**साङकेन अरुणाचल प्रदेश का नव वर्ष त्योहार है।**
**मुख्य बातें:**
• स्थान: अरुणाचल प्रदेश का गाँव
• समय: नव वर्ष आरंभ होने पर
• परंपरा: बौद्ध-विहार से मूर्तियाँ निकाली जाती हैं
• मंदिर: बाँस, फूल, और पेड़ों की टहनियों से बना
**शोभा यात्रा का मतलब:**
नाचते-गाते लोगों का जुलूस जिसमें बड़ी-बड़ी पालकियों में भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ ली जाती हैं।
**तीन दिन का त्योहार:**
दिन 1: मूर्तियाँ मंदिर में रखी जाती हैं
दिन 2-3: लोग पानी खेलते हैं, एक-दूसरे से मिलते हैं, पकवान खाते हैं
दिन 4: मूर्तियाँ वापस विहार को
**वल्लरी की टिप्पणी:** दिल्ली की भीड़ से हटकर चौखाम की शांति पसंद आई।
**होली से अंतर:** दोनों नया साल हैं, पानी खेल हैं, पर साङकेन में बौद्ध परंपरा है।
**परीक्षा में याद रखें:** साङकेन = बौद्ध नव वर्ष त्योहार (अरुणाचल में), शोभा यात्रा = जुलूस।
Q1. साङकेन त्योहार कब मनाया जाता है?
Answer: A — पाठ में चाऊतान ने कहा कि साङकेन नव वर्ष आरंभ होने के अवसर पर मनाया जाता है।
Q2. वल्लरी के पिता कहाँ से अरुणाचल प्रदेश आए थे?
Answer: B — पाठ की शुरुआत में लिखा है कि पिताजी ने दिल्ली से अपने परिवार को अरुणाचल प्रदेश बुलाया।
Q3. मंदिर किन चीजों से सजाया गया था?
Answer: B — पाठ में लिखा है कि मंदिर की दीवारें बाँस से बनी थीं और पेड़ों की हरी-भरी टहनियों पर रंग-बिरंगे फूल सजाए गए थे।
Q4. शोभा यात्रा में भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ कहाँ से लाई गई थीं?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट लिखा है कि लोगों ने बौद्ध-विहार से भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ लाई थीं।
Q5. तीसरे दिन मूर्तियों का क्या किया जाता है?
Answer: C — पाठ में चाऊतान ने बताया कि तीसरे दिन बौद्ध भिक्षु मूर्तियों को पालकियों में रखकर बौद्ध-विहार ले जाते हैं।
Q6. वल्लरी को होली की याद क्यों आ गई?
Answer: B — पाठ में लिखा है कि जब लोग एक-दूसरे पर पानी डालने लगे और चावल का आटा लगाने लगे, तब वल्लरी को होली की याद आ गई।
Q7. दिल्ली और चौखाम में वल्लरी को सबसे बड़ा अंतर क्या लगा?
Answer: B — पाठ की शुरुआत में ही दोनों स्थानों का विपरीत वर्णन किया गया है।
Q8. साङकेन और होली दोनों में कौन-सी समानता है?
Answer: C — पाठ में वल्लरी ने कहा कि होली से ही नया वर्ष आरंभ होता है, और चाऊतान ने साङकेन को भी नव वर्ष त्योहार बताया।
Q9. मंदिर की जालीदार दीवारें किस चीज़ से बनी थीं?
Answer: C — पाठ में स्पष्ट उल्लेख है कि मंदिर की जालीदार दीवारें बाँस और बाँस की खिप्चियों से बनी हुई थीं।
Q10. भिक्षु लोग लोगों को आशीर्वाद देते हुए कहते हैं कि — (रिक्त स्थान भरिए) 'खेती फू_____-फले तुम्हारी, तुम्हें न हो कोई _____।'
Answer: C — पाठ के अंत में भिक्षुओं का आशीर्वाद दिया गया है जिसमें यह पंक्ति है।
साङकेन त्योहार कब मनाया जाता है?
साङकेन नव वर्ष (नए साल) के आरंभ पर मनाया जाता है।
शोभा यात्रा क्या है?
शोभा यात्रा नाचते-गाते हुए लोगों का एक जुलूस है जिसमें मूर्तियों की पालकियाँ ली जाती हैं।
मंदिर किसके किनारे बना था?
मंदिर नदी के किनारे बना था।
मंदिर किन चीजों से बना था?
मंदिर बाँस और बाँस की खिप्चियों से बना था, और फूलों से सजाया गया था।
वल्लरी को होली की याद क्यों आई?
लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे और चावल का आटा लगा रहे थे, जैसे होली में करते हैं।
तीन दिन के बाद मूर्तियों का क्या होता है?
तीसरे दिन बौद्ध भिक्षु मूर्तियों को पालकियों में रखकर वापस बौद्ध-विहार ले जाते हैं।
वल्लरी के पिता कहाँ के कर्मचारी थे?
वल्लरी के पिता दिल्ली से अरुणाचल प्रदेश के चौखाम मंडल कार्यालय में अधिकारी थे।
चाऊतान के पिता वल्लरी को देखकर क्या कर रहे थे?
चाऊतान के पिता घर की सफाई कर रहे थे।
साङकेन और होली में एक समानता बताइए।
दोनों में नया साल आरंभ होता है, लोग एक-दूसरे पर रंगीन पानी डालते हैं, और खुशियाँ मनाते हैं।
भिक्षु लोग लोगों को कौन-सा आशीर्वाद देते हैं?
भिक्षु कहते हैं: खेती फूले-फले, कोई बीमारी न हो, सब नाचें-गाएँ और नए साल में खुशी मनाएँ।
साङकेन त्योहार क्यों मनाया जाता है? [1 mark]
नव वर्ष के आरंभ पर बौद्ध परंपरा के अनुसार मनाया जाता है; भगवान बुद्ध की मूर्तियों को मंदिर में रखा जाता है।
शोभा यात्रा में क्या-क्या देखा गया? किन्हीं दो बातें बताइए। [2 marks]
यात्रा में बड़ी-बड़ी और सुंदर मूर्तियों की पालकियाँ थीं; लोग नाचते-गाते हुए जा रहे थे; बहुत भीड़ थी।
दिल्ली और चौखाम के बीच क्या-क्या अंतर हैं? अपने शब्दों में समझाइए। [3 marks]
दिल्ली: भीड़भरी सड़कें, कारों का शोर, लंबी कतारें; चौखाम: खुला, शांत, हरियाली, लोगों के चेहरों पर मुस्कान।
मंदिर कैसा बना था? उसकी सजावट का विस्तार से वर्णन कीजिए। यदि आपको ऐसा कोई मंदिर देखना हो तो आपको कैसा लगेगा? [5 marks]
मंदिर: बाँस और खिप्चियों से बनी जालीदार दीवारें; बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ लगाई गई थीं; फूलों से सजाया था; साधारण पर सुंदर; अपना अनुभव लिखें।
क्या साङकेन और होली में कोई समानता है? हाँ/नहीं और कारण के साथ उत्तर दीजिए। [2 marks]
हाँ, समानता है: दोनों नव वर्ष का आरंभ करते हैं; दोनों में लोग एक-दूसरे पर रंगीन पानी डालते हैं; दोनों में खुशियाँ मनाई जाती हैं।
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