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Harihar Kaka

NCERT Class 10 · Hindi B Based on NCERT Class 10 Hindi B textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

हरिहर काका - संपूर्ण अध्ययन नोट्स

**अध्याय परिचय**

हरिहर काका राही मास्टर द्वारा लिखी गई एक संवेदनशील कहानी है। यह कहानी एक वृद्ध, अकेले व्यक्ति के जीवन की पीड़ा, पारिवारिक उपेक्षा, धार्मिक भावना और अंततः आत्मबोध को दर्शाती है। यह कहानी समाज में बुजुर्गों के प्रति व्यवहार और मानवीय मूल्यों पर गहरा प्रश्न चिह्न लगाती है।

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**पात्र परिचय**

**हरिहर काका** - कहानी के प्रमुख पात्र। एक वृद्ध, आत्मनिर्भर व्यक्ति जो धार्मिक विचारों वाले हैं। उनके पास 60 बीघे जमीन है, कोई संतान नहीं है, लेकिन तीन भाइयों के परिवार के साथ रहते हैं। उनकी खासियत है - संवेदनशील मन, ईश्वर में आस्था, परिवार से प्रेम, लेकिन उपेक्षा सहना।

**कथाकार (लेखक)** - वह गांव में रहते हैं और हरिहर काका के करीब हैं। वह समाज की बुराइयों को देखते हैं और इस कहानी के माध्यम से संदेश देते हैं।

**ईश्वर (ईगार) पुजारी** - ठाकुरबारी के पंडित। बुद्धिमान, धार्मिक संवेदना वाले, हरिहर काका को सही मार्गदर्शन देने वाले।

**हरिहर काका के भाई** - तीन भाई हैं। भोलेभाले, स्वार्थी प्रवृत्ति वाले। उनका मुख्य चिंता हरिहर की जमीन के बारे में है।

**भाइयों की पत्नियां** - शुरुआत में सेवा करती हैं, लेकिन बाद में उपेक्षा करने लगती हैं।

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**गांव का परिचय**

**गांव का नाम** - कहानी में गांव का निर्दिष्ट नाम नहीं दिया गया है, लेकिन यह एक छोटा सा गांव है।

**स्थिति** - शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर, बस स्टैंड के पास। आबादी लगभग 2000-3000 लोग।

**गांव के मुख्य स्थान**:

  • पश्चिमी किनारे पर एक बड़ा तालाब
  • गांव के बीच में एक पुराना बरगद का पेड़
  • गांव के पूर्व में ठाकुरबारी (देवता का मंदिर)
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    **ठाकुरबारी का महत्व**

    **ठाकुरबारी क्या है** - यह एक प्राचीन धार्मिक संस्था है जहां ठाकुरजी (देवता) की पूजा होती है। यह कहानी में गांव के मानसिक केंद्र का प्रतीक है।

    **ठाकुरबारी की स्थापना** - बहुत वर्षों पहले जब गांव बसा नहीं था, एक संत यहां आए और अपनी झोपड़ी बनाकर ठाकुरजी की पूजा करने लगे। लोगों के प्रेम से धीरे-धीरे एक छोटा मंदिर बना।

    **ठाकुरबारी का विस्तार** - जैसे-जैसे गांव बढ़ता गया, ठाकुरबारी भी बड़ा होता गया। लोग मनौती मानते - पुत्र हो जाए, मुकदमे में जीत हो, बेटी की शादी अच्छे घर में हो, लड़के को नौकरी मिल जाए। सफलता मिलने पर रुपये, शेवार, अनाज चढ़ाते। बहुत खुशी होने पर अपने खेत का एक टुकड़ा ठाकुरजी के नाम लिख देते।

    **ठाकुरबारी का वर्तमान स्वरूप** - यह इलाके की सबसे बड़ी और प्रभावशाली धार्मिक संस्था बन गई है। इसके अपने 20 बीघे खेत हैं। धार्मिक लोगों की एक समिति है जो हर तीन साल में एक मुंशी और एक पुजारी की नियुक्ति करती है।

    **ठाकुरबारी का उद्देश्य** - लोगों के मन में ठाकुरजी के प्रति भक्ति-भावना जागृत करना, धर्म से विमुख होने वाले लोगों को सही रास्ते पर लाना।

    **ठाकुरबारी में धार्मिक कार्यकलाप**:

  • भजन-कीर्तन की आवाज हमेशा गूंजती रहती है
  • बाढ़ या सूखे की मार सहते समय ठाकुरबारी में भक्तों का अखंड हरिकीर्तन होता है
  • सभी पर्व-त्योहार की शुरुआत ठाकुरबारी से होती है
  • होली में सबसे पहले गुलाल ठाकुरजी को चढ़ाया जाता है
  • दिवाली का पहला दीप ठाकुरबारी में जलता है
  • जन्म, शादी, मृत्यु के अवसरों पर अन्न-वस्त्र की पहली भेंट ठाकुरजी के नाम की जाती है
  • फसल कटाई के बाद जब खलिहान में अनाज की ढेरी तैयार हो जाती है, तो ठाकुरजी के नाम 'अगमन' निकाला जाता है, उसके बाद ही लोग अनाज अपने घर ले जाते हैं
  • **ठाकुरबारी से लोगों का संबंध** - अधिकांश लोगों का संबंध ठाकुरबारी से मन और शरीर दोनों स्तर पर गहरा है। कृषि-कार्य से बचा समय वे ठाकुरबारी में बिताते हैं। साधु-संतों का प्रवचन सुनकर और ठाकुरजी का दर्शन करके वे अपना जीवन सार्थक मानने लगते हैं। उन्हें लगता है कि ठाकुरबारी में प्रवेश करते ही वे पवित्र हो जाते हैं।

    **ठाकुरबारी के संत और पुजारी** - कहानी में कहा गया है कि ये संत और पुजारी आलसी हैं। ठाकुरजी के भोग के नाम पर वे अच्छे व्यंजन खाते हैं, आराम से पड़े रहते हैं। उन्हें काम-धाम करने में कोई रुचि नहीं है। ये लोग केवल बातें बनाना जानते हैं।

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    **हरिहर काका का परिवार और संपत्ति**

    **हरिहर काका की स्थिति** - वह अपने तीन भाइयों के साथ संयुक्त परिवार में रहते हैं। उनके पास कोई संतान नहीं है। दोनों पत्नियां अकाल मृत्यु को प्राप्त हुई हैं।

    **संपत्ति का विवरण** - कुल 60 बीघे जमीन है। प्रत्येक भाई के हिस्से में 15 बीघे पड़ते हैं। पूरा परिवार कृषि पर निर्भर है।

    **परिवार की संरचना**:

  • बड़े भाई: शादीशुदा, बच्चों वाले
  • मझले भाई: शादीशुदा, बच्चों वाले (एक बेटा शहर में क्लर्की करता है)
  • छोटे भाई: शादीशुदा, बच्चों वाले
  • हरिहर काका: अविवाहित (दोनों पत्नियां गुजर गईं)
  • **संयुक्त परिवार व्यवस्था** - भाइयों की पत्नियों को सिखाया गया था कि हरिहर काका की अच्छी तरह सेवा करें। समय पर नाश्ता-खाना दें। किसी बात की खिझावट न होने दें। शुरुआत में तो वे हरिहर की खोज-खबर लेती रहीं। फिर 'ठहर-चौका' लगाकर पंखा झलते हुए अपनी सहेलियों को अच्छे-अच्छे व्यंजन खिलाने लगीं। हरिहर को बची-खुची चीजें मिलती।

    **दरिद्रता की शुरुआत** - कभी-कभी हरिहर को रूखा-सूखा खाना खाकर संतोष करना पड़ता। अगर कभी उनकी तबीयत खराब हो जाती तो वह दुर्दशा में पड़ जाते। इतने बड़े परिवार के होते हुए भी कोई उन्हें पानी देने वाला नहीं रहता। सभी अपने-अपने कामों में व्यस्त हैं। बच्चे पढ़-लिख रहे हैं या धर्मचौकड़ी का खेल खेल रहे हैं। आदमी खेतों पर चले गए हैं। औरतें अपनी बहुओं को अच्छे-अच्छे व्यंजन खिला रही हैं। अकेले बैठे हरिहर काका को स्वयं अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं। इसी समय हरिहर काका की आँखें भर आती हैं क्योंकि वे अपनी पत्नियों को याद कर लेते हैं।

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    **परिवार का अन्याय और विस्फोट**

    **घटना की शुरुआत** - भाई के शहर में रहने वाले दोस्त के आने के अवसर पर कई तरह की सब्जी, बटवड़े, चटनी, राइता आदि बनाए गए। हरिहर काका की रुचि अच्छे भोजन के लिए तरसते रहते थे। वे मन ही मन में भतीजे के दोस्त की तारीफ करते हैं कि उसके कारण उन्हें अच्छी चीजें खाने को मिलेंगी। लेकिन सब कुछ बिल्कुल विपरीत हुआ।

    **विस्फोट का क्षण** - सभी ने खाना खा लिया। हरिहर को कोई नहीं पूछा। गायब होने वाली फसल के समय से उनका मन अच्छे खाने के लिए बेचैन था। भाई के परिवार को इस बात की निश्चितता थी कि हरिहर को पहले ही खिला दिया गया होगा। छोटे भाई की पत्नी ने रूखा-सूखा खाना - भात, दाल और अचार - हरिहर के सामने परोस दिया। हरिहर काका का बदन आग से जल गया। उन्होंने थाली उठाकर आंगन के बीच फेंक दी। भात बिखर गया। विभिन्न घरों में बैठी लड़कियां, बहुएं सब एक साथ बाहर निकल आईं।

    **हरिहर का गुस्सा** - हरिहर गुस्से में आंगन में गरजते हुए आगे बढ़ते हैं। वे कहते हैं - "समझ रही हो कि मुफ्त में खिलाती हो? तो अपने मन से यह बात निकाल दो। मेरे हिस्से के खेत की पैदावार इसी घर में आती है। मैं दो-चार नौकर रख लूँ, आराम से खाऊँ, तब भी कमी नहीं होगी। मैं अनाथ और बेसहारा नहीं हूँ। मेरे धन पर तुम सब मौज कर रही हो। लेकिन अब मैं तुम सबको बताऊँगा..." आदि।

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    **भावनात्मक संकट और समस्या**

    **हरिहर की मानसिक स्थिति** - कहानी शुरुआत में यह बताती है कि कथाकार कल भी हरिहर के यहां गया था, आज भी। लेकिन हरिहर न तो कल कुछ कह सके और न आज। दोनों दिन कथाकार उनके पास बैठा रहा, लेकिन उनसे कोई बातचीत नहीं हुई। जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा तो उन्होंने सिर उठाकर एक बार देखा और फिर सिर झुकाया। हालांकि उनकी एक ही नज़र बहुत कुछ कह गई।

    **मानसिक पीड़ा का कारण** - हरिहर काका का परिवार से गहरा जुड़ाव है। वे भाइयों को अपने से ज्यादा प्रेम करते थे। बचपन में भाइयों ने उन्हें बहुत दुलार दिया था। अपने कंधे पर बैठाकर घुमाते थे। एक पिता अपने बच्चे को जितना प्रेम करता है, हरिहर काका भाइयों को उससे कहीं ज्यादा प्रेम करते थे। जब हरिहर बड़े हुए तो उनकी पहली दोस्ती ही भाइयों के साथ हुई।

    **आत्मबोध का क्षण** - हरिहर को समझ आ गया कि वे अब किसी से कुछ कह नहीं सकते। कोई ऐसी बात नहीं जिससे वह हल्का हो सकें। कोई ऐसी उक्ति नहीं जिससे मुक्ति पा सकें। हरिहर की स्थिति उस नाव की तरह है जो बीच समुद्र में फंसी हो। वहां से चिल्लाने का कोई फायदा नहीं। उनकी चिल्लाहट दूर तक पैसी सागर की लहरों में खो जाती है। मौन होकर जल-समाधि लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं।

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    **ईगार पुजारी की भूमिका**

    **पुजारी का परिचय** - ईगार पुजारी ठाकुरबारी के ज्ञानी, धार्मिक और संवेदनशील मुंशी हैं। वे वार्षिक हुमाही (घी और शक्कर) लेने आते हैं।

    **हरिहर से मिलना** - पुजारी को हरिहर का गुस्सा सुनाई देता है। उनके कान खड़े हो जाते हैं। वे ईगार को विस्तार के साथ सारी बात बताते हैं।

    **धार्मिक मार्गदर्शन** - पुजारी हरिहर को समझाते हैं। एक अंधेरे कमरे में बैठाकर प्रेम से कहते हैं:

  • "हरिहर! यहां कोई किसी का नहीं है। सब माया का बंधन है।"
  • "तू धार्मिक प्रवृत्ति का आदमी है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि तू इस बंधन में कैसे फंस गया।"
  • "ईश्वर में भक्ति लगा। उसके सिवा कोई तुम्हारा अपना नहीं।"
  • "पत्नी, बेटे, भाई-बंधु सब स्वार्थ के साथी हैं। जिस दिन उन्हें लगेगा कि तुमसे उनका स्वार्थ नहीं सध रहा, उस दिन वे तुमसे बोलना ही बंद कर देंगे।"
  • "तुम्हारे हिस्से में 15 बीघे खेत हैं। अगर तुम एक दिन कहकर अपना खेत उन्हें न दोगे, बल्कि किसी और को लिख दोगे, तो खून का रिश्ता खत्म हो जाएगा।"
  • "तुम्हारे भले के लिए मैं बहुत दिनों से सोच रहा था, लेकिन संकोच में नहीं कह रहा था। आज कह देता हूँ - तुम अपने हिस्से का खेत ठाकुरजी के नाम पर लिख दो।"
  • "सीधा बैंक को प्राप्त करोगे। तीनों लोक में तुम्हारी कीर्ति जगमग उठेगी। जब तक चांद-सूरज रहेंगे, तब तक लोग तुम्हें याद करेंगे।"
  • "ठाकुरजी के नाम पर जमीन लिख देना तुम्हारे जीवन का महादान होगा। साधु-संत तुम्हारे पांव पखारेंगे। सभी तुम्हारा यशोगान करेंगे। तुम्हारा यह जीवन सार्थक हो जाएगा।"
  • "अपनी शेष जिंदगी तुम इसी ठाकुरबारी में गुजारना। तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होगी। एक मांगोगे तो चार हाजिर की जाएंगी।"
  • "ईश्वर को एक भर दोगे तो दस भर पाओगे। मैं अपने लिए तो तुमसे माँग नहीं रहा। तुम्हारा यह लोक और परलोक दोनों बन जाएं, इसकी राह मैं तुम्हें बता रहा हूँ।"
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    **हरिहर की आंतरिक द्वंद्व**

    **मन का संघर्ष** - पुजारी की बातें हरिहर के मन में बैठ जाती हैं। वे सोचने लगते हैं कि पुजारी बिल्कुल सही कह रहे हैं। 15 बीघे खेत की पैदावार भाइयों के परिवार को दें, तो कोई नहीं पूछता। कुछ न दें तो क्या होगा? उनका जीवन तो यह है कि उनकी पैदावार भाइयों के परिवार को दें, तो बाद में कौन उन्हें याद करेगा? जमीन हड़प जाएगी। ठाकुरजी के नाम लिख दें तो पुस्तकों तक लोग उन्हें याद करेंगे। अंतिम समय तो यह बड़ा पुण्य कर्म है।

    लेकिन साथ ही हरिहर को चिंता भी होती है। भाई का परिवार तो अपना ही होता है। जमीन न दें तो उसके साथ धोखा और विश्वासघात होगा। खून के रिश्ते के बीच दीवार बनानी होगी।

    **अंतिम निर्णय की दिशा** - हरिहर का मुँह खुल नहीं रहा है। न तो 'हाँ' कह रहे हैं और न 'नहीं'। 'नहीं' कहकर वे पुजारी को दुखी नहीं करना चाहते, क्योंकि भाई के परिवार से जो सुख-सुविधा मिल रही है, वह पुजारी की कृपा से है। और 'हाँ' तो उन्हें कहना ही नहीं है, क्योंकि अपनी जिंदगी में अपनी जमीन किसी को नहीं लिखनी।

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    **परिवार की वापसी और नई परिस्थिति**

    **भाइयों की वापसी** - शाम को जब हरिहर काका के भाई घर लौटते हैं, तो उन्हें इस घटना का पता चलता है। पहले तो वे अपनी पत्नियों पर खूब बरसते हैं। फिर एक जगह बैठकर चिंतामग्न हो जाते हैं। गांव के किसी व्यक्ति ने पुजारी को क्या-क्या समझाया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

    **भावनात्मक टकराव** - लेकिन इसके बावजूद भाइयों का मन शंकालु और बेचैन हो जाता है। 15 बीघे खेत! इस गांव की मिट्टी! दो लाख से अधिक की संपत्ति! अगर हाथ से निकल गई तो फिर वह कहीं के नहीं रहेंगे।

    **भाइयों की याचना** - रात को हरिहर काका के भाई पुनः ठाकुरबारी पहुँचते हैं। हरिहर के पाँव पकड़ते हुए रोने लगते हैं। अपनी पत्नियों की गलती के लिए क्षमा माँगते हैं और उन्हें दंड देने की बात करते हैं। साथ ही खून के रिश्ते की माया फैलाते हैं। हरिहर का दिल पसीज जाता है। वह पुनः अपने घर लौट आते हैं।

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    **घर में नई परिस्थिति**

    **परिवर्तन का दृश्य** - लेकिन इस बार घर लौटकर जो परिवर्तन हरिहर ने देखा, उसने उन्हें सुखद आश्चर्य में डाल दिया।

    **परिवार की सेवा**:

  • घर के छोटे-बड़े सब हरिहर को सिर-आँखों पर उठाने को तैयार हैं
  • भाइयों की पत्नियों ने पैर पर माथा रखकर गलती के लिए क्षमा-याचना की
  • जैसी खातिर शुरू हुई, वैसी खातिर पहले किसी के यहां मेहमान आने पर भी नहीं होती
  • उनकी रुचि और इच्छा के मुताबिक दोनों तरह का खाना-नाश्ता तैयार
  • पाँच महिलाएं उनकी सेवा में मुस्तैद - तीन भाइयों की पत्नियां और दो उनकी बहुएं
  • हरिहर दालान में आराम से पड़े रहते हैं
  • **हरिहर का भ्रम** - हरिहर समझ गए हैं कि यह सब पुजारी के चलते हो रहा है। इसलिए पुजारी के प्रति उनके मन में आदर और श्रद्धा के भाव निरंतर बढ़ते जा रहे हैं।

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    **समाज की प्रतिक्रिया**

    **खबर का प्रसार** - बिना किसी को बताए ही गांव के लोग सचाई से वाकिफ हो जाते हैं।

    **लोगों के विचारों का विभाजन**:

    **पहला विचार (धार्मिक लोग)**:

  • हरिहर को अपनी जमीन ठाकुरजी के नाम लिख देनी चाहिए
  • इससे ठाकुरबारी न सिर्फ अपने इलाके की, बल्कि पूरे राज्य की सबसे बड़ी ठाकुरबारी बन जाएगी
  • इस विचार वाले लोग धार्मिक संस्कार वाले हैं
  • ये लोग कई तरीकों से ठाकुरबारी से जुड़े हैं
  • जब सुबह-शाम ठाकुरजी को भोग लगाया जाता है, तो साधु-संतों के साथ गांव के कुछ पेटू और चतुर किस्म के लोग प्रसाद पाने के लिए वहां जुट जाते हैं
  • **दूसरा विचार (प्रगतिशील लोग)**:

  • गांव के प्रगतिशील विचारों वाले लोग
  • वैसे किसान, जिनके यहां हरिहर जैसे आदमी रहते हैं
  • इनका मानना है कि भाई का परिवार तो अपना ही होता है
  • अपनी जायदाद दूसरों को न देकर न देना सही नहीं है
  • जायदाद लिख देने से ल
  • MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. लेखक हरिहर काका के प्रति इतने स्नेह से क्यों बंधे हैं?

    • A. क्योंकि हरिहर काका के पास बहुत संपत्ति है
    • B. क्योंकि बचपन में हरिहर काका ने बहुत प्यार दिया था और वह पहली दोस्ती थी ✓
    • C. क्योंकि हरिहर काका ठाकुर बारी के पुजारी हैं
    • D. क्योंकि हरिहर काका ने लेखक को गांव के नियम सिखाए थे

    Answer: B — लेखक स्पष्ट कहते हैं कि हरिहर काका बचपन में अपनी संतान जितना प्यार करते थे, और जब लेखक बड़ा हुआ तो पहली दोस्ती हरिहर काका के साथ हुई।

    Q2. हरिहर काका की वर्तमान समस्या का मूल कारण क्या है?

    • A. वह बहुत बूढ़े हो गए हैं और काम नहीं कर सकते
    • B. उनके पास पैसा नहीं है और भाई उन्हें खाना नहीं देते
    • C. संयुक्त परिवार में रहते हुए भी वह भावनात्मक रूप से अकेले हैं - कोई उन्हें समझता नहीं है ✓
    • D. ठाकुर बारी के साधु उन्हें परेशान करते हैं

    Answer: C — लेखक यह बताते हैं कि हरिहर काका को यह समझ नहीं आता कि कहें तो क्या कहें क्योंकि उनकी पीड़ा को कोई समझता नहीं है - परिवार में होते हुए भी वह अकेले हैं।

    Q3. नाव का प्रतीकात्मक प्रयोग किसके लिए किया गया है?

    • A. गांव की नदी के लिए
    • B. हरिहर काका की असहायता और अकेलेपन के लिए ✓
    • C. ठाकुर बारी की शक्ति के लिए
    • D. गांव के लोगों की आस्था के लिए

    Answer: B — लेखक कहते हैं कि नाव जो समुद्र के बीच फंसी हो - चिल्लाने से भी बचाव नहीं हो सकता, ठीक वैसे ही हरिहर काका की स्थिति है।

    Q4. गांव में ठाकुर बारी का महत्व क्या है?

    • A. यह केवल एक धार्मिक स्थान है जहां पूजा होती है
    • B. यह गांव की पहचान है और लोग सभी महत्वपूर्ण कार्यों में यहां मनौती मानते हैं ✓
    • C. यह गांव के सबसे धनी जमींदार का घर है
    • D. यह ब्राह्मणों का आवास स्थल है

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि ठाकुर बारी गांव की आस्था का केंद्र है - पुत्र, विवाह, मुकदमा, नौकरी, फसल सभी के लिए मनौती मानी जाती है।

    Q5. हरिहर काका के भाइयों की पत्नियों की उदासीनता का कारण क्या था?

    • A. हरिहर काका उन्हें पसंद नहीं थे
    • B. पहले कुछ दिनों तक सेवा करने के बाद फिर 'ठहर-चौका' लगाकर वे अपने कामों में व्यस्त हो गईं ✓
    • C. उनके पास हरिहर काका की सेवा के लिए समय नहीं था
    • D. हरिहर काका स्वभाव से ही उदास रहते थे

    Answer: B — पाठ में लिखा है कि कुछ दिनों तक भाइयों की पत्नियां हरिहर काका की खोज-खबर लेती रहीं, फिर उन्हें कौन पूछने वाला - 'ठहर-चौका' लगाकर पंखा झलते हुए अपनी सहेलियों को ब्यौहार खिलाने लगीं।

    Q6. लेखक को ठाकुर बारी के साधु-संतों से क्या असंतोष है?

    • A. वे दिन में अधिकतर सोते हैं
    • B. वे लोग काम-धंधे में कोई रुचि नहीं रखते, केवल बातें बनाते हैं ✓
    • C. वे गांव के लोगों को धर्म नहीं सिखाते
    • D. वे ठाकुर बारी की संपत्ति का दुरुपयोग करते हैं

    Answer: B — लेखक कहते हैं कि साधु-संत ठाकुरजी को भोग लगाने के नाम पर दोनों जून हलवा-पूड़ी खाते हैं, आराम से पड़े रहते हैं, और उन्हें काम-धंधे में कोई रुचि नहीं है।

    Q7. हरिहर काका का परिवार कृषि पर निर्भर क्यों है?

    • A. क्योंकि उन्हें और कोई रोजगार नहीं मिल सका
    • B. क्योंकि परिवार के पास कुल साठ बीघे खेत हैं जिससे ही सभी को आजीविका मिलती है ✓
    • C. क्योंकि गांव में केवल कृषि ही संभव है
    • D. क्योंकि उन्हें गांव की परंपरा निभानी है

    Answer: B — पाठ में लिखा है कि हरिहर काका के परिवार के पास कुल साठ बीघे खेत हैं, इसीलिए संयुक्त परिवार के रूप में ही रहते आ रहे हैं क्योंकि कृषि-कार्य पर निर्भर हैं।

    Q8. लेखक के अनुसार हरिहर काका की मौन स्थिति का क्या कारण है?

    • A. हरिहर काका प्रकृति से ही शांत स्वभाव के हैं
    • B. उन्हें कुछ कहने की बात ही नहीं सूझती
    • C. वह अपनी समस्याओं को छिपाना चाहते हैं
    • D. जीवन की लालसा के कारण बेचैनी बढ़ गई है, कोई ऐसी बात नहीं है जिससे कहकर वह हल्का हो सकें ✓

    Answer: D — लेखक कहते हैं कि हरिहर काका को यह समझ नहीं आता कि कहें तो क्या कहें, कोई ऐसी उक्ति नहीं है जिससे वह मुक्ति पा सकें - यह अकेलेपन का परम संकट है।

    Q9. ठाकुर बारी के संचालन के लिए कौन जिम्मेदार है?

    • A. गांव का जमींदार
    • B. धार्मिक लोगों की एक समिति जो हर तीन साल पर एक मेहर और एक पुजारी की नियुक्ति करती है ✓
    • C. गांव के सरपंच
    • D. ठाकुर बारी के पास रहने वाले पुजारी

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि धार्मिक लोगों की एक समिति है जो ठाकुर बारी की देख-रेख और संचालन के लिए प्रत्येक तीन साल पर एक मेहर और एक पुजारी की नियुक्ति करती है।

    Q10. गांव के लोगों को ठाकुर बारी से क्या विश्वास है?

    • A. ठाकुर बारी में प्रवेश करते ही सभी पाप धुल जाते हैं
    • B. अच्छी फसल ठाकुरजी की कृपा से होती है और मुकदमे की जीत भी ठाकुरजी के कारण ✓
    • C. ठाकुरजी प्रत्यक्ष रूप से लोगों की मदद करते हैं
    • D. ठाकुर बारी के पुजारी चमत्कार कर सकते हैं

    Answer: B — पाठ में लिखा है कि लोगों को विश्वास है कि अच्छी फसल ठाकुरजी की कृपा से होती है, मुकदमे की जीत ठाकुरजी के चलते होती है - यह विश्वास ही ठाकुर बारी के विकास का मूल है।

    Flashcards

    लेखक हरिहर काका के बारे में क्यों सोचते हैं?

    क्योंकि लेखक गांव में सम्मान देते हैं, हरिहर काका उनके पड़ोसी हैं, बचपन में उन्होंने बहुत प्यार दिया था और वह उनकी पहली दोस्ती थी।

    ठाकुर बारी की स्थापना कब और क्यों हुई?

    वर्षों पहले एक संत ने यहां झोपड़ी बनाई, ठाकुरजी की पूजा की, और लोगों ने चंदा करके मंदिर बनवा दिया जो गांव की पहचान बन गया।

    हरिहर काका के पास कितने भाई हैं और उनकी औलाद है?

    हरिहर काका के चार भाई हैं जिनकी शादी हो चुकी है और उनके बाल-बच्चे हैं, लेकिन हरिहर काका की अपनी कोई औलाद नहीं है।

    नाव की तुलना किससे की गई है और क्यों?

    हरिहर काका की स्थिति को नाव से तुलना की गई है जो समुद्र के बीच फंसी हो - चिल्लाने से भी बचाव नहीं हो सकता, केवल मौन ग्रहण करना ही विकल्प है।

    हरिहर काका की प्रमुख समस्या क्या है?

    हरिहर काका को समझ नहीं आता कि क्या कहें जब उनकी कोई बात सुनने वाला नहीं है, और कोई भी शब्द उनको मुक्ति नहीं दे सकता।

    गांव की कुल जनसंख्या और मुख्य स्थान क्या हैं?

    गांव की कुल जनसंख्या ढाई-तीन हजार है और तीन मुख्य स्थान हैं - पश्चिम में तालाब, बीच में बरगद का पुराना वृक्ष, और पूर्व में ठाकुर बारी का मंदिर।

    ठाकुर बारी में किन अवसरों पर प्रथम भेंट की जाती है?

    जन्म, शादी और तेरहवीं के अवसरों पर अन्न-वस्त्र की पहली भेंट ठाकुरजी के नाम की जाती है।

    गांव के लोग ठाकुरजी को मनौती कब मानते हैं?

    गांव के लोग ठाकुरजी को पुत्र प्राप्ति, मुकदमे में जीत, लड़की की शादी अच्छे घर में, लड़के को नौकरी मिलने और अच्छी फसल के लिए मनौती मानते हैं।

    भाइयों की पत्नियों ने हरिहर काका की सेवा के बारे में क्या सिखाया?

    भाइयों की पत्नियों को समय पर नाश्ता-खाना देना, किसी बात की तकलीफ न देना, और खोज-खबर लेना सिखाया गया था।

    लेखक को ठाकुर बारी के साधु-संतों से क्या समस्या है?

    लेखक को साधु-संतों की निष्क्रियता, काम-धंधे में कोई रुचि न होना और सिर्फ बातें बनाना पसंद नहीं है।

    Important Board Questions

    लेखक ने हरिहर काका से मिलकर क्या महसूस किया? उनकी आंखों में क्या बात थी? [2 marks]

    हरिहर काका ने सिर उठाकर एक बार देखा फिर झुका दिया - उनकी आंखें बहुत कुछ कह रही थीं क्योंकि उनका मुंह कुछ भी नहीं बोल सकता था। उनकी आंखें यंत्रणाओं के बीच की मन:स्थिति को दर्शाती थीं।

    ठाकुर बारी गांव की पहचान कैसे बन गई? गांव के लोग इसमें कितना विश्वास रखते हैं और क्यों? [3 marks]

    ठाकुर बारी की स्थापना एक संत के प्रयास से हुई थी, जिसे लोगों ने पूरे गांव की आस्था का केंद्र बना दिया। पुत्र, विवाह, मुकदमे, नौकरी, फसल - सभी के लिए लोग मनौती मानते हैं क्योंकि उन्हें विश्वास है कि यहां की कृपा उनकी मनोकामनाएं पूरी करती है। इसी विश्वास के कारण गांव अन्य चीजों की तुलना में ठाकुर बारी पर हजार गुना अधिक ध्यान देता है।

    हरिहर काका की पीड़ा का मूल कारण क्या है और यह संयुक्त परिवार में रहते हुए भी उन्हें क्यों दूर रखता है? इसे 'नाव' की तुलना से समझाइए। [5 marks]

    हरिहर काका अकेले हैं क्योंकि संयुक्त परिवार में भी कोई उनको समझता नहीं है, सुनता नहीं है, कोई भी बात का उत्तर देता नहीं है। उनकी समस्या यह है कि अगर कहने की कोई बात हो तो भी कहने के लिए कोई तैयार नहीं है, और अगर कहें भी तो मुक्ति नहीं मिलेगी। नाव की तुलना से लेखक बताते हैं - जैसे कोई नाव समुद्र के बीच में फंसी हो, लोग चिल्लाते भी हों लेकिन चिल्लाहट दूर तक फैलकर लहरों में खो जाती है, तो फिर मौन रहकर अपनी मृत्यु स्वीकार करना ही विकल्प रह जाता है। ठीक यही हरिहर काका की स्थिति है - परिवार में होते हुए भी पूरी तरह अलग-थलग, भावनात्मक रूप से मृत।

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