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Do Gauraiya

NCERT Class 8 · Hindi Based on NCERT Class 8 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

कक्षा 8 हिंदी (मल्हार, एनसीएफ 2023) - "दो गौरैया" - संपूर्ण अध्ययन सामग्री

पाठ परिचय

**पाठ का नाम:** दो गौरैया

**लेखक:** भीष्म साहनी

**विधा:** कहानी (गद्य)

**पाठ का प्रकार:** सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित कहानी

यह कहानी एक परिवार के घर में आई दो गौरैयों की गाथा को प्रस्तुत करती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे पिताजी शुरुआत में गौरैयों को घर से निकालना चाहते हैं, लेकिन आखिर में उनका हृदय परिवर्तन होता है और वे गौरैयों और उनके बच्चों को अपने घर में रहने की अनुमति दे देते हैं। यह कहानी मानवीय करुणा, दृढ़ संकल्प और परिवार के महत्व को दर्शाती है।

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पाठबोध (Paath Bodh) - पाठ की विस्तृत व्याख्या

1. घर में रहने वाले जीव-जंतु

**मूल संदर्भ:** लेखक बताता है कि उसके घर में केवल तीन व्यक्ति रहते हैं - माँ, पिताजी और स्वयं। लेकिन पिताजी कहते हैं कि यह घर "सराय" बन गया है क्योंकि इसमें अनेक पक्षी और जानवर रहते हैं।

**व्याख्या:** लेखक के इस कथन से पता चलता है कि घर में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु भी रहते हैं। जिस तरह एक सराय (सराय = पड़ाव, विश्राम स्थल) में अलग-अलग यात्री आते-जाते हैं, उसी तरह यह घर भी एक अस्थायी ठिकाना बन गया है।

**घर में रहने वाले प्राणी:**

• **आँगन में:** आम का पेड़ है जहाँ तोते, कौवे, गौरैयाँ डेरा डाले रहते हैं

• **घर के अंदर:** चूहों की भीड़ जो रात भर दौड़ते-भागते हैं

• **विशेष चूहे:** एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठा रहता है (शीतकाल में सर्दी से बचने के लिए), दूसरा बाथरूम की टंकी पर चढ़ता है (गर्मी से बचने के लिए)

• **बिल्ली:** कभी-कभी घर में झाँक जाती है, जब मन हो तो दूध पी जाती है

• **चमगादड़:** शाम पड़ते ही कमरों में व्यायाम करते हैं

• **कबूतर:** दिन भर "गुटर-गूँ गुटर-गूँ" का संगीत सुनाई देता है

• **छिपकलियाँ:** घर की दीवारों पर रहती हैं

• **बर्रे और चींटियाँ:** घर में अपनी छावनी डाले रहते हैं

**महत्व:** इस विवरण से पता चलता है कि प्रकृति और मनुष्य साथ-साथ रहते हैं। लेखक ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में बताया है, जिससे जीवन की सहजता दिखती है।

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2. दो गौरैयों का आगमन

**घटना:** एक दिन अचानक दो गौरैयाँ सीधी घर के अंदर घुस आती हैं। वे उड़-उड़कर घर को देखने लगती हैं।

**पिताजी की टिप्पणी:** पिताजी कहते हैं कि गौरैयाँ "मकान का निरीक्षण" कर रही हैं - यानी देख रही हैं कि उनके रहने के लिए यह जगह उपयुक्त है या नहीं।

**कहानी का आगे बढ़ना:** दो दिन बाद जब परिवार को पता चलता है कि गौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बना लिया है। वे वहीं बैठकर गाना भी गा रहीं हैं।

**महत्वपूर्ण संदर्भ:** "जाहिर है, उन्हें घर पसंद आ गया था।" - इस वाक्य से दिखता है कि घर में वह सुविधा है जो गौरैयों को आकृष्ट करती है।

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3. पिताजी का क्रोध और माँ की बुद्धिमत्ता

**माँ की पहली चेतावनी:** जब माँ को पता चलता है कि गौरैयों ने घोंसला बना लिया है, तो वह गंभीर होकर कहती हैं: "अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।"

**पिताजी का प्रतिक्रिया:** पिताजी को गुस्सा आ जाता है और वह लाठी उठाकर गौरैयों को निकालने का प्रयास करते हैं।

**माँ का व्यंग्य:** माँ पिताजी को व्यंग्य से कहती हैं: "छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!" इस वाक्य में माँ की बुद्धिमत्ता दिखती है। वह पिताजी को समझा रही हैं कि जब आप घर के चूहों से निपट नहीं सकते, तो चिड़ियों को कैसे निकालेंगे।

**पिताजी का नाच:** पिताजी गुस्से में ताली बजाते हैं, "श...शू" करते हैं, बाँहें झुलाते हैं और कूदते-फांदते हैं। गौरैयाँ इसे देखकर "चीं-चीं" करती हैं।

**महत्व:** इस दृश्य में माँ की विवेकशीलता और पिताजी के आवेग के बीच का अंतर स्पष्ट है। माँ समझदारी से काम ले रही है, जबकि पिताजी भावनाओं में बहे हुए हैं।

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4. गौरैयों की जिद्द - बार-बार लौटना

**कहानी का महत्वपूर्ण मोड़:** जब भी गौरैयों को निकाल दिया जाता है, वे बार-बार लौट आती हैं। पहली बार किचन के दरवाजे के रास्ते, दूसरी बार सीढ़ियों वाले दरवाजे से, फिर दरवाजों के नीचे की खाली जगह से, और अंत में रोशनदान के टूटे शीशे से।

**दरवाजों को बंद करने का प्रयास:** पिताजी सभी दरवाजों के नीचे कपड़े ठूँस देते हैं। रोशनदान में भी कपड़ा ठूँस देते हैं।

**महत्वपूर्ण संदर्भ:** "किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।" - पिताजी का यह कथन दर्शाता है कि जब बाहर निकालने के सभी तरीके विफल हो जाते हैं, तो केवल घर को नष्ट करने का विकल्प बचता है।

**गौरैयों का संघर्ष:** पिताजी का यह कथन गौरैयों के दृढ़ संकल्प को भी दर्शाता है। वे बार-बार अपने घर की रक्षा करने के लिए लौट आती हैं।

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5. घोंसला तोड़ने का निर्णय

**दृश्य:** जब पिताजी की सहनशीलता समाप्त हो जाती है, तो वह फैसला करते हैं कि घोंसले को ही नष्ट कर देंगे।

**संवाद:** "किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।" - गुस्से से कहते हुए पिताजी स्टूल पर चढ़ते हैं।

**घोंसले का विवरण:** "घोंसले में से अनेक तिनके बाहर की ओर लटक रहे थे, गौरैयों ने सजावट के लिए मानो झालर टाँग रखी हो।"

**महत्वपूर्ण दृश्य:** जब पिताजी लाठी से घोंसले को तोड़ने लगते हैं, तभी नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं की आवाज सुनाई देती है। यह आवाज घोंसले के अंदर से आ रही है।

**लेखक का विवरण:** "अभी भी पिताजी के हाथ में लाठी थी और उस पर लिपटा घोंसले का बहुत-सा हिस्सा था। नन्हीं-नन्हीं दो गौरैयाँ! वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?"

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6. पिताजी का दिल परिवर्तन - कहानी का क्लाइमेक्स

**महत्वपूर्ण क्षण:** जब पिताजी देखते हैं कि घोंसले में नन्हीं गौरैयाँ हैं जो अपने माता-पिता को बुला रही हैं, तो उनका क्रोध पिघल जाता है।

**दृश्य:** "मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा। फिर मैंने देखा, पिताजी स्टूल पर से नीचे उतर आए हैं। और घोंसले के तिनकों में से लाठी निकालकर उन्होंने लाठी को एक ओर रख दिया है और चुपचाप कुर्सी पर आकर बैठ गए हैं।"

**माँ की भूमिका:** माँ तुरंत समझ जाती हैं कि पिताजी का हृदय परिवर्तन हो गया है। वह सभी दरवाजे खोल देती हैं।

**पुनः मिलन:** "उनके माँ-बाप झट-से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुग्गा डालने लगे।"

**अंतिम दृश्य:** "कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।"

**पिताजी का नया निर्देश:** "आज दरवाजे बंद रखो। एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।"

**महत्व:** यह कहानी का सबसे महत्वपूर्ण अंश है जहाँ पिताजी का क्रोध, अहंकार और आत्मा के बीच संघर्ष दिखता है। अंत में मानवीय करुणा जीत जाती है।

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7. कहानी का संदेश

**मुख्य विषय:**

• **परिवार का महत्व:** गौरैयों का अपने बच्चों के लिए कितना प्रेम है, यह दिखाया गया है।

• **दृढ़ संकल्प:** जब गौरैयाँ बार-बार घर लौटती हैं, तो वह दिखाता है कि सच्चा संकल्प कभी हार नहीं मानता।

• **हृदय परिवर्तन:** पिताजी का क्रोध भूलकर गौरैयों को अपने घर में स्थान देना, यह दिखाता है कि प्रेम और करुणा सभी भावनाओं से बड़ी होती हैं।

• **सहअस्तित्व:** विभिन्न प्राणी एक साथ रह सकते हैं और शांतिपूर्वक जी सकते हैं।

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व्याकरण (Vyakaran) - कक्षा 8 स्तर की व्याख्या

1. कारक (Karak)

**परिभाषा:** संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो वाक्य में अन्य शब्दों के साथ संबंध प्रदर्शित करता है, कारक कहलाता है।

**कारक के 8 भेद:**

**1. कर्ता कारक (Nominative case)**

  • **परिभाषा:** जो काम को करता है
  • **चिह्न:** ने
  • **उदाहरण:**
  • "पिताजी ने लाठी उठाई।" (यहाँ पिताजी कर्ता हैं)
  • "गौरैयों ने घोंसला बना लिया।"
  • "माँ ने हँसकर कहा।"
  • **2. कर्म कारक (Objective case)**

  • **परिभाषा:** जिस पर काम का प्रभाव पड़ता है
  • **चिह्न:** को
  • **उदाहरण:**
  • "पिताजी ने गौरैयों को निकाल बाहर करना चाहा।" (गौरैयों कर्म हैं)
  • "लेखक को पिताजी ने झिड़ककर कहा।"
  • "अंडों से बच्चे निकले।"
  • **3. करण कारक (Instrumental case)**

  • **परिभाषा:** जिसके द्वारा या जिससे काम किया जाता है
  • **चिह्न:** से, द्वारा
  • **उदाहरण:**
  • "पिताजी ने लाठी से घोंसला तोड़ने की कोशिश की।" (लाठी करण है)
  • "गौरैयों ने अपने पंखों से घर लौटने का रास्ता खोज लिया।"
  • "दरवाजे के नीचे से गौरैयाँ आ गईं।"
  • **4. सम्प्रदान कारक (Dative case)**

  • **परिभाषा:** जिसके लिए या किसे दिया जाता है
  • **चिह्न:** के लिए, को
  • **उदाहरण:**
  • "गौरैयों ने अपने बच्चों के लिए घर बनाया।"
  • "माँ ने गौरैयों के लिए दरवाजे खोल दिए।"
  • "लेखक के घर में सभी के लिए जगह है।"
  • **5. अपादान कारक (Ablative case)**

  • **परिभाषा:** जहाँ से अलग होना या दूर जाना
  • **चिह्न:** से
  • **उदाहरण:**
  • "गौरैयाँ बाहर से अंदर आ गईं।" (बाहर से अलग होकर)
  • "दरवाजे से गौरैयाँ निकली।"
  • "घर से चूहे दौड़ते हैं।"
  • **6. संबंध कारक (Genitive case)**

  • **परिभाषा:** किसी का स्वामित्व या संबंध दिखाता है
  • **चिह्न:** का, की, के
  • **उदाहरण:**
  • "पिताजी का घर सराय बन गया।" (पिताजी का संबंध)
  • "गौरैयों के बच्चे।"
  • "घर की छत में घोंसला।"
  • **7. अधिकरण कारक (Locative case)**

  • **परिभाषा:** जहाँ पर काम होता है
  • **चिह्न:** में, पर
  • **उदाहरण:**
  • "घर में गौरैयाँ रहती हैं।"
  • "पंखे के गोले में घोंसला बना लिया।"
  • "दीवार पर गौरैयाँ बैठीं।"
  • **8. संबोधन कारक (Vocative case)**

  • **परिभाषा:** किसी को पुकारना या संबोधित करना
  • **चिह्न:** हे, ओ
  • **उदाहरण:**
  • "हे पिताजी! क्या ये गौरैयाँ घर छोड़ देंगी?"
  • "ओ गौरैयों! यहाँ क्यों आ गईं?"
  • ---

    2. वाक्य - रचना के आधार पर (Sentence - Based on Structure)

    **परिभाषा:** दो या दो से अधिक पदों का सार्थक समूह जो पूर्ण अर्थ प्रदान करता है, वाक्य कहलाता है।

    **रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार:**

    **1. साधारण/सरल वाक्य (Simple Sentence)**

  • **परिभाषा:** जिस वाक्य में एक ही क्रिया होती है
  • **संरचना:** एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय
  • **उदाहरण:**
  • "पिताजी को गुस्सा आ गया।"
  • "गौरैयाँ घर में रहती हैं।"
  • "माँ हँसने लगीं।"
  • "लेखक सो गया।"
  • **2. मिश्र वाक्य (Complex Sentence)**

  • **परिभाषा:** जिसमें एक प्रधान वाक्य और एक या अधिक आश्रित वाक्य हों
  • **संरचना:** प्रधान वाक्य + आश्रित वाक्य (कि, जो, जब, जहाँ, आदि से जुड़े)
  • **उदाहरण:**
  • "जब माँ ने कहा कि गौरैयाँ घर नहीं छोड़ेंगी, तो पिताजी को और गुस्सा आ गया।"
  • "लेखक को पता था कि गौरैयों के बच्चे अंदर हैं।"
  • "पिताजी लाठी उठाते हैं ताकि गौरैयाँ घर छोड़ जाएँ।"
  • "चूंकि गौरैयाँ घर नहीं छोड़ रहीं, इसलिए पिताजी परेशान हो गए।"
  • **3. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)**

  • **परिभाषा:** जिसमें दो या अधिक समानाधिकार स्वतंत्र वाक्य हों
  • **संरचना:** वाक्य + योजक (और, या, किंतु, पर, तथा, अथवा) + वाक्य
  • **उदाहरण:**
  • "गौरैयाँ घर में रहती हैं और गाना गाती हैं।"
  • "पिताजी लाठी उठाते हैं, पर गौरैयाँ वापस आ जाती हैं।"
  • "माँ हँसती हैं और पिताजी को सलाह देती हैं।"
  • "दरवाजे खोल दिए गए या गौरैयाँ खुद ही निकल गईं।"
  • ---

    3. मुहावरे (Idioms)

    **परिभाषा:** मुहावरे वे शब्द-समूह हैं जिनका अर्थ अपने शब्दों के सामान्य अर्थ से अलग होता है। ये भाषा को रोचक और सजीव बनाते हैं।

    **कहानी में प्रयुक्त मुहावरे:**

    **1. "डेरा डालना"**

  • **अर्थ:** किसी जगह पर रहने के लिए ठिकाना बनाना, बस जाना
  • **वाक्य:** "तरह-तरह के पक्षी आम के पेड़ पर डेरा डाले रहते हैं।"
  • **दूसरा उदाहरण:** "चोर शहर में डेरा डाल गए।"
  • **2. "कानों के पर्दे फट जाना"**

  • **अर्थ:** बहुत जोर का शोर, असहनीय आवाज
  • **वाक्य:** "वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ।"
  • **दूसरा उदाहरण:** "इतनी जोर से चिल्लो मत, कानों के पर्दे फट जाएँगे।"
  • **3. "धमा-चौकड़ी मचना"**

  • **अर्थ:** खूब शोरगुल और उथल-पुथल होना, हड़बड़ाहट
  • **वाक्य:** "वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।"
  • **दूसरा उदाहरण:** "बच्चों की धमा-चौकड़ी से घर का चैन गायब हो गया।"
  • **4. "मजाक उड़ाना"**

  • **अर्थ:** किसी की खिल्ली उड़ाना, उपहास करना
  • **वाक्य:** "वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं।"
  • **दूसरा उदाहरण:** "दूसरे बच्चों ने उसके कपड़ों का मजाक उड़ाया।"
  • **5. "हार मानना"**

  • **अर्थ:** हिम्मत हार जाना, असफल हो जाना
  • **वाक्य:** "पिताजी कहते हैं, 'मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।'"
  • **दूसरा उदाहरण:** "मुश्किलों के सामने उसने हार नहीं मानी।"
  • **6. "अक्ल आना"**

  • **अर्थ:** समझदारी होना, बुद्धिमान होना
  • **वाक्य:** "मैंने समझ लिया कि उन्हें अक्ल आ गई होगी।"
  • **दूसरा उदाहरण:** "जब उसे अक्ल आई, तो उसने गलती न दोहराई।"
  • **7. "पर्दे के डंडे पर बैठना"**

  • **अर्थ:** किसी जगह बैठना या छिपना
  • **वाक्य:** "गौरैयाँ पर्दे के डंडे पर जा बैठीं।"
  • **8. "छत पर बैठना"**

  • **अर्थ:** घर के किसी ऊँचे हिस्से में रहना
  • **वाक्य:** "बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में उन्होंने अपना बिछावन बिछा लिया।"
  • ---

    4. लोकोक्तियाँ (Proverbs/Sayings)

    **परिभाषा:** ये किसी समाज द्वारा प्रचलित किसी विशेष परिस्थिति या सामान्य सत्य को व्यक्त करने वाली कहावतें होती हैं।

    **कहानी में प्रयुक्त लोकोक्तियाँ:**

    **1. "जहाँ अपना घर, वहाँ अपनी बात"**

  • **अर्थ:** अपने घर में कोई भी अपना निर्णय ले सकता है
  • **संदर्भ:** पिताजी अपने घर में गौरैयों को निकालने का फैसला करते हैं
  • **2. "घोंसला बना लेना"**

  • **अर्थ:** किसी जगह को अपना स्थायी ठिकाना बना लेना
  • **संदर्भ:** जब गौरैयों ने घोंसला बना लिया, तो माँ कहती हैं कि वे अब नहीं जाएँगी
  • ---

    5. संधि (Sandhi)

    **परिभाषा:** दो वर्णों या पदों के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं।

    **संधि के प्रकार:**

    **1. स्वर संधि (Vowel Combination)**

  • **आगम संधि:** दो स्वरों के मध्य एक स्वर का आगम हो
  • उदाहरण: "न + अ + ई = ना + ई" (नई)
  • **2. व्यंजन संधि (Consonant Combination)**

  • **उदाहरण:** "त् +
  • MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. पिताजी ने घर को सराय बना हुआ कहा क्योंकि—

    • A. घर बहुत बड़ा और खुला था
    • B. घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते थे ✓
    • C. घर की बनावट सराय जैसी थी
    • D. घर में बहुत से मेहमान रहते थे

    Answer: B — पिताजी का मतलब था कि घर में गौरैयें, चूहे, बिल्ली, चमगादड़ जैसे विभिन्न जीव आते-जाते रहते हैं इसलिए घर एक सराय की तरह हो गया है।

    Q2. गौरैयों ने अपना घोंसला कहाँ बनाया?

    • A. आँगन के आम के पेड़ पर
    • B. बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में ✓
    • C. रोशनदान के पास
    • D. पर्दे के डंडे पर

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट लिखा है कि गौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बनाया और सामान भी ले आए।

    Q3. पिताजी को गौरैयों को भगाते समय सबसे ज्यादा परेशानी किस बात से हुई?

    • A. गौरैयें बार-बार वापस लौट आती थीं ✓
    • B. गौरैयें बहुत तेज चिल्लाती थीं
    • C. घर में बहुत शोर होने लगता था
    • D. माँ उनका मजाक उड़ाती रहीं

    Answer: A — पाठ में आता है कि दिन में तो गौरैयें निकाली जाती थीं लेकिन रात को न जाने किस रास्ते से वे अंदर घुस आती थीं, जिससे पिताजी परेशान हो गए।

    Q4. 'धमा-चौकड़ी मचना' मुहावरे का अर्थ क्या है?

    • A. शांति से बैठना
    • B. बहुत शोर-गुल और अव्यवस्था होना ✓
    • C. दौड़ना और भागना
    • D. नृत्य करना

    Answer: B — 'धमा-चौकड़ी मचना' का मतलब है बहुत शोर-गुल और अव्यवस्था होना, जैसे चूहे रात भर दौड़-भाग करते थे।

    Q5. माँ के हँसने का मुख्य कारण क्या था?

    • A. गौरैयों के व्यवहार की मजेदारिता
    • B. पिताजी के प्रयासों की व्यर्थता ✓
    • C. पिताजी के क्रोध में परिहास करना
    • D. घर की अव्यवस्था को स्वीकार करना

    Answer: B — माँ समझदारी से जानती थीं कि पिताजी के लाठी झुलाने के सभी प्रयास व्यर्थ हैं क्योंकि गौरैयें बार-बार लौट आती हैं।

    Q6. जब पिताजी घोंसला तोड़ रहे थे, तब पंखे के ऊपर से कौन सी आवाज आई?

    • A. माँ की हँसी
    • B. चूहों की चीं-चीं
    • C. नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं ✓
    • D. बिल्ली की म्याऊँ

    Answer: C — जब पिताजी घोंसला तोड़ रहे थे तो पंखे के गोले के ऊपर से नन्हीं गौरैयों की तीव्र चीं-चीं की आवाज आई जिससे पिताजी के हाथ ठिठक गए।

    Q7. पाठ के अनुसार, नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं सुनकर पिताजी को क्या एहसास हुआ?

    • A. परिवार के प्रति माता-पिता की जिम्मेदारी ✓
    • B. अपनी शक्ति का एहसास
    • C. गौरैयों की मूर्खता
    • D. अपने क्रोध को दबाने की जरूरत

    Answer: A — नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं और उनके माता-पिता का तुरंत अंदर आकर उन्हें दाना खिलाने से पता चलता है कि परिवार के प्रति माता-पिता की कितनी जिम्मेदारी होती है।

    Q8. कहानी का यह संदेश क्या है कि गौरैयें बार-बार लौटती रहीं?

    • A. जानवर मूर्ख होते हैं
    • B. असफलता से हार मान लेना चाहिए
    • C. कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष जारी रखना चाहिए ✓
    • D. घर से जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण है

    Answer: C — गौरैयों का बार-बार लौटना यह दर्शाता है कि चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, अपने लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

    Q9. पिताजी की लाठी उठाकर रखना और मुसकराना इसका प्रतीक है कि—

    • A. वह हार मान गए
    • B. वह क्रोधित थे
    • C. मानवीय करुणा उनके क्रोध को जीत गई ✓
    • D. वह थक गए थे

    Answer: C — पिताजी का लाठी उठाकर रखना और फिर केवल मुसकराते रहना यह दर्शाता है कि नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं ने उनके दिल में करुणा जगाई और उनका क्रोध समाप्त हो गया।

    Flashcards

    पिताजी घर को सराय क्यों कहते थे?

    क्योंकि घर में तरह-तरह की गौरैयें, चूहे, बिल्ली, चमगादड़ और अन्य जीव आते-जाते रहते थे जिससे घर सराय जैसा हो गया था।

    गौरैयों ने अपना घोंसला कहाँ बनाया?

    गौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बनाया और सामान भी ले आए।

    माँ ने पिताजी की लाठी झुलाने पर क्या कहा?

    माँ ने मजाक में कहा कि ये चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है।

    पिताजी घोंसला तोड़ने से पहले क्या सोच रहे थे?

    पिताजी सोच रहे थे कि किसी को सचमुच बाहर निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।

    नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं की आवाज कब सुनाई दी?

    जब पिताजी घोंसले को लाठी से तोड़ रहे थे, तभी पंखे के ऊपर से नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं की आवाज सुनाई दी।

    बाहर बैठी गौरैयों का कैसा रूप था?

    बाहर बैठी दोनों गौरैयें कुछ-कुछ दुबली हो गई थीं, कुछ-कुछ काली पड़ गई थीं और चहक भी नहीं रही थीं।

    माँ ने पिताजी को गौरैयों को निकालने से मना करने के लिए क्या कारण दिया?

    माँ ने कहा कि अब गौरैयों ने अंडे दे दिए हैं, इसलिए वे घर से नहीं जाएँगी।

    कहानी का सबसे महत्वपूर्ण क्षण कौन सा है?

    जब पिताजी घोंसला तोड़ रहे होते हैं और नन्हीं गौरैयें अपने माता-पिता को पुकारती हैं, तब पिताजी की मानवीयता जागती है।

    पिताजी के हाथ कब ठिठक गए?

    जब पंखे के गोले के ऊपर से नन्हीं गौरैयों की तीव्र चीं-चीं की आवाज आई तब पिताजी के हाथ ठिठक गए।

    कहानी के अंत में माँ-पिताजी ने क्या किया?

    माँ ने सभी दरवाजे खोल दिए और गौरैयें अंदर आकर अपनी नन्हीं गौरैयों को दाना खिलाने लगीं, तब पिताजी केवल मुसकराते रहे।

    Important Board Questions

    पिताजी ने घर को सराय कहने का क्या मतलब था? [1 mark]

    घर में कौन-कौन से जीव-जंतु रहते थे। सराय का मतलब क्या होता है।

    माँ बार-बार हँसती और मजाक करती थीं। इससे पाठ का क्या संदेश स्पष्ट होता है? [2 marks]

    माँ की करुणा, पिताजी के क्रोध का विरोध, जीवों के प्रति सहानुभूति। दो-तीन वाक्य में समझाइए कि माँ क्यों हँस रही थीं।

    गौरैयों द्वारा बार-बार घर में लौटने से कहानीकार क्या सीख देना चाहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। [3 marks]

    दृढ़ता, साहस, संघर्ष, असफलता से हार न मानना। कहानी में कम से कम दो उदाहरण दें जहाँ गौरैयें असफल हुईं लेकिन लौटी रहीं।

    नन्हीं गौरैयों की चीं-चीं सुनकर पिताजी के मन-मस्तिष्क में कौन सा परिवर्तन आया? यह परिवर्तन कहानी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्यों है? पूरी घटना को अपने शब्दों में वर्णित कीजिए। [5 marks]

    पिताजी का अहंकार और क्रोध → नन्हीं गौरैयों की पुकार → माता-पिता का प्रेम → पिताजी की मानवीयता जागृति। पूरा दृश्य (पंखा, लाठी, नन्हीं गौरैयें, माँ-बाप का आना, दाना खिलाना) और पिताजी की मुसकुराहट को विस्तार से समझाइए। यह दिखाएँ कि कैसे प्रकृति और जीवन का प्रेम मानवीय क्रूरता को जीत जाता है।

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