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**न्याय की कुसी — मुख्य बातें**
**कहानी का सार:** उज्जैन के बाहर एक लड़का राजा-रानी खेल खेलते हुए एक पत्थर की कुसी पर बैठकर सच्चा न्याय करने लगा। लोग उसके न्याय से बहुत खुश थे। जब राजा को पता चला, तो खुद देखने गया। असली में वह कुसी राजा विक्रमादित्य की सिंहासन निकली। चार देवदूतों की मूर्तियों ने राजा से अपने दोष पूछे। राजा झूठ, चोरी और हिंसा के लिए दोषी पाया गया, इसलिए सिंहासन पर नहीं बैठ सका।
**महत्वपूर्ण शब्द:** न्याय = सच्चा फैसला; कलुष = बुराई; देवदूत = देवताओं के दूत; सिंहासन = राजा की कुर्सी; भोला-भाला = सरल मन वाला।
**याद रखो:** लड़के को सिंहासन पर बैठने में सफलता मिली क्योंकि उसका मन पवित्र था और वह ईमानदार था। राजा को असफल हुआ क्योंकि उसने गलतियाँ की थीं।
**परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण:** लड़का = ईमानदार, न्यायप्रिय; कुसी = विक्रमादित्य की असली सिंहासन; राजा = अपने दोषों को स्वीकार करने वाला।
**भ्रम में न पड़ो:** कुसी = सिर्फ पत्थर की नहीं, बल्कि एक देवी-देवताओं की शक्तिशाली कुसी थी।
Q1. लड़का टीले पर ठोकर खाकर किस चीज़ के पास गिरा?
Answer: A — पाठ में स्पष्ट है कि लड़का एक बड़ी, चिकनी पत्थर की कुसी के पास गिरा था।
Q2. लड़के ने अपने दोस्तों के साथ कौन-सा खेल खेला?
Answer: B — पाठ में लिखा है कि लड़का कुसी पर बैठकर राजा बनता था और लोगों की समस्याओं का न्याय करता था।
Q3. लोग लड़के के पास अपनी समस्याएँ लेकर क्यों आने लगे?
Answer: B — पाठ में बताया गया है कि लड़के की न्याय-बुद्धि की चर्चा से लोग उसके पास समस्याएँ लेकर आने लगे थे।
Q4. राजा को क्रोध क्यों आया?
Answer: B — पाठ में लिखा है कि राजा को लगा कि छोटा लड़का अपने को उससे बेहतर न्यायकर्ता समझता है, इसलिए उसे क्रोध आया।
Q5. पत्थर की कुसी असली में कौन-सी कुसी थी?
Answer: B — जब राजा ने कुसी को खोदवाकर बाहर निकलवाया, तो विद्वान पंडितों ने बताया कि वह राजा विक्रमादित्य की सिंहासन थी।
Q6. पहली मूर्ति ने राजा से कौन-सा सवाल पूछा?
Answer: B — पहली मूर्ति ने राजा को रोककर पूछा कि क्या उसे विश्वास है कि वह ईमानदार है और कभी चोरी नहीं की है।
Q7. राजा ने सिंहासन पर बैठने के लिए तीन बार उपवास क्यों किया?
Answer: B — पाठ में बताया गया है कि हर बार मूर्ति राजा को अपने दोष स्वीकार करने के लिए कहती थी, तो राजा उपवास करता था।
Q8. चौथी मूर्ति ने क्या कहा?
Answer: B — चौथी मूर्ति ने कहा कि जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे वे भोले-भाले और निर्दोष थे, उनके मन में कोई बुराई नहीं थी।
Q9. राजा सिंहासन पर बैठ सका या नहीं?
Answer: B — जब राजा सिंहासन पर बैठने वाला था, तो चौथी मूर्ति भी अपने पंख सहित उड़ गई क्योंकि राजा का गर्व अभी दूर नहीं हुआ था।
Q10. इस कहानी से हमें सबसे बड़ी सीख क्या है?
Answer: C — कहानी दिखाती है कि लड़का अपनी सच्चाई और भोली-भाली सोच से सिंहासन पर बैठा, जबकि राजा अपने गर्व और दोषों के कारण असफल रहा।
उज्जैन के बाहर लड़के ने क्या खेल खेला?
लड़के ने राजा-रानी का खेल खेला जहाँ वह न्यायाधीश बनकर लोगों की समस्याओं का समाधान देता था।
लड़का टीले पर ठोकर क्यों खाया?
एक बड़ी, चिकनी पत्थर की कुसी से ठोकर खाई जो असली में राजा विक्रमादित्य की सिंहासन थी।
लोग लड़के के पास क्यों आने लगे?
क्योंकि लड़के के न्याय की बुद्धि और सच्चे फैसलों की सब में चर्चा होने लगी थी।
राजा को क्यों क्रोध आया?
क्योंकि राजा सोचता था कि लड़का अपने को उससे बेहतर न्यायकर्ता समझता है।
पत्थर की कुसी असली में क्या थी?
पत्थर की कुसी असली में राजा विक्रमादित्य की सुंदर सिंहासन थी जिस पर चार देवदूतों की मूर्तियाँ बनी थीं।
पहली मूर्ति ने राजा से क्या पूछा?
पहली मूर्ति ने पूछा कि क्या राजा को विश्वास है कि उसने कभी चोरी नहीं की है।
राजा ने सिंहासन पर बैठने के लिए क्या किया?
राजा ने तीन-तीन बार उपवास और प्रार्थना की क्योंकि मूर्तियों ने उसे अपने दोष स्वीकार करने को कहा।
चौथी मूर्ति ने राजा को सिंहासन पर बैठने दिया या नहीं?
नहीं, चौथी मूर्ति भी अपने पंख सहित आसमान में उड़ गई क्योंकि राजा का गर्व नहीं मिटा था।
लड़के के अंदर कौन से गुण थे जो सिंहासन पर बैठने लायक बनाते थे?
लड़का भोला-भाला, ईमानदार, निष्पक्ष और निर्दोष मन वाला था जिसमें कोई कलुष नहीं था।
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई, ईमानदारी और निर्दोष मन ही असली शक्ति है, न कि धन और ताकत।
उज्जैन के बाहर लड़के ने क्या खेल खेला? (एक वाक्य में उत्तर दें) [1 mark]
पाठ में लिखा है कि लड़का कुसी पर बैठकर राजा बनता था और दोस्तों की समस्याओं का न्याय करता था। यह खेल क्या कहलाता है?
निम्नलिखित को मिलाइए: (क) पत्थर की कुसी — (i) न्याय करना (ख) लड़का — (ii) राजा विक्रमादित्य की सिंहासन (ग) लड़के का काम — (iii) ईमानदार और निर्दोष (घ) लड़के के गुण — (iv) लोगों की समस्याओं को सुनना [2 marks]
पाठ को ध्यान से पढ़ो। कुसी वास्तव में क्या थी? लड़का क्या काम करता था? उसके गुण क्या-क्या थे?
लड़का सिंहासन पर बैठने में सफल क्यों रहा जबकि राजा असफल क्यों रहा? दैनिक जीवन का एक उदाहरण देकर समझाइए। [3 marks]
लड़के का मन निर्दोष और पवित्र था, जबकि राजा ने चोरी, झूठ और हिंसा के दोष किए थे। यह दिखाता है कि ईमानदारी और सच्चाई ही असली शक्ति है। अपने स्कूल या घर में इसका उदाहरण दो।
इस कहानी में चार देवदूतों की मूर्तियों ने राजा से क्या-क्या सवाल पूछे? प्रत्येक सवाल के पीछे क्या संदेश छिपा है? विस्तार से लिखिए। [5 marks]
पहली मूर्ति = चोरी के बारे में पूछी; दूसरी = झूठ के बारे में; तीसरी = हिंसा के बारे में; चौथी = मन की शुद्धता के बारे में। हर सवाल हमें बताता है कि सच्चा न्यायकर्ता किस तरह का होना चाहिए।
सही या गलत लिखिए और कारण दीजिए: (क) लड़का हर दिन सिंहासन पर बैठकर लोगों का न्याय करता था। (ख) राजा ने तीन बार उपवास किया लेकिन फिर भी सिंहासन पर नहीं बैठ सका। [2 marks]
(क) सही है क्योंकि पाठ में बताया गया है कि लड़के के न्याय की चर्चा पूरे नगर में फैल गई थी। (ख) सही है क्योंकि राजा का गर्व दूर नहीं हुआ था।
Q1. Assertion (A):
लड़के ने पत्थर की कुर्सी पर बैठकर न्याय करना शुरू किया।
Reason (R):
क्योंकि पत्थर की कुर्सी का कोई जादुई शक्ति थी।
Answer: C — A is true but R is false — कथन तो सही है कि लड़के ने कुर्सी पर बैठकर न्याय किया, लेकिन कारण गलत है। न्याय करने की शक्ति पत्थर में नहीं, बल्कि लड़के की समझदारी और ईमानदारी में थी। कुर्सी तो सिर्फ एक प्रतीक थी।
Q2. Assertion (A):
राजा विक्रमादित्य का सिंहासन प्राचीन काल का था।
Reason (R):
क्योंकि विद्वान पंडितों ने कहा कि यह सदियों पुराना सिंहासन है।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण भी सही व्याख्या है। पाठ में साफ लिखा है कि पंडितों ने बताया कि यह राजा विक्रमादित्य का प्राचीन सिंहासन है।
Q3. Assertion (A):
चौथी मूर्ति ने राजा को सिंहासन पर बैठने की अनुमति दे दी।
Reason (R):
क्योंकि राजा भोले-भाले और कलुष रहित था।
Answer: D — A is false but R is true — दोनों ही कथन गलत हैं। चौथी मूर्ति सिंहासन के साथ आकाश में उड़ गई और राजा को बैठने नहीं दिया। साथ ही, राजा के मन में अहंकार था, इसलिए वह भोले-भाले नहीं थे।
Case Study:
गांव में रमेश और मोहन के बीच सीमा को लेकर झगड़ा हो गया। दोनों अपनी-अपनी बात कह रहे हैं और गांव वाले भी दोनों के पक्ष में बोल रहे हैं। गांव के मुखिया को यह फैसला करना है कि किसका पक्ष सही है। मुखिया दोनों की बात को ध्यान से सुनता है, गांव के बुजुर्गों से पुरानी जानकारी लेता है और फिर सच्चाई के आधार पर अपना फैसला देता है।
Q1. मुखिया ने किस तरीके से अपना फैसला लिया?
Answer: B
Q2. मुखिया का यह तरीका किस पाठ के किरदार से मिलता है?
Answer: B
Q3. यदि मुखिया ने बिना सच्चाई जाने कोई फैसला कर दिया होता तो क्या हुआ होता?
Answer: C
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