StudyOSStudyOS CBSE Study Material, Class 5–12

Miyan Nasiruddin

NCERT Class 11 · Hindi Based on NCERT Class 11 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Everything you need to ace this chapter, in one place.
Notes · Mind Map · Quiz · Assertion-Reason · Case Studies · Question Bank · Past Papers

Get Full Study Kit →
Studying with friends? Send them this chapter.

Chapter Notes

**मियाँ नसीरुद्दीन — कृष्णा सोबती के शब्दचित्र — विस्तृत अध्ययन नोट्स**

**लेखिका परिचय — कृष्णा सोबती**

**जन्म और जीवन:**

  • जन्म — 18 फरवरी 1925 को गुजरात (पश्चिमी पंजाब) में, जो वर्तमान में पाकिस्तान है
  • प्रमुख कृतियाँ — फिंदगीनामा, दिलो दानिश, ऐ लड़की, समय सरगम (उपन्यास); डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, बादलों के घेरे, सूरजमुखी अँधेरे के (कहानी संग्रह); हे-हशमत, शब्दों के आलोक में (शब्दचित्र, संस्मरण)
  • पुरस्कार — साहित्य अकादेमी सम्मान, हिंदी अकादेमी का शलाका सम्मान, साहित्य अकादेमी की मानद सदस्यता, राष्ट्रीय पुरस्कार
  • मृत्यु — 25 जनवरी 2019
  • **साहित्यिक महत्त्व:**

  • **हिंदी साहित्य में विशिष्ट पहचान** — "कम लिखना विशिष्ट लिखना है" — यह उनका सिद्धांत है
  • संयमित लेखन और साफ-सुथरी रचनात्मकता ने एक नया पाठक वर्ग बनाया
  • **मेमोरेबल पात्र** — मित्रो, शाहनी, हशमत जैसे अमर पात्र हिंदी साहित्य को दिए
  • **भारत-पाकिस्तान विभाजन पर रचनाएँ** — यशपाल का झूठा-सच, राही मासूम रज़ा का आधा गाँव, भीष्म साहनी का तमस के साथ फिंदगीनामा इसी संदर्भ की महत्वपूर्ण कृति है
  • **संस्मरण क्षेत्र में विशिष्ठता** — हे-हशमत शीर्षक से इन्होंने अपने एक दूसरे व्यक्तित्व के रूप में हशमत नाम का पात्र सृजित कर अद्भुत प्रयोग किया है
  • **भाषागत विशेषताएँ:**

  • कथा-भाषा में विलक्षण तश्तरी (सुंदरता)
  • संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्दावली
  • उर्दू का बाँकपन
  • पंजाबी की शिन्दाखिली (सरलता-सहजता)
  • सभी का संतुलित मिश्रण
  • ---

    **पाठ का परिचय — "मियाँ नसीरुद्दीन"**

    **पाठ की विधा:** शब्दचित्र (Character Sketch)

    **स्रोत:** यह शब्दचित्र संग्रह "हे-हशमत" से लिया गया है

    **प्रमुख बिंदु:**

  • यह एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व का चित्रण नहीं, बल्कि एक **सामान्य जन-जीवन के पात्र की मनोवैज्ञानिक खोज** है
  • खाँदानी नानबाई (रोटी बनाने वाला) मियाँ नसीरुद्दीन का विस्तृत अंतरंग परिचय
  • लेखिका की पर्यवेक्षण क्षमता और पात्रों के मनोविज्ञान को समझने की दक्षता का उदाहरण
  • ---

    **पाठ का कथानक सारांश (खंडात्मक)**

    **प्रथम खंड — मियाँ की दुकान तक पहुँचना**

    **परिस्थिति:**

  • लेखिका एक दुपहली मस्जिद के सामने गढ़ैया मुहल्ले की ओर जाती है
  • एक निहायत ममूली, अंधेरी दुकान पर ढेर सारा आटा देखती है
  • पहले लगा कि सेवियों (मिठाई) की तैयारी हो रही है, लेकिन पता चलता है कि खाँदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान है
  • मियाँ NIgun Viz़़््३म की रोटियों के लिए मशहूर हैं
  • **मियाँ का परिचय:**

  • चारपाई पर बीड़ी का मशा ले रहे हैं
  • मौसम की मार से पका चेहरा, आँखों में कैया का भोलापन, माथे पर कारीगर के तेवर
  • मियाँ नसीरुद्दीन ने लेखिका को "फरमाइए" कहकर संबोधित किया
  • **दूसरा खंड — सवाल और जिज्ञासा**

    **लेखिका के सवाल:**

  • "क्या आप अखबारनवीस हैं?" (खोजियों की खुराफात नहीं समझते)
  • अखबार बनाने और पढ़ने वाले दोनों को निठल्ला समझते हैं
  • कामकाजी लोगों को अखबारों से क्या लेना-देना
  • **मियाँ की प्रतिक्रिया:**

  • नाराज़ी का संकेत
  • पहले ही अगर इतनी दूर आने की तकलीफ उठाई है तो पूछ ही लो — कोई संकोच नहीं
  • "निकालेंगे वक़्त थोड़ा"
  • **तीसरा खंड — खाँदानी हुनर की बात**

    **मुख्य प्रश्न:** विष्टम-विष्टम की रोटी पकाने की कला कहाँ से सीखी?

    **मियाँ का विस्तृत उत्तर:**

  • "क्या मतलब? कहीं और जाएगा? क्या नगीना-साक़ के पास? क्या आइना-साक़ के पास? क्या मीना-साक़ के पास?"
  • इल्म रखने की बात अलग है, जो भी सीखा, अपने वालिद उस्ताद से ही सीखा
  • **मूल सिद्धांत:** घर से निकले बिना कोई पेशा अख्तियार नहीं किया
  • "जो बाप-दादा का हुनर था, वही उससे पाया और वालिद मरहूम के उठ जाने पर आ बैठे उन्हीं के ठिए पर"
  • **वालिदों का परिचय:**

  • पिता — **शाही नानबाई "मियाँ बरवक़त"** (गढ़ैयावाले के नाम से मशहूर)
  • दादा — **अला नानबाई मियाँ कल्लन**
  • दोनों ही खाँदानी नानबाई की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले थे
  • **व्यक्तिगत खोज:**

  • जब लेखिका पूछती है कि क्या कोई यादें हैं?
  • मियाँ कहते हैं: "यादें कहाँ? काम करने से आता है, यादों से नहीं"
  • यह **कर्म-केंद्रित जीवनदर्शन** का प्रतीक है
  • **चौथा खंड — तालीम की तालीम**

    **लेखिका की जिज्ञासा:** जब वालिद-साहब ने सिखाया तो क्या कहते थे?

    **मियाँ की शिक्षा-पद्धति का विवरण:**

    1. **परंपरागत तरीका (वल्टू शिक्षा):**

  • उस्ताद कहता है: "अलिफ़ (Aleph)"
  • बच्चा दोहराता है: "अलिफ़"
  • उस्ताद कहता है: "बे (B)"
  • बच्चा कहता है: "बे"
  • इसी बीच उस्ताद एक हाथ सिर पर धरता है और दूसरे से शागिर्द को परवान (उन्नति) देता है
  • **अर्थ:** पढ़ाई और शारीरिक दंड एक साथ
  • 2. **वास्तविक शिक्षा (व्यावहारिक):**

  • रोटी पकाने की प्रक्रिया सीखनी होती है
  • बर्तन धोना, भट्टी बनाना, आँच देना — ये सब सीखना पड़ता था
  • **महत्वपूर्ण कथन:**

    "तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ होती है" — यह पंक्ति दर्शाती है कि शिक्षा पद्धति स्वयं एक कला है।

    **पाँचवाँ खंड — बादशाह शाहजहाँ की कहानी**

    **पृष्ठभूमि:**

  • बादशाह सलामत ने मियाँ के बुज़ुर्गों के दरबार में कहा: "कोई नई चीज़ खिला सको?"
  • आदेश: "कोई ऐसी चीज़ बनाओ जो न आग से पके, न पानी से बने"
  • **हल और उत्तर:**

  • मियाँ का कहना है कि ऐसी चीज़ बनी थी
  • बादशाह ने बहुत खुश होकर खाई और सराही
  • "कहावत" के माध्यम से यह घटना जनश्रुति बन गई
  • **लेखिका की शंका:**

  • "लेकिन वह पकवान क्या था?"
  • मियाँ कहते हैं: "यह नहीं बताएँगे, समझ लीजिए कि एक कहावत है"
  • **कहावत की व्याख्या:**

    "खाँदानी नानबाई कुएँ में भी रोटी पका सकता है" — यह खाँदानी कला की महिमा दर्शाती है।

    **छठा खंड — लेखिका की गणना का प्रश्न**

    **नई समस्या:**

  • लेखिका को **तीन तबक़ों** (श्रेणियों) की बात समझ नहीं आती:
  • न कच्ची में बैठा
  • न बैठा पक्की में
  • न दूसरी में
  • और बैठ गया तीसरी में
  • **मियाँ की प्रतिक्रिया:**

  • पहले "समझ लीजिए, यह एक कहावत है" कहकर अनदेखी करते हैं
  • फिर हँस पड़ते हैं — "ताज़ा समझ जाएँगे"
  • **सातवाँ खंड — शिक्षा की प्रक्रिया (विस्तार)**

    **मियाँ का बयान:**

    "अगर बच्चे को भेजा भूल से तो बच्चा:

  • न कच्ची में बैठा
  • न बैठा पक्की में
  • न दूसरी में"
  • **ताज़ा विवरण:**

  • बर्तन धोना न सीखते
  • भट्टी बनाना न सीखते
  • भट्टी को आँच देना न सीखते
  • तो क्या सीधे-सीधे नानबाई का हुनर सीख जाते!
  • **महत्व:** प्रत्येक चरण की अपनी महत्ता है।

    **आठवाँ खंड — बादशाह का नाम पूछना**

    **नई जिज्ञासा:**

  • लेखिका कौतूहलवश बादशाह का नाम जानना चाहती है
  • दिल्ली के किस बादशाह के यहाँ काम किया
  • **मियाँ की असहजता:**

  • "बाल की खाल निकालने पर तुले हो"
  • "ठीक है, कह दिया न कि बादशाह के यहाँ काम करते थे — यही काफी नहीं?"
  • फिर भी बताते हैं: **बादशाह शाहजहाँ**
  • "औरंगज़ेब शरीफ़ की तरह कोई हो" — संदर्भ अस्पष्ट रखते हैं
  • ---

    **पात्र-विश्लेषण — मियाँ नसीरुद्दीन का व्यक्तित्व**

    **शारीरिक विशेषताएँ:**

  • **चेहरा:** मौसम की मार से पका हुआ
  • **आँखें:** कैया का भोलापन, कोरी सरलता
  • **माथा:** पेशेवर कारीगर के गहरे तेवर
  • **दाँत:** सहजता और सादगी का प्रतीक
  • **व्यक्तिगत गुण:**

    **१. आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान:**

  • अपने काम पर गर्व करते हैं
  • "खाँदानी नानबाई" का खिताब अपने लिए पर्याप्त है
  • बाहरी दुनिया से असंबद्ध
  • **२. कर्मनिष्ठता:**

  • "काम करने से आता है, यादों से नहीं"
  • हर चीज़ अभ्यास और प्रशिक्षण से सीखी
  • **कर्म-केंद्रित जीवन दर्शन** का प्रतीक
  • **३. परंपरा-प्रेमी:**

  • पिता से सीखा, पिता ने दादा से सीखा
  • खाँदानी हुनर को आगे बढ़ाना अपना कर्तव्य समझते हैं
  • घर से बाहर निकलकर कोई और पेशा नहीं अपनाया
  • **४. गरिमा और आत्मविश्वास:**

  • खाँदानी नानबाई का उदाहरण स्वयं में पर्याप्त मानते हैं
  • "कहावत" के माध्यम से अपनी क्षमता को संवेदनशील ढंग से प्रकट करते हैं
  • **५. सरल और व्यावहारिक:**

  • अखबारों से दूरी
  • "झूठ से रोटी नहीं पकेगी" — सत्य और वास्तविकता पर विश्वास
  • **६. बुज़ुर्ग आदर:**

  • अपने पूर्वजों का सम्मान करते हैं
  • उनके नाम लेते हैं, उनकी कहानियाँ दोहराते हैं
  • **मनोवैज्ञानिक जटिलताएँ:**

    **गुम-शुदा अतीत:**

  • "उठ गए वो शमानेज़्"
  • माता-पिता की स्मृतियाँ उन्हें गहरे अंदर मथ जाती हैं
  • लेखिका के सवाल को सुनते ही चेहरा बदल जाता है
  • "क्या आँखों के आगे चेहरा शिंदा हो गया!" — आँतरिक पीड़ा का इशारा
  • **अपने हुनर का अकेलापन:**

  • आखिर में "उठ गए वो शमानेज़् और गए वो क़ैदयान"
  • अपने बाद इस हुनर का भविष्य अनिश्चित है
  • "अब क्या रख्खा है — निकाली तंदूर से निकली और हशमत" (द्वंद्व)
  • ---

    **शब्दचित्र की विशेषताएँ (साहित्यिक तकनीकें)**

    **१. शब्दचित्र विधा की परिभाषा:**

  • किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का संक्षिप्त, जीवंत और गहन चित्रण
  • शारीरिक विशेषताओं के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
  • कृष्णा सोबती के शब्दचित्र में **आत्मनिरीक्षण** और **सामाजिक आलोचना** दोनों हैं
  • **२. प्रस्तुतिकरण की विधि:**

  • **संवाद के माध्यम से:** सीधी बातचीत पाठक को सटीकता देती है
  • **व्यंग्य:** अखबारों के बारे में टिप्पणी, बादशाह की कहानी
  • **प्रतीकात्मकता:** "कहावत" का प्रयोग गहरे अर्थ दर्शाता है
  • **भावनात्मक संवेदनशीलता:** अंत में दुःख और विदाई का बोध
  • **३. लेखिका की दृष्टि:**

  • निरपेक्षता और सहानुभूति का सुंदर मिश्रण
  • "दबे हुए अँधेरे के आसार" — मियाँ की आंतरिक पीड़ा को समझना
  • "सिर्फ एक लाइन में कहीं" का संबोध — गरीब और सीमांत लोगों के प्रति सम्मान
  • ---

    **महत्वपूर्ण संवाद और उनका अर्थ**

    **१. "काम करने से आता है, यादों से नहीं"**

  • **अर्थ:** अनुभव ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है, न कि सैद्धांतिक ज्ञान
  • **जीवन-दर्शन:** कर्मयोगी दृष्टिकोण — सकाम कर्म के बिना सिद्धि नहीं
  • **वर्तमान संदर्भ:** यांत्रिक शिक्षा के विरुद्ध व्यावहारिक प्रशिक्षण की महिमा
  • **२. "तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ होती है"**

  • **अर्थ:** शिक्षा पद्धति स्वयं में एक कला है
  • **अंतर्निहित संदेश:** बेतरतीब सीखने के विरुद्ध संरचित शिक्षा का महत्व
  • **भारतीय संदर्भ:** गुरु-शिष्य परंपरा का महिमामंडन
  • **३. "यादें कहाँ? कामकाजी आदमी को इससे क्या काम है"**

  • **अर्थ:** कामकाजी जीवन में यादों के लिए समय नहीं, केवल वर्तमान महत्वपूर्ण है
  • **विडंबना:** अतीत के प्रति अनिच्छा, लेकिन अंत तक अतीत ही सताता है
  • **४. "झूठ से रोटी नहीं पकेगी"**

  • **अर्थ:** सत्य, प्रामाणिकता और कला का गहरा संबंध
  • **जीवन का सत्य:** नैतिकता ही किसी काम को कला का दर्जा देती है
  • **५. "उठ गए वो शमानेज़् और गए वो क़ैदयान जो पकाने-खाने की क़ैद करना जानते थे"**

  • **अर्थ:** परंपरा की विदाई, हुनर की समाप्ति
  • **दुःख-भाव:** आधुनिकता की जकड़ में खोती परंपरा
  • **अधूरा संघर्ष:** नई पीढ़ी का उत्तराधिकारी न होना
  • ---

    **सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम**

    **१. जातीय-पेशागत परंपरा (Caste-Craft Tradition):**

  • **ऐतिहासिक संदर्भ:** भारत-पाकिस्तान में नानबाई का सामाजिक स्तर
  • **परिवार-केंद्रित हुनर:** पेशा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता है
  • **सामाजिक गरिमा:** "खाँदानी नानबाई" का खिताब सामाजिक पहचान है
  • **२. औपनिवेशिक भारत में हस्तशिल्प:**

  • **बादशाही दरबार का संदर्भ:** शाहजहाँ के समय का खिताब (ऐतिहासिक सत्य या कहावत?)
  • **यांत्रिक शिक्षा vs. शिल्प-शिक्षा:** विष्टम-विष्टम की रोटी सीखने की प्रक्रिया
  • **शिल्पकार की प्रतिष्ठा:** "कहावत" के माध्यम से आत्मगरिमा
  • **३. विभाजन के बाद की यादें:**

  • **पाकिस्तान में जीवन:** गढ़ैया मुहल्ला, मस्जिद के पास दुकान
  • **सांस्कृतिक स्मृतियाँ:** पूर्वजों की दुनिया, बादशाहों के दरबार
  • **अधूरापन:** परिवार, परंपरा, एक सुसंगत जीवन — सब टूट गया
  • **४. आधुनिकता का संकट:**

  • **अखबार का प्रश्न:** लेखिका की आधुनिक दुनिया मियाँ के लिए बेमानी है
  • **मूल्यों का द्वंद्व:** कामकाजी जीवन बनाम भावनात्मक यादें
  • **बदलती पीढ़ी:** खाँदानी हुनर का भविष्य अनिश्चित
  • ---

    **व्याकरणात्मक और भाषागत विशेषताएँ**

    **१. संवाद-शैली (Dialogic Style):**

  • **सीधी बातचीत:** पाठक को पात्र से सीधा परिचय
  • **व्यक्तिगत भाषा:** हर पात्र की अलग भाषा
  • लेखिका: औपचारिक, जिज्ञासुक
  • मियाँ: सहज, मुहावरेदार, उर्दू-प्रभावित
  • **२. मुहावरे और लोकोक्तियाँ:**

  • **"निकाल लेंगे वक़्त थोड़ा"** — आत्मविश्वास और समय की उपलब्धता
  • **"पंचगश्ती अंदाज़े से सिर हिलाया"** — एक विशेष अंदाज़ा, गहराई की ओर इशारा
  • **"आँखों के आगे चेहरा शिंदा हो गया"** — स्मृतियों का पुनरुत्थान
  • **"बैठ गया तीसरी में"** — असफलता, हाशिए पर होना
  • **"बाल की खाल निकालना"** — अनावश्यक विस्तार करना
  • **"कहावत"** — अप्रत्यक्ष संदर्भ, पवित्रता में रहस्य
  • **३. वर्णनात्मक शैली (Descriptive Style):**

  • **आंतरिक दृश्य:** दुकान का अँधेरापन, आटे का ढेर, मियाँ की मुद्रा
  • **भावनात्मक संवेदना:** "लहमा भर को किसी भरी में गुम हो गई" — गहरी दुःखी अवस्था
  • **संवेदनशील प्रेक्षण:** "दबे हुए अँधेरे के आसार" — अंतरंग पीड़ा को देखना
  • **४. तत्सम-तद्भव का संतुलन:**

  • **संस्कृत:** तालीम, पेशा, वालिद, उस्ताद (अरबी-फारसी, लेकिन संस्कृत जैसे प्रभाव)
  • **हिंदी:** चेहरा, आँख, दाँत, हुनर, कल्लन, गढ़ैया
  • **उर्दू:** मियाँ, नानबाई, बादशाह, दरबार, तंदूर
  • **५. आवृत्ति (Repetition) की भूमिका:**

  • **"तीसरी में"** — तीन बार दोहराया जाता है, जिससे महत्व बढ़ता है
  • **बादशाह का नाम** — दोबारा पूछा जाता है, मियाँ की असहजता दर्शाता है
  • **"कहावत है"** — बार-बार आश्रय लेना, रहस्य का प्रतीक
  • ---

    **केंद्रीय विषय-वस्तु और संदेश**

    **१. परंपरा और आधुनिकता का द्वंद्व:**

  • **परंपरा:** खाँदानी हुनर, पिता-दादा की विरासत, कहावतें
  • **आधुनिकता:** अखबार, छापाखाना, नई सूचनाएँ
  • **संघर्ष:** पारंपरिक जीवन का आधुनिक दुनिया में अस्तित्व संकट
  • **२. सामाजिक हाशि

    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. कृष्णा सोबती की रचना 'मीयाँ नसीरुद्दीन' किस विधा में है?

    • A. उपन्यास
    • B. संस्मरण ✓
    • C. कहानी
    • D. नाटक

    Answer: B — यह रचना संस्मरण है जिसमें लेखक ने अपने वास्तविक अनुभवों के माध्यम से मीयाँ नसीरुद्दीन का चित्रण किया है।

    Q2. मीयाँ नसीरुद्दीन किस कला के लिए मशहूर थे?

    • A. काठ की नक्काशी
    • B. विस्क़े की रोटियाँ बनाना ✓
    • C. संगीत वाद्य निर्माण
    • D. धातु शिल्प

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि मीयाँ नियाज़ी की विस्क़े की रोटियाँ बनाने की कला के लिए प्रसिद्ध थे।

    Q3. मीयाँ के दादा का खांदानी नाम क्या था?

    • A. मीयाँ कल्लन
    • B. मीयाँ बरक़त शाही नवाबजी
    • C. आला नवाबजी मीयाँ कल्लन ✓
    • D. शाही नवाबजी गढ़ैयों

    Answer: C — पाठ में स्पष्ट उल्लेख है कि मीयाँ के दादा 'आला नवाबजी मीयाँ कल्लन' थे।

    Q4. लेखक को मीयाँ की दुकान पर जाने से पहले क्या ख्याल आया कि वहाँ क्या तैयारी हो रही है?

    • A. दावत की तैयारी
    • B. सेविओं की तैयारी ✓
    • C. व्यापार का सामान
    • D. कपड़ों की धुलाई

    Answer: B — लेखक ने सोचा कि अटे का ढेर देखकर सेविओं की तैयारी हो रही है, लेकिन असल में यह मीयाँ की दुकान था।

    Q5. मीयाँ के अनुसार हुनर कहाँ से आता है?

    • A. किताबों से सीखकर
    • B. विद्यालय की शिक्षा से
    • C. काम करने से, नसीहतों से नहीं ✓
    • D. दूसरों की नकल करके

    Answer: C — मीयाँ स्पष्ट कहते हैं कि 'कलम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।'

    Q6. बादशाह सलीम की कहानी में ऐसी चीज़ बनाने को कहा गया जो किन दोनों चीज़ों से न बने?

    • A. मिट्टी और पत्थर से
    • B. आग और पानी से ✓
    • C. नमक और खटाई से
    • D. चावल और गेहूँ से

    Answer: B — बादशाह सलीम ने फरमाया कि ऐसी चीज़ बनाओ जो न आग से पके, न पानी से बने।

    Q7. मीयाँ नसीरुद्दीन के पिता किस नाम से प्रसिद्ध थे?

    • A. मीयाँ बरक़त शाही
    • B. मीयाँ कल्लन गढ़ैयों
    • C. शाही नवाबजी गढ़ैयों ✓
    • D. मीयाँ कल्लन शाही

    Answer: C — पाठ में कहा गया है कि मीयाँ के पिता शाही नवाबजी गढ़ैयों वाले के नाम से प्रसिद्ध थे।

    Q8. निम्नलिखित में से कौन सी बात मीयाँ के अनुसार गलत नहीं है? (अ) हुनर किताबों से मिलता है (ब) तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ है (स) रोटी झूठ से पकती है (द) पारंपरिक ज्ञान पिता-दादा से मिलता है

    • A. अ और ब दोनों सही हैं
    • B. ब और द दोनों सही हैं ✓
    • C. केवल अ सही है
    • D. केवल स सही है

    Answer: B — मीयाँ मानते हैं कि तालीम की तालीम बड़ी चीज़ है और हुनर पारंपरिक रूप से पिता-दादा से मिलता है, न कि किताबों से।

    Q9. तीन तकमों (पीढ़ियों) की तालीम के संदर्भ में मीयाँ का क्या सिद्धांत है?

    • A. सभी पीढ़ियों को एक जैसी तालीम देनी चाहिए
    • B. बच्चा जहाँ भी बैठे, तालीम देनी चाहिए
    • C. तीनों पीढ़ियों के सिद्धांत को समझे बिना प्रश्न नहीं उठाने चाहिए ✓
    • D. किसी भी तकम में बैठने से कोई फर्क नहीं पड़ता

    Answer: C — मीयाँ कहते हैं कि तीनों तकमों (पीढ़ियों) का क्या अर्थ और प्रयोजन है, यह समझे बिना कोई सवाल नहीं करना चाहिए।

    Q10. पाठ में मीयाँ के चरित्र के आधार पर कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है? A) मीयाँ आधुनिक शिक्षा में विश्वास करते हैं B) मीयाँ पारंपरिक हुनर को धर्म के समान पवित्र मानते हैं C) मीयाँ राजनीतिक मामलों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं D) मीयाँ अपनी कला को गुप्त रखना चाहते हैं

    • A. A और C दोनों सही हैं
    • B. केवल B सही है ✓
    • C. B और D सही हैं
    • D. सभी कथन सही हैं

    Answer: B — पाठ के माध्यम से स्पष्ट है कि मीयाँ अपने खांदानी पेशे को धर्म की तरह मानते हैं, और उन्हें अखबारें या राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

    Flashcards

    मीयाँ नसीरुद्दीन किस कला के लिए मशहूर हैं?

    मीयाँ निशीरुद्दीन नियाज़ी की विस्क़े की रोटियाँ बनाने की कला के लिए प्रसिद्ध हैं।

    मीयाँ के दादा का नाम क्या था और वह किस नाम से जाने जाते थे?

    मीयाँ के दादा का नाम आला नवाबजी मीयाँ कल्लन था और वह मीयाँ बरक़त 'शाही नवाबजी' के नाम से जाने जाते थे।

    मीयाँ के पिता का नाम क्या था?

    मीयाँ के पिता शाही नवाबजी मीयाँ बरक़त का नाम 'मशहूर' था और वह गढ़ैयों वाले के नाम से प्रसिद्ध थे।

    'तालीम की तालीम' से मीयाँ का क्या आशय है?

    मीयाँ का आशय यह है कि सिखाने की प्रक्रिया भी एक बड़ी चीज़ है, इसलिए शिष्य को केवल पकवान ही नहीं बल्कि अनुशासन और आचरण भी सीखना चाहिए।

    मीयाँ के अनुसार हुनर कहाँ से आता है?

    मीयाँ के अनुसार हुनर काम करने से आता है, न कि किसी प्रकार की नसीहत या किताबी ज्ञान से।

    बादशाह सलीम की कहानी में कौन सी नई चीज़ बनाने का आदेश दिया गया था?

    बादशाह सलीम ने आदेश दिया कि ऐसी कोई चीज़ बनाओ जो न आग से पके, न पानी से बने।

    'लेखक' को मीयाँ की दुकान पर क्या पहले व्यक्ति दिखा?

    लेखक को मीयाँ नसीरुद्दीन चारपाई पर बैठे बीड़ी का मशा ले रहे दिखे।

    मीयाँ नसीरुद्दीन ने अंदर से कौन सी बात कही जो 'कहावत' के रूप में थी?

    मीयाँ ने बताया कि खांदानी नवाबजी कुएँ में भी रोटी पका सकता है, क्योंकि यह कहावत उनके बुजुर्गों के करतब पर पूरी उतरती है।

    तीन तकमों (पीढ़ियों) की तालीम के बारे में मीयाँ क्या कहते हैं?

    मीयाँ कहते हैं कि अगर बच्चा न कच्ची में बैठे, न पक्की में, तो तीसरी में क्यों बैठा और तीनों तकमों का क्या हुआ यह सवाल नहीं उठना चाहिए।

    'कहावत' और 'सच्चाई' के बीच मीयाँ का दृष्टिकोण क्या है?

    मीयाँ मानते हैं कि कहावत सच्ची भी हो सकती है क्योंकि रोटी तो आग से ही पकती है, झूठ से नहीं, इसलिए रोटी बनाने में झूठ का कोई काम नहीं।

    Important Board Questions

    मीयाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2 marks]

    पाठ में मीयाँ की शारीरिक बनावट (माथे पर मँजे हुए कारीगर के तेवर) और उनके आत्मविश्वास (विनम्र दिखाव में गहरा आत्मविश्वास) का उल्लेख है। उनके खांदानी पेशे के प्रति समर्पण और कला को धर्म मानना भी महत्वपूर्ण है।

    मीयाँ के अनुसार 'तालीम' (शिक्षा) की परिभाषा क्या है? पाठ से उदाहरण देते हुए समझाइए। [5 marks]

    'तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ है' — इस कथन में मीयाँ यह कहते हैं कि सिखाने की प्रक्रिया में अनुशासन और आचरण दोनों आवश्यक हैं। बच्चे को सीधे पकवान ही नहीं सीखना, बल्कि बर्तन धोना, आग देना आदि भी सीखना चाहिए। 'काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं' — यह उनके व्यावहारिक ज्ञान का सूचक है।

    मीयाँ नसीरुद्दीन के आधार पर समझाइए कि 'पारंपरिक हुनर' और 'आधुनिक शिक्षा' में क्या अंतर है? इस पाठ के संदर्भ में यह अंतर क्यों महत्वपूर्ण है? [6 marks]

    पारंपरिक हुनर = पिता-दादा से सीधा संचरण, कार्य करते हुए सीखना, आचरण और अनुशासन का समावेश। आधुनिक शिक्षा = किताबें, स्कूल, नियम। मीयाँ के कथन 'अखबार बनाने वाले और अखबार पढ़ने वाले दोनों को निठल्ला समझते हैं' से स्पष्ट है कि वे अपने पारंपरिक ज्ञान को मूल्य देते हैं। बादशाह सलीम की कहानी यह दर्शाती है कि हुनर केवल सैद्धांतिक ज्ञान से नहीं बल्कि व्यावहारिक कौशल और पीढ़ियों के अनुभव से आता है।

    Assertion-Reason Questions for Miyan Nasiruddin

    Q1. Assertion (A):

    कृष्णा सोबती के लेखन की विशेषता यह है कि वे कम लिखती हैं, पर विशेष रूप से लिखती हैं।

    Reason (R):

    इसी कारण उनका संयमित लेखन और साफ-सुथरी रचनात्मकता ने एक नया पाठक वर्ग तैयार किया है।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण सीधे कथन को समर्थन देता है। यह पाठ में दिए गए कृष्णा सोबती के व्यक्तित्व के विवरण से मेल खाता है।

    Q2. Assertion (A):

    मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान राजधानी के सबसे प्रमुख बाज़ार में स्थित थी।

    Reason (R):

    वह एक दुपहरी तंग मस्जिद के आगे के गढ़ैया मुहल्ले में एक ढँड़ी नीची-सी दुकान में काम करते थे।

    Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है, क्योंकि मियाँ की दुकान किसी प्रमुख बाज़ार में नहीं, बल्कि एक सामान्य मुहल्ले की एक छोटी-सी दुकान में थी। कारण कथन को खंडित करता है।

    Q3. Assertion (A):

    मियाँ नसीरुद्दीन को अपने कार्य की शिक्षा विद्यालय या किसी औपचारिक संस्थान से मिली थी।

    Reason (R):

    वे स्वयं कहते हैं कि जो कुछ भी सीखा है, वह अपने माता-पिता और उस्ताद से ही सीखा है, घर से निकले बिना।

    Answer: D — A is false but R is true — कथन गलत है, क्योंकि मियाँ की शिक्षा औपचारिक नहीं, बल्कि परिवारिक परंपरा के माध्यम से प्राप्त हुई थी। कारण यह स्पष्ट करता है।

    Unlock more Assertion-Reason questions in Premium — unlock →

    Case-Based Questions (CBQ) for Miyan Nasiruddin

    Case Study:

    लेखक ने मियाँ नसीरुद्दीन से जब पूछा कि उन्होंने निशान फिरोज़ी की रोटियाँ बनाने का कला कहाँ से सीखी, तो मियाँ ने कहा—क्या ईश्वर ने कहीं और सीखने के लिए कहा? वह तो घर से ही निकले बिना यह पेशा सीखते हैं। मियाँ कहते हैं कि तालीम की तालीम भी एक बड़ी चीज़ है और रोटी बनाने में झूठ का क्या काम है।

    Q1. उपरोक्त अंश में मियाँ नसीरुद्दीन किस बात पर जोर देते हैं?

    • A. विद्यालय की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है
    • B. परिवारिक परंपरा और व्यावहारिक सीखना ही सच्ची शिक्षा है ✓
    • C. किसी को घर से निकलना नहीं चाहिए
    • D. रोटी बनाने का कोई नियम नहीं है

    Answer: B

    Q2. मियाँ द्वारा कही गई बात 'तालीम की तालीम भी एक बड़ी चीज़ है' का क्या अर्थ है?

    • A. शिक्षा लेने की प्रक्रिया ही शिक्षा है ✓
    • B. शिक्षा केवल किताबें पढ़ने से मिलती है
    • C. शिक्षा को दोहराया जाना चाहिए
    • D. शिक्षा एक व्यर्थ कार्य है

    Answer: A

    Q3. मियाँ नसीरुद्दीन 'रोटी बनाने में झूठ का क्या काम है' कहकर क्या संदेश देते हैं?

    • A. रोटी बनाना एक गलत काम है
    • B. ईमानदारी और सच्चाई कारीगरी का आधार है ✓
    • C. रोटी में कोई महत्व नहीं है
    • D. झूठ से रोटी बनाई जा सकती है

    Answer: B

    Next chapterApu Ke Saath Dhaai Saal →
    Found this useful? Share it with your class group.

    You've seen the free preview. Open the full interactive study kit — mind map, instant-graded quiz, progress tracking — free, no sign-in required.

    Open Full Study Kit — Free →

    Premium unlocks the full Question Bank, Daily Practice Papers, Chapter Quiz and Full Mock Papers for every chapter.