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Bazar Darshan

NCERT Class 12 · Hindi Based on NCERT Class 12 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

**बाज़ार दर्शन - संपूर्ण अध्ययन सामग्री**

**लेखक परिचय: जैनेंद्र कुमार**

**जन्म:** 29 नवंबर 1905, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

**मृत्यु:** 1990

**साहित्यिक पहचान:** हिंदी के सबसे महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक कथाकार के रूप में स्थापित। प्रेमचंद के बाद हिंदी कथा साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया।

**प्रमुख रचनाएँ:**

  • **उपन्यास:** परख, अनुश्वा, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, जयवर्धन, मुक्तिबोध
  • **कहानी संग्रह:** वातायन, एक रात, दो चिड़िया, फाँसी, नीले देश की राजकन्या, पाश्व, खेल
  • **निबंध संग्रह:** प्रस्तुत प्रश्न, जड़ की बात, पूर्वोदय, साहित्य का श्रेय और प्रेय, सोच-विचार, समय और हम
  • **पुरस्कार:** साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत-भारती सम्मान, पद्मभूषण (भारत सरकार द्वारा)

    **विचारधारा:** प्रगतिशील गांधीवादी दृष्टिकोण। सामाजिक, आर्थिक, नैतिक और दार्शनिक प्रश्नों को सहज किंतु गहरे विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करते हैं।

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    **पाठ का परिचय: बाज़ार दर्शन**

    **विधा:** विचारप्रधान निबंध (विचार निबंध)

    **मूल विषय:** बाज़ार का मनोविज्ञान, उपभोक्तावाद की आलोचना, मनुष्य की इच्छा और संतुष्टि के बीच संबंध, और वास्तविक सुख की खोज।

    **लेखन शैली:** सरल, अनौपचारिक, किंतु गहरी दार्शनिक चेतना से युक्त। व्यक्तिगत अनुभव, मित्रों की कहानियों, और सामान्य जीवन उदाहरणों के माध्यम से अमूर्त विचारों को मूर्त करते हैं।

    **पाठ का महत्व:** आधुनिक उपभोक्तावादी समाज की आलोचना और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का संदेश। CBSE बोर्ड परीक्षा में यह पाठ निबंध और दर्शन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

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    **पाठ का सारांश और मुख्य विषयवस्तु**

    **बाज़ार क्या है?**

    बाज़ार सिर्फ एक व्यावसायिक स्थान नहीं है, बल्कि एक **मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक शक्ति** है जो मनुष्य की इच्छाओं को जगाता है और उसे क्रय के लिए प्रेरित करता है। यह मनुष्य की कमजोरियों का लाभ उठाता है।

    **मुख्य बिंदु:**

  • बाज़ार एक "तादू" (जादू) है जो आँख की राह काम करता है
  • यह रूप का जादू है, किंतु इसकी सीमा है - जेब भरी हो और मन खाली हो, तभी यह कारगर है
  • बाज़ार में अक्सर चीजें आवश्यकता के अनुरूप नहीं, बल्कि "पर्चेजिंग पॉवर" (क्रय शक्ति) के अनुपात में आती हैं
  • ---

    **बाज़ार का जादू: कार्य-प्रणाली**

    **इच्छा का जागरण**

    जब कोई बाज़ार चौपाल में खड़ा होता है, तो उसे अनुभव होता है कि:

  • **उसके पास कुछ कमी है**
  • **कहीं कुछ बेहतर उपलब्ध है**
  • **उसे और चीजों की आवश्यकता है**
  • **परिणाम:** निरंतर असंतुष्टि, तृष्णा और ईष्या का जन्म होता है।

    **उदाहरण:** एक व्यक्ति मोटरकार को देखकर (जिसे वह कभी कल्पना में भी नहीं सोचता था) अचानक वंचित महसूस करने लगता है। बाज़ार की दृश्यमान समृद्धि मन में एक तीव्र व्यंग्य-शक्ति पैदा करती है।

    **बाज़ार की व्यंग्य-शक्ति**

  • **परिभाषा:** बाज़ार की वह शक्ति जो मनुष्य को कमतर, असंतुष्ट और असमर्थ अनुभव कराती है
  • **कार्य:** जब मनुष्य अपने आस-पास की समृद्धि को देखता है, तो वह अपनी दरिद्रता का गहन बोध करता है
  • **परिणाम:** वह अपने परिवार, रिश्तों, और जीवन के साथ वर्तमान स्थिति में संतुष्ट रहना छोड़ देता है
  • ---

    **संतुष्टि बनाम तृष्णा: दो प्रकार के मनुष्य**

    **संयमी/संतुष्ट मनुष्य**

    **विशेषताएँ:**

  • जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए
  • अपनी आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से पहचानते हैं
  • बुद्धि और संयम से धन का उपयोग करते हैं
  • बाज़ार से केवल आवश्यक वस्तुएँ लेते हैं
  • **परिणाम:** बाज़ार का जादू उन पर काम नहीं करता। वे सीमित खरीदारी करते हैं और शांति से जीवन जीते हैं।

    **उदाहरण - भगत जी (घुरन बेचने वाले):**

  • दशकों से चूरन बेचते हैं
  • कभी छः आने से अधिक कमाई नहीं की
  • बाज़ार सरणी में रहते हैं, जहाँ लोकप्रिय हैं
  • कभी दुकान फैलाने या व्यापार बढ़ाने की चिंता नहीं की
  • चौपाल में खड़े होकर भी बाज़ार की चकाचौंध से अप्रभावित रहते हैं
  • खुली आँखों से बाज़ार को देखते हैं, किंतु न तो लालच होता है और न असंतुष्टि
  • संतुष्टि की यह स्थिति उनके मन को परिपूर्ण रखती है
  • **अतृप्त/लोभी मनुष्य**

    **विशेषताएँ:**

  • नहीं जानते कि उन्हें क्या चाहिए
  • सभी ओर से लालच उन्हें घेर लेता है
  • "और चाहिए, और चाहिए" की मानसिकता
  • बाज़ार की प्रत्येक चीज को अपना समझते हैं
  • **परिणाम:**

  • असंतुष्टि, तृष्णा और ईष्या से घायल होकर सदा के लिए बेकार हो जाते हैं
  • न तो कोई निर्धारित लक्ष्य रह जाता है
  • न ही निर्णय लेने की क्षमता
  • ---

    **मित्र की कहानी: दोहरी शिक्षा**

    **पहला मित्र - बाज़ार से लौटकर खाली हाथ**

    लेखक के एक मित्र दोपहर को बाज़ार गए और शाम को खाली हाथ लौटे।

    **संवाद:**

  • **लेखक:** "कहाँ रहे?"
  • **मित्र:** "बाज़ार देखते रहे।"
  • **लेखक:** "बाज़ार को देखते क्या रहे?"
  • **मित्र:** "क्यों? बाज़ार!"
  • **विश्लेषण:**

  • मित्र को बाज़ार की प्रत्येक वस्तु लेने की इच्छा थी
  • सबकुछ लेना चाहते थे, इसलिए कुछ भी नहीं ले सके
  • **मूल समस्या:** जो आवश्यकता स्पष्ट नहीं थी, वह लक्ष्य भी स्पष्ट नहीं रहा
  • **परिणाम:** ट्रास (निराशा) ही परिणाम, गति नहीं, कर्म नहीं
  • **सूत्र:** "यदि ठीक पता नहीं है कि क्या चाहते हो, तो सब ओर की चाह तुम्हें घेर लेगी।"

    ---

    **भगत जी: संतुष्ट जीवन का आदर्श**

    **भगत जी का परिचय और विशेषताएँ**

  • **पेशा:** घुरन (चूरन) विक्रेता
  • **समय:** दशकों से यही काम करते आ रहे हैं
  • **आय:** कभी छः आने (6 आने) से अधिक कमाई नहीं
  • **बाज़ार:** कोने वाली पान की दुकान से अपना सामान खरीदते हैं
  • **बाज़ार में भगत जी का व्यवहार**

    **चौपाल में उपस्थिति:**

  • आँखें खुली रहती हैं - किंतु हृदय खुला नहीं
  • आकर्षण नहीं, अप्रतिरोध नहीं
  • सभी लोगों को देखते और जानते हैं, किंतु मन में अनुराग है
  • कोई खाली भाव नहीं है
  • **खरीदारी की प्रवृत्ति:**

  • बड़े-बड़े स्टोर को छोड़कर कोने की पान-पसारी पर रुकते हैं
  • दो-चार अपनी काम की चीजें लेते हैं
  • अकुशलता से बाज़ार में विमुख नहीं हैं
  • किंतु जरूरत समझते हैं, तो केवल आवश्यक वस्तुएँ लेते हैं
  • **भगत जी की आध्यात्मिक शक्ति**

    **अद्भुत गुण:**

  • **दृढ़ प्रतिज्ञा:** जरूरा (जीरा) और काला नमक उन्हें चाहिए - बस यही उनका लक्ष्य
  • **निर्भय:** सारा चौपाल-बाज़ार की चकाचौंध उनके लिए व्यर्थ हो जाती है
  • **शांति:** बाज़ार की सारी सज्जा उनके लिए आमंत्रण नहीं रह जाती
  • **करुणा:** शेष सामान के प्रति कोई विद्रोह नहीं, प्रसन्नता ही है
  • **महत्वपूर्ण उद्धरण:**

    "बाज़ार को सार्थकता वही मनुष्य देता है जो जानता है कि वह क्या चाहता है। जो नहीं जानते, वे अपनी 'पर्चेजिंग पॉवर' के गर्व में केवल एक विनाशकारी शक्ति - शैतानी शक्ति, व्यंग्य की शक्ति ही बाज़ार को देते हैं।"

    ---

    **व्यंग्य-शक्ति का विश्लेषण**

    **परिभाषा और कार्य**

    **व्यंग्य-शक्ति:** बाज़ार की वह अमूर्त शक्ति जो मनुष्य के मन को कुंद करती है, उसे दीन बनाती है, और उसे स्वयं से नीचा दिखलाती है।

    **उदाहरण:**

  • मोटरकार को देखना = अपनी दरिद्रता का गहन बोध
  • सामर्थ्य से परे वस्तुओं को देखना = ईष्या और तृष्णा जन्माना
  • बाज़ार की समृद्धि = व्यक्तिगत असमर्थता की अनुभूति
  • **परिणाम:**

  • मनुष्य "व्यंग्य की कठिनता" से आहत हो जाता है
  • अपने परिवार और रिश्तों के प्रति कृतघ्न हो जाता है
  • क्षुद्र ईष्या में फँस जाता है
  • **व्यंग्य-शक्ति और निर्बलता**

    **लेखक का कथन:**

    "जहाँ तृष्णा है, बचत रखने की स्पृहा है, वहाँ उस शक्ति का बीज नहीं है।"

    **सत्य:**

  • संचय की तृष्णा = व्यक्ति की निर्बलता
  • जो निर्बल होते हैं, वे धन की ओर झुकते हैं
  • यह बात ऐतिहासिक सत्य मानी जाती है
  • **विरोधाभास:**

  • एक ओर लोभ को पराजित करने का उपदेश
  • दूसरी ओर इसी लोभ से मनुष्य की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था चलती है
  • ---

    **मन की अवस्थाएँ और बाज़ार**

    **मन खाली हो**

    **अर्थ:** जब मनुष्य का मन इच्छा-विहीन न हो, किंतु विशिष्ट आवश्यकताओं से रहित हो।

    **स्थिति:**

  • बाज़ार की सभी चीजें आकर्षक लगती हैं
  • प्रत्येक वस्तु एक बुलावा प्रतीत होती है
  • असंख्य विकल्प से मनुष्य भ्रमित हो जाता है
  • **परिणाम:** बाज़ार का जादू पूरी तरह कार्य करता है।

    **मन भरा हो (निश्चित लक्ष्य के साथ)**

    **अर्थ:** जब मनुष्य को पता हो कि उसे क्या चाहिए।

    **स्थिति:**

  • बाज़ार सिर्फ एक सेवक बन जाता है
  • फैली-पसारी चकाचौंध व्यर्थ हो जाती है
  • विक्रय केवल आवश्यक वस्तुओं तक सीमित रहता है
  • **परिणाम:** बाज़ार से सार्थक लाभ उठाया जा सकता है।

    **मन बंद हो (निषेध के साथ)**

    **लेखक का विरोध:**

  • तमाम इच्छाओं का दमन (निरोध) गलत है
  • यह तो "निषेध ब्रह्मचर्य" है = नकारात्मक तपस्या
  • यह रजिस्तान (रेगिस्तान) की ओर ले जाती है, मोक्ष की नहीं
  • मन को बंद करके केवल विकृत होता है
  • **सही मार्ग:**

  • मन को खुला रखो, किंतु अनिवार्य इच्छाओं से परिचित रहो
  • पूर्णता की खोज न करो, अपूर्णता को स्वीकार करो
  • व्यक्ति अपूर्ण है, यह ही सत्य है
  • ---

    **पूर्णता बनाम अपूर्णता: गहरी दार्शनिकता**

    **अपूर्णता का महत्व**

    **लेखक का दर्शन:**

    "यदि हम में पूर्णता होती, तो परमात्मा से अभिन्न होकर हम महाशून्य ही न होते?"

    **अर्थ:**

  • अपूर्णता ही मनुष्य की पहचान है
  • अपूर्णता ही मनुष्य को क्रिया के लिए प्रेरित करती है
  • सच्चा ज्ञान अपूर्णता के बोध में ही निहित है
  • **सच्चा ज्ञान और सच्चा कर्म**

    **सच्चा ज्ञान:**

  • सदा अपूर्णता के बोध को गहरा करता है
  • यह विनम्रता सिखाता है
  • **सच्चा कर्म:**

  • अपूर्णता की स्वीकृति के साथ होता है
  • स्वहृदय से संपन्न होता है
  • व्यापक न होकर क्षुद्र हो जाता है (यदि पूर्णता का भ्रम हो)
  • ---

    **शून्यता बनाम पूर्णता**

    **जड़ योग (हठ योग) की आलोचना**

    **समस्या:**

  • आँख बंद करके भी आकार दिख जाता है
  • मन को बंद करना असंभव है
  • दमन से केवल विकृति आती है, मुक्ति नहीं
  • **उदाहरण:**

  • आँख फोड़ने से क्या रूप दिखना बंद हो जाता है?
  • क्या आँख बंद करके हम स्वप्न नहीं देखते?
  • क्या वे स्वप्न चैन-भंग नहीं करते?
  • **निष्कर्ष:**

    "शायद हठ ही हठ है, योग नहीं है।"

    ---

    **बाज़ार की सार्थकता: केवल आवश्यकता में**

    **बाज़ार का वास्तविक उद्देश्य**

    **परिभाषा:** बाज़ार की सार्थकता केवल आवश्यकता के समय काम आने में है।

    **उदाहरण - भगत जी:**

  • जरूरा और काला नमक चाहिए = आवश्यकता स्पष्ट
  • यही सामान एक छोटी पान-पसारी से ले लिया
  • भीड़ भरे बाज़ार की अवहेलना
  • शांति से घर लौट आए
  • **सूत्र:**

    "जरूरत-भर जीरा वहाँ से ले लिया कि फिर सारा चौपाल उनके लिए 'नहीं के बराबर' हो जाता है।"

    ---

    **बाज़ारूपण (आर्टिफिशियलीकरण) की आलोचना**

    **बाज़ारूपण क्या है?**

    **परिभाषा:** जब बाज़ार अपनी वास्तविक सेवक भूमिका को छोड़कर आकर्षक, चकाचौंध भरा और लोभजनक बन जाता है।

    **परिणाम:**

  • खरीद-बिक्री में धोखा और शोषण शुरू होता है
  • पारस्परिक सद्भाव समाप्त हो जाता है
  • व्यक्ति दूसरे को ठगने की मानसिकता से काम करते हैं
  • **बाज़ार और शोषण**

    **परिस्थिति:**

    "कभी-कभी बाज़ार में आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है।"

    **कारण:**

  • जब आवश्यकता समाप्त नहीं होती
  • जब लोभ की तृष्णा बढ़ती है
  • जब एक का हानि दूसरे का लाभ समझा जाता है
  • **परिणाम:**

  • व्यक्ति एक-दूसरे को ठगने की घात में रहते हैं
  • भाई-भाई और सद्भाव समाप्त हो जाते हैं
  • केवल क्रेता-विक्रेता बचते हैं
  • ---

    **अर्थशास्त्र और नीति-शास्त्र**

    **अर्थशास्त्र की समस्या**

    **लेखक का आरोप:**

    "जो अर्थशास्त्र केवल बाज़ार का पोषण करता है, वह अनीति-शास्त्र है।"

    **कारण:**

  • यह पूरी मानवता को नहीं, केवल बाज़ार को देखता है
  • इसमें नैतिकता का कोई स्थान नहीं
  • यह केवल लाभ-हानि की गणना करता है
  • **माया और बाज़ार**

    **पत्नी और ईश्वर का संबंध:**

  • "स्त्री माया न जोड़े, तो क्या मैं जोड़ूँ?"
  • इसका अर्थ नहीं कि स्त्री दोषी है
  • अर्थ है कि ऐतिहासिक परिस्थितियों ने स्त्री को यह भूमिका दी
  • बाज़ार भी इसी परिस्थिति-जन्य माया है
  • ---

    **सामाजिक समरसता और बाज़ार**

    **बाज़ार की एक सकारात्मक भूमिका**

    **दृष्टिकोण:** बाज़ार जाति, धर्म, क्षेत्र नहीं देखता - केवल क्रय-शक्ति देखता है।

    **परिणाम:**

  • किसी सीमा तक सामाजिक समानता आती है
  • सभी को बराबरी का अधिकार मिलता है
  • **सीमा:**

  • यदि यह समानता केवल खरीद-बिक्री तक सीमित हो
  • यदि पारस्परिक सद्भाव न हो
  • तो यह व्यावहारिक समानता ही नहीं, केवल बाज़ारी समानता है
  • ---

    **मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: दो उदाहरण**

    **उदाहरण 1: खरीद लाता है अनंत असंतुष्टि**

    **घटना:** लेखक का एक मित्र बाज़ार जाता है, एक साधारण वस्तु लेने की नीयत से।

    **परिणाम:**

  • घर लौटते समय कई बंडल पैकेज लिए
  • "मनीबैग में सब कुछ उड़ गया, अब रेलगाड़ी के टिकट के लिए भी बचा नहीं"
  • **विश्लेषण:**

  • आवश्यकता स्पष्ट न रहने से क्रय-शक्ति का दुरुपयोग
  • पर्चेजिंग पावर के अनुरूप खरीद, आवश्यकता के अनुरूप नहीं
  • **उदाहरण 2: मोटरकार से व्यंग्य की व्यथा**

    **घटना:** लेखक पैदल चल रहे हैं, तभी एक मोटरकार धूल उड़ाती निकल जाती है।

    **मनोविश्लेषण:**

  • सिर्फ मोटरकार ने नहीं, बल्कि उसकी "व्यंग्य-शक्ति" ने पीड़ा दी
  • अचानक अहसास: "मैं वंचित हूँ"
  • एक तीव्र असंतुष्टि का जन्म
  • **गहराई:**

  • "यह व्यंग्य इतना तीव्र है कि क्षणभर में पूरे परिवार के प्रति वर्तमान बना सकता है"
  • "हाय, ये ही माँ-बाप रह गए थे जिनके यहाँ मैं जन्म लूँ!"
  • **निष्कर्ष:** बाज़ार की सबसे बड़ी हिंसा मनस्ताप है।

    ---

    **पाठ की संरचना और तर्क-क्रम**

    **प्रस्तावना: मित्र की खरीदारी**

    1. एक मित्र बाज़ार से एक साधारण वस्तु लेकर आते हैं

    2. किंतु पत्नी की "महिमा" के कारण अनेक चीजें साथ आती हैं

    3. पैसा → सामान → असंतुष्टि

    **मुख्य विषय: बाज़ार का तादू (जादू)**

    1. बाज़ार एक जादू है

    2. इसकी सीमा है - जेब भरी, मन खाली

    3. यह शैतान का जाल है

    4. यह "और चाहिए" की भावना पैदा करता है

    **विश्लेषण: संतुष्ट बनाम अतृप्त**

    1. **संयमी मनुष्य:** बाज़ार से लाभ उठाता है

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    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. प्रेमचंद के अनुसार, एक मित्र बाज़ार से कुछ साधारण वस्तुओं को खरीदने गया, लेकिन कई बंडल लेकर लौटा। इसका कारण क्या था?

    • A. उसकी पत्नी की महिमा और 'पर्चेजिंग पावर' की शक्ति ✓
    • B. बाज़ार में बहुत सस्ता सामान था
    • C. उसके पास सेना (पैसा) बहुत था और वह बुद्धिमान था
    • D. वह बिना जरूरत के चीजें खरीदना पसंद करता था

    Answer: A — प्रेमचंद निबंध में कहते हैं कि पैसा पावर है और यह महिमा प्रदर्शित करती है, जिससे अनावश्यक खरीदारी होती है।

    Q2. निबंध में चुंबक का उदाहरण किस विचार को समझाने के लिए दिया गया है?

    • A. बाज़ार की शक्ति सर्वत्र समान रूप से कार्य करती है
    • B. बाज़ार का जादू केवल उसी पर काम करता है जिसकी सेना (पैसा) भरी हो ✓
    • C. चुंबक बाज़ार की तरह मनुष्य को आकर्षित करता है
    • D. धातु और पैसा दोनों में समान गुण होते हैं

    Answer: B — चुंबक लोहे पर ही काम करता है, वैसे ही बाज़ार का सम्मोहन केवल उसी पर काम करता है जिसके पास पैसा हो।

    Q3. अपने मित्र की विफलता से प्रेमचंद कौन-सा सबक सीखते हैं?

    • A. बाज़ार कभी संतुष्टि नहीं देता
    • B. जो कुछ न लूँ तो क्या? सभी चीजें लेने की इच्छा होती है, पर कुछ छोड़ने की बात न समझ आए तो सब छूट जाता है ✓
    • C. पैसा बाज़ार में ही खर्च हो जाता है
    • D. खरीदारी का कोई फायदा नहीं है

    Answer: B — निबंध में प्रेमचंद कहते हैं कि जब तक यह न समझ आए कि कौन-सी चीजें आवश्यक हैं, तब तक आवश्यकता से परे की सभी इच्छाएं घेर लेती हैं।

    Q4. प्रेमचंद के अनुसार, 'बुद्धिमान' व्यक्ति का बाज़ार से क्या संबंध होता है?

    • A. वह बाज़ार में जाता ही नहीं है
    • B. वह अपनी बुद्धि और संयम से पैसे को जोड़ता-जोड़ता है और पैसे की शक्ति को इतना निश्चित समझता है कि उसके प्रयोग की परीक्षा की जरूरत नहीं समझता ✓
    • C. वह सभी वस्तुओं को खरीदता है
    • D. वह बाज़ार के आकर्षण से सदा प्रभावित रहता है

    Answer: B — प्रेमचंद संयमी व्यक्ति को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि वह पैसे की शक्ति को समझ कर उसका सही उपयोग करता है।

    Q5. बाज़ार से व्यक्ति को असंतोष और तृष्णा से बचाने का मुख्य उपाय क्या है?

    • A. बाज़ार में कभी न जाना
    • B. मन को किसी निश्चित लक्ष्य से भर देना ताकि बाज़ार का प्रभाव खत्म हो ✓
    • C. सभी इच्छाओं का निरोध कर देना
    • D. पैसा खर्च न करना

    Answer: B — प्रेमचंद कहते हैं कि मन लक्ष्य से भरा हो तो बाज़ार भी पैला-का-पैला रह जाता है और घाव नहीं देता।

    Q6. निबंध में कौन-सी स्थिति सबसे खतरनाक मानी गई है?

    • A. सेना भरी, मन खाली ✓
    • B. सेना खाली, मन खाली
    • C. सेना भरी, मन भरा
    • D. सेना खाली, मन भरा

    Answer: A — प्रेमचंद के अनुसार, जब पैसा (सेना) हो पर मन खाली हो, तब बाज़ार का जादू सबसे अधिक काम करता है।

    Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन प्रेमचंद के विचार के विरुद्ध है? (I) इच्छा-निरोध सही पथ है। (II) बाज़ार की वास्तविक कृतार्थता आवश्यकता के समय काम आना है।

    • A. केवल कथन (I) गलत है ✓
    • B. केवल कथन (II) गलत है
    • C. दोनों कथन गलत हैं
    • D. दोनों कथन सही हैं

    Answer: A — प्रेमचंद इच्छा-निरोध को आत्मघाती कहते हैं और कहते हैं कि इच्छा-निर्देशन ही सही है, जबकि कथन (II) उनके मत से सर्वथा सहमत है।

    Q8. पानी पीकर नदी जाने का उदाहरण निबंध में किस अर्थ में दिया गया है?

    • A. यह दिखाता है कि खाली पेट नदी नहीं जाना चाहिए
    • B. जिस प्रकार पानी पीने से लूट का जादू खत्म हो जाता है, उसी तरह मन को ज्ञान-लक्ष्य से भरने से बाज़ार का आकर्षण समाप्त हो जाता है ✓
    • C. यह सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक सलाह है
    • D. यह दिखाता है कि बाज़ार खतरनाक है

    Answer: B — प्रेमचंद इस उदाहरण से समझाते हैं कि मन को सार्थक लक्ष्य से भर देने से बाज़ार का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

    Q9. आँख बंद करने का तर्क निबंध में किस संदर्भ में खंडित किया गया है?

    • A. क्योंकि लोभ आँख बंद करने से नष्ट नहीं होता
    • B. क्योंकि आँख बंद करने पर भी सपने देख लेते हैं और स्वर्ग की कल्पना करते हैं ✓
    • C. क्योंकि लोभ मन में है, आँखों में नहीं
    • D. क्योंकि आँख बंद करना असंभव है

    Answer: B — प्रेमचंद कहते हैं कि आँख बंद करने पर भी स्वप्न देखते हैं, इसलिए केवल आँख बंद करना समाधान नहीं है।

    Q10. निबंध के अनुसार, कौन-सा व्यक्ति बाज़ार से अपने आप को सबसे अधिक नुकसान में डालता है? (A) वह जो संयम से पैसे खर्च करता है (B) वह जो बाज़ार न जाए (C) वह जो अपनी आवश्यकता न समझता हो और सब कुछ खरीदना चाहता हो (D) वह जो सेना भरी हो पर मन भरा हो

    • A. वह जो संयम से पैसे खर्च करता है
    • B. वह जो बाज़ार न जाए
    • C. वह जो अपनी आवश्यकता न समझता हो और सब कुछ खरीदना चाहता हो ✓
    • D. वह जो सेना भरी हो पर मन भरा हो

    Answer: C — प्रेमचंद कहते हैं कि जो अपनी आवश्यकता नहीं समझता, उसे बाज़ार की सभी वस्तुओं की निंदा सुनाई देती है और वह असंतोष से पीड़ित रहता है।

    Flashcards

    बाज़ार दर्शन निबंध का मुख्य विषय क्या है?

    बाज़ार की जादुई शक्ति और मानवीय इच्छा के बीच संबंध तथा आत्मनियंत्रण के उपाय।

    प्रेमचंद के अनुसार पैसा वास्तव में क्या है?

    पैसा केवल एक संख्या है, असली शक्ति तो उसके साथ आने वाली वस्तुओं में निहित है।

    'पर्चेजिंग पावर' शब्द का क्या अर्थ है?

    किसी की खरीदारी की क्षमता या पैसे की ताकत जो बाज़ार में वस्तुओं को आकर्षित करती है।

    बाज़ार का सबसे बड़ा हथकंडा कौन-सा है?

    मनुष्य को यह विश्वास दिलाना कि उसके पास अभी कुछ कमी है और उसे और चीजें चाहिए।

    प्रेमचंद बाज़ार से बचाव के लिए क्या सुझाव देते हैं?

    मन को किसी निश्चित लक्ष्य या उद्देश्य से भर देना ताकि बाज़ार का आकर्षण प्रभावहीन रहे।

    कौन-सा व्यक्ति बाज़ार से असंतुष्ट हो जाता है?

    वह जो अपनी आवश्यकता का भेद नहीं समझता और सभी चीजें खरीदना चाहता है।

    मन को खाली रखने का क्या खतरा है?

    खाली मन बाज़ार की असंख्य वस्तुओं की निंदा सुनता है और असंतोष व तृष्णा से पीड़ित हो जाता है।

    चुंबक का तर्क निबंध में किस संदर्भ में आया है?

    जिस तरह चुंबक केवल लोहे पर काम करता है, उसी तरह बाज़ार का जादू सेना भरी पर ही काम करता है।

    बाज़ार की वास्तविक कृतार्थता क्या है?

    जब आवश्यकता के समय बाज़ार काम आए और मनुष्य को वास्तविक लाभ दे।

    इच्छा-निरोध और इच्छा-निर्देशन में क्या अंतर है?

    इच्छा-निरोध सभी इच्छाओं को दबाना है जो आत्मघाती है, जबकि इच्छा-निर्देशन उन्हें सार्थक लक्ष्य की ओर मोड़ना है।

    Important Board Questions

    बाज़ार दर्शन निबंध का मुख्य उद्देश्य क्या है? (2 अंक) [2 marks]

    प्रेमचंद की गांधीवादी चिंतन-दृष्टि और आर्थिक दर्शन — बाज़ार की शक्ति बनाम आत्मनियंत्रण। वाणिज्यवाद पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण।

    प्रेमचंद के अनुसार बाज़ार का जादू कब और कैसे काम करता है? अपने उत्तर को दो उदाहरणों से समर्थित कीजिए। (5 अंक) [5 marks]

    चुंबक का उदाहरण (सेना भरी + मन खाली = जादू काम करता है) और पानी का उदाहरण (मन लक्ष्य से भरा = बाज़ार निरर्थक)। पर्चेजिंग पावर की व्याख्या।

    प्रेमचंद के विचार से आधुनिक उपभोक्तावादी समाज को क्या सीख मिल सकती है? उपभोक्ता के रूप में आत्मनियंत्रण की महत्ता को समझाइए। (6 अंक) [6 marks]

    इच्छा-निरोध बनाम इच्छा-निर्देशन का अंतर। आवश्यकता बनाम लालच की पहचान। बाज़ार से बचाव के व्यावहारिक उपाय और गांधीवादी जीवन-दर्शन का आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता।

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