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**तरुण के स्वप्न** यह पाठ नेताजी सुभाषचंद्र बोस के एक प्रसिद्ध भाषण का अंश है जिसे उन्होंने **29 दिसंबर, 1929** को **मेदिनीपुर जिले के युवक-सम्मेलन** में दिया था। इस भाषण में नेताजी ने अपने **आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र के स्वप्न** के बारे में विस्तार से बताया है।
**पाठ का मुख्य उद्देश्य:** युवाओं को प्रेरित करना और उन्हें एक बेहतर भारत निर्माण के लिए एकजुट करना।
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1. **ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष:** उन्होंने अंग्रेजी राज को समाप्त करने के लिए निरंतर संघर्ष किया और कई बार जेल की यातनाएँ सहीं
2. **आजाद हिंद फौज का नेतृत्व:** यह नेताजी की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। जैसे 1857 में भारतीय सैनिकों ने एकजुट होकर अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया, उसी प्रकार नेताजी ने आजाद हिंद फौज के माध्यम से एक सशस्त्र क्रांति का नेतृत्व किया
3. **प्रसिद्ध नारे:**
नेताजी का मानना था कि:
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**1929 का समय भारतीय इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण था:**
1. **साइमन कमीशन (1928):** इस आयोग का भारतीयों द्वारा विरोध किया गया क्योंकि इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था
2. **राष्ट्रीय आंदोलन की गति:** विभिन्न क्रांतिकारी संगठन सक्रिय थे, जिनमें भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि प्रमुख थे
3. **युवा पीढ़ी की ऊर्जा:** भारतीय युवाओं में स्वतंत्रता के लिए एक नई चेतना जाग रही थी
नेताजी ने अपने भाषण में **देशबंधु चित्तरंजन दास** का उल्लेख किया है, जो उनके राजनीतिक गुरु थे। चित्तरंजन दास के स्वप्न ने नेताजी को प्रेरित किया और वह उनके **आध्यात्मिक उत्तराधिकारी** बन गए।
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नेताजी के लिए **स्वप्न** केवल एक काल्पनिक कल्पना नहीं है। यह है:
**महत्वपूर्ण पंक्ति:** "इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।"
इसका अर्थ है कि स्वप्न उनके जीवन के प्रत्येक पहलू को प्रभावित करता है।
नेताजी के स्वप्न का समाज निम्नलिखित विशेषताओं से युक्त होगा:
#### 1. **व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्ति**
"उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।"
**अर्थ:**
**व्यावहारिक उदाहरण:**
किसी युवा को अपने विचार व्यक्त करने, अपना काम चुनने और अपना जीवन जीने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, भले ही समाज उसके विचारों से सहमत न हो।
#### 2. **जातिभेद की समाप्ति**
"उस समाज में जातिभेद का स्थान नहीं हो।"
**व्याख्या:**
**महत्व:**
यह दलितों, पिछड़ी जातियों और सभी वंचितों के अधिकारों की मांग थी।
#### 3. **महिलाओं का समान अधिकार**
"उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे और समाज तथा राष्ट्र की सेवा में समान रूप से हिस्सा ले।"
**सुभाषचंद्र बोस के समय की परिस्थिति:**
**नेताजी का दृष्टिकोण:**
उन्होंने आजाद हिंद फौज में महिलाओं की एक विशेष टुकड़ी **रानी झांसी रेजिमेंट** बनाई, जिसकी कमान **डॉ. लक्ष्मी सहगल** के पास थी। यह महिला सशक्तिकरण का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
#### 4. **आर्थिक समानता**
"उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।"
**विषमता का अर्थ:**
अमीर और गरीब के बीच का अंतर, असमान वितरण, आर्थिक असमानता
**नेताजी की मांग:**
#### 5. **शिक्षा और विकास के समान अवसर**
"उस समाज में प्रत्येक व्यक्ति शिक्षा और उन्नति का समान सुअवसर पाए।"
**इसका महत्व:**
**आधुनिक संदर्भ:**
आज भी शिक्षा में असमानता है - कुछ बच्चे अच्छे स्कूलों में जाते हैं, कुछ को न तो स्कूल ही मिलता है।
#### 6. **श्रम और कर्म की मर्यादा**
"जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी और आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।"
**मर्यादा का अर्थ:**
सम्मान, मूल्य, प्रतिष्ठा
**नेताजी का विचार:**
#### 7. **विदेशी प्रभाव से मुक्ति**
"वह राष्ट्र किसी भी विजातीय प्रभाव से हर प्रकार से मुक्त रहेगा।"
**अर्थ:**
#### 8. **भारतीय समाज के अनुरूप राष्ट्र**
"जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा।"
**यंत्र (मशीन) का रूपक:**
जैसे एक मशीन **सटीकता और सामंजस्य** से काम करती है, उसी प्रकार राष्ट्र को **भारतीय समाज के अनुसार** संचालित होना चाहिए, बाहरी नियमों के अनुसार नहीं।
#### 9. **भारतीयों की गरीबी को दूर करना**
"वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा या भारतवासी के आदर्श को सार्थक बनाकर ही स्थिर नहीं होगा।"
**भारतीय आदर्श:**
भारतीय परंपरा में जो मूल्य हैं - **सत्य, अहिंसा, सामाजिक कल्याण, आत्मनिर्भरता** - इन्हें साकार करना।
#### 10. **विश्व के लिए आदर्श**
"बल्कि विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा।"
**दूरदर्शिता:**
नेताजी की सोच **केवल भारत तक सीमित नहीं** थी। वे चाहते थे कि भारत एक **आदर्श राष्ट्र** बने जो पूरी दुनिया के लिए एक **मॉडल** हो सके।
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नेताजी कहते हैं:
"इस सत्य की प्रतिष्ठा के लिए सबकुछ किया जा सकता है, हर प्रकार का त्याग किया जा सकता है, हर संकट को सहा जा सकता है और इस स्वप्न को सार्थक बनाने के दौरान प्राण देना भी है तो 'वह मरण है स्वर्ग समान'।"
**व्याख्या:**
**यह सोच नेताजी की:**
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नेताजी का संबोधन विश्लेषण:
**क्यों 'भाइयों' कहा?**
1. **समानता का सूचक:** सभी युवा एक समान हैं, भेदभाव नहीं
2. **भावनात्मक जुड़ाव:** 'भाई' एक घनिष्ठ संबंध दर्शाता है
3. **साझा उत्तरदायित्व:** सभी को मिलकर इस स्वप्न को पूरा करना है
"यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।"
**गहरा अर्थ:**
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यह एक **भाषण (ओरेटरी)** है जिसमें निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:
#### 1. **पुनरावृत्ति का प्रयोग (Repetition)**
**उदाहरण:** "उस समाज में..., उस समाज में..., उस समाज में..."
**प्रभाव:**
#### 2. **रूपक और प्रतीकवाद**
"वही स्वप्न उनकी शक्ति का **उत्स** बना और उनके आनंद का **निर्झर** रहा।"
**उत्स (स्रोत):** जहाँ से कोई चीज निकलती है
**निर्झर (झरना):** निरंतर बहने वाला जल
**अर्थ:** स्वप्न ही उनकी सभी शक्ति और खुशी का स्रोत था।
#### 3. **सूची शैली**
भाषण में एक के बाद एक **विशेषताओं की सूची** दी गई है:
**लाभ:** यह **व्यवस्थित और स्पष्ट** संदेश देता है।
#### 4. **संबोधन शैली**
"हे मेरे तरुण भाइयों!"
"तुम्हें देने लायक मेरे पास कुछ भी नहीं है..."
**प्रभाव:**
#### 5. **विपरीतार्थक शब्दों का जोड़**
**उदाहरण:**
**प्रभाव:** दोनों स्थितियों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाता है।
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**व्याख्या:**
यह सूची **जीवन के प्रत्येक पहलू** को दर्शाती है। नेताजी कहना चाहते हैं कि:
**संदेश:** स्वप्न **जीवन का केंद्र** है, सब कुछ इसी के इर्द-गिर्द घूमता है।
**दृष्टियों का क्या अर्थ है?**
**"समाज के दबाव से मरे नहीं":**
सामाजिक परंपराएँ और अंधविश्वास व्यक्ति को **मार न दें**। यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक टिप्पणी है जो **कुप्रथाओं** के खिलाफ है।
**पंक्ति का महत्व:**
नेताजी **प्रश्न पूछते हैं** और फिर **स्वयं उत्तर देते हैं**। यह एक **प्रभावी भाषण तकनीक** है जो:
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**कर्ता कारक (Nominative):**
"हम चाहते हैं" - हम = कर्ता
**कर्म कारक (Accusative):**
"एक नया सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज" - इसे चाहते हैं = कर्म
**करण कारक (Instrumental):**
"स्वप्न की प्रेरणा से" - स्वप्न की प्रेरणा = करण
**संबंध कारक (Genitive):**
"समाज की सेवा में" - समाज = संबंध
**सरल वाक्य:**
"यह स्वप्न मेरे समक्ष नित्य और अखंड सत्य है।"
**जटिल वाक्य:**
"उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।"
**मिश्र वाक्य:**
"हमारे नेता स्वर्गीय देशबंधु चित्तरंजन दास ने भी एक स्वप्न देखा था। वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।"
**सकर्मक क्रिया:** "हम चाहते हैं" (इच्छा करते हैं)
**अकर्मक क्रिया:** "वह मरे नहीं" (मृत्यु को न प्राप्त हो)
**विभिन्न काल:**
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"वही स्वप्न उनकी शक्ति का **उत्स** बना और उनके आनंद का **निर्झर** रहा।"
**व्याख्या:**
"जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के **यंत्र** के रूप में काम करेगा।"
**व्याख्या:**
राष्ट्र को एक **यंत्र** से तुलना की गई है जो:
Q1. नेताजी सुभाषचंद्र बोस का भाषण किस वर्ष दिया गया था?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट रूप से 29 दिसंबर 1929 को मेदिनीपुर में यह भाषण दिया गया था।
Q2. चित्तरंजन दास के साथ नेताजी का क्या संबंध था?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि चित्तरंजन दास नेताजी के राजनीतिक गुरु थे और उनके स्वप्न के संप्रेरक थे।
Q3. स्वप्न को 'निर्झर' कहने से क्या भाव प्रकट होता है?
Answer: B — निर्झर एक झरना है जो सदा बहता है; वैसे ही स्वप्न लगातार प्रेरणा देता रहता है।
Q4. नेताजी के भाषण में 'सर्वांगीण' शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: B — सर्वांगीण का अर्थ है सभी पहलुओं या दृष्टियों से पूर्ण और विकसित।
Q5. आदर्श समाज में 'विषमता' न होने से क्या तात्पर्य है?
Answer: B — विषमता का अर्थ असमानता है; नेताजी ने आर्थिक और सामाजिक असमानता को खत्म करना चाहा।
Q6. जब नेताजी कहते हैं 'हमारा भी अपना एक स्वप्न है', तो 'हमारा' किसके लिए प्रयुक्त है?
Answer: C — नेताजी यहाँ युवा पीढ़ी को संबोधित कर रहे हैं; 'हमारा' का अर्थ है देश के तरुण वर्ग।
Q7. नेताजी के अनुसार किस तरह का राष्ट्र विश्व के समक्ष आदर्श बन सकता है?
Answer: C — पाठ में स्पष्ट है कि जो राष्ट्र अपने समाज को आधार बनाकर भारतवासियों का कल्याण करे, वही विश्व में आदर्श माना जाता है।
Q8. नारी मुक्ति की बात नेताजी के स्वप्न में क्यों महत्त्वपूर्ण है?
Answer: B — नेताजी चाहते हैं कि नारियों को पुरुषों के समान अधिकार मिलें और वे समाज व राष्ट्र की सेवा में बराबर भागीदार बनें।
Q9. यदि नेताजी के स्वप्न को आज का युवा पूरा करना चाहे, तो सबसे पहले क्या आवश्यक है?
Answer: B — नेताजी के स्वप्न को पूरा करने के लिए सबसे पहले समाज में जागरूकता और समानता की बात करनी आवश्यक है।
Q10. 'हे मेरे तरुण भाइयो! तुम्हें देने लायक मेरे पास कुछ भी नहीं है' — इस कथन का सही अर्थ क्या है?
Answer: B — नेताजी का अभिप्राय है कि उनके पास स्वप्न है जो असीम शक्ति और आनंद देता है — यही सबसे बड़ा उपहार है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस किस देश से संबंधित थे?
नेताजी सुभाषचंद्र बोस उड़ीसा (अब ओड़िशा) के कटक नगर से संबंधित थे।
'तरुण के स्वप्न' पाठ किसका भाषण है?
यह पाठ नेताजी सुभाषचंद्र बोस का भाषण है जो उन्होंने मेदिनीपुर में 29 दिसंबर 1929 को दिया था।
सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कौन थे?
चित्तरंजन दास सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु और स्वराज पार्टी के संस्थापक थे।
स्वप्न को 'निर्झर' क्यों कहा गया है?
स्वप्न को निर्झर कहा गया है क्योंकि झरना सदा बहता रहता है, वैसे ही स्वप्न हमेशा प्रेरणा देता रहता है।
'सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज' का अर्थ क्या है?
सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज वह समाज है जहाँ सभी व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हों और समृद्ध जीवन जीएँ।
नेताजी ने अपने स्वप्न में किन तीन चीजों की समानता की मांग की?
नेताजी ने नारी-पुरुष के अधिकारों में समानता, शिक्षा में समानता और आर्थिक समानता की मांग की।
'आजाद हिंद फौज' किसने बनाई थी?
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को चुनौती दी।
'उत्तराधिकारी' शब्द का अर्थ इस पाठ में क्या है?
इस पाठ में 'उत्तराधिकारी' का अर्थ है वह युवा जो पिछली पीढ़ी के स्वप्न को आगे बढ़ाएँ और पूरा करें।
नेताजी के अनुसार आलसी को समाज में क्या स्थान होना चाहिए?
नेताजी के अनुसार आलसी और अकर्मण्य को आदर्श समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
नेताजी ने तरुणों को अपने स्वप्न के बदले क्या दिया?
नेताजी ने तरुणों को अपने स्वप्न को उपहार के रूप में दिया जो उन्हें असीम शक्ति और आनंद देता है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस को 'नेताजी' क्यों कहा जाता है? [1 mark]
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका और 'आजाद हिंद फौज' का नेतृत्व — यही कारण है।
नेताजी के स्वप्न के अनुसार आदर्श समाज की कोई दो विशेषताएँ लिखिए। [2 marks]
जातिभेद न हो, नारी को समान अधिकार मिलें, शिक्षा सभी को मिले, आर्थिक विषमता न हो — इनमें से कोई दो लिखें।
नेताजी ने 'उस समाज में अर्थ की विषमता न हो' — यह बात क्यों कही? तीन वाक्यों में समझाइए। [3 marks]
आर्थिक असमानता से सामाजिक भेदभाव होता है, गरीबों का शोषण होता है, और समाज की एकता टूटती है — इन बातों को आधार बनाएँ।
'तरुण के स्वप्न' पाठ का अध्ययन करते हुए आप अपने समाज में कौन-कौन सी असमानताएँ पाते हैं? इन्हें दूर करने के लिए तीन सुझाव दीजिए। [5 marks]
जातिभेद, लैंगिक भेदभाव, आर्थिक असमानता — इनमें से कोई दो-तीन असमानताएँ चिन्हित करें; फिर शिक्षा, जागरूकता, कानून और सामाजिक संगठन के माध्यम से दूर करने के तरीके सुझाएँ।
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