**एक कहानी यह भी - मन्नू भंडारी का जीवन और कृतित्व**
**जन्म और प्रारंभिक जीवन**
• जन्म: सन् 1931 में गांव भानपुरा, शिला मांडलसौर (मध्य प्रदेश) में
• अंतरिम शिक्षा: राजस्थान के अजमेर शहर में
• उच्च शिक्षा: दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज में; हिंदी में एम.ए.
• व्यावसायिक कार्य: कॉलेज में अध्यापन
• निधन: सन् 2021
**साहित्यिक कृतियाँ**
• त्रिशंकु
• अन्य महत्वपूर्ण कहानियाँ आत्मचिंतन और मनोवैज्ञानिक गहराई से युक्त
• आपका बंटी (मातृत्व और संबंधों पर)
• महाभोज (समाज और राजनीति पर)
• एक प्लेट सैलाब
• मैं हार गई
• यही सच है
• फिल्म और टेलीविजन धारावाहिकों के लिए पटकथाएँ
• एक कहानी यह भी - आत्मकथा (हाल ही में प्रकाशित)
**साहित्यिक विशेषताएँ**
• भाषा और शिल्प में सादगी
• प्रामाणिक और वास्तविक अनुभूति
• स्त्री-मन से जुड़ी गहन संवेदनाएँ
• मनोवैज्ञानिक जटिलताओं को सरलता से व्यक्त करना
• सामाजिक यथार्थ का चित्रण
**प्रमुख पुरस्कार और सम्मान**
• हिंदी अकादेमी के शिखर सम्मान
• भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता
• राजस्थान संगीत नाटक अकादेमी
• उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पुरस्कार
**"एक कहानी यह भी" - आत्मकथा का विश्लेषण**
**संरचना और विषय**
• यह पारंभरिक आत्मकथा नहीं है
• ग्रंथित अंश में किशोरावस्था से संबंधित घटनाएँ
• पिता और कॉलेज प्रधानाध्यापिका शीला अग्रवाल का प्रभाव
• साधारण लड़की के असाधारण बनने की यात्रा
**ऐतिहासिक संदर्भ: 1946-47 की आजादी**
• आजादी की लड़ाई में छोटे शहर की युवा लड़की की भागीदारी
• उत्साह, आज, संगठन-क्षमता और विरोध करने का तरीका
• आजादी की आंधी से प्रभावित होना
**पारिवारिक पृष्ठभूमि**
• बैंकौर में उच्च प्रतिष्ठा और सम्मान
• कांग्रेस से जुड़े
• समाज-सुधार के कार्यों में संलग्न
• शिक्षा के प्रति प्रतिबद्ध - 8-10 विद्यार्थियों को घर पर रखकर शिक्षा देना
• खुशहाली और दरियादिली के दिन
• द्वैध व्यक्तित्व: कोमल-संवेदनशील परंतु क्रोधी और अहंकारी
• अजमेर आने का कारण: आर्थिक संकट
• अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश (विषयवार) पर अधूरा काम
• अपूर्ण महत्वाकांक्षा और गिरती आर्थिक स्थिति
• बच्चों को आर्थिक व्यथा का भागीदार न बनाने की जिद
• विश्वासघात के गहरे घाव → अत्यधिक संदेह
• निरक्षर-लिखी व्यक्तित्व
• पिता के विपरीत स्वभाव
• धरती से अधिक धैर्य और सहनशक्ति
• पिता की हर मांग को स्वीकार करना
• आजीवन त्याग और समर्पण (केवल देना, न माँगना)
• बच्चों के प्रति अगाध प्रेम
• असहाय मजबूरी में लिपटा त्याग - आदर्श नहीं माना जा सकता
• सहन-शक्ति का प्रतीक
**मन्नू भंडारी का व्यक्तित्व**
• काली, दुबली, कमजोर
• बड़ी बहन सुशीला के साथ तुलना (गोरी, स्वस्थ, हँसमुख)
• पिता की कमजोरी: गोरे रंग की सुंदरता
• तुलना और प्रशंसा से गहरे हीन-भाव की जड़ें
• नाम, सम्मान, प्रतिष्ठा के बावजूद हीन-भाव से नहीं बच सकीं
• पिता की संदेहशीलता की परछाई
• संघर्ष की परछाई विभिन्न रूपों में (कुंठा, प्रतिक्रिया, प्रतिछाया)
• पिता के शक्की स्वभाव से अप्रत्यक्ष प्रभाव
• व्यक्तिगत संबंधों में विश्वास की कमी
• किसी भी उपलब्धि पर भरोसा न कर पाना
• सभी कुछ 'तुक्का' लगना
• अचेतन पर्त में दबा हीन-भाव → आत्मविश्वास में बाधा
• पिता के शक्की स्वभाव की गहरी व्यथा से उत्पन्न
**बचपन के खेल और परिवेश**
• ब्रह्मपुरी मोहल्ला, अजमेर में दो-मंजिली मकान
• पिता का ऊपरी मंजिल पर साम्राज्य
• किताबें, पत्रिकाएँ, अखबार बिखरे
• पिता पढ़ना या डिक्टेशन देना
• नीचे सभी भाई-बहनें
• माँ सुबह शाम सभी की सेवा में नियुक्त
• सतोलिया, लँगड़ी-टाँग, पकड़म-पकड़ाई, काली-टीलो
• कमरों में गुड़-गुड़ियों के ब्याह
• पड़ोस की सहेलियों के साथ खेल
• भाइयों के साथ गली-डंडा
• पतंग उड़ाना, काँच पीसकर माँजा सूतना
• बहुत बड़ी जगह - घर की दीवारें मोहल्ले तक फैली हुईं
• किसी भी घर में आने-जाने में कोई पाबंदी नहीं
• कुछ घर परिवार का हिस्सा
• परिवार और मोहल्ले का घनिष्ठ संबंध
• 'पड़ोस-कल्चर' की महत्ता
**आधुनिक भारत में खोई संस्कृति**
• आधुनिक दबाव: अपनी जिंदगी खुद जीना
• फ्लैट संस्कृति से विच्छेद
• मेट्रो शहरों में 'पड़ोस-संस्कृति' का विलोप
• सामाजिक अलगाववाद
• असुरक्षा और असहायता की भावना
• बचपन की स्मृतियों से पूर्णता और सुरक्षा का अनुभव
**साहित्यिक जड़ें**
• मोहल्ले के पात्र दर्जनों प्रारंभिक कहानियों में
• किशोरावस्था और युवावस्था की शुरुआत
• परिवार का कोई पात्र नहीं (सिवाय एक-दो के)
• मोहल्ले की घटनाएँ देखे-सुने→ साहित्यिक सामग्री बनी
• लंबे समय के अंतराल में भी पात्रों की भाव-भंगिमा, भाषा अपरिवर्तित
**अतीत की शक्ति**
• बाहरी भिन्नता से परंपरा और पीढ़ियों को नकारने का गलत विचार
• अवचेतन में अतीत की शक्तिशाली जड़ें
• समय का प्रवाह दिशा बदल दे, परिस्थिति रूप बदले
• परंतु अतीत से मुक्ति संभव नहीं
• पिता की धारणा, टकराहट विभिन्न रूपों में - कुंठा, प्रतिक्रिया, प्रतिछाया
• अतीत हमेशा वर्तमान को प्रभावित करता है
**निष्कर्ष**
• पितृ-गाथा सुनाना अन्य उद्देश्य नहीं
• गुणों की पहचान और दोषों का मूल्यांकन
• पारिवारिक प्रभाव की जटिलता
• व्यक्तिगत विकास में अतीत की भूमिका
• आत्म-चिंतन और आत्मबोध का प्रसंग
Q1. मन्नू भंडारी का जन्म किस वर्ष हुआ था?
Answer: A — पाठ में स्पष्ट है कि 'जन्मी तो मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में थी, लेकिन मेरी यादों का सिलसिला शुरू होता है अजमेर...'
Q2. एक कहानी यह भी किस विधा की रचना है?
Answer: B — लेखक ने स्वयं कहा है कि उन्होंने 'आत्मकथ्य' में केवल चुनिंदा घटनाओं और व्यक्तियों के बारे में लिखा है, पूरी जीवनी नहीं।
Q3. लेखक की किस बहन के साथ अधिकतर खेल होते थे?
Answer: B — पाठ में लिखा है: 'अपने से दो साल बड़ी बहन सुशीला और मैंने घर के बड़े से आँगन में बचपन के सारे खेल खेले।'
Q4. लेखक के पिता की मुख्य असफलता कौन-सी थी?
Answer: B — पाठ कहता है कि बड़े आर्थिक झटके के कारण अजमेर आए और यहाँ अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश का अधूरा काम करते रहे।
Q5. लेखक के अनुसार उसके भीतर हीन-भाव का मूल कारण क्या था?
Answer: C — लेखक कहती हैं कि वह कालिया और दुबली-पतली थी जबकि सुशीला गोरी, स्वस्थ और हँसमुख थीं; पिता की प्रशंसा से हीन-भाव पैदा हुआ।
Q6. अजमेर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले का लेखक के जीवन में क्या महत्व है?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट है: 'यहाँ मैंने अपनी किशोरावस्था गुजारी, अपनी युवावस्था का आरंभ किया था।'
Q7. लेखक के माता-पिता के व्यक्तित्व में मुख्य अंतर क्या था?
Answer: C — पाठ कहता है: पिता 'बेहद कोमल और संवेदनशील... तो दूसरी ओर बेहद क्रोधी और अहंकारी' थे; माता 'धरती से कुछ ज्यादा ही धैर्य और सहनशक्ति' रखती थीं।
Q8. लेखक अपनी सफलता पर विश्वास क्यों नहीं कर पाती?
Answer: C — लेखक कहती हैं: 'शायद अचेतन की किसी परत के नीचे दबी इसी हीन-भावना के चलते मैं अपनी किसी भी उपलब्धि पर भरोसा नहीं कर पाती।'
Q9. आधुनिक महानगरों में 'पड़ोस-संस्कृति' क्यों खोई जा रही है?
Answer: B — लेखक लिखती हैं: 'अपनी जिंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों में फ्लैट में रहने वालों को हमारे पारंपरिक पड़ोस-संस्कृति से विछिन्न कर दिया है।'
Q10. इस आत्मकथ्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Answer: C — लेखक स्वयं कहती हैं: 'मैं तो यह देखना चाहती हूँ कि उनके व्यक्तित्व की कौन-सी खूबी और खामियाँ मेरे व्यक्तित्व के ताने-बाने में गुँथी हुई हैं।'
मन्नू भंडारी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1931 में मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ, किंतु शिक्षा अजमेर (राजस्थान) में हुई।
एक कहानी यह भी क्या है?
मन्नू भंडारी की आत्मकथ्य कृति है जिसमें उन्होंने अपनी किशोरावस्था की घटनाओं और व्यक्तित्व-निर्माण को दर्शाया है।
लेखक के पिता का मुख्य स्वभाव क्या था?
पिता संवेदनशील, कोमल किंतु अहंकारी, क्रोधी और बेहद अव्यवस्थित थे; वे अपनी आर्थिक विफलता को छिपाते थे।
लेखक की माता ने किस प्रकार का जीवन जिया?
माता ने अपनी सभी इच्छाओं को त्यागकर पिता की सभी आज्ञाओं का पालन किया और बिना शिकायत परिवार की सेवा करती रहीं।
लेखक को अपनी बड़ी बहन सुशीला से हीन-भाव क्यों आया?
सुशीला गोरी, स्वस्थ और हँसमुख थीं जबकि लेखक कालिया, दुबली और मरियल थीं; पिता द्वारा सुशीला की प्रशंसा ने गहरा हीन-भाव पैदा किया।
अजमेर का ब्रह्मपुरी मोहल्ला लेखक के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यहीं लेखक के किशोरावस्था और युवावस्था की शुरुआत हुई तथा पड़ोस की पारंपरिक सांस्कृतिक परंपरा ने उनकी रचनाओं को प्रेरित किया।
लेखक ने पारंपरिक पड़ोस-संस्कृति को आधुनिक जीवन में क्यों खोया हुआ माना है?
फ्लैट संस्कृति और आधुनिक व्यस्तता ने महानगरों में सामूहिक सह-अस्तित्व को नष्ट कर दिया है जिससे लोग संवेदनहीन हो गए हैं।
वह कौन-सी घटना थी जिसने लेखक के पिता को आर्थिक संकट में डाला?
बड़े आर्थिक झटके के कारण पिता को इंदौर से अजमेर जाना पड़ा जहाँ उन्होंने अधूरे अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश पर काम करना शुरू किया।
लेखक के अनुसार अपनी उपलब्धियों पर विश्वास न कर पाने का क्या कारण है?
बचपन में पिता द्वारा उत्पन्न किए गए गहरे हीन-भाव और आत्म-संदेह ने लेखक को आजीवन अपनी सफलता पर संशय रखने के लिए बाध्य किया।
क्या आत्मकथ्य में मन्नू भंडारी को अपने पिता का गौरव-गान करना था?
नहीं, लेखक का उद्देश्य पिता के व्यक्तित्व की किन-किन विशेषताओं ने उनके आंतरिक व्यक्तित्व को ढाला, यह समझना था; यह आत्म-विश्लेषण है।
एक कहानी यह भी में मन्नू भंडारी ने अपने पिता के किन दो विरोधाभासी गुणों को प्रकट किया है? [2 marks]
पिता के एक ओर कोमल-संवेदनशील और दूसरी ओर क्रोधी-अहंकारी स्वभाव को दर्शाएँ; यह विरोधाभास कैसे उनके आर्थिक पतन से जुड़ा था, संक्षेप में समझाएँ।
लेखक ने अपने माता-पिता के स्वभाव की तुलना करते हुए क्या कहा है और इससे पारिवारिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? [3 marks]
माता का त्याग और धैर्य बनाम पिता का अहंकार व क्रोध; दिखाएँ कि कैसे माता की सहनशीलता ने लेखक के मन में आदर्श न बनकर केवल मजबूरी की छवि रची; परिवार में तनाव के स्रोत स्पष्ट करें।
बहन सुशीला से लेखक की तुलना के आधार पर वह अपने भीतर हीन-भाव लेकर कब तक रही? इस हीन-भाव ने उसके व्यक्तित्व और लेखन को कैसे प्रभावित किया? [5 marks]
शारीरिक अंतर (काला-गोरा, दुबला-स्वस्थ) और पिता की प्रशंसा; दिखाएँ कि यह हीन-भाव आजीवन रहा और लेखक अपनी सफलताओं पर विश्वास नहीं कर सकीं; अपनी किशोरावस्था से लेकर वर्तमान तक की मनोवैज्ञानिक यात्रा को विस्तार से समझाएँ और यह बताएँ कि कैसे इसी हीन-भाव ने उन्हें संवेदनशील लेखक बनाया।
Q1. Assertion (A):
मन्नू भंडारी ने एक कहानी यह भी में अपने जीवन की संपूर्ण घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन किया है।
Reason (R):
यह पाठ परिभाषित अर्थ में आत्मकथा है जो जन्म से वर्तमान तक की सभी महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्ज करता है।
Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है क्योंकि लेखिका स्वयं कहती हैं कि उन्होंने परिभाषित अर्थ में कोई सिलसिलेवार आत्मकथा नहीं लिखी है। वे केवल अपने लेखकीय जीवन से जुड़ी व्यक्तियों और घटनाओं के बारे में लिखती हैं। इसलिए कारण गलत है।
Q2. Assertion (A):
लेखिका के पिता का व्यक्तित्व संघर्षशील और आत्मनिर्भर था।
Reason (R):
वह बनारस में अच्छी प्रतिष्ठा और सम्मान रखते थे तथा अजमेर में अपने बल-बूते से एक अद्वितीय शब्दकोश का निर्माण करने का कार्य करते रहे।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण कथन को पूरी तरह समर्थन करता है। पिता की आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपना महत्वपूर्ण कार्य जारी रखना उनके संघर्षशील स्वभाव और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
Q3. Assertion (A):
लेखिका की बहन सुशीला के साथ तुलना से लेखिका में आत्मविश्वास की कमी उत्पन्न हुई।
Reason (R):
यह भावना सामान्य है और सभी अलग-अलग बच्चों को अपने परिवार में होती है, इसलिए यह कोई गहरी समस्या नहीं है।
Answer: C — A is true but R is false — कथन पूरी तरह सही है। पाठ स्पष्ट करता है कि यह तुलना लेखिका में हीनता की गहरी ग्रंथि पैदा करती है जो उन्हें आजीवन प्रभावित करती है। लेकिन कारण गलत है क्योंकि यह कोई सामान्य समस्या नहीं है बल्कि एक गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव का कारण बनती है।
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Case Study:
वह मेरे पिता जी की एक बहुत बड़ी आर्थिक कठिनाई का शिकार हो गया और पिता वह शक्की व्यक्ति बन गये जिन्हें अपने अपने ऊपर निर्भर, अपनी किसी भी सफलता पर विश्वास नहीं रहा। शायद पिता के जीवन की यह सबसे बड़ी त्रासदी थी कि बनारस में जहाँ उनकी अपार प्रतिष्ठा और सम्मान था, अजमेर में वह सब समाप्त हो गया और वहाँ उन्हें जीवन भर अपने बल-बूते से लड़ाई लड़नी पड़ी।
Q1. पाठ के अनुसार पिता के व्यक्तित्व में परिवर्तन का मुख्य कारण क्या था?
Answer: B
Q2. लेखिका पिता की त्रासदी को कहाँ से संबंधित मानती हैं?
Answer: C
Q3. इस अंश से पिता के किस गुण का पता चलता है?
Answer: B
Real CBSE board exam questions from past papers — free to attempt.
CBSE 2026 · Set 31/1/1 · 6 marks
(i) [Question text in Hindi - skipped]
CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 6 marks
[Diagram/Map-based question — skipped]
CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 6 marks
[Question text not clearly visible in image]
CBSE 2026 · Set 31/3/1 · 4 marks
[Question text in Hindi - English portion not clearly visible]
CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 2 marks
How does the story 'Ek Kahani Yeh Bhi' explore the theme of identity?
CBSE 2026 · Set 31/4/2 · 2 marks
(i) How does 'Ek Kahani Yeh Bhi' portray the protagonist's life journey? What does it reveal?
CBSE 2026 · Set 31/4/3 · 2 marks
What is the central theme of 'Ek Kahani Yeh Bhi'?
CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 4 marks
What is the central theme of 'Ek Kahani Yeh Bhi'? Explain how the protagonist's journey reflects this theme.
CBSE 2026 · Set 31/5/2 · 2 marks
What is the central conflict in 'Ek Kahani Yeh Bhi' (Manu Bhandari)? How does the protagonist resolve it?
CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 1 mark
What is the theme of 'Ek Kahani Yeh Bhi'?
CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 1 mark
Who is the protagonist of the story?
CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 1 mark
What conflict drives the narrative?
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