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**मूल नाम:** धनपत राय
**जन्म:** संवत् 1880 (ईस्वी में), लमही गाँव, उत्तर प्रदेश
**मृत्यु:** संवत् 1936
**प्रमुख रचनाएँ:**
**साहित्यिक महत्व:**
प्रेमचंद को हिंदी कथा-साहित्य का शिखर पुरुष माना जाता है। हिंदी साहित्य के इतिहास में कहानी और उपन्यास विधा का विकास प्रेमचंद को केंद्र में रखकर तीन कालों में बाँटा जाता है—**प्रेमचंद-पूर्व युग, प्रेमचंद युग, प्रेमचंदोत्तर युग।** यह प्रेमचंद के निर्विवाद महत्व का प्रमाण है।
**रचनात्मक विकास:**
प्रेमचंद की कहानी और उपन्यास की विधा कल्पना, संयोग और रूमानियत के धुँधलके से निकलकर **यथार्थ की ठोस जमीन पर प्रतिष्ठित हुई।** उन्होंने **हिंदुस्तानी (हिंदी-उर्दू मिश्रित) भाषा** का सशक्त प्रयोग किया। उनकी भाषा अपने पूरे ठाठ-बाट और जातीय स्वरूप के साथ आई।
**यथार्थवादी विकास की यात्रा:**
प्रेमचंद की रचनाएँ **आदर्शोन्मुख यथार्थवाद** से **आलोचनात्मक यथार्थवाद** तक का विकास दिखाती हैं। **आदर्शोन्मुख यथार्थवाद** (यह शब्द प्रेमचंद ने ही गढ़ा) उन रचनाओं पर लागू होता है जो कठु यथार्थ का चित्रण करते हुए भी समस्याओं और अंतर्विरोधों को अंततः एक आदर्शवादी और मनोवांछित समाधान तक पहुँचा देती हैं। उदाहरण—**सेवासदन, प्रेमाश्रम** आदि।
बाद की रचनाओं में (जैसे **गोदान, गबन, कफन** आदि) प्रेमचंद ने कठोर वास्तविकता को प्रस्तुत किया बिना किसी तरह का समझौता किए।
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**प्रथम प्रकाशन:** 1914 ईस्वी
यह कहानी **आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का एक मुकम्मल उदाहरण** है। कहानी में आए एक मुहावरे के अनुसार, **यह धन के ऊपर धर्म की जीत की कहानी है।**
**मूल विषय:** धन और धर्म का द्वंद्व, जहाँ:
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**1. मुंशी वंशीधर:**
**2. पंडित अलोपीदीन:**
**3. बदलू सिंह:**
**4. वंशीधर के पिता:**
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**ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:**
जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वर-प्रदत्त वस्तु के व्यवहार पर प्रतिबंध लगा, तब लोग चोरी-छिपे नमक का व्यापार करने लगे। इसके लिए अनेक प्रकार के **छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ**—कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से।
**अधिकारियों की भ्रष्टता:**
**सामाजिक परिस्थिति:**
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**पिता का उपदेश (मूल संदेश):**
पिता वंशीधर को समझाते हैं:
**व्यावहारिक निर्देश:**
1. नौकरी में आहेदे की ओर ध्यान मत देना, **यह तो पीर का मसार है** (असाध्य कष्ट)
2. **निगाह चढ़ाओ और चादर पर रखनी चाहिए**—अपनी हैसियत के अनुसार रहो
3. ऐसा काम ढूँढो जहाँ कुछ ऊपरी आय हो
**पिता की अर्थव्यवस्था की शिक्षा:**
**नैतिकता का पक्ष:**
इन सिद्धांतों के आधार पर ही वंशीधर की आगे की कहानी निर्मित होती है।
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डाँटकर पूछा—**किसकी गाड़ियाँ हैं?**
सैनिकों में कुछ कानाफूसी हुई, फिर आगे वाले ने कहा—**पंडित अलोपीदीन की!**
यह सूचना वंशीधर के संदेह को और ठोस करती है।
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**पंडित अलोपीदीन अपने रथ पर सवार होकर, कुछ सोते-कुछ जागते चले आते थे।** अचानक गाड़ीवानों ने जगाया और बताया—**दारोगा ने गाड़ियाँ रोक दीं और घाट पर खड़े होकर आपको बुलाते हैं।**
**पंडित का मानस:**
**लेटे ही लेटे गर्व से बोले—चलो, हम आते हैं।**
यह वाक्य पंडित के **पूर्ण आत्मविश्वास और धन के प्रति अपने निर्भरता** को दर्शाता है। उन्हें पूर्ण भरोसा है कि **यह छोटा-मोटा दारोगा अलोपीदीन के आगे क्या चीज है।**
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वंशीधर ने **पंडित के प्रति सरकारी गुस्से का लहजा अपनाते हुए कहा—किसकी गाड़ियाँ हैं?**
पंडित ने उत्तर दिया—**पंडित अलोपीदीन की!**
**दारोगा की प्रारंभिक सौजन्यता:**
"कौन पंडित अलोपीदीन?" दारोगा को पहचान नहीं थी।
जब जानकारी मिली कि वह **दातागंज के सबसे बड़े जमींदार, लाखों का लेन-देन करने वाले** हैं, तब भी **दारोगा का संदेह बढ़ा।**
दारोगा ने **गर्म होकर कहा—क्या तुम सब गूँगे हो गए हो? हम पूछते हैं, इनमें क्या लादा है?**
किसी ने उत्तर न दिया। **दारोगा का संदेह और भी बढ़ा।**
एक गाड़ी को **लाठी से तोड़ा।** **भ्रम दूर हो गया—यह नमक के ढेले थे।**
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जब वंशीधर ने औपचारिकता से कहा—**सरकारी हुक्म!**
**पंडित अलोपीदीन ने हँसते हुए जवाब दिया:**
**यह बयान पंडित के आत्मविश्वास को दर्शाता है कि धन के सामने सब कुछ झुक जाता है।**
किंतु वंशीधर को **ऐश्वर्य की मोहिनी** का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
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पंडित अलोपीदीन को जब समझ आया कि **छोटा-मोटा लालच नहीं सुनेगा**, तब उन्होंने **धन का तोपचाल शुरू किया।**
किंतु अभी तक **धन की साँख्यिक शक्ति का पूरा भरोसा था।** अपने मुख्तार से बोले—
**"लाला जी, एक हजार के नोट बाबू साहब को भेंट करो, आप इस समय भूखे सिंह हो रहे हैं।"**
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जब **दूसरे दिन पंडित अलोपीदीन अभियुक्त होकर कांस्टेबलों के साथ, हाथों में हथकड़ियाँ, ह्रदय में ग्लानि और क्षोभ लिए, लज्जा से गरदन झुकाते, अदालत की ओर चले**, तो **पूरे शहर में हलचल मच गई।**
**भीड़ का दृश्य:**
सभी लोग **सहानुभूति प्रकट करते थे** क्योंकि:
**यहाँ तक कि मुंशीजी को न्याय भी अपनी ओर से कुछ खिचा हुआ दिख पड़ता था।**
**मुकदमा शीघ्र ही समाप्त हो गया।**
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डिप्टी मजिस्ट्रेट ने अपनी तजवीज में लिखा:
**सामाजिक स्तर, आर्थिक शक्ति और राजनीतिक प्रभाव न्याय को कैसे विकृत कर सकते हैं।**
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**कार्य-पराभवता का दंड मिला।** मुअत्तली (निलंबन) का परवाना आ गया।
जब **मुंशी वंशीधर इस दुरावस्था में घर पहुँचे** और **बूढ़े पिताजी ने समाचार सुना**, तो **सिर पीट लिया।**
**पिता की प्रतिक्रिया:**
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**बूढ़े मुंशीजी तो पहले ही से कुड़कुड़ा रहे थे कि चलते-चलते इस लड़के को समझाया था किंतु इसने एक न सुनी। सब मनमानी करता है।**
उनका विचार:
जब **पिता इस दुर्दशा में घर पहुँचते हैं, तो उन्हें समझ आता है कि लड़का अभाग
Q1. प्रेमचंद का जन्म किस गाँव में हुआ था?
Answer: A — प्रेमचंद का जन्म संन् 1880 में लमही गाँव (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
Q2. साहित्य को प्रेमचंद ने किसके साथ तुलना की है?
Answer: B — प्रेमचंद के अनुसार साहित्य वह जादू की लकड़ी है जो पशुओं, इंटों, पत्थरों और पेड़ों में भी विश्व की आत्मा का दर्शन करा देती है।
Q3. नमक का दारोगा कहानी का प्रथम प्रकाशन कब हुआ?
Answer: C — नमक का दारोगा कहानी का प्रथम प्रकाशन संन् 1914 में हुआ था।
Q4. नमक का दारोगा में कौन-सी कहानी (मुहावरे) का संकेत है?
Answer: B — नमक का दारोगा कहानी में धन (लोभ) और धर्म (ईमानदारी) का द्वंद्व है, और अंत में धर्म की विजय दिखाई जाती है।
Q5. आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का क्या अर्थ है?
Answer: B — आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का अर्थ है कठोर यथार्थ का चित्रण करते हुए भी समस्याओं को अंततः एक आदर्शवादी और मनोवांछित समाधान तक पहुंचाना।
Q6. प्रेमचंद की किस रचना को आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण नहीं माना जा सकता?
Answer: C — गोदान प्रेमचंद की बाद की रचना है जिसमें आदर्शोन्मुख प्रवृत्ति कम है और आलोचनात्मक यथार्थवाद अधिक है।
Q7. हिंदी साहित्य का कालविभाजन किसको केंद्र में रखकर किया गया है?
Answer: C — हिंदी साहित्य के इतिहास में कथा-साहित्य का कालविभाजन प्रेमचंद को केंद्र में रखकर प्रेमचंद-पूर्व, प्रेमचंद और प्रेमचंदोत्तर युग में किया जाता है।
Q8. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन प्रेमचंद के बारे में सत्य नहीं है? (A) वे अंग्रेजी में एम.ए. करना चाहते थे (B) उन्होंने महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन में भाग नहीं लिया (C) उनकी पत्नी का नाम शिवरानी देवी था (D) उन्होंने हिंदुस्तानी भाषा का प्रयोग किया
Answer: D — प्रेमचंद ने फारसी का नहीं, बल्कि हिंदुस्तानी (हिंदी-उर्दू मिश्रित) भाषा का अधिक प्रयोग किया।
Q9. यदि कोई लेखक कठोर वास्तविकता को प्रस्तुत करे और उसमें कोई समझौता न करे, तो वह किस प्रकार का यथार्थवाद लिखता है?
Answer: B — प्रेमचंद की बाद की रचनाओं में आलोचनात्मक यथार्थवाद दिखाई देता है जहाँ कठोर वास्तविकता को बिना किसी समझौते के प्रस्तुत किया जाता है।
Q10. नमक का दारोगा कहानी में मुंशी वंशीधर और पंडित अलोपीदीन के बीच संघर्ष किसका प्रतीक है?
Answer: B — नमक का दारोगा में ईमानदार कर्मचारी मुंशी वंशीधर और धनी जमींदार पंडित अलोपीदीन के बीच संघर्ष धर्म और धन (लोभ) के बीच का द्वंद्व है।
Q11. प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं का विषय क्यों सामाजिक जीवन से लिया?
Answer: C — प्रेमचंद की राजनीतिक और सामाजिक चेतना उनकी रचनाओं में सामाजिक संघर्ष को लाई, क्योंकि वे विश्वास करते थे कि साहित्य समाज को बदल सकता है।
प्रेमचंद का जन्म और मृत्यु कब हुई?
प्रेमचंद का जन्म संन् 1880 में लमही गाँव (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और मृत्यु संन् 1936 में हुई।
साहित्य क्या है प्रेमचंद के अनुसार?
साहित्य वह जादू की लकड़ी है जो पशुओं, इंटों, पत्थरों, पेड़ों में भी विश्व की आत्मा का दर्शन करा देती है।
आदर्शोन्मुख यथार्थवाद से क्या तात्पर्य है?
कठुर यथार्थ का चित्रण करते हुए भी समस्याओं और अंतर्विरोधों को अंततः एक आदर्शवादी और मनोवांछित समाधान तक पहुंचाना।
नमक का दारोगा कहानी का मूल विषय क्या है?
धन और धर्म का द्वंद्व जिसमें धर्मनिष्ठ मुंशी वंशीधर अंत में धर्म की विजय दर्शाते हैं।
मुंशी वंशीधर का पिता उसे किस सलाह का उपदेश देता है?
पिता ने वंशीधर को ईमानदारी, दायित्वबोध और ऊपरी आय लेने की चेतावनी दी है।
प्रेमचंद की किस रचना को आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण माना जाता है?
सेवासदन, प्रेमाश्रम जैसे उपन्यास और पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, नमक का दारोगा जैसी कहानियाँ।
हिंदी साहित्य के इतिहास में प्रेमचंद का क्या स्थान है?
प्रेमचंद को कथा-साहित्य के शिखर पुरुष माना जाता है और हिंदी साहित्य का कालविभाजन (प्रेमचंद-पूर्व, प्रेमचंद, प्रेमचंदोत्तर) उन्हीं को केंद्र में रखकर किया जाता है।
नमक का दारोगा में पंडित अलोपीदीन का कौन-सा गुण उसे सफल बनाता है?
पंडित अलोपीदीन की धन की शक्ति, लालच और भ्रष्टाचार का ज्ञान उसे ईमानदार मुंशी को पराजित करने का साधन देता है।
प्रेमचंद की भाषा की विशेषता क्या है?
प्रेमचंद ने हिंदुस्तानी (हिंदी-उर्दू मिश्रित) भाषा का प्रयोग किया जो व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचने के लिए उपयुक्त है।
कहानी के अंत में मुंशी वंशीधर को कौन-सा पद और पुरस्कार मिलता है?
पंडित अलोपीदीन वंशीधर को सरकारी महकमे से बर्खास्त करवाते हैं लेकिन अपनी सारी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त करते हैं।
साहित्य की परिभाषा प्रेमचंद के अनुसार क्या है? [2 marks]
साहित्य = जादू की लकड़ी; इसका प्रमुख कार्य = आत्मा का दर्शन करवाना (यहाँ तक कि निर्जीव वस्तुओं में भी)।
नमक का दारोगा कहानी में मुंशी वंशीधर के पिता ने उसे किन मूल्यों की शिक्षा दी? इन शिक्षाओं का उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? [5 marks]
पिता की सीख = ईमानदारी, दायित्वबोध, ऊपरी आय से बचना; प्रभाव = वंशीधर ने ईमानदार व्यवहार किया लेकिन भ्रष्ट समाज में असहाय रहा; अंत = आदर्श की विजय।
प्रेमचंद के साहित्य में आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का विकास कैसे हुआ? नमक का दारोगा इसका कैसे उदाहरण है? [6 marks]
विकास = कल्पना से यथार्थवाद तक; आदर्शोन्मुख = समस्याएँ दिखाना + आदर्शवादी समाधान; नमक का दारोगा = भ्रष्टाचार दिखाए लेकिन धर्म की विजय से समाप्त किया (निराशावाद से बचना); गोदान जैसी बाद की कहानियों में यह आदर्शवाद कम होता है।
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