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**बिस्मिल्लाह खाँ और शहनाई: संपूर्ण अध्ययन सामग्री**
**लेखक परिचय: यतीन्द्र मिश्र**
• जन्म: १९७७ में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में
• शिक्षा: लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए.
• पेशा: स्वतंत्र लेखन और अर्धवार्षिक सहित पत्रिका का संपादन
• सांस्कृतिक कार्य: विमला देवी फाउंडेशन (१९९९) का संचालन
• प्रमुख प्रकाशन: यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप, गिरजा देवी की जीवनी
• पुरस्कार: भारत भूषण अग्रवाल कविता सम्मान, हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार, श्रृंगार सम्मान
• विशेषज्ञता: कविता, संगीत, ललित कलाएँ, समाज और संस्कृति
**पाठ का समय और स्थान**
• समय काल: १९१६-१९२२ के आसपास की काशी
• स्थान: पंचगंगा घाट स्थित बालाजी मंदिर और उसका शहनाई घर (नौबतखाना)
• महत्व: शहनाई की परंपरागत ध्वनि का जन्मस्थान
**बिस्मिल्लाह खाँ: परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि**
**व्यक्तिगत जानकारी**
• पूरा नाम: उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ
• जन्मस्थान: डुमराँव, बिहार (सोन नदी के किनारों पर)
• पारिवारिक परंपरा: संगीत प्रेमी परिवार
• पिता का नाम: उस्ताद पैगंबरबक्श खाँ
• दादा का नाम: उस्ताद सलार हुसैन खाँ (डुमराँव निवासी)
• शिक्षा: पाँच-छह वर्ष डुमराँव में, फिर नानी के घर काशी (ननिहाल) में आना
• प्रसिद्ध शिष्य: अमीरुद्दीन (उनका भतीजा)
**डुमराँव का शहनाई से संबंध**
• भौगोलिक महत्व: सोन नदी के किनारे नर्कट (एक प्रकार की घास) का विशेष पाया जाना
• शहनाई निर्माण: नर्कट से रीड (reed) बनती है, जिससे शहनाई को फूँका जाता है
• ऐतिहासिक योग दान: डुमराँव की नर्कट के बिना शहनाई जैसा वाद्य बज नहीं सकता
• संबंध: बिस्मिल्लाह खाँ के जन्मस्थान का काशी से गहरा जुड़ाव
**शहनाई का परिचय और इतिहास**
**परिभाषा और वर्गीकरण**
• संगीत शास्त्र में वर्गीकरण: सुषिर वाद्य (जिसमें हवा से ध्वनि निकलती है)
• अरब देश में नाम: न्य (nak)
• शहनाई शब्द की व्युत्पत्ति: 'शाहु नै' = सुषिर वाद्यों में शाह (राजा), विशेष सम्मान की उपाधि
• संरचना: नर्कट या रीड (ujkdV) से बनी होती है, अंदर से पोली होती है
• उपयोग के तरीके: इसे फूँक कर बजाया जाता है
**ऐतिहासिक विकास**
• वैदिक इतिहास: वेदों में शहनाई का कोई उल्लेख नहीं
• मध्यकालीन संदर्भ: सोलहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में रानी तानसेन द्वारा रचित बंदिश "संगीत राग कल्पद्रुम" में शहनाई, मुरली, वंशी, श्रृंगी और मुरचंग का वर्णन
• लोक परंपरा: अवधी परंपरागत लोकगीतों और चैती में शहनाई का बारंबार उल्लेख
• धार्मिक स्थान: दक्षिण भारत के नागस्वरम् (नगाड़े की तरह) की तरह शहनाई भी प्रभातीय मंगल ध्वनि का संपूरक है
**शहनाई का सामाजिक महत्व**
• मंगल वाद्य: मंगल के परिवेश को स्थापित करने वाला वाद्य
• त्योहारों में उपयोग: मांगलिक विधि-विधानों के अवसरों पर प्रयुक्त
• विवाह समारोह: शादियों में शहनाई की मेहँदी, गीत और गिद्दा दिखता है
• सांस्कृतिक प्रतीक: भारतीय संस्कृति की पहचान
**अमीरुद्दीन (बिस्मिल्लाह खाँ की पहचान के रूप में)**
**बचपन का परिचय**
• नाम: अमीरुद्दीन
• आयु (पाठ के समय): चौदह वर्ष
• बड़े भाई: शमसुद्दीन (नौ वर्ष के)
• भौगोलिक संबंध: काशी निवासी, बालाजी मंदिर के पास रहते हैं
• शिक्षक: उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ (माँ के भाई)
**शिक्षा और प्रशिक्षण**
• समस्या: अमीरुद्दीन को राग की परिभाषा नहीं पता → 'भीमपलासी' और 'मुलतानी' जैसे कठिन संगीतात्मक शब्द समझ नहीं आते
• पृष्ठभूमि: परिवार में 'भीमपलासी', 'कल्याण', 'ललित' और 'भैरव' राग सुनने का रिवाज
• पहली प्रेरणा: गायिकाओं रसूलनबाई और बतूलनबाई के गायन से संगीत के प्रति जागृति
• बालसुलभ भाव: शहनाई बजाने के लिए अपने मन की बात करना और उस्ताद के पास जाना
**उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ का व्यक्तित्व और साधना**
**संगीत के प्रति दृष्टिकोण**
• संगीत का अर्थ: शास्त्र (विधि-विधान), आराधना, विज्ञान और कला का समन्वय
• आवश्यक शर्तें:
**लगन और समर्पण**
• आयु: अस्सी वर्ष की उम्र में भी शहनाई बजाते हैं
• प्रेरणा: अस्सी साल की उम्र में भी सातों सुरों की तलाश
• लक्ष्य: 'सच्चे सुर' की प्राप्ति → इसी एक सुर के लिए जीवनभर साधना
• संकल्प: अस्सी साल से यह सोच रहे हैं कि सातों सुरों को बर्तने की तमीज की कला अभी तक क्यों नहीं आई
**सच्चे सुर की खोज: आध्यात्मिक आयाम**
• विश्वास: ईश्वर एक दिन निश्चित रूप से सच्चे सुर का फल देंगे
• प्रार्थना: अस्सी साल की नमाज इसी सच्चे सुर को पाने की प्रार्थना में खर्च होती है
• विचार: करोड़ों मुसलमान इसी एक सच्चे सुर की इबादत में अल्लाह के आगे झुकते हैं
• आँसू: सच्चे मोती जैसे आँसू आँखों से निकल आएँ → यह सच्चे सुर की पहचान
• आशीर्वाद की प्रार्थना: 'मेरे मालिक एक सुर बख्श दे' → इसी में तसीर (असर) है कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ
**मुहर्रम का महत्व और धार्मिक मूल्यबोध**
**मुहर्रम का परिचय**
• धार्मिक महत्व: शिया मुसलमानों द्वारा मनाया जाने वाला महीना
• अर्थ: हजरत इमाम हुसैन और उनके वंश के लोगों के प्रति अशादारी (शोक-मनाना)
• अवधि: पूरे दस दिनों का शोक
**संगीत और शहनाई पर प्रतिबंध**
• नियम: मुहर्रम के दिनों में न शहनाई बजाते हैं, न किसी संगीत कार्यक्रम में भाग लेते हैं
• विशेष दिन: नवीं तारीख (अशूरा) का विशेष महत्व
• अशूरा पर बिस्मिल्लाह खाँ की परंपरा:
**आध्यात्मिक और मानवीय पहलू**
• भावनात्मक जुड़ाव: आँखें इमाम हुसैन और परिवार के शहादत में नम रहती हैं
• सामूहिक शोक: हजारों लोगों की आँखें नम रहती हैं
• हजार साल की परंपरा: मुहर्रम हर साल मनाया जाता है
• मानवीय भाव: एक बड़े कलाकार का सहज मानवीय रूप ऐसे अवसर पर आसानी से दिख जाता है
**स्मृति और भावनात्मक जुड़ाव**
**बचपन की यादें**
• सुकून के क्षणों में: बिस्मिल्लाह खाँ अपनी जवानी के दिनों को याद करते हैं
• फोकस: रियाज को कम, उस समय के अपने जुनून को अधिक याद करना
• नॉस्टेलजिया: अपने अब्बाजान और उस्ताद से ज्यादा, पक्का महल की कुलसुम हलवाई की चपौड़ी वाली दुकान को याद करना
• प्रिय यादें:
**व्यक्तित्व की विशेषताएँ**
• आँखें: अनुभवी और तत्काल खिल जाने की दैवीय क्षमता
• हास्य: बालसुलभ हँसी जिसमें कई यादें समाई हैं
• स्मृति खेल: शिष्य करते समय इसी स्वाभाविक आनंद में आँखें खिल उठती हैं
**पाठ के मुख्य संदेश**
**संगीत की साधना**
• दीर्घकालीन प्रक्रिया: संगीत एक रातोंरात कला नहीं है
• गुरु-शिष्य परंपरा: ज्ञान-स्थानांतरण का आवश्यक माध्यम
• निरंतरता: अस्सी वर्ष की उम्र में भी साधना जारी रहती है
**आध्यात्मिकता और संगीत**
• उच्च अर्थ: संगीत एक आराधना है, केवल मनोरंजन नहीं
• पवित्रता: सच्चे सुर की खोज आध्यात्मिक यात्रा है
• समर्पण: ईश्वर के लिए समर्पित संगीत अलौकिक भाव लाता है
**परंपरा और सांस्कृतिक मूल्य**
• भारतीय संस्कृति: शहनाई मांगलिक अवसरों का अभिन्न अंग
• धार्मिक सद्भाव: विभिन्न धर्मों का समान सम्मान (मंदिर में नमाज और संगीत)
• सामाजिक जिम्मेदारी: परंपरा को जीवित रखना और आगे बढ़ाना
**व्यक्तिगत विकास**
• प्रेरणा के स्रोत: बचपन की यादें और प्रिय लोग
• धैर्य और लगन: छोटी-छोटी साधना से बड़ी उपलब्धि
• जीवन दर्शन: सुख-दुःख दोनों में समता बनाए रखना
**CBSE परीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदु**
**तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए**
• बिस्मिल्लाह खाँ का जन्मस्थान: डुमराँव, बिहार
• शहनाई किससे बनती है: नर्कट/रीड से
• संगीत शास्त्र में वर्गीकरण: सुषिर वाद्य
• अमीरुद्दीन की आयु (पाठ के समय): चौदह वर्ष
• मुहर्रम में मनाया जाता है: इमाम हुसैन के शहादत का शोक
**विश्लेषणात्मक प्रश्नों के लिए**
• बिस्मिल्लाह खाँ द्वारा संगीत को आराधना क्यों कहते हैं?
• डुमराँव का शहनाई से क्या संबंध है?
• मुहर्रम में बिस्मिल्लाह खाँ संगीत क्यों नहीं बजाते?
• अमीरुद्दीन के संगीत सीखने की यात्रा में किन बातों का महत्व है?
**भाषा संबंधी महत्वपूर्ण बिंदु**
• शहनाई शब्द: फारसी मूल, 'शाहु नै' = सुषिर वाद्यों का राजा
• अरबी नाम: न्य (nay)
• मुहर्रम: इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना
• नौहा: शोक गीत
• तसीर: असर/प्रभाव
• रीड (रीड): नर्कट से बनी खोखली नली
• नर्कट: एक प्रकार की घास
• ननिहाल: माँ का घर (काशी)
• रियाज: संगीत का अभ्यास
**पाठ का समग्र उद्देश्य**
यह पाठ एक महान संगीतकार के माध्यम से भारतीय संगीत परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध, धार्मिक मूल्यबोध, और आध्यात्मिकता का परिचय देता है। साथ ही, यह दर्शाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी आस्था, परंपरा और संस्कृति के प्रति समर्पित रहकर जीवनभर साधना कर सकता है।
Q1. बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म किस वर्ष और किस नगर में हुआ था?
Answer: C — पाठ में स्पष्ट लिखा है कि '1916 से 1922 के आसपास की काशी' और अमीरुद्दीन (बिस्मिल्लाह) का जन्म डुमराँव, बिहार में हुआ।
Q2. शहनाई को संगीत शास्त्र में किन वाद्यों में गिना जाता है?
Answer: B — पाठ में लिखा है कि शहनाई को 'सुषिर-वाद्यों' में गिना जाता है और इसे 'शाहसुनय' अर्थात् सुषिर वाद्यों का शाह कहा जाता है।
Q3. रीड किस चीज़ से बनाई जाती है जो डुमराँव में मिलती है?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि रीड नरकट (एक प्रकार की घास) से बनाई जाती है जो डुमराँव की सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।
Q4. बिस्मिल्लाह खाँ के माता-पिता की ओर से संगीत-प्रेम किसने प्रदान किया?
Answer: A — पाठ में बताया गया है कि अमीरुद्दीन के मामा साकिद हुसैन और अलीबख्श देश के जाने-माने शहनाई वादक थे।
Q5. मुहर्रम के महीने में बिस्मिल्लाह खाँ क्या नहीं करते थे?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि मुहर्रम में बिस्मिल्लाह खाँ न तो शहनाई बजाते हैं और न ही किसी संगीत कार्यक्रम में भाग लेते हैं।
Q6. बिस्मिल्लाह खाँ की अष्टम तारीख की विशेष परंपरा क्या थी?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि अष्टम तारीख को खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते हैं और दालमंडी में फकीरमान के करीब आठ किलोमीटर की दूरी तक पैदल रोते हुए नौहा बजाते हैं।
Q7. संगीत साधना के लिए कौन-कौन सी शर्तें आवश्यक बताई गई हैं?
Answer: B — पाठ में लेखक ने स्पष्ट किया है कि संगीत की साधना के लिए शास्त्र, अभ्यास, गुरु-शिष्य परंपरा, पूर्ण तन्मयता, धैर्य और मंथन सभी आवश्यक हैं।
Q8. रलूबाई और बतूलबाई बिस्मिल्लाह खाँ के जीवन में कौन थीं?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि बिस्मिल्लाह खाँ को अपने जीवन के आरंभिक दिनों में संगीत के प्रति आसक्ति इन्हीं गायिकाओं को सुनकर मिली।
Q9. डुमराँव शहनाई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Answer: B — पाठ में लिखा है कि रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव की सोन नदी के किनारों पर मिलती है, इसलिए डुमराँव शहनाई के लिए महत्वपूर्ण है।
Q10. बिस्मिल्लाह खाँ किस बात के लिए अस्सी वर्षों से प्रार्थना कर रहे थे?
Answer: C — पाठ में बिस्मिल्लाह खाँ को अस्सी वर्षों से सच्चे सुर की खोज में तपस्या करते हुए दिखाया गया है और वे इसी के लिए प्रार्थना करते हैं।
बिस्मिल्लाह खाँ का जन्मस्थान कहाँ था?
बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म डुमराँव, बिहार में एक संगीत-प्रेमी परिवार में हुआ था।
शहनाई को संगीत शास्त्र में क्या कहा जाता है?
शहनाई को 'सुषिर-वाद्यों' में गिना जाता है और इसे 'शाहसुनय' अर्थात् सुषिर वाद्यों का शाह कहा जाता है।
रीड (reed) किस चीज़ से बनाई जाती है?
रीड नरकट (एक प्रकार की घास) से बनाई जाती है जो डुमराँव की सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।
बिस्मिल्लाह खाँ के गुरु का नाम क्या था?
उस्ताद पैगम्बरबख्श खाँ और मिर्जन बिस्मिल्लाह खाँ के शिक्षक थे।
मुहर्रम का महीना बिस्मिल्लाह खाँ के लिए क्यों विशेष था?
मुहर्रम में बिस्मिल्लाह खाँ शहनाई नहीं बजाते थे, बल्कि आठवीं तारीख को नौहा गाते थे और रो-रोकर आठ किलोमीटर की दूरी तय करते थे।
संगीत साधना के लिए कौन-कौन सी चीजें आवश्यक हैं?
संगीत साधना के लिए शास्त्र का परिचय, नियमित अभ्यास, गुरु-शिष्य परंपरा, पूर्ण तन्मयता, धैर्य और मंथन सभी आवश्यक हैं।
बिस्मिल्लाह खाँ ने अपने संगीत-प्रेम की प्रेरणा कहाँ से पाई?
रलूबाई और बतूलबाई जैसी गायिकाओं को सुनकर बचपन में ही उन्हें संगीत के प्रति आसक्ति और प्रेरणा मिली।
बाला जी का मंदिर काशी में किस दृष्टि से महत्वपूर्ण था?
बाला जी का मंदिर काशी में सबसे ऊपर आता है और हर दिन की शुरुआत वहाँ ध्यवनि पर होती है, जहाँ बिस्मिल्लाह खाँ को शहनाई का अभ्यास करना पड़ता था।
शहनाई किस परिस्थिति में मांगलिक वाद्य के रूप में प्रयुक्त हुई?
शहनाई मांगलिक अनुष्ठानों और विभिन्न रियासतों के दरबारों में बजाया जाता था, जो इसे एक प्रतिष्ठित और पवित्र वाद्य बनाता है।
लेखक के अनुसार बिस्मिल्लाह खाँ की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?
उनकी अनुभवी आँखें, तेजी से खिल देने की ईश्वरीय कृपा, रहस्यमय मुस्कराहट और पचास वर्षों से निरंतर संगीत-साधना उनकी महानता का प्रमाण थी।
शहनाई को 'शाहसुनय' की उपाधि क्यों दी गई? पाठ के आधार पर समझाइए। [2 marks]
शहनाई को सुषिर-वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है इसलिए इसे 'सुषिर वाद्यों का शाह' कहा जाता है; शोलहवीं शताब्दी की संगीत रचनाओं में इसका उल्लेख शाही और मांगलिक कार्यों में मिलता है।
डुमराँव और काशी बिस्मिल्लाह खाँ के जीवन में किस तरह महत्वपूर्ण थे? पाठ से उदाहरण देते हुए बताइए। [3 marks]
डुमराँव से नरकट मिलती है जिससे रीड बनती है (शहनाई की आत्मा); काशी में बाला जी मंदिर का परिवेश, गुरु-शिष्य परंपरा और मांगलिक अनुष्ठान बिस्मिल्लाह खाँ की संगीत साधना को जीवंत रखते थे।
पाठ में लेखक ने बिस्मिल्लाह खाँ को संगीत की 'आराधना' करने वाला माना है। इस कथन को समझाते हुए बताइए कि संगीत-साधना के लिए कौन-कौन से गुण आवश्यक हैं और बिस्मिल्लाह खाँ में ये किस प्रकार प्रतिफलित होते हैं। [5 marks]
संगीत को 'आराधना' कहने का अर्थ है इसे धार्मिक भक्ति के समान मानना; साधना के आवश्यक अंग हैं शास्त्र-ज्ञान, नियमित अभ्यास, गुरु-शिष्य परंपरा, तन्मयता, धैर्य और मंथन; बिस्मिल्लाह खाँ ने अस्सी वर्षों तक सच्चे सुर की खोज, मुहर्रम में तपस्या, हर दिन मंदिर में अभ्यास आदि के माध्यम से इन सभी गुणों को प्रदर्शित किया है।
Q1. Assertion (A):
बिस्मिल्लाह खाँ साहब 80 वर्ष की आयु में भी शहनाई बजाना जारी रखते हैं।
Reason (R):
संगीत एक आराधना है जिसमें विधि, शास्त्र, गुरु-शिष्य परंपरा और पूर्ण तन्मयता आवश्यक है।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण (reason) कथन (assertion) की व्याख्या करता है। बिस्मिल्लाह खाँ की निरंतर साधना उसी कारण संभव है कि वे संगीत को एक पवित्र आराधना मानते हैं, न कि व्यावसायिक कार्य।
Q2. Assertion (A):
मुहर्रम के महीने में बिस्मिल्लाह खाँ साहब की परंपरागत परिवार शहनाई नहीं बजाता।
Reason (R):
मुहर्रम का महीना शिया मुसलमानों के लिए शोक मनाने का समय है।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण पूर्णतः कथन को समझाता है। परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार मुहर्रम में शोक मनाया जाता है, इसलिए किसी भी संगीत कार्यक्रम में भाग नहीं लिया जाता।
Q3. Assertion (A):
बिस्मिल्लाह खाँ साहब को संगीत की प्रेरणा शास्त्रीय ग्रंथों से प्राप्त हुई।
Reason (R):
उन्होंने अपने जीवन के आरंभिक दिनों में रसूलन बाई और बतूलन बाई को सुनकर संगीत की प्रेरणा पाई।
Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है क्योंकि पाठ में स्पष्ट लिखा है कि उन्हें शास्त्रीय ग्रंथों से नहीं बल्कि गायिकाओं को सुनकर प्रेरणा मिली। कारण सही है और कथन को खंडित करता है।
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Case Study:
शहनाई के इसी मंगलध्वनि के नायक बिस्मिल्लाह खाँ साहब असी बरस से सुर माँग रहे हैं। सच्चे सुर की तलब। असी बरस की पाँचों वक्त की नमाज इसी सुर को पाने की प्रार्थना में खर्च हो जाती है। लाखों शिष्य, इसी एक सच्चे सुर की इबादत में खुदा के आगे झुकते हैं।
Q1. बिस्मिल्लाह खाँ साहब किस वस्तु की तलाश में असी बरस से लगे हैं?
Answer: B
Q2. पाठ के अनुसार बिस्मिल्लाह खाँ साहब अपनी प्रार्थना में क्या माँग रहे हैं?
Answer: C
Q3. लाखों शिष्य बिस्मिल्लाह खाँ साहब को किस रूप में मानते हैं?
Answer: C
Real CBSE board exam questions from past papers — free to attempt.
CBSE 2026 · Set 31/1/1 · 8 marks
(i) [Question text in Hindi - skipped]
CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 8 marks
[Diagram/Map-based question — skipped]
CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 8 marks
[Question text not clearly visible in image]
CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark
[Passage about Yatindra Mishra - Naubatkhane mein Ibadatein - Hindi text not extracted]
What is the significance of the title 'Naubatkhane mein Ibadatein'?
CBSE 2026 · Set 31/4/2 · 4 marks
(i) How does 'Naubatkhane mein Ibadatein' show the relationship between different religious practices? What is the main message of this text?
CBSE 2026 · Set 31/4/3 · 4 marks
Discuss the significance of 'Naubatkhane mein Ibadatein' in the context of cultural harmony.
CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 6 marks
Write a detailed note on the significance of 'Naubatkhane mein Ibadatein' in understanding syncretic culture.
CBSE 2026 · Set 31/5/2 · 2 marks
What is the significance of music in 'Naubatkhane mein Ibadatein' (Yatindra Mishra)?
CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 1 mark
What is 'Naubatkhana'?
CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 1 mark
What does the term 'Ibadatein' signify?
CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 1 mark
What is the historical context of the text?
CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 2 marks
How does the text explore the intersection of music and spirituality?
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