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**रीढ़ की हड्डी** जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित एक प्रसिद्ध एकांकी है। इस एकांकी की रचना 1939 में की गई थी। यह एकांकी भारतीय समाज में व्याप्त रूढ़िगत परंपराओं, विशेषतः विवाह की व्यवस्था और महिलाओं की शिक्षा के प्रति रूढ़ सोच पर तीक्ष्ण प्रहार करता है। इसके माध्यम से लेखक ने सामाजिक कुरीतियों, दहेज प्रथा और कम पढ़ी-लिखी लड़कियों की माँग जैसी बुराइयों को उजागर किया है।
**जगदीशचंद्र माथुर** का जन्म 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और भारतीय सिविल सेवा में भी चयनित हुए।
**प्रमुख कृतियाँ:**
**निधन:** 1978 में
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**उमा** — पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर और सशक्त लड़की जो रूढ़ि के खिलाफ आवाज उठाती है
**रामस्वरूप (बाबू)** — उमा के पिता, मध्यमवर्गीय परिवार के प्रतिनिधि जो परंपरा और आधुनिकता के बीच द्वंद्व में हैं
**प्रेमा** — उमा की माँ, रूढ़िवादी विचारों की प्रतीक जो परंपरागत स्त्री-शिक्षा में विश्वास रखती हैं
**शंकर** — वर (दूल्हा), एक चिकित्सा छात्र जो धीमी आवाज और झुकी कमर वाला है
**गोपालप्रसाद** — शंकर के पिता, एक पुरानी सोच वाले वकील जो नारी शिक्षा के सख्त विरोधी हैं
**रतन** — रामस्वरूप का घरेलू सहायक
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**एकांकी** नाटक का वह रूप है जो एक ही अंक में पूरी कहानी को प्रस्तुत करता है। इसमें:
**रीढ़ की हड्डी** मानव शरीर की मजबूत हड्डी है जो शरीर को सीधा रखती है। इस एकांकी में यह शीर्षक **आत्मनिर्भरता, साहस और आत्मसम्मान** का प्रतीक है। **उमा** एक आत्मनिर्भर युवती है जिसके पास अपने निर्णय लेने का साहस है — यही उसकी 'रीढ़ की हड्डी' है।
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एकांकी की शुरुआत रामस्वरूप के घर में एक तख्त (पलंग) को बिछाते हुए होती है। रतन (नौकर) और बाबू मिलकर घर को दूल्हे के परिवार के स्वागत के लिए तैयार कर रहे हैं। इसी दौरान प्रेमा अपनी चिंता व्यक्त करती है कि उमा विवाह के लिए मान्यता प्राप्त नहीं है।
**महत्वपूर्ण संवाद:**
गोपालप्रसाद और उनका बेटा शंकर विवाह की बातचीत के लिए आते हैं। बातचीत में गोपालप्रसाद स्पष्ट करते हैं कि उन्हें **अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए**। वे कहते हैं: "हद से हद मैट्रिक पास होनी चाहिए"।
**गोपालप्रसाद के मुख्य विचार:**
उमा पान की तश्तरी लेकर आती है। जैसे ही वह अपने पिता को पान देती है, उसके माथे पर सोने की रिम वाला चश्मा दिखाई देता है। यह दृश्य मोड़ बन जाता है। गोपालप्रसाद को यह पढ़ाई-लिखाई का संकेत लगता है।
**वार्तालाप:** रामस्वरूप चश्मा लगने का कारण आँखों का दर्द बताते हैं, लेकिन गोपालप्रसाद संदेह करते हैं कि यह पढ़ाई के कारण तो नहीं है।
गोपालप्रसाद उमा से गाना गवाना चाहते हैं। उमा **मीरा का प्रसिद्ध भक्ति गीत 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई'** गाती है। गीत के समय उमा की आँखें शंकर की आँखों से मिल जाती हैं, और वह अचानक रुक जाती है।
**महत्वपूर्ण बिंदु:** इस गीत का प्रतीकार्थ — मीरा ने अपना विश्वास और प्रेम एक ईश्वर को समर्पित किया था, जो स्वतंत्र चिंतन का प्रतीक है।
गोपालप्रसाद उमा से पेंटिंग, सिलाई और पुरस्कार जीतने के बारे में पूछते हैं। जब वह उमा से सीधे सवाल करते हैं, तो उमा चुप रहती है।
**रामस्वरूप का प्रयास:** पिता अपने बेटे को जवाब देने के लिए इशारे करते हैं, लेकिन उमा मौन रहती है।
यह एकांकी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ है। जब गोपालप्रसाद रूखे अंदाज में उमा से कहते हैं: "ज़रा मुँह तो खोलना चाहिए", तो उमा अपने विचार व्यक्त करती है:
**उमा का ऐतिहासिक उद्बोधन:**
"क्या जवाब दूँ, बाबू जी! जब कुर्सी-मेज बिकती है तब दुकानदार कुर्सी-मेज से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ खरीदार को दिखला देता है। पसंद आ गई तो अच्छा है, वरना..."
फिर वह तेज आवाज में कहती है:
"ये जो महाशय मेरे खरीदार बनकर आए हैं, इनसे ज़रा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?"
उमा आगे कहती है:
"और हमारी बेइज्जती नहीं होती जो आप इतनी देर से नाप-तोल कर रहे हैं? और ज़रा अपने इन साहबजादे से पूछिए कि अभी पिछली फरवरी में ये लड़कियों के होस्टल के इर्द-गिर्द क्यों घूम रहे थे, और वहाँ से कैसे भगाए गए थे!"
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1. **महिला सशक्तिकरण:** उमा एक आत्मनिर्भर युवती है जो अपनी बेइज्जती के विरुद्ध आवाज उठाती है
2. **रूढ़िगत विवाह प्रणाली की आलोचना:** विवाह को एक सौदे के रूप में दिखाया गया है
3. **नारी शिक्षा का महत्व:** उमा की शिक्षा ही उसे साहस देती है
4. **दहेज और विवाह की कुरीतियाँ:** महिलाओं को पण्य के रूप में देखने की परंपरा
5. **न्याय और समानता:** महिलाओं को सम्मान और समान अधिकार का अधिकार है
1939 में भारतीय समाज में:
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**व्यक्तित्व:**
**महत्वपूर्ण विशेषताएँ:**
**व्यक्तित्व:**
**विशेषताएँ:**
**व्यक्तित्व:**
**विशेषताएँ:**
**व्यक्तित्व:**
**महत्वपूर्ण बातें:**
**व्यक्तित्व:**
**विशेषताएँ:**
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**1. उपमा अलंकार:** "रतन भीगी बिल्ली की तरह"
**2. रूपक अलंकार:** "जब कुर्सी-मेज बिकती है"
**3. प्रतीकार्थ (Symbolism):**
**1. संवाद शैली:** एकांकी में प्राकृतिक और जीवंत संवाद हैं
**2. शब्दावली:** हिंदी और उर्दू मिश्रित
**3. व्यंग्य (Irony):** एकांकी में गहरा सामाजिक व्यंग्य है
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**रामस्वरूप का कथन:**
"ग्रामोफोन बाजा होता है न? दो तरह का होता है। एक तो आदमी का बनाया हुआ। उसे एक बार चलाकर जब चाहे रोक लो। और दूसरा परमात्मा का बनाया हुआ। उसका रिकार्ड एक बार चढ़ा तो रुकने का नाम नहीं।"
**अर्थ:** महिला प्रकृति को लेकर पूर्वाग्रह को खारिज करना। जब एक महिला को शिक्षा दी जाती है, तो उसकी प्रतिभा स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।
**गोपालप्रसाद का कथन:**
"मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं। ... मर्द के दाढ़ी होती है, औरत के नहीं।"
**अर्थ:** प्राकृतिक भिन्नता को सामाजिक असमानता के रूप में प्रस्तुत करना। यह तर्क असंगत और निंदनीय है क्योंकि शारीरिक विशेषताएँ बौद्धिक क्षमता से संबंधित नहीं हैं।
**उमा का कथन:**
"जब कुर्सी-मेज बिकती है तब दुकानदार कुर्सी-मेज से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ खरीदार को दिखला देता है।"
**अर्थ:** विवाह प्रणाली में लड़कियों को वस्तु के समान माना जाता है। उनके विचार, भावनाएँ और पसंद-नापसंद का कोई महत्व नहीं होता।
**उमा का कथन:**
"क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?"
**अर्थ:** महिलाओं को जीवंत मानवी के रूप में स्वीकार न करना। उन्हें खरीदा-बेचा जा सकता है, इस सोच की निंदा।
**उमा का तीक्ष्ण प्रश्न:**
"अभी पिछली फरवरी में ये लड़कियों के होस्टल के इर्द-गिर्द क्यों घूम रहे थे?"
**अर्थ:** द्विमापदंड (double standard) को उजागर करना। गोपालप्रसाद लड़कियों को अनपढ़ और घर के अंदर रखना चाहते हैं, लेकिन उनका बेटा लड़कियों के होस्टल के पास घूमता है।
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**प्रारंभ:** घर की तैयारी और दांपत्य संवाद
**विकास:** गोपालप्रसाद और शंकर का आगमन
**उत्कर्ष (Climax):** उमा का विद्रोह और तीक्ष्ण प्रश्न
**समाप्ति:** खुली या अधूरी (पाठकों के लिए विचार की गुंजाइश)
**1. द्वंद्व (Conflict):**
**2. संकट (Crisis):** चश्मे की दृष्टि में आना
**3. चरम-बिंदु (Climax):** उमा का भाषण
**4. तनाव:** पूरे एकांकी में तनाव बना रहता है
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एकांकी विवाह को एक **सामाजिक क्रय-विक्रय** के रूप में प्रस्तुत करता है, न कि प्रेम और सहमति का आधार:
गोपालप्रसाद का यह विचार पूरी तरह असंगत है:
**उमा का साहस:**
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**उत्तर:** एकांकी का मूल संदेश महिला सशक्तिकरण और आत्मसम्मान है। यह दर्शाता है कि महिलाओं को विवा
Q1. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के लेखक कौन हैं?
Answer: A — जगदीशचंद्र माथुर (1917-1978) ने 1939 में यह एकांकी लिखा था।
Q2. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' में मुख्य पात्र उमा किस चीज का प्रतीक है?
Answer: B — उमा एक पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर और दृढ़ संकल्पवाली महिला है।
Q3. प्रेमा के अनुसार महिला शिक्षा की सीमा कहाँ तक होनी चाहिए?
Answer: C — प्रेमा अपने समय की परंपरावादी सोच को दर्शाते हुए महिला शिक्षा की सीमा बाँधती हैं।
Q4. एकांकी में बाबू साहब द्वारा ग्रामोफोन की तुलना किससे की गई है और यह तुलना क्या दर्शाती है?
Answer: A — यह तुलना शिक्षित महिला की स्वतंत्र सोच और अनियंत्रित स्वभाव को दर्शाती है।
Q5. जगदीशचंद्र माथुर का जन्म कहाँ और कब हुआ?
Answer: B — जगदीशचंद्र माथुर का जन्म 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
Q6. एकांकी में शंकर की कौन-सी विशेषता उसे अपने पिता गोपालप्रसाद से अलग करती है?
Answer: B — शंकर चिकित्सा विद्यार्थी है और शिक्षा को विवाह से अलग मानता है, जो आधुनिक सोच दर्शाता है।
Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के संदर्भ में सही नहीं है?
Answer: C — प्रेमा परंपरावादी विचारों वाली हैं और महिला शिक्षा के विरुद्ध हैं, समर्थक नहीं हैं।
Q8. जगदीशचंद्र माथुर की सबसे प्रसिद्ध और मंचित कृति कौन-सी है?
Answer: B — 'कोणार्क' जगदीशचंद्र माथुर की सर्वाधिक चर्चित और मंचित रचना है।
Q9. रामस्वरूप द्वारा अपनी बेटी को पढ़ाया-लिखाया जाना और प्रेमा द्वारा इसका विरोध किए जाने का क्या कारण है? (परिस्थिति-आधारित प्रश्न)
Answer: B — यह एकांकी की मूल समस्या है — परंपरावादी समाज महिला शिक्षा को विवाह के लिए बाधा मानता है।
Q10. एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' क्यों रखा गया होगा? (विश्लेषणात्मक प्रश्न)
Answer: B — रीढ़ की हड्डी मजबूती, दृढ़ता और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो उमा के चरित्र को दर्शाता है।
'रीढ़ की हड्डी' एकांकी कब लिखी गई?
यह एकांकी 1939 में लिखी गई थी।
जगदीशचंद्र माथुर का जन्म कहाँ हुआ?
जगदीशचंद्र माथुर का जन्म 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ।
'रीढ़ की हड्डी' एकांकी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
विवाह प्रणाली में लेन-देन, दहेज और महिला शिक्षा के विरुद्ध समाज की रूढ़िगत सोच को उजागर करना।
एकांकी की मुख्य पात्र उमा का चरित्र क्या दर्शाता है?
उमा एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त महिला का प्रतिनिधित्व करती है।
बाबू रामस्वरूप और प्रेमा के विचारों में क्या अंतर है?
रामस्वरूप प्रगतिशील हैं और महिला शिक्षा का समर्थन करते हैं जबकि प्रेमा परंपरावादी हैं।
जगदीशचंद्र माथुर की प्रमुख कृति कौन-सी है?
जगदीशचंद्र माथुर की सर्वाधिक चर्चित और मंचित कृति 'कोणार्क' है।
'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक का प्रतीकार्थ क्या है?
रीढ़ की हड्डी मजबूत आत्मनिर्भरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
एकांकी में शंकर कौन है?
शंकर गोपालप्रसाद का लड़का है जो चिकित्सा विज्ञान का छात्र है।
प्रेमा के अनुसार महिला शिक्षा कितनी होनी चाहिए?
प्रेमा के अनुसार महिला को केवल 'आ-ई' और गिनती सीखनी चाहिए, अधिकतम स्त्री-सुबोधिनी पढ़नी चाहिए।
बाबू साहब द्वारा ग्रामोफोन की तुलना किससे की गई है?
बाबू साहब ने ग्रामोफोन की तुलना परमात्मा द्वारा बनाई गई महिला से की है जो एक बार सक्रिय हो जाए तो नियंत्रित नहीं की जा सकती।
'रीढ़ की हड्डी' एकांकी का मुख्य संदेश क्या है? [2 marks]
समाज में महिला शिक्षा की आवश्यकता और दहेज जैसी कुरीतियों की आलोचना — उमा का चरित्र यह दर्शाता है कि शिक्षित महिला आत्मनिर्भर और सशक्त होती है।
प्रेमा के विचार बाबू रामस्वरूप के विचारों से कैसे भिन्न हैं? अपने उत्तर का कारण दीजिए। [3 marks]
प्रेमा परंपरावादी हैं और महिला को केवल घरेलू कार्यों के लिए योग्य मानती हैं, जबकि रामस्वरूप प्रगतिशील हैं और महिला शिक्षा को समर्थन देते हैं — यह अंतर उनके समय-काल और सामाजिक विचारों का परिणाम है।
एकांकी में उमा की भूमिका समाज की परंपरागत सोच के विरुद्ध प्रतिरोध को दर्शाती है। विस्तार से समझाइए कि उमा का चरित्र किस प्रकार की महिला की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। [5 marks]
उमा शिक्षित, आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी है और सामाजिक दबाव में झुकती नहीं है — उसकी 'रीढ़ की हड्डी' मजबूत है। यह दर्शाता है कि महिला केवल सजने-संवरने या विवाह के लिए नहीं बल्कि अपने हक और शिक्षा के लिए लड़ सकती है, जिससे समाज में चेतना जागृत होती है और दहेज, लेन-देन जैसी कुरीतियों को चुनौती मिलती है।
Q1. Assertion (A):
एकांकी रीढ़ की हड्डी समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव को दर्शाती है।
Reason (R):
एकांकी में प्रेमा और रामस्वरूप की बातचीत से पता चलता है कि समाज महिलाओं की अधिक शिक्षा को अपराध मानता है और विवाह के लिए कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग करता है।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सटीक व्याख्या करता है। एकांकी का मूल विषय समाज की रूढ़िगत सोच और महिलाओं के साथ भेदभाव को दर्शाना है।
Q2. Assertion (A):
जगदीशचंद्र माथुर केवल ऐतिहासिक नाटकों के लेखक थे।
Reason (R):
उन्होंने सामाजिक समस्याओं से जुड़े कई एकांकी-नाटक भी लिखे जो समाज के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं।
Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है क्योंकि माथुर ने ऐतिहासिक नाटकों के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं पर आधारित एकांकी-नाटक भी लिखे। कारण सही है और कथन को खंडित करता है।
Q3. Assertion (A):
प्रेमा स्त्री-सुबोधिनी को महिलाओं के लिए आवश्यक पुस्तक मानती है।
Reason (R):
प्रेमा का विचार है कि महिलाओं को आ-ई, गिनती और स्त्री-सुबोधिनी पढ़ने से अधिक शिक्षा की आवश्यकता नहीं है।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — कथन और कारण दोनों सही हैं। प्रेमा अपने समय की महिला हैं और परंपरागत शिक्षा में विश्वास करती हैं। उनके लिए स्त्री-सुबोधिनी महिलाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है।
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Case Study:
रामस्वरूप रतन से कहते हैं - अरे धीरे-धीरे चल... अब तख्त को उधर मोड़ दे। जब परमात्मा के यहाँ अक्ल बँट रही थी तो तू देर से पहुँचा था क्या? इसके बाद रामस्वरूप ग्रामोफोन का उदाहरण देते हैं कि परमात्मा का बनाया ग्रामोफोन एक बार चला तो रुकता ही नहीं। यह कथन प्रेमा द्वारा उमा को पढ़ाने के विरुद्ध सुझावों के संदर्भ में है।
Q1. रामस्वरूप ग्रामोफोन का उदाहरण देकर किसके बारे में संकेत करते हैं?
Answer: A
Q2. रामस्वरूप के इस कथन का प्रसंग क्या है?
Answer: B
Q3. इस अंश से एकांकी की मूल समस्या कौन सी प्रतिबिंबित होती है?
Answer: B
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