी करते हैं और शांति से जीवन जीते हैं।
**उदाहरण - भगत जी (घुरन बेचने वाले):**
**विशेषताएँ:**
**परिणाम:**
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लेखक के एक मित्र दोपहर को बाज़ार गए और शाम को खाली हाथ लौटे।
**संवाद:**
**विश्लेषण:**
**सूत्र:** "यदि ठीक पता नहीं है कि क्या चाहते हो, तो सब ओर की चाह तुम्हें घेर लेगी।"
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**चौपाल में उपस्थिति:**
**खरीदारी की प्रवृत्ति:**
**अद्भुत गुण:**
**महत्वपूर्ण उद्धरण:**
"बाज़ार को सार्थकता वही मनुष्य देता है जो जानता है कि वह क्या चाहता है। जो नहीं जानते, वे अपनी 'पर्चेजिंग पॉवर' के गर्व में केवल एक विनाशकारी शक्ति - शैतानी शक्ति, व्यंग्य की शक्ति ही बाज़ार को देते हैं।"
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**व्यंग्य-शक्ति:** बाज़ार की वह अमूर्त शक्ति जो मनुष्य के मन को कुंद करती है, उसे दीन बनाती है, और उसे स्वयं से नीचा दिखलाती है।
**उदाहरण:**
**परिणाम:**
**लेखक का कथन:**
"जहाँ तृष्णा है, बचत रखने की स्पृहा है, वहाँ उस शक्ति का बीज नहीं है।"
**सत्य:**
**विरोधाभास:**
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**अर्थ:** जब मनुष्य का मन इच्छा-विहीन न हो, किंतु विशिष्ट आवश्यकताओं से रहित हो।
**स्थिति:**
**परिणाम:** बाज़ार का जादू पूरी तरह कार्य करता है।
**अर्थ:** जब मनुष्य को पता हो कि उसे क्या चाहिए।
**स्थिति:**
**परिणाम:** बाज़ार से सार्थक लाभ उठाया जा सकता है।
**लेखक का विरोध:**
**सही मार्ग:**
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**लेखक का दर्शन:**
"यदि हम में पूर्णता होती, तो परमात्मा से अभिन्न होकर हम महाशून्य ही न होते?"
**अर्थ:**
**सच्चा ज्ञान:**
**सच्चा कर्म:**
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**समस्या:**
**उदाहरण:**
**निष्कर्ष:**
"शायद हठ ही हठ है, योग नहीं है।"
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**परिभाषा:** बाज़ार की सार्थकता केवल आवश्यकता के समय काम आने में है।
**उदाहरण - भगत जी:**
**सूत्र:**
"जरूरत-भर जीरा वहाँ से ले लिया कि फिर सारा चौपाल उनके लिए 'नहीं के बराबर' हो जाता है।"
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**परिभाषा:** जब बाज़ार अपनी वास्तविक सेवक भूमिका को छोड़कर आकर्षक, चकाचौंध भरा और लोभजनक बन जाता है।
**परिणाम:**
**परिस्थिति:**
"कभी-कभी बाज़ार में आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है।"
**कारण:**
**परिणाम:**
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**लेखक का आरोप:**
"जो अर्थशास्त्र केवल बाज़ार का पोषण करता है, वह अनीति-शास्त्र है।"
**कारण:**
**पत्नी और ईश्वर का संबंध:**
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**दृष्टिकोण:** बाज़ार जाति, धर्म, क्षेत्र नहीं देखता - केवल क्रय-शक्ति देखता है।
**परिणाम:**
**सीमा:**
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**घटना:** लेखक का एक मित्र बाज़ार जाता है, एक साधारण वस्तु लेने की नीयत से।
**परिणाम:**
**विश्लेषण:**
**घटना:** लेखक पैदल चल रहे हैं, तभी एक मोटरकार धूल उड़ाती निकल जाती है।
**मनोविश्लेषण:**
**गहराई:**
**निष्कर्ष:** बाज़ार की सबसे बड़ी हिंसा मनस्ताप है।
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1. एक मित्र बाज़ार से एक साधारण वस्तु लेकर आते हैं
2. किंतु पत्नी की "महिमा" के कारण अनेक चीजें साथ आती हैं
3. पैसा → सामान → असंतुष्टि
1. बाज़ार एक जादू है
2. इसकी सीमा है - जेब भरी, मन खाली
3. यह शैतान का जाल है
4. यह "और चाहिए" की भावना पैदा करता है
1. **संयमी मनुष्य:** बाज़ार से लाभ उठाता है
2
Q1. जैनेंद्र के अनुसार, एक मित्र बाज़ार से कुछ साधारण वस्तुओं को खरीदने गया, लेकिन कई बंडल लेकर लौटा। इसका कारण क्या था?
Answer: A — जैनेंद्र निबंध में कहते हैं कि पैसा पावर है और यह महिमा प्रदर्शित करती है, जिससे अनावश्यक खरीदारी होती है।
Q2. निबंध में चुंबक का उदाहरण किस विचार को समझाने के लिए दिया गया है?
Answer: B — चुंबक लोहे पर ही काम करता है, वैसे ही बाज़ार का सम्मोहन केवल उसी पर काम करता है जिसके पास पैसा हो।
Q3. अपने मित्र की विफलता से जैनेंद्र कौन-सा सबक सीखते हैं?
Answer: B — निबंध में जैनेंद्र कहते हैं कि जब तक यह न समझ आए कि कौन-सी चीजें आवश्यक हैं, तब तक आवश्यकता से परे की सभी इच्छाएं घेर लेती हैं।
Q4. जैनेंद्र के अनुसार, 'बुद्धिमान' व्यक्ति का बाज़ार से क्या संबंध होता है?
Answer: B — जैनेंद्र संयमी व्यक्ति को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि वह पैसे की शक्ति को समझ कर उसका सही उपयोग करता है।
Q5. बाज़ार से व्यक्ति को असंतोष और तृष्णा से बचाने का मुख्य उपाय क्या है?
Answer: B — जैनेंद्र कहते हैं कि मन लक्ष्य से भरा हो तो बाज़ार भी पैला-का-पैला रह जाता है और घाव नहीं देता।
Q6. निबंध में कौन-सी स्थिति सबसे खतरनाक मानी गई है?
Answer: A — जैनेंद्र के अनुसार, जब पैसा (सेना) हो पर मन खाली हो, तब बाज़ार का जादू सबसे अधिक काम करता है।
Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन जैनेंद्र के विचार के विरुद्ध है? (I) इच्छा-निरोध सही पथ है। (II) बाज़ार की वास्तविक कृतार्थता आवश्यकता के समय काम आना है।
Answer: A — जैनेंद्र इच्छा-निरोध को आत्मघाती कहते हैं और कहते हैं कि इच्छा-निर्देशन ही सही है, जबकि कथन (II) उनके मत से सर्वथा सहमत है।
Q8. पानी पीकर नदी जाने का उदाहरण निबंध में किस अर्थ में दिया गया है?
Answer: B — जैनेंद्र इस उदाहरण से समझाते हैं कि मन को सार्थक लक्ष्य से भर देने से बाज़ार का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
Q9. आँख बंद करने का तर्क निबंध में किस संदर्भ में खंडित किया गया है?
Answer: B — जैनेंद्र कहते हैं कि आँख बंद करने पर भी स्वप्न देखते हैं, इसलिए केवल आँख बंद करना समाधान नहीं है।
Q10. निबंध के अनुसार, कौन-सा व्यक्ति बाज़ार से अपने आप को सबसे अधिक नुकसान में डालता है? (A) वह जो संयम से पैसे खर्च करता है (B) वह जो बाज़ार न जाए (C) वह जो अपनी आवश्यकता न समझता हो और सब कुछ खरीदना चाहता हो (D) वह जो सेना भरी हो पर मन भरा हो
Answer: C — जैनेंद्र कहते हैं कि जो अपनी आवश्यकता नहीं समझता, उसे बाज़ार की सभी वस्तुओं की निंदा सुनाई देती है और वह असंतोष से पीड़ित रहता है।
बाज़ार दर्शन निबंध का मुख्य विषय क्या है?
बाज़ार की जादुई शक्ति और मानवीय इच्छा के बीच संबंध तथा आत्मनियंत्रण के उपाय।
जैनेंद्र के अनुसार पैसा वास्तव में क्या है?
पैसा केवल एक संख्या है, असली शक्ति तो उसके साथ आने वाली वस्तुओं में निहित है।
'पर्चेजिंग पावर' शब्द का क्या अर्थ है?
किसी की खरीदारी की क्षमता या पैसे की ताकत जो बाज़ार में वस्तुओं को आकर्षित करती है।
बाज़ार का सबसे बड़ा हथकंडा कौन-सा है?
मनुष्य को यह विश्वास दिलाना कि उसके पास अभी कुछ कमी है और उसे और चीजें चाहिए।
जैनेंद्र बाज़ार से बचाव के लिए क्या सुझाव देते हैं?
मन को किसी निश्चित लक्ष्य या उद्देश्य से भर देना ताकि बाज़ार का आकर्षण प्रभावहीन रहे।
कौन-सा व्यक्ति बाज़ार से असंतुष्ट हो जाता है?
वह जो अपनी आवश्यकता का भेद नहीं समझता और सभी चीजें खरीदना चाहता है।
मन को खाली रखने का क्या खतरा है?
खाली मन बाज़ार की असंख्य वस्तुओं की निंदा सुनता है और असंतोष व तृष्णा से पीड़ित हो जाता है।
चुंबक का तर्क निबंध में किस संदर्भ में आया है?
जिस तरह चुंबक केवल लोहे पर काम करता है, उसी तरह बाज़ार का जादू सेना भरी पर ही काम करता है।
बाज़ार की वास्तविक कृतार्थता क्या है?
जब आवश्यकता के समय बाज़ार काम आए और मनुष्य को वास्तविक लाभ दे।
इच्छा-निरोध और इच्छा-निर्देशन में क्या अंतर है?
इच्छा-निरोध सभी इच्छाओं को दबाना है जो आत्मघाती है, जबकि इच्छा-निर्देशन उन्हें सार्थक लक्ष्य की ओर मोड़ना है।
बाज़ार दर्शन निबंध का मुख्य उद्देश्य क्या है? (2 अंक) [2 marks]
जैनेंद्र की गांधीवादी चिंतन-दृष्टि और आर्थिक दर्शन — बाज़ार की शक्ति बनाम आत्मनियंत्रण। वाणिज्यवाद पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण।
जैनेंद्र के अनुसार बाज़ार का जादू कब और कैसे काम करता है? अपने उत्तर को दो उदाहरणों से समर्थित कीजिए। (5 अंक) [5 marks]
चुंबक का उदाहरण (सेना भरी + मन खाली = जादू काम करता है) और पानी का उदाहरण (मन लक्ष्य से भरा = बाज़ार निरर्थक)। पर्चेजिंग पावर की व्याख्या।
जैनेंद्र के विचार से आधुनिक उपभोक्तावादी समाज को क्या सीख मिल सकती है? उपभोक्ता के रूप में आत्मनियंत्रण की महत्ता को समझाइए। (6 अंक) [6 marks]
इच्छा-निरोध बनाम इच्छा-निर्देशन का अंतर। आवश्यकता बनाम लालच की पहचान। बाज़ार से बचाव के व्यावहारिक उपाय और गांधीवादी जीवन-दर्शन का आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता।
Q1. Assertion (A):
बाज़ार दर्शन निबंध में लेखक कहते हैं कि पैसे की वास्तविक शक्ति उसकी पचेसिंग पावर में निहित है।
Reason (R):
बैंक में रखा पैसा केवल एक आंकड़ा है, लेकिन जब वह वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रयोग होता है तब उसकी सक्रिय शक्ति प्रकट होती है।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण कथन को पूरी तरह समझाता है। लेखक पैसे की शक्ति को केवल संचय नहीं, बल्कि उसके सक्रिय उपयोग में देखते हैं। यह निबंध की मूल अवधारणा है।
Q2. Assertion (A):
निबंध के अनुसार, मन को पूरी तरह खाली रखना बाज़ार की चाल से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।
Reason (R):
मन को बंद करके आँख फोड़ लेने से आदमी अपने आप को जड़ बना लेता है, जो वास्तविक समाधान नहीं है।
Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है क्योंकि लेखक स्पष्ट करते हैं कि मन को खाली नहीं, बल्कि किसी सकारात्मक लक्ष्य से भरा होना चाहिए। कारण सही है कि आँख बंद करना जड़ता है, लेकिन यह कथन का समर्थन नहीं करता।
Q3. Assertion (A):
बाज़ार की जादू केवल उन लोगों पर काम करती है जिनके पास पैसे की कमी है।
Reason (R):
जेब भरी हो और मन खाली हो, ऐसी हालत में बाज़ार की जादू अच्छी तरह काम करती है।
Answer: D — A is false but R is true — कथन गलत है। निबंध में लेखक कहते हैं कि बाज़ार की जादू पैसे की कमी से नहीं, बल्कि मन की खालीपन से संबंधित है। कारण सही है कि जब दोनों शर्तें पूरी हों - जेब भरी और मन खाली - तब जादू सबसे प्रभावी होती है।
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Case Study:
एक बार की बात कहता हूँ। मित्र बाज़ार गए तो थे कोई एक मामूली चीज़ लेने पर लौटे तो एकदम बहुत-से बंडल पास थे। मैंने पूछा कि यह क्या है? बोले - यह जो साथ था। बाज़ार की यह जादू है कि वह रूप का जादू है परंतु जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी मर्यादा है। जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है।
Q1. निबंध के इस अंश में लेखक के मित्र के अनुभव से क्या संदेश मिलता है?
Answer: B
Q2. लेखक ने चुंबक और लोहे का उदाहरण क्यों दिया है?
Answer: B
Q3. इस अंश के अनुसार, बाज़ार की जादू सबसे अधिक कब असरदार होती है?
Answer: B
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