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Teesri Kasam ke Shilpkaar Shailendra

NCERT Class 10 · Hindi B Based on NCERT Class 10 Hindi B textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

**तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र**

**परिचय एवं पृष्ठभूमि**

• शैलेंद्र: हिंदी फिल्म जगत के प्रसिद्ध गीतकार, संवाद लेखक और फिल्म निर्माता

• भारत की आजादी के समय मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में जन्म

• हिंदी से एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त

• किशोरावस्था से ही हिंदी फिल्मों के इतिहास, फिल्मकारों के जीवन और अभिनय में गहरी रुचि

• वर्तमान में सतना के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राध्यापन

**शैलेंद्र की प्रमुख कृतियां**

• साठवां दशक की फिल्में

• तानाशाह

• मैं खुशबू

• सुपर स्टार

• राजकपूर: आधी हकीकत आधा फसाना

• कवि शैलेंद्र: जिंदगी की जीत में यकीन

• प्यासा: चिर अतृप्त गुरुदत्त

• उत्तल उमंग: सुभाष घई की फिल्मकला

• ओ रे मांझी: बिमल राय का सिनेमा

• महाबाजार के महानायक: इक्कीसवीं सदी का सिनेमा

**राजकपूर की फिल्म 'संग' की सफलता और उसके प्रभाव**

  • 'संग' की अद्भुत सफलता → राजकपूर में गहन आत्मविश्वास भर दिया
  • इसके बाद राजकपूर ने चार फिल्मों के निर्माण की घोषणा की: 'मेरा नाम जोकर', 'अजंता', 'मैं और मेरा दोस्त', 'सत्यम् शिवम् सुंदरम्'
  • **'मेरा नाम जोकर' की निर्माण यात्रा**

    • 1965 में निर्माण शुरू किया गया

    • छः वर्षों का लंबा निर्माण काल

    • इस अवधि में राजकपूर द्वारा अभिनीत अन्य फिल्में भी प्रदर्शित हुईं

    • 1966 में कवि शैलेंद्र की 'तीसरी कसम' भी इसी दौरान प्रदर्शित हुई

    **'तीसरी कसम' का महत्व और विशेषताएं**

    • शैलेंद्र की पहली और अंतिम फिल्म

    • राजकपूर ने इस फिल्म में अपने जीवन की सर्वोत्कृष्ट भूमिका निभाई

    • साहित्य की एक अत्यंत मार्मिक कृति को पूरी सार्थकता से सेल्युलाइड पर उतारी

  • 'तीसरी कसम' फिल्म नहीं, सेल्युलाइड पर लिखी कविता थी
  • **पुरस्कार एवं सम्मान**

    • राष्ट्रपति स्वर्ण पदक प्राप्त

    • बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म

    • अनेक अन्य पुरस्कारों द्वारा सम्मानित

    • मॉस्को फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कृत

    • इसकी कलात्मकता की लंबी-चौड़ी तारीफें हुईं

    • शैलेंद्र की संवेदनशीलता पूरी शिद्दत के साथ मौजूद थी

    **राजकपूर और शैलेंद्र का सहयोग**

    • शैलेंद्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए

    • राजकपूर ने अपने अद्वितीय सहयोगी की फिल्म में तन्मयता के साथ काम किया

    • किसी परिश्रमिक की अपेक्षा किए बिना सहयोग किया

  • शैलेंद्र को कहानी सुनाने जाना → शैलेंद्र ने उत्साह से काम स्वीकार किया
  • परंतु तुरंत गंभीरता से बोला: 'मेरा परिश्रमिक एडवांस देना होगा'
  • शैलेंद्र को ऐसी उम्मीद नहीं थी कि राजकपूर जीवनभर की दोस्ती का यह बदला देंगे
  • शैलेंद्र का मुर्झाया हुआ चेहरा देखकर राजकपूर ने मुस्कराते हुए कहा: 'निकालो एक रुपया, मेरा परिश्रमिक! पूरा एडवांस'
  • **शैलेंद्र की व्यावहारिक समझ और आदर्शवाद**

    • शैलेंद्र फिल्म निर्माता के रूप में बिल्कुल अयोग्य थे

    • व्यावहारिक सूझबूझ में कमजोर

    • राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फिल्म की असफलता के खतरों से आगाह किया

    • परंतु शैलेंद्र एक आदर्शवादी भावुक कवि थे

    • उन्हें अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी

    **फिल्म की व्यावसायिक असफलता के कारण**

  • कलात्मक उत्कृष्टता की कीमत व्यावसायिक सफलता नहीं हो सकती
  • 'तीसरी कसम' में राजकपूर और वहीदा रहमान जैसे नामचीन सितारे थे
  • शंकर-जयकिशन का प्रसिद्ध संगीत था
  • फिल्म के गीत प्रदर्शन से पूर्व ही अत्यंत लोकप्रिय हो गए थे
  • लेकिन फिल्म खरीदने वाला कोई नहीं था
  • कारण: फिल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी
  • इसमें रची-बसी करुणा तारतम्य पर तौली जा सकने वाली नहीं थी
  • इसलिए 'तीसरी कसम' रिलीज होने पर कोई प्रचार नहीं हुआ
  • फिल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा
  • **शैलेंद्र की स्वतंत्र सोच और दृढ़ मत**

    • शैलेंद्र बीस सालों तक फिल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहां के तौर-तरीकों से नावाकिफ थे

    • परंतु उन्होंने अपनी आदमियत नहीं खोई

    • 'श्री 420' का लोकप्रिय गीत: 'प्यार हुआ इकरार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल'

  • एक पंक्ति: 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियां'
  • संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की
  • उनका खयाल: दर्शक 'चार दिशाएं' तो समझ सकते हैं, 'दस दिशाएं' नहीं
  • लेकिन शैलेंद्र परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हुए
  • शैलेंद्र का दृढ़ मंतव्य: दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए
  • कलाकार का कर्तव्य: उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करना
  • यह विचार गलत नहीं था
  • **शैलेंद्र की गीत रचना की विशेषताएं**

    • शैलेंद्र ने बहुत अच्छे गीत लिखे जो अत्यंत लोकप्रिय हुए

    • झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया

    • गीत भाव-प्रवण थे, दुरुह नहीं

    • उदाहरण: 'मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी'

  • यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे
  • • शांत नदी का प्रवाह और समुद्र की गहराई लिए हुए

    • यह विशेषता उनकी जिंदगी की थी और उन्होंने अपनी फिल्म के द्वारा भी साबित की थी

    **साहित्य-निर्माण के साथ न्याय**

    • 'तीसरी कसम' यदि एकमात्र नहीं तो पांच फिल्मों में से एक है जिसने साहित्य-निर्माण के साथ सौ प्रतिशत न्याय किया

    • शैलेंद्र ने राजकपूर जैसे स्टार को 'हीरामन' बना दिया

    • हीरामन पर राजकपूर की हवेली नहीं हो सकी

    • छींट की सस्ती साड़ी में लिपटी 'हीराबाई' ने वहीदा रहमान की प्रसिद्ध ऊंचाइयों को बहुत पीछे छोड़ दिया

    **'तीसरी कसम' की सूक्ष्मताएं**

    • कजरी नदी के किनारे उकड़ू बैठा हीरामन जब गीत गाते हुए हीराबाई से पूछता है: 'मन समझती हो न आप?'

  • तब हीराबाई शब्दों से नहीं, आंखों से बोलती है
  • दुनिया-भर के शब्द उस भाषा को अभिव्यक्ति नहीं दे सकते
  • • ऐसी ही सूक्ष्मताओं से सुसज्जित थी: 'तीसरी कसम'

    **गाड़ीवान की संवेदनशीलता**

    • अपनी मस्ती में डूबकर झूमते गाड़ीवान: 'चलत मुसाफिर मोह लिया रे जिंदे वाली मुनिया'

    • टप्पर-गाड़ी में हीराबाई को जाते हुए देखकर उसके पीछे दौड़ते-गाते बच्चों का हुजूम: 'लाली-लाली डोली में लाली रे दुलहनिया'

    • एक नाचंकी की बाई में अपनापन खोज लेने वाला सरल हृदय गाड़ीवान

    • अभावों की जिंदगी जीते लोगों के सपनीले अहसास

    **हिंदी फिल्मों की कमजोरी**

    • हिंदी फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी: लोक-तत्व का अभाव

    • फिल्में जिंदगी से दूर होती हैं

    • यदि कष्टकर स्थितियों का चित्रांकन होता है तो उन्हें ग्लोरीफाई किया जाता है

    • दुख का ऐसा वीभत्स रूप प्रस्तुत होता है जो दर्शकों का भावनात्मक शोषण कर सके

  • 'तीसरी कसम' की यह खास बात थी कि यह दुख को भी सहज स्थिति में, जीवन-सापेक्ष रूप में प्रस्तुत करती है
  • **शैलेंद्र का व्यक्तित्व और कलात्मकता**

    • शैलेंद्र को गीतकार नहीं, कवि कहा जाना चाहिए

    • फिल्म उद्योग की चकाचौंध के बीच रहते हुए भी यश और धन-लिप्सा से कोसों दूर

    • जो बात उनकी जिंदगी में थी, वही उनके गीतों में भी

    • उनके गीतों में सिर्फ करुणा नहीं, संघर्ष का संकेत भी था

    • और वह प्रक्रिया भी मौजूद थी जिसके तहत अपनी मंजिल तक पहुंचा जाता है

    • व्यथा आदमी को परास्त नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है

    **निष्कर्ष**

    • शैलेंद्र एक साधारण इंसान के गहन संवेदनशील हृदय वाले कवि थे

    • 'तीसरी कसम' फिल्म उनके जीवन दर्शन का प्रतिबिंब है

    • साहित्य और सिनेमा के अद्भुत संयोग का एक उदाहरण

    • अपनी कलात्मक निष्ठा के लिए व्यावसायिक कीमत चुकाने वाला एक महान् निर्माता

    • वह कवि जो फिल्म निर्माता भी बन गया, लेकिन अपनी काव्य संवेदना कभी नहीं भूला

    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. शैलेंद्र का जन्म किस शहर में हुआ था?

    • A. जबलपुर ✓
    • B. इंदौर
    • C. भोपाल
    • D. ग्वालियर

    Answer: A — पाठ में स्पष्टतः लिखा है कि शैलेंद्र का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ था।

    Q2. 'तीसरी कसम' किस साहित्यकार की रचना पर आधारित है?

    • A. मुंशी प्रेमचंद
    • B. फणीश्वर नाथ रेणु ✓
    • C. राजेंद्र यादव
    • D. दूधनाथ सिंह

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट किया गया है कि शैलेंद्र ने फणीश्वर नाथ रेणु की अमर कृति 'मारे गए गुलफाम' को सिनेमा पर उतारा।

    Q3. 'संगम' फिल्म की सफलता के बाद राजकपूर ने कितनी फिल्मों के निर्माण की घोषणा की?

    • A. दो फिल्में
    • B. तीन फिल्में
    • C. चार फिल्में ✓
    • D. पाँच फिल्में

    Answer: C — पाठ में लिखा है कि 'संगम' की सफलता के बाद राजकपूर ने चार फिल्मों के निर्माण की घोषणा की।

    Q4. शैलेंद्र ने राजकपूर को 'तीसरी कसम' के लिए मजदूरी के रूप में क्या दिया?

    • A. दस रुपये
    • B. एक रुपया ✓
    • C. पाँच रुपये
    • D. कोई मजदूरी नहीं

    Answer: B — पाठ में वर्णित है कि शैलेंद्र ने मजदूरी के तौर पर एक रुपया देने की बात कही और राजकपूर ने हँसते हुए स्वीकार कर लिया।

    Q5. 'तीसरी कसम' को निर्माण में कितना समय लगा?

    • A. तीन वर्ष
    • B. चार वर्ष
    • C. छह वर्ष ✓
    • D. आठ वर्ष

    Answer: C — पाठ में स्पष्ट है कि 1965 में निर्माण शुरू होने के बाद छह वर्षों का समय इस फिल्म को बनाने में लगा।

    Q6. संगीतकार जयकिशन को शैलेंद्र के किस गीत पर आपत्ति थी?

    • A. चलत मुसाफिर
    • B. नौ दिशाएँ ✓
    • C. लाली-लाली डोली
    • D. मेरा जूता है जापानी

    Answer: B — पाठ में बताया गया है कि जयकिशन को 'नौ दिशाएँ' गीत पर आपत्ति थी क्योंकि दर्शक केवल 'चार दिशाएँ' समझ सकते हैं।

    Q7. 'तीसरी कसम' के संबंध में कौन-सा कथन सही है?

    • A. यह शैलेंद्र की एकमात्र फिल्म नहीं थी
    • B. यह शैलेंद्र की जीवन की पहली और अंतिम फिल्म थी ✓
    • C. यह उन्होंने राजकपूर के बिना बनाई थी
    • D. इसे बनाने में केवल एक वर्ष लगा था

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट लिखा है कि 'तीसरी कसम' शैलेंद्र के जीवन की पहली और अंतिम फिल्म थी।

    Q8. 'तीसरी कसम' की असफलता का मुख्य कारण क्या माना जाता है?

    • A. अभिनेताओं की कमजोर अभिनय
    • B. संगीत की कमजोरी
    • C. फिल्म की सूक्ष्म संवेदनशीलता को दर्शकों द्वारा नहीं समझा जाना ✓
    • D. निर्माण की खराब तकनीक

    Answer: C — पाठ में कहा गया है कि फिल्म की सूक्ष्म करुणा और भावुकता को दो-चार बनाने का गणित न जानने वाले दर्शक नहीं समझ सके।

    Q9. शैलेंद्र को फिल्म उद्योग से दूर रखने वाली मुख्य प्रवृत्ति क्या थी?

    • A. व्यावसायिक सफलता की इच्छा
    • B. धन-दौलत की महत्वाकांक्षा
    • C. यश और धन-लिप्सा से दूरी, आत्म-संतुष्टि की अभिलाषा ✓
    • D. फिल्म उद्योग में काम करने की अक्षमता

    Answer: C — पाठ में स्पष्ट किया गया है कि शैलेंद्र एक आदर्शवादी भावुक कवि थे जो आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा रखते थे और व्यावसायिक सफलता से दूर रहते थे।

    Q10. शैलेंद्र के बारे में लेखक का मुख्य मत क्या है?

    • A. वे एक असफल फिल्मकार थे
    • B. वे केवल गीतकार थे, फिल्मकार नहीं
    • C. वे एक कवि थे जिन्होंने साहित्य को सिनेमा के माध्यम से जीवन्त किया ✓
    • D. वे व्यावहारिक व्यवसायी थे

    Answer: C — पाठ में लेखक ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने शैलेंद्र को गीतकार नहीं, कवि कहा है और वे साहित्य की पवित्रता को सिनेमा पर प्रतिफलित करने में सफल रहे।

    Flashcards

    शैलेंद्र का जन्म स्थान और शिक्षा पृष्ठभूमि क्या थी?

    शैलेंद्र का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ था और उन्होंने हिंदी से एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त की।

    'तीसरी कसम' फिल्म किस साहित्यिक कृति पर आधारित है?

    'तीसरी कसम' फिल्मकार शैलेंद्र ने फणीश्वर नाथ रेणु की अमर कृति 'मारे गए गुलफाम' को सिनेमा पर उतारी।

    राजकपूर को 'तीसरी कसम' में मजदूरी के रूप में कितना दिया गया?

    शैलेंद्र ने राजकपूर को मजबूरी की स्थिति में एक रुपया मजदूरी (आँवकेंस) देने की बात कही और राजकपूर ने हँसते हुए स्वीकार कर लिया।

    'संगम' फिल्म की सफलता का राजकपूर पर क्या प्रभाव पड़ा?

    'संगम' की अद्भुत सफलता ने राजकपूर में गहरा आत्मविश्वास भर दिया और उन्होंने चार फिल्मों के निर्माण की घोषणा की।

    शैलेंद्र के गीत 'नौ दिशाएँ' पर किसने आपत्ति की और क्यों?

    संगीतकार जयकिशन ने 'नौ दिशाएँ' पर आपत्ति की क्योंकि उन्हें लगा कि दर्शक केवल 'चार दिशाएँ' समझ सकते हैं, लेकिन शैलेंद्र ने परिवर्तन नहीं किया।

    'तीसरी कसम' फिल्म को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?

    'तीसरी कसम' को राष्ट्रपति स्वर्णपदक, बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार और मास्को फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कृत किया गया।

    शैलेंद्र की 'तीसरी कसम' निर्माण में कितना समय लगा?

    राजकपूर ने 1965 में 'मेरा नाम जोकर' का निर्माण शुरू किया और 'तीसरी कसम' बनाने में छह वर्षों का समय लगा।

    'तीसरी कसम' की असफलता का मुख्य कारण क्या था?

    फिल्म की सूक्ष्म संवेदनशीलता और करुणा को व्यावहारिक दर्शकों द्वारा नहीं समझा गया क्योंकि इसमें दो-चार बनाने का गणित नहीं था।

    शैलेंद्र के गीत 'मेरा जूता है जापानी' की विशेषता क्या है?

    'मेरा जूता है जापानी' गीत में राष्ट्रीय भावना के साथ भाषा की सूक्ष्मता और सांस्कृतिक गौरव का मिश्रण है।

    शैलेंद्र के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषता क्या थी?

    शैलेंद्र एक आदर्शवादी भावुक कवि थे जो आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा करते थे और व्यावसायिक सफलता तथा धन-दौलत से दूर रहते थे।

    Important Board Questions

    राजकपूर और शैलेंद्र की मैत्री की विशेषता क्या थी? 'एक रुपया मजदूरी' वाले प्रसंग को संदर्भ में समझाइए। [2 marks]

    शैलेंद्र की अदा-कारी हँसी और राजकपूर का उदार व्यवहार दिखाएँ; आजीवन दोस्ती की भावना पर ध्यान दें।

    'तीसरी कसम' फिल्म के संदर्भ में शैलेंद्र की कलात्मक दृष्टि को स्पष्ट कीजिए। इसकी असफलता के क्या कारण थे? [3 marks]

    साहित्य की रक्षा करना, सूक्ष्म संवेदनशीलता, जन-तत्व का अभाव, दो-चार बनाने का गणित न जानना — इन बिंदुओं को विकसित करें।

    ''तीसरी कसम' यदि एकमात्र नहीं तो पाँच उन फिल्मों में से है जिन्होंने साहित्य-रचना के साथ सौ प्रतिशत न्याय किया है।' इस कथन की पुष्टि करते हुए शैलेंद्र के फिल्मकार दृष्टिकोण और व्यक्तिगत गुणों को समझाइए। [5 marks]

    राजकपूर को हीरामन बनाना, हीराबाई की सहज अभिनय, लोकतत्व का समावेश, दुःख को सहज जीवन-संदर्भ में प्रस्तुत करना, आदर्शवाद और व्यावहारिकता का संतुलन दिखाएँ।

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