Everything you need to ace this chapter, in one place.
Notes · Mind Map · Quiz · Assertion-Reason · Case Studies · Question Bank · Past Papers
---
**एक टोकरी भर मिट्टी** माधवराव सप्रे द्वारा रचित एक प्रसिद्ध हिंदी कहानी है। यह कहानी हमें सामाजिक न्याय, अहंकार, करुणा और मानवीय मूल्यों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती है। लेखक ने इस कहानी के माध्यम से दिखाया है कि कैसे एक गरीब वृद्धा अपनी बुद्धिमत्ता और धैर्य से एक अहंकारी जमींदार को उसके अन्याय का अहसास कराती है।
**लेखक परिचय — माधवराव सप्रे (1871-1926)**
माधवराो सप्रे हिंदी साहित्य के प्रारंभिक महत्वपूर्ण कहानीकार थे। उनकी मातृभाषा मराठी थी, किंतु लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से वे हिंदी साहित्य में आए। उन्होंने तिलक के प्रसिद्ध ग्रंथ **गीता-रहस्य** का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया। स्वदेशी आंदोलन और बहिष्कार उनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं। सप्रे की कहानियाँ केवल घटनाएँ नहीं सुनातीं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने में गहरे सवाल उठाती हैं।
---
**मुख्य घटनाएँ क्रमानुसार:**
• एक धनी जमींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोपड़ी है।
• जमींदार अपने महल का अहाता (परिसर) बढ़ाना चाहता है और झोपड़ी को हटाने के लिए कहता है।
• वृद्धा इंकार कर देती है क्योंकि वह झोपड़ी उसके स्वर्गीय पति, पुत्र और पतोहू की यादों से जुड़ी है।
• जमींदार भ्रष्ट वकीलों को पैसे देकर कानूनी चालें चलता है और अदालत से झोपड़ी पर कब्जा कर लेता है।
• वृद्धा की पोती इस घटना के बाद खाना-पीना छोड़ देती है।
• एक दिन वृद्धा जमींदार से मिलती है और झोपड़ी से मिट्टी लेने की विनती करती है।
• जमींदार को मिट्टी लेने देने की सहानुभूति हो जाती है और वह स्वयं टोकरी उठाने का प्रयास करता है।
• टोकरी को उठाते समय जमींदार को एहसास होता है कि वह बहुत भारी है।
• वृद्धा का प्रश्न — "आपसे एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्मभर कैसे उठा सकेंगे?" — जमींदार को अपने अन्याय का अहसास कराता है।
• जमींदार को अपने किए पर पश्चाताप होता है।
• वह वृद्धा से क्षमा माँगता है और झोपड़ी वापस कर देता है।
**1. वृद्धा**
— एक गरीब, अनाथ महिला जो अपनी पोती की देखभाल करती है। वह धैर्यशील, विनम्र, बुद्धिमान और करुणामय है। उसका दिल अपनी झोपड़ी से बँधा है क्योंकि उसमें उसके प्रियजनों की यादें बसी हैं।
**मुख्य विशेषताएँ:**
— अहिंसक प्रतिरोध करती है
— नैतिक शक्ति रखती है
— परोक्ष रूप से संदेश देती है (टोकरी के माध्यम से)
— विनम्रता के साथ आत्मसम्मान बनाए रखती है
**2. जमींदार साहब**
— एक धनी जमींदार जो अहंकार और लालच के शिकार है। वह धन के बल पर कानून को अपने पक्ष में मोड़ देता है। किंतु कहानी के अंत में उसका हृदय परिवर्तन होता है।
**विकास क्रम:**
— शुरुआत: अहंकारी, क्रूर, न्यायविरोधी
— मध्य: थोड़ी करुणा जागती है (वृद्धा के विनम्र आचरण से)
— अंत: आत्मचेतन, पश्चातापी, सुधारा हुआ
**3. वृद्धा की पोती**
— पाँच साल की कन्या जो अपनी दादी से गहरा जुड़ाव रखती है। वह घर की भावनात्मक संपत्ति का प्रतीक है। खाना-पीना छोड़ना उसके गहरे लगाव और प्रतिरोध को दर्शाता है।
यह कहानी **20वीं शताब्दी के प्रारंभ** में लिखी गई थी जब:
— ब्रितानी शासन चल रहा था
— जमींदारी प्रथा अत्यंत शोषणकारी थी
— गरीब, विशेषकर महिलाएँ, कानूनी सुरक्षा से वंचित थीं
— सामाजिक न्याय की माँग थी
**लेखक का उद्देश्य:**
— सामाजिक अन्याय की ओर ध्यान आकर्षित करना
— नैतिक शक्ति दिखाना (बुद्धि और धैर्य की)
— धन-मद से मुक्ति का संदेश देना
— मानवीय संवेदनशीलता जगाना
---
**1. सतही अर्थ (Literal Meaning):**
एक वृद्धा अपनी झोपड़ी से मिट्टी लेती है जिससे उसकी पोती खाना खा सके।
**2. सामाजिक अर्थ (Social Meaning):**
एक गरीब महिला को जमींदार जैसे शक्तिशाली व्यक्ति के अन्याय का सामना करना पड़ता है।
**3. प्रतीकात्मक अर्थ (Symbolic Meaning):**
— **मिट्टी** = आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ें, परंपरा, स्मृति, न्याय का भार
— **टोकरी** = वह बोझ जो गलत कर्मों का परिणाम होता है
— **चूल्हा बनाना** = घर को बसाना, जीवन को संभालना
**1. अन्याय और शोषण**
जमींदार भ्रष्ट वकीलों को रिश्वत देकर कानूनी व्यवस्था को लूट लेता है। गरीब और वंचितों को न्याय नहीं मिलता।
**पाठ से साक्ष्य:**
"बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।"
**2. नैतिक शक्ति बनाम भौतिक शक्ति**
भौतिक रूप से ताकतवर जमींदार एक टोकरी मिट्टी भी नहीं उठा सकता। यह दिखाता है कि सच्ची शक्ति नैतिकता में है।
**3. मानवीय संवेदनशीलता और परिवर्तन**
जमींदार कठोर हृदय वाला नहीं है। वृद्धा की विनम्रता और पीड़ा उसके दिल को छू जाती है और वह बदल जाता है।
**4. अहंकार का पतन**
धन-मद से अंधा हुआ जमींदार अपने कर्तव्य भूल जाता है। किंतु जब उसे सत्य का बोध हो जाता है, तो वह सुधर जाता है।
**5. महिला शक्ति और साहस**
एक कमजोर-सी दिखने वाली वृद्धा अपनी बुद्धिमत्ता, धैर्य और नैतिक साहस से एक शक्तिशाली जमींदार को झुकाती है। वह न तो झूठ बोलती है, न हिंसा करती है, न अदालत जाती है। बस अपनी करुणा और समझदारी से काम लेती है।
---
**परिभाषा:**
कारक संज्ञा या सर्वनाम के साथ लगने वाले चिह्न हैं जो उनका क्रिया के साथ संबंध बताते हैं।
**आठ कारक:**
**1. कर्ता कारक (Nominative Case)**
— चिह्न: ने (अतीत में सकर्मक क्रिया के साथ)
— परिभाषा: जो कार्य करता है
— पाठ से उदाहरण:
"वृद्धा ने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली।"
"ज़मींदार साहब ने आज्ञा दे दी।"
**2. कर्म कारक (Accusative Case)**
— चिह्न: को
— परिभाषा: जिस पर क्रिया की जाती है
— पाठ से उदाहरण:
"श्रीमान् ने वृद्धा को यहाँ से हटा दो कहा।"
"उसकी पोती को यह बात पसंद नहीं आई।"
**3. करण कारक (Instrumental Case)**
— चिह्न: से, के द्वारा
— परिभाषा: जिसके माध्यम से कार्य होता है
— पाठ से उदाहरण:
"हाथ से उठाकर बाहर ले आई।"
"अपनी बुद्धि से उसने जमींदार को शिक्षा दी।"
**4. संप्रदान कारक (Dative Case)**
— चिह्न: को, के लिए
— परिभाषा: किसे दिया जाता है / किसके लिए कार्य होता है
— पाठ से उदाहरण:
"उन्होंने अपनी सब ताकत लगाकर टोकरी को उठाना चाहा।"
"उसकी झोपड़ी को बचाने के लिए पोती ने खाना छोड़ दिया।"
**5. अपादान कारक (Ablative Case)**
— चिह्न: से (अलग होने का बोध)
— परिभाषा: कहाँ से / किससे अलग होता है
— पाठ से उदाहरण:
"पतोहू एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी।"
"अदालत से झोपड़ी पर कब्जा कर लिया।"
**6. संबंध कारक (Genitive Case)**
— चिह्न: का, की, के
— परिभाषा: एक संज्ञा का दूसरी संज्ञा के साथ संबंध
— पाठ से उदाहरण:
"जमींदार के महल के पास एक झोपड़ी थी।"
"वृद्धा की पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी।"
"ज़मींदार साहब की इच्छा का हाल सुना।"
**7. अधिकरण कारक (Locative Case)**
— चिह्न: में, पर
— परिभाषा: कहाँ / किस स्थान पर
— पाठ से उदाहरण:
"झोपड़ी में वृद्धा की यादें थीं।"
"महल के पास गरीब की झोपड़ी पर नजर थी।"
**8. संबोधन कारक (Vocative Case)**
— चिह्न: ओ, हे, अरे
— परिभाषा: किससे बात की जाती है
— पाठ से उदाहरण:
"महाराज, कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।"
"नाराज न हों..."
**परिभाषा:**
संरचना के आधार पर वाक्य को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है।
**1. साधारण वाक्य (Simple Sentence)**
जिस वाक्य में एक कर्ता और एक ही क्रिया हो।
**विशेषताएँ:**
— एक स्वतंत्र उपवाक्य
— एक ही मुख्य क्रिया
— सरल और स्पष्ट भाव
**पाठ से उदाहरण:**
"वृद्धा झोपड़ी में गई।"
"जमींदार नाराज हुए।"
"टोकरी बहुत भारी थी।"
**2. मिश्र वाक्य (Complex Sentence)**
जिस वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों। आश्रित उपवाक्य मुख्य उपवाक्य पर निर्भर होता है।
**संयोजक शब्द:** जो, कि, जब, यदि, क्योंकि, जिससे, इसलिए आदि।
**संरचना:** मुख्य उपवाक्य + संयोजक + आश्रित उपवाक्य
**पाठ से उदाहरण:**
"उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी **क्योंकि** उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ।"
यहाँ:
— मुख्य उपवाक्य: "उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी"
— संयोजक: क्योंकि
— आश्रित उपवाक्य: "उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ"
"वह जानती थी **कि** ज़मींदार उसे वापस नहीं देगा।"
— मुख्य: वह जानती थी
— आश्रित: ज़मींदार उसे वापस नहीं देगा
"**जब** जमींदार ने टोकरी उठाने का प्रयास किया **तो** उसे एहसास हुआ कि यह असंभव है।"
— आश्रित उपवाक्य: जब जमींदार ने टोकरी उठाने का प्रयास किया
— मुख्य: उसे एहसास हुआ कि यह असंभव है
**3. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)**
जिस वाक्य में दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य हों जो समान महत्व के हों और योजक शब्दों से जुड़े हों।
**संयोजक शब्द:** और, या, एवं, तथा, लेकिन, किंतु, पर, परंतु, अथवा, इसलिए, फिर भी आदि।
**विशेषताएँ:**
— सभी उपवाक्य मुख्य होते हैं
— कोई भी आश्रित नहीं होता
— समान स्तर का महत्व
**पाठ से उदाहरण:**
"वृद्धा बहुत दुःखी थी **और** जमींदार बहुत अहंकारी था **किंतु** फिर भी उसके हृदय में सद्भावना थी।"
यहाँ:
— पहला उपवाक्य: वृद्धा बहुत दुःखी थी
— और: संयोजक
— दूसरा उपवाक्य: जमींदार बहुत अहंकारी था
— किंतु: संयोजक
— तीसरा उपवाक्य: फिर भी उसके हृदय में सद्भावना थी
"वह हाथ जोड़कर विनती करने लगी **और** जमींदार का कोप थोड़ा शांत हुआ।"
"ज़मींदार ने अन्याय किया **पर** अंत में उसे पश्चाताप हुआ **और** वह क्षमा माँगने लगा।"
**परिभाषा:**
मुहावरे शब्दों के विशेष योग होते हैं जिनका अर्थ शब्दों के सामान्य अर्थ से भिन्न होता है। ये किसी भाष्य को रोचक और प्रभावशाली बनाते हैं।
**पाठ में मुहावरे:**
**1. "बाल की खाल निकालना"**
— अर्थ: बहुत ही बारीकी से या जटिल तरीके से काम करना; चालाकी से काम करना
— पाठ में वाक्य: "बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।"
— अर्थ: चतुर और धूर्त वकीलों को पैसे देकर जटिल कानूनी प्रक्रिया अपने पक्ष में मोड़ दी।
**2. "थैली गरम करना"**
— अर्थ: किसी को पैसे देना; रिश्वत देना
— पाठ में उदाहरण के साथ ऊपर दिया गया है।
**3. "हाथ जोड़ना"**
— अर्थ: विनती करना; प्रार्थना करना; आग्रह करना
— पाठ में: "फिर हाथ जोड़कर श्रीमान् से प्रार्थना करने लगी।"
**4. "आँखें खुल जाना"**
— अर्थ: सत्य का ज्ञान हो जाना; चेतन हो जाना; समझ आ जाना
— पाठ में: "वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं।"
— यानी: जमींदार को अपने किए का अहसास हो गया।
**5. "आँसुओं की धारा बहना"**
— अर्थ: अत्यधिक रोना; तीव्र भावनाओं से रोना
— पाठ में: "उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।"
**6. "दुख के मारे रोना"**
— अर्थ: भारी दुःख से रोना; पीड़ा से रोना
— पाठ में: "जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी।"
**7. "फूट-फूट कर रोना"**
— अर्थ: बहुत तेजी से रोना; बिलखकर रोना
— यह शब्द-द्वैत का उदाहरण भी है (एक शब्द को दोहराना)।
**8. "घर से जुड़ाव"**
— पाठ में: "उस झोपड़ी में उसका ऐसा कुछ मन लग गया था।"
— अर्थ: बहुत प्रेम और लगाव हो जाना।
**9. "कर्तव्य भूल जाना"**
— अर्थ: अपने कर्तव्य को नहीं याद रखना; अपने कर्तव्य को भूल जाना
— पाठ में: "ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।"
**10. "लज्जित होना"**
— अर्थ: शर्मिंदा होना; अपमानित महसूस करना
— पाठ में: "वह लज्जित होकर कहने लगे कि नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।"
**लोकोक्तियाँ** पूरी कहानी में व्यक्त भाव को लोकप्रिय कहावतों से जोड़ा जा सकता है:
— **"अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना"** — जमींदार ने अपना ही नुकसान किया।
— **"जैसी करनी तैसी भरनी"** — जमींदार का अन्याय उसके सामने आ गया।
— **"नीति से बड़ी नीति नहीं"** — वृद्धा की नैतिक शक्ति सबसे बड़ी थी।
— **"धन का अहंकार बुरा है"** — जमींदार का पतन उसके धन-मद से हुआ।
**परिभाषा:**
दो वर्णों के मेल से होने वाले परिवर्तन को संधि कहते हैं।
**संधि के प्रकार:**
1. स्वर संधि
2. व्यंजन संधि
3. विसर्ग संधि
**पाठ में संधि के उदाहरण:**
**1. स्वर संधि (Vowel Combination)**
**इ + ए = ई (Ikat Sandhi)**
— पति + इच्छा = पत्तेच्छा (यहाँ व्यंजन परिवर्तन भी है)
— वास्तविक: पतिच्छा
**अ + ई = ऐ (Vridhi Sandhi)**
— महल + का = महल का (यहाँ अलग स्थिति है)
**2. व्यंजन संधि (Consonant Combination)**
**त् + च = च्च (Palatalization)**
— पति + इच्छा = पत्तिच्छा या पत्तेच्छा (परिवर्तन)
— लेकिन यहाँ शब्द में सीधा "पतोहू" है जो अलग शब्द है।
**व्यावहारिक पाठ उदाहरण:**
"उस" + "अहाता" = "उसअहाता" (सामान्य)
लेकिन संयुक्त होने पर "उसका अहाता" कहते हैं।
"पति + इकलौता" = "पत्तिकलौता" (व्यंजन संधि से)
**परिभाषा:**
दो या अधिक शब्दों के योग को समास कहते हैं। समास में शब्दों का मूल रूप बदल जाता है।
**समास के प्रकार:**
**1. तत्पुरुष समास (Tatpurusha Compound)**
जिसमें पूर्वपद विशेषण हो और उत्तरपद विशेष्य हो।
**पाठ से उदाहरण:**
— **"गरीब अनाथ"** = गरीब और अनाथ (यहाँ दोनों एक-दूसरे को बराबरी से संशोधित करते हैं)
— **"धन-मद"** = धन का मद, अर्थात् धन से उत्पन्न अहंकार
— **"पत्नी-पुत्र"** = पत्नी और पुत्र (द्वंद्व समास)
**2. द्वंद्व समास (Coordinative Compound)**
जिसमें दोनों पद समान महत्व के हों और "और" से जुड़ते हों।
**पाठ से उदाहरण:**
— **"पति और पुत्र"** = पति-पुत्र
— **"खाना-पीना"** = खाना और पीना
— **"आँखें और आँसू"** = आँखें-आँसू (यहाँ भी द्वंद्व)
**3. बहुव्रीहि समास (Exocentric Compound)**
जिसमें दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ को व्यक्त करते हैं।
**पाठ से उदाहरण:**
— **"अनाथ"
Q1. किसी श्रीमान् ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता कब लगी?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि ज़मींदार को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
Q2. वृद्धा की पोती ने खाना-पीना क्यों छोड़ दिया?
Answer: C — पाठ में कहा गया है कि पोती हमेशा कहती थी—'अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी।' यह घर से आसक्ति दर्शाता है।
Q3. 'बाल की खाल निकालना' मुहावरे का सही अर्थ है—
Answer: A — यह मुहावरा धूर्त और बारीकी से किसी को धोखा देने का अर्थ प्रकट करता है; यहाँ वकीलों की चालाकी के लिए प्रयुक्त हुआ है।
Q4. ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
Answer: B — पाठ में कहा गया है—'बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से कब्जा कर लिया।'
Q5. जब ज़मींदार ने टोकरी उठाने का प्रयास किया, तो वह उठ न सकी। इससे कहानी क्या संकेत देती है?
Answer: C — यह एक प्रतीकात्मक घटना है; वृद्धा कहती है कि छोटी मिट्टी उठ न सकी तो पूरी झोंपड़ी का भार जीवनभर कैसे उठाएँगे।
Q6. निम्नलिखित में से 'की' (संबंधसूचक कारक) का सही प्रयोग किस वाक्य में है?
Answer: B — विकल्प B में 'की' वृद्धा और पोती के बीच संबंध दर्शाता है (पोती किसकी? वृद्धा की)।
Q7. ज़मींदार के मन में दया कब जागी?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट है—'जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई।'
Q8. कहानी के अंत में ज़मींदार ने क्या किया?
Answer: B — पाठ के अंत में कहा गया है—'कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।'
Q9. यदि आज का कोई शक्तिशाली व्यक्ति किसी दुर्बल को सताता है, तो इस कहानी के आधार पर सबक क्या है?
Answer: C — कहानी का मुख्य संदेश यही है कि अन्याय का भार अंततः अन्यायकारी को ही उठाना पड़ता है और विनम्रता से सत्य जीत जाता है।
Q10. निम्नलिखित में कौन सी पंक्ति 'कि' (संयोजक) का सही प्रयोग दर्शाती है?
Answer: A — विकल्प A में 'कि' संयोजक है जो यह बताता है कि क्या सोचा गया (कि सब ठीक हो जाएगा); यह पूर्ण और अधूरे वाक्य को जोड़ता है।
कहानी में ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की इच्छा कब हुई?
जब ज़मींदार अपने महल के अहाते को बढ़ाना चाहते थे तब झोंपड़ी बाधा बन गई।
वृद्धा की एकमात्र सहायता कौन था?
वृद्धा की पोती (पाँच साल की लड़की) ही उसकी वृद्धावस्था में एकमात्र आधार थी।
'बाल की खाल निकालने वाले' मुहावरे का अर्थ क्या है?
बहुत ही धूर्त और बारीकी से धोखा देने वाले (यहाँ ज़मींदार के वकील)।
पोती ने खाना-पीना क्यों छोड़ दिया था?
अपने घर की मिट्टी से गहरा लगाव था; वह अपने ही घर में खाना चाहती थी।
ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली?
टोकरी अन्याय के भार का प्रतीक थी; ज़मींदार शारीरिक रूप से नहीं, नैतिक रूप से कमजोर था।
वृद्धा ने मिट्टी माँगने के लिए कौन सी रणनीति अपनाई?
विनम्रता, विनती और ज़मींदार के पैरों पर गिरकर उसका दया जागृत किया।
'संयोजक' किसे कहते हैं?
संयोजक वह शब्द या कण हैं जो शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं; 'कि', 'और', 'या' आदि संयोजक हैं।
ज़मींदार के आचरण में परिवर्तन का संकेत कहाँ मिला?
जब ज़मींदार ने किसी नौकर से न कहकर स्वयं टोकरी उठाने का प्रयास किया।
कहानी का सर्वप्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
वृद्धा है क्योंकि वह ताकत से नहीं, बुद्धि और करुणा से अन्याय का विरोध करती है।
माधवराव सप्रे ने कहानी के माध्यम से कौन सा मुख्य संदेश दिया है?
धन और शक्ति से हमें अहंकार नहीं बल्कि करुणा, न्याय और अपने कर्तव्य का बोध होना चाहिए।
ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की इच्छा क्यों हुई? [1 mark]
अहाता = बागीचे का घेरा; बढ़ाना = विस्तार करना। एक ही पंक्ति में उत्तर दें।
वृद्धा की पोती खाना क्यों नहीं खा रही थी? पाठ के आधार पर लिखिए। [2 marks]
दो बातें लिखें— (1) पोती कहाँ रहना चाहती थी? (2) घर से उसका कौन सा संबंध था?
वृद्धा ने मिट्टी की टोकरी माँगकर क्या संदेश देना चाहा? कहानी के आधार पर समझाइए। [3 marks]
तीन बिंदु— (1) मिट्टी क्या प्रतीक है? (2) 'हजारों टोकरियाँ' किसका प्रतीक हैं? (3) ज़मींदार को कौन सा अहसास हुआ?
कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? अपने शब्दों में विस्तार से लिखिए और कहानी के घटनाक्रम के साथ समझाइए। [5 marks]
पाँच बातें शामिल करें— (1) अन्याय का परिणाम क्या होता है? (2) ज़मींदार की गलती क्या थी? (3) वृद्धा ने किस तरह सत्य को सामने लाया? (4) ज़मींदार के पश्चाताप का अर्थ? (5) समाज में न्याय के लिए क्या आवश्यक है?
Q1. Assertion (A):
ज़मींदार साहब ने वकीलों को रिश्वत देकर झोपड़ी पर अवैध कब्जा कर लिया था।
Reason (R):
पाठ में कहा गया है कि 'बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया' जिसका अर्थ है भ्रष्ट तरीका अपनाना।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन को पूर्ण रूप से समझाता है। 'थैली गरम करना' मुहावरा रिश्वत देने का संकेत है और यह दर्शाता है कि ज़मींदार ने अन्यायपूर्ण तरीका अपनाया।
Q2. Assertion (A):
वृद्धा की पोती ने इसलिए खाना छोड़ दिया था क्योंकि वह जिद्दी स्वभाव की थी।
Reason (R):
पोती को अपने घर की याद थी और वह विश्वास करती थी कि अपने घर की मिट्टी से बने चूल्हे की रोटी ही उसे संतुष्ट कर सकती है।
Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है, लेकिन कारण सही है। पोती की खाना न खाने का कारण जिद नहीं था, बल्कि गहरा भावनात्मक लगाव और अपने घर की मिट्टी से संबंधित था। यह उसके संवेदनशील मन को दर्शाता है।
Q3. Assertion (A):
ज़मींदार को टोकरी का वजन उठाते समय एहसास हुआ कि अन्याय का भार वास्तव में बहुत भारी है।
Reason (R):
जब ज़मींदार ने टोकरी को उठाने का प्रयास किया तो वह एक हाथ भी ऊँची न हो सकी, जिससे वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से समझाया कि कर्मफल का दायित्व उठाना बेहद मुश्किल है।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों सही हैं। कथन में दिया गया अर्थ सही है और कारण इसको पूर्ण रूप से समर्थन करता है। यह कहानी का सबसे महत्वपूर्ण दृश्य है जहाँ ज़मींदार को अपनी गलती का अनुभव होता है।
Unlock more Assertion-Reason questions in Premium — unlock →
Case Study:
एक दिन श्रीमान् उस झोपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बताला रहे थे कि इतने में वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। श्रीमान् ने उसको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहाँ से हटा दो। पर वह गिड़गिड़ाकर बोली, 'महाराज, अब तो झोपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ। महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।'
Q1. वृद्धा ज़मींदार के पास क्या माँगने गई थी?
Answer: C
Q2. ज़मींदार ने वृद्धा को देखकर सबसे पहले क्या आदेश दिया?
Answer: C
Q3. इस अंश से वृद्धा के किस गुण का परिचय मिलता है?
Answer: B
You've seen the free preview. Open the full interactive study kit — mind map, instant-graded quiz, progress tracking — free, no sign-in required.
Open Full Study Kit — Free →Premium unlocks the full Question Bank, Daily Practice Papers, Chapter Quiz and Full Mock Papers for every chapter.