StudyOSStudyOS CBSE Study Material, Class 5–12

Rajasthan ki Rajat Bundein

NCERT Class 11 · Hindi Based on NCERT Class 11 Hindi textbook · Free CBSE study kit

Everything you need to ace this chapter, in one place.
Notes · Mind Map · Quiz · Assertion-Reason · Case Studies · Question Bank · Past Papers

Get Full Study Kit →
Studying with friends? Send them this chapter.

Chapter Notes

राजस्थान की रज बूंदें — सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स

अनुक्रम परिचय

यह पाठ **अनुपम मिश्र** द्वारा लिखा गया एक वर्णनात्मक गद्य है। इसमें राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में **कुंई** नामक जल संरक्षण की परंपरागत तकनीक का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह पाठ जल संरक्षण की पारंपरिक प्रणालियों की महत्ता और मानव समाज के साथ प्रकृति के संतुलन को दर्शाता है।

---

कुंई की परिभाषा और मूल संरचना

**कुंई क्या है?**

कुंई राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में वर्षा के जल को संरक्षित करने के लिए बनाई जाने वाली एक **विशेष कुआँ होती है**। यह सामान्य कुओं से बिल्कुल अलग है।

**कुंई बनाने वाले लोग:**

  • जो लोग कुंई बनाते हैं उन्हें **'चेजारो'** कहा जाता है
  • चेजारो की कला का नाम **'चेजो'** है
  • ये लोग इस विशेष कला में पारंगत होते हैं
  • **कुंई और कुए में अंतर:**

    | विशेषता | कुआँ | कुंई |

    |---------|------|------|

    | उद्देश्य | भूजल को निकालना | वर्षा के जल को संरक्षित करना |

    | जल का स्रोत | भूमिगत जल | वर्षा का पानी |

    | जल की प्रकृति | खारा होता है | मीठा होता है |

    | गहराई | कम गहरी | अधिक गहरी |

    | आकार | बड़े व्यास वाली | 4-5 हाथ व्यास वाली छोटी |

    ---

    कुंई की भौतिक संरचना और निर्माण प्रक्रिया

    कुंई की बाहरी संरचना

    **आकार और आयाम:**

  • व्यास: **4-5 हाथ** (लगभग 6-8 फीट)
  • गहराई: **30-70 हाथ** तक (90-210 फीट तक)
  • कुंई का मुँह छोटा रखा जाता है ताकि:
  • जल सीधी धूप में न पड़े
  • वाष्पीकरण कम हो
  • प्रदूषण से सुरक्षा रहे
  • निर्माण के चरण

    **पहला दिन — खोदाई और रस्सी बिछाना:**

  • चेजारो खोदाई शुरू करते हैं
  • **'खैणी'** नामक घास का ढेर इकट्ठा किया जाता है
  • इस घास से **3 अंगुल मोटी रस्सी** बनाई जाती है
  • रस्सी को दीवार के साथ लगाकर गोलाकार आकार में बिछाया जाता है
  • रस्सियों को एक-दूसरे में फंसाकर मजबूत किया जाता है
  • **लेजे का निर्माण (यदि आवश्यक हो):**

  • कुछ क्षेत्रों में **'लेजे' नामक लकड़ी के टुकड़े** प्रयोग होते हैं
  • ये **अरणी, बण, बावल या कुंभट के पेड़ों की डालों** से बनते हैं
  • लेजों को एक-दूसरे में फंसाकर खड़ा किया जाता है
  • फिर इन्हें **खैणी की रस्सी से बाँधा** जाता है
  • यह बँधाई **साँपणी** कहलाती है
  • **दूसरा दिन — दीवार का निर्माण:**

  • पहले दिन की खोदाई से निकली मिट्टी दूसरे दिन वाली खोदाई में डाली जाती है
  • नई दीवार पर नई रस्सी का गोला बाँधा जाता है
  • इस तरह **एक के ऊपर एक गोला** बनता है
  • **गहराई के अनुसार रस्सी की लंबाई:**

  • **5 हाथ व्यास** की कुंई में एक गोला बनाने के लिए **लगभग 15 हाथ लंबी रस्सी** चाहिए
  • एक हाथ गहराई में रस्सी के **8-10 लपेटे** खप जाते हैं
  • 30 हाथ गहरी कुंई में रस्सी की **कुल लंबाई 4000 हाथ** तक हो जाती है
  • विशेष परिस्थितियाँ

    **जब पत्थर की परत आए:**

  • यदि **खड़ी पत्थर** की परत मिले तो खोदाई कठिन हो जाती है
  • ऐसी स्थिति में कुंई को **'बाँधा' जाता है** (रस्सी से कसकर बाँध दिया जाता है)
  • **चिनाई की आवश्यकता:**

  • कुछ स्थानों पर **ईंट की चिनाई** आवश्यक हो जाती है
  • गहरी खोदाई के दौरान मिट्टी **धँसने** का खतरा होता है
  • **लकड़ी के लंबे लड़े** (झकन) से अंदर की चिनाई की जाती है
  • ---

    जल भूविज्ञान — राजस्थान की मिट्टी और पानी

    मरुभूमि में जल की विशेषता

    **रेगिस्तानी मिट्टी की संरचना:**

    राजस्थान की मिट्टी **दो प्रकार की होती है:**

    1. **दोमट (Black soil/काली मिट्टी):**

  • गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार आदि में पाई जाती है
  • वर्षा बंद होने के बाद सूरज निकलने पर मिट्टी के कण **एक-दूसरे से चिपक जाते हैं**
  • इससे **दरारें** (सूखी खाईयाँ) पड़ जाती हैं
  • संचित नमी **वाष्प में बदलकर** वातावरण में चली जाती है
  • 2. **मरुभूमि की मिट्टी (Sandy soil):**

  • राजस्थान के रेगिस्तान में **बिखरी हुई रेत** पाई जाती है
  • रेत के कण **एक-दूसरे से चिपकते नहीं**
  • परस्पर अलगाव होने से **खाली स्थान** बना रहता है
  • इसलिए **दरारें नहीं पड़ती**
  • तीन प्रकार का पानी

    **पारंपरिक जल विभाजन प्रणाली:**

    राजस्थान की मरुभूमि में समाज ने पानी को **तीन रूपों में बाँटा है:**

    #### 1. पालरपानी (Surface/Surface Runoff Water)

  • **परिभाषा:** सीधे वर्षा से मिलने वाला पानी
  • **विशेषताएँ:**
  • भूमिगत जल नहीं
  • धरती पर बहता है
  • नदी, तालाब आदि में रोका जाता है
  • **महत्व:** आपातकालीन पानी के लिए
  • #### 2. पाताल पानी (Groundwater/Bhujal)

  • **परिभाषा:** कुओं से निकाला जाने वाला पानी
  • **विशेषताएँ:**
  • भूमि के बहुत नीचे से आता है
  • प्रायः **खारा** होता है
  • **समस्या:** पीने के काम में नहीं आ सकता
  • #### 3. रेजानी पानी (Perched Water/Retained Moisture)

    **यह सबसे महत्वपूर्ण प्रकार है:**

  • **परिभाषा:** वर्षा का वह जल जो मिट्टी की ऊपरी परतों में रुक जाता है
  • **स्थिति:** धरती पर तो उतरा, लेकिन भूजल में नहीं मिला
  • **मापन:** इंच या सेंटीमीटर में नहीं, **'रेजा'** (हाथ की इकाई) से मापा जाता है
  • **5 अंगुल बारिश = 5 अंगुल रेजा**
  • **महत्व:** यही पानी साल भर कुंई में इकट्ठा रहता है
  • खड़ी पत्थर की परत (Impermeable Layer)

    **राजस्थान की विशेषता:**

  • मरुभूमि में **10-50 हाथ नीचे** (लगभग 30-150 फीट) एक **कड़ी खड़ी पत्थर की परत** होती है
  • यह परत **काफी लंबी और चौड़ी** है
  • यह परत **जल को नीचे जाने से रोकती है**
  • **रेजानी पानी का रक्षक:**

  • यह खड़ी पत्थर **रेजानी पानी को भूजल तक मिलने से रोकती है**
  • जिस क्षेत्र में यह परत है, **वहाँ गाँव-गाँव में कुंई मिलती हैं**
  • वर्षा का पानी इस परत पर ही रुक जाता है और **नमी की तरह फैल जाता है**
  • **रेजानी पानी का संरक्षण:**

  • ऊपर से: **खड़ी पत्थर की परत** सुरक्षा देती है
  • नीचे से: **रेगिस्तानी मिट्टी की बिखरी हुई बनावट** नमी को बनाए रखती है
  • बूंद-बूंद पानी: **रेत के कणों में** रिसता है और कुंई में इकट्ठा होता है
  • ---

    कुंई निर्माण की वैज्ञानिक कला

    कुंई निर्माण में कठिनाइयाँ

    **गहराई के साथ समस्याएँ:**

  • **20-25 हाथ नीचे तक:** गर्मी बढ़ती है, हवा कम होती है
  • **साँस लेना कठिन हो जाता है**
  • समाधान: **ऊपर से मिट्टी भरी बाल्टियाँ** तेजी से नीचे फेंकी जाती हैं
  • इससे **ऊपर की ठंडी हवा** अंदर जाती है
  • गर्म हवा **बाहर आती है**
  • पसीने से नहाते चेजारो को राहत

    **कार्य की परिस्थिति:**

  • चेजारो पसीने से भीगे रहते हैं
  • ऊपर से **तेज धूप और गर्मी**
  • नीचे **गहरे गड्ढे की दुर्गम परिस्थिति**
  • **राहत का साधन:**

  • ऊपर से आने वाली **ठंडी हवा की धारा** चेजारो को हवा देती है
  • यह प्राकृतिक हवा-चलन प्रणाली **श्रम को सहनीय बनाती है**
  • रस्सी बिछाई की तकनीक

    **रस्सी की विशेषताएँ:**

  • खैणी घास से बनी रस्सी **लचीली और मजबूत** होती है
  • रस्सी दीवार के सहारे **गोलाकार आकार** में बिछाई जाती है
  • **एक के ऊपर एक गोला** बनता है
  • **चिनाई के साथ समायोजन:**

  • हर गोले के बीच-बीच **चिनाई भी की जाती है** ताकि दीवार मजबूत रहे
  • यह **क्रमिक निर्माण** गहराई तक जारी रहता है
  • ---

    प्रकृति की उदारता और जल विज्ञान

    मरु-समाज की विचारशीलता

    **रेगिस्तान में पानी की कथा:**

  • रेगिस्तान में पानी **अमृत के समान है**
  • रेजानी पानी **खारे भूजल के सागर में अमृत** है
  • इसे प्राप्त करने के लिए समाज ने **विचारशील प्रणाली** विकसित की
  • **जल संरक्षण का 'शास्त्र':**

    लोगों ने **अनुभव के आधार पर एक पूरा 'शास्त्र'** बनाया है:

  • जल को **तीन रूपों में वर्गीकृत** किया
  • हर रूप का **अलग महत्व और उपयोग** समझा
  • **कुंई निर्माण की पद्धति** इसी विचार पर आधारित है
  • प्रकृति की अनोखी उदारता

    **मिट्टी के कणों का वैज्ञानिक संचय:**

    **दोमट (घनी मिट्टी) में:**

  • मिट्टी के कण **एक-दूसरे से चिपकते हैं**
  • चिपकाव से **लगाव भी और अलगाव भी** होता है
  • जहाँ लगाव है, वहाँ खाली स्थान भी छूट जाता है
  • खाली स्थान से **नमी वाष्प बनकर उड़ जाती है**
  • **रेगिस्तानी मिट्टी में:**

  • कण **बिखरे हुए रहते हैं**
  • परस्पर अलगाव है, इसलिए **अलगाव नहीं होता** (भीतरी रिक्त स्थान बना रहता है)
  • **नमी यहीं बनी रहती है**
  • कुंई में पानी **सुरक्षित रहता है**
  • **यह प्रकृति की 'उदारता' है** कि:

  • रेगिस्तान में वर्षा कम हो, पर जो भी बरसती है, वह **संरक्षित रहती है**
  • सूखे क्षेत्रों में **नमी की बर्बादी कम** होती है
  • ---

    कुंई का पानी — आयामी समझ

    दैनिक जल संग्रह की मात्रा

    **सीमित उपलब्धता:**

  • एक कुंई से **दिन भर में मात्र 2-3 घड़े** मीठा पानी निकाला जा सकता है
  • यह सीमा इसलिए है कि:
  • रेजानी पानी **बहुत धीरे-धीरे रिसता है**
  • मिट्टी के कणों में **पानी की बूँदें** बेहद धीमी गति से बहती हैं
  • कुंई का मुँह छोटा क्यों रखा जाता है?

    **तीन प्रमुख कारण:**

    1. **पानी के वाष्पीकरण को रोकना:**

  • छोटे मुँह से **सीधी धूप नहीं पड़ती**
  • गर्मी में **पानी भाप में नहीं बदलता**
  • 2. **कम व्यास = कम फैलाव:**

  • कुंई का व्यास बड़ा हो तो कम पानी **ज्यादा फैल जाएगा**
  • सतह पर पानी **वाष्पीकृत हो जाएगा**
  • **छोटे व्यास में पानी गहराई में जमा रहता है**
  • 3. **जल को सुरक्षित रखना:**

  • छोटे मुँह से **धूल-मिट्टी प्रवेश कम** होती है
  • **ढक्कन लगाना आसान** होता है
  • कीटों और प्रदूषण से **संरक्षण** मिलता है
  • पानी निकालने का उपकरण

    **चड़स (Leather bucket):**

  • **छोटी चड़स** का उपयोग होता है
  • **मोटे कपड़े या चमड़े की** बनी होती है
  • मुँह पर **लोहे की वर्तनी** कसी होती है
  • यह पानी में **आसानी से डूबती नहीं है**
  • ऊपर की वर्तनी **नीचे के भाग पर गिरती है**
  • इससे **कम पानी में भी ठीक से भर जाती है**
  • **वर्तनी का वैज्ञानिक उपयोग:**

  • चड़स पानी से टकराती है
  • ऊपर की वर्तनी का भाग नीचे गिरता है
  • इससे **कम पानी की गहराई में भी** पूरी चड़स भर जाती है
  • **कुछ क्षेत्रों में:**

  • **छोटी पीतल की चड़स** भी प्रयोग होती है
  • यह **पानी में नहीं डूबती**
  • ---

    कुंई का भूगोल — राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्र

    खड़ी पत्थर वाले क्षेत्र

    **खड़ी पत्थर की परत वाले जिले:**

    1. **चूरू**

    2. **बीकानेर**

    3. **जैसलमेर**

    4. **बाड़मेर**

    **इन क्षेत्रों की विशेषता:**

  • **गाँव-गाँव में कुंई मिलती हैं**
  • एक बड़े सफाचट मैदान में **30-40 कुंई** भी पाई जाती हैं
  • **खड़ी की विशेषता** से ही कुंई का जल सुरक्षित रहता है
  • कुंई और पाल (Well vs. Kuni)

    **पाल (आचीन कुआँ):**

  • पाल का अर्थ: **'जल संरक्षण की संरचना'**
  • कुछ स्थानों पर इसे **'पार'** भी कहते हैं
  • **सो-अस्सी** (80 गुणा 20) के नाम से प्रसिद्ध इलाका है
  • **जैसलमेर जिले का उदाहरण:**

  • एक गाँव **'खड़सरों की ढाणी'** में **120 कुंई** थीं
  • इस क्षेत्र को **'छह-बीसी'** (6×20) के नाम से जानते थे
  • पाल के कारण ये गाँव **आबाद थे**
  • **पाल के कारण आबाद गाँव:**

  • **'जानरे आलो पार'** और **'सीरगु आलो पार'** जैसे गाँव हैं
  • ये गाँव केवल **पाल (कुंई) के कारण ही आबाद हैं**
  • क्षेत्रीय भाषा में खड़ी के नाम

    अलग-अलग स्थानों पर खड़ी पत्थर को **विभिन्न नामों से जानते हैं:**

    1. **चारोली**

    2. **धाधड़ो**

    3. **धड़धड़ो**

    4. **बिट्टू रो बल्लीयो**

    5. **खड़ी** (सबसे सामान्य नाम)

    **अंतिम कथन:**

    > "और इसी खड़ी के बल पर, खारे पानी के सागर में मीठा पानी देती खड़ी रहती है कुंई।"

    ---

    चेजारों का सामाजिक सम्मान और बदलता समाज

    पारंपरिक सामाजिक व्यवहार

    **कुंई निर्माण के समय सम्मान:**

  • पहले दिन से ही **कुंई बनाने वालों का विशेष ध्यान रखा जाता है**
  • यह परंपरा **सदियों पुरानी है**
  • **कुंई पूरी होने पर विशेष भोज:**

  • कुंई तैयार होने पर **विशेष भोज का आयोजन**
  • चेजारों को **विदाई के समय तरह-तरह की भेंट**
  • गाँव से चेजारों का रिश्ता **केवल कुंई बनाने पर नहीं रहता**
  • आचार-प्रथा के अनुसार सम्मान

    **साल भर का सामाजिक अधिकार:**

  • **तीज-त्यौहार:** विवाह जैसे मंगल अवसरों पर **नेग और भेंट** दी जाती है
  • **फसल आना:** नई फसल आने पर **खलिहान में चेजारों के नाम से अनाज का अलग ढेर** लगता है
  • **वर्ष भर संबंध:** गाँव का **सामाजिक बंधन** साल भर बना रहता है
  • आधुनिक समय में परिवर्तन

    **आर्थिक बदलाव:**

  • **पहले:** आचार-प्रथा के माध्यम से चेजारों का सम्मान और भरण-पोषण होता था
  • **अब:** **केवल मजदूरी देकर काम कराने की परंपरा** आ गई है
  • सामाजिक बंधन **कमजोर पड़ गए हैं**
  • **सामाजिक संबंध टूटने के कारण:**

  • **आर्थिकीकरण** ने सामाजिक संबंधों को प्रभावित किया
  • गाँव का **सामूहिक दायित्व घटा**
  • चेजारो अब **बाहरी मजदूर** माने जाने लगे
  • ---

    कुंई और गाँव-समाज का संबंध

    निजी और सार्वजनिक संपत्ति का अंतर

    **एक विचित्र स्थिति:**

    कुंई का निर्माण **निजी संपत्ति** के रूप में होता है, लेकिन यह **सार्वजनिक हित** से जुड़ी होती है:

    **निजी पक्ष:**

  • हर घर की **अपनी कुंई** होती है
  • उसे बनाने का अधिकार **निजी है**
  • पानी लेने का अधिकार **व्यक्तिगत है**
  • **सार्वजनिक पक्ष:**

  • कुंई जिस क्षेत्र में बनती है, वह **गाँव-समाज की सार्वजनिक जमीन** है
  • **वर्षा का पानी** जो उस क्षेत्र में गिरता है, वह **सामूहिक संपत्ति** है
  • उस वर्षा से **साल भर की नमी** सुरक्षित रहती है
  • नई कुंई के निर्माण पर सामाजिक नियंत्रण

    **समाज का नियामक भूमिका:**

  • कुंई निजी होती है, लेकिन **ग्राम-समाज** नई कुंई बनाने से पहले **अनुमति देता है**
  • **कारण:** उस क्षेत्र की **कुल नमी निर्धारित है**
  • नई कुंई = **पहले से तय नमी का विभाजन**
  • **उदाहरण:**

    यदि मैदान में **कुल 10 इकाई नमी** है और पहले से **5 कुंई (5 इकाई) बनी हैं**, तो:

  • नई कुंई = **शेष 5 इकाई का बँटवारा**
  • समाज को **यह निर्णय लेना है** कि नई कुंई बने या नहीं
  • **सामाजिक सहमति:**

  • समाज **बहुत जरूरत पड़ने पर ही** नई कुंई के लिए अनुमति देता है
  • **निजी होते हुए भी सार्वजनिक हित** संरक्षित रहता है
  • यह **भारतीय ग्राम-समाज की बुद्धिमत्ता** का प्रमाण है
  • ---

    कुंई का प्रतीकात्मक महत्व

    मुर्गी की कथा

    **'नियति कथा':**

    > "हर दिन सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की प्रसिद्ध कहानी को धरती पर उतारती है कुंई। इससे दिन भर में केवल दो-तीन घड़े मीठा पानी निकाला जा सकता है। इसलिए प्रायः पूरा गाँव गोधूलि (गायों के चरने का समय) में कुंईयों पर आता है।"

    **प्रतीकात्मक अर्थ:**

    1. **सीमित संसाधन:** जैसे मुर्गी **प्रतिदिन एक अंडा** देती है, कुंई **सीमित पानी** देती है

    2. **दैनिक आवश्यकता:** यह **सीमा ही संरक्षण है**

    3. **सामूहिक उपयोग:** **पूरा गाँव मिलकर** इस सीमित पानी को संभालता है

    मेला-सा दृश्य

    **गोधूलि का दृश्य:**

  • गाँव से सटे मैद
  • MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. कुंई और कुएँ में मुख्य अंतर क्या है?

    • A. कुंई रेजानी-पानी के लिए बनाई जाती है, कुआँ भूजल के लिए ✓
    • B. कुंई और कुआँ दोनों ही भूजल निकालते हैं
    • C. कुंई केवल बारिश के पानी को रोकती है
    • D. कुएँ में खड़ी पत्थर की परत होती है, कुंई में नहीं

    Answer: A — पाठ में स्पष्ट है कि कुंई खड़ी पत्थर की परत के ऊपर रेजानी-पानी को संरक्षित करती है, जबकि कुआँ भूजल को सीधे खोदकर निकालता है।

    Q2. मरुभूमि में रेत के कण आपस में नहीं चिपकते, इसलिए क्या फायदा होता है?

    • A. बारिश का पानी तेजी से रिस जाता है
    • B. जब पानी सूखता है तो दरारें नहीं पड़तीं और पानी बना रहता है ✓
    • C. मिट्टी ढीली रहती है इसलिए खुदाई आसान हो जाती है
    • D. खारा पानी ऊपर आ जाता है

    Answer: B — पाठ में कहा गया है कि मरुभूमि में कण न चिपकने से वे अपनी जगह नहीं छोड़ते, इसलिए दरारें नहीं बनतीं और नमी संरक्षित रहती है।

    Q3. खड़ी पत्थर की परत का राजस्थान की जल प्रणाली में क्या महत्व है?

    • A. यह ठंडक प्रदान करती है
    • B. यह बारिश के पानी को खारे भूजल से मिलने से रोकती है ✓
    • C. यह कुंई की दीवारों को मजबूत करती है
    • D. यह पानी को तेजी से रिसने देती है

    Answer: B — पाठ स्पष्ट करता है कि खड़ी पत्थर की परत रेजानी-पानी को पाताल-पानी से अलग रखती है और गहरे खारे जल में मिलने से रोकती है।

    Q4. रेजानी-पानी की माप में 'रेजा' शब्द का प्रयोग क्यों किया जाता है?

    • A. क्योंकि यह शब्द संस्कृत से आया है
    • B. क्योंकि इसकी मात्रा इंच या सेंटीमीटर में नहीं बल्कि मिट्टी में रिसे पानी की गहराई से मापी जाती है ✓
    • C. क्योंकि यह पानी बहुत कम मात्रा में मिलता है
    • D. क्योंकि यह केवल गर्मियों में पाया जाता है

    Answer: B — पाठ में कहा गया है कि रेजा की माप अंगुल या सेंटीमीटर से नहीं होती, बल्कि मिट्टी में समाए बारिश के पानी की गहराई से होती है।

    Q5. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

    • A. पाणीपानी सतह पर बहता है और नदी-तालाब में रोका जाता है
    • B. पाताल-पानी हमेशा खारा होता है और पीने के काम में नहीं आता
    • C. रेजानी-पानी केवल खड़ी पत्थर की परत के बिना इलाकों में पाया जाता है ✓
    • D. कुंई की गहराई कुआँ से अधिक हो सकती है

    Answer: C — पाठ कहता है कि खड़ी पत्थर की परत रेजानी-पानी को संरक्षित करती है, अर्थात् इसकी उपस्थिति ही जरूरी है, न कि अनुपस्थिति।

    Q6. चेतरोजे (कुंई बनाने वाले) के लिए सबसे खतरनाक कौन सी परिस्थिति है?

    • A. ऊपर से फेंकी जाने वाली रेत के कण और गहराई में तापमान ✓
    • B. केवल गहराई में ठंड लगना
    • C. कुंई का व्यास बहुत बड़ा हो जाना
    • D. रस्सी टूट जाना

    Answer: A — पाठ में बताया गया है कि चेतरोजे को धातु का कवच पहनना पड़ता है क्योंकि ऊपर से फेंकी गई रेत के कण खतरनाक हैं, और गहराई में गर्मी भी समस्या है।

    Q7. यदि किसी क्षेत्र में मरुभूमि की मिट्टी न होकर दोमट मिट्टी हो तो क्या समस्या आएगी? (कारण सहित)

    • A. कोई समस्या नहीं, दोनों में समान जल संरक्षण होगा
    • B. दोमट में कण चिपकते हैं, सूखने पर दरारें पड़ेंगी और नमी वाष्प बन जाएगी ✓
    • C. दोमट में पानी तेजी से रिस जाएगा
    • D. दोमट में खड़ी पत्थर की परत नहीं बनेगी

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि दोमट या काली मिट्टी में कण चिपकते हैं, गर्मी में दरारें पड़ती हैं और नमी वाष्प बनकर उड़ जाती है।

    Q8. कुंई बनाते समय रस्सी से बाँधना किन परिस्थितियों में जरूरी होता है?

    • A. जब कुंई की गहराई 50 हाथ से अधिक हो
    • B. जब ईंट की चिनाई से मिट्टी को रोकना संभव न हो और मिट्टी का विस्तार हो ✓
    • C. जब खई घास के रस्से न मिलें
    • D. केवल गर्मियों में

    Answer: B — पाठ में कहा गया है कि 'कहीं-कहीं ईंट की चिनाई से मिट्टी को रोकना संभव नहीं हो पाता, तब कुंई को रस्सों से बाँधा जाता है।'

    Q9. दोमट/काली मिट्टी के क्षेत्र में बारिश के बाद खेतों में दरारें पड़ती हैं, जबकि मरुभूमि की रेत में नहीं — इसका कारण क्या है? (द्विस्तरीय विश्लेषण)

    • A. रेत में पानी नहीं सोखा जाता
    • B. दोमट के कण आपस में चिपकते हैं, रेत के नहीं; सूखने पर चिपके कण अपनी जगह छोड़ते हैं पर रेत के कण नहीं ✓
    • C. मरुभूमि में सूर्य का ताप कम होता है
    • D. रेत की गहराई दोमट से अधिक होती है

    Answer: B — यह बहुस्तरीय तर्क है: कण चिपकना → सूखने पर अलग होना → खाली जगह → दरारें। रेत में यह श्रृंखला नहीं घटती।

    Q10. निम्नलिखित कथनों को पढ़ें: कथन 1: कुंई का निर्माण एक सामान्य कौशल है जो कोई भी कर सकता है। कथन 2: चेतरोजे को गहराई में तापमान, हवा की कमी और ऊपर से गिरने वाली रेत से सुरक्षा की जरूरत है। (A) दोनों कथन सही हैं (B) दोनों कथन गलत हैं (C) कथन 1 सही है, कथन 2 गलत है (D) कथन 1 गलत है, कथन 2 सही है

    • A. दोनों कथन सही हैं
    • B. दोनों कथन गलत हैं
    • C. कथन 1 सही है, कथन 2 गलत है
    • D. कथन 1 गलत है, कथन 2 सही है ✓

    Answer: D — पाठ स्पष्ट करता है कि कुंई निर्माण में 'कुशलता और सावधानी की पूरी ऊँचाई' चाहिए (कथन 1 गलत), और चेतरोजे को कई सुरक्षाएँ पहननी पड़ती हैं (कथन 2 सही)।

    Flashcards

    राजस्थान में कुंई किस विशेष जल को संरक्षित करती है?

    कुंई रेजानी-पानी को संरक्षित करती है, जो बारिश के जल को रेत और पत्थर की परत के बीच फँसाए रखता है।

    खड़ी पत्थर की परत का क्या कार्य है?

    खड़ी पत्थर की परत बारिश के पानी को गहरे खारे भूजल से मिलने से रोकती है और रेजानी-पानी को पृथक् रखती है।

    मरुभूमि की मिट्टी में दरारें क्यों नहीं पड़ती?

    मरुभूमि में रेत के कण आपस में नहीं चिपकते, इसलिए जब पानी सूखता है तो वे अपनी जगह नहीं छोड़ते और दरारें नहीं बनतीं।

    पाणीपानी और पाताल-पानी में मुख्य अंतर क्या है?

    पाणीपानी सतह पर बरसात से सीधे बहता है, जबकि पाताल-पानी कुओं से निकाला जाने वाला गहरा भूजल है।

    रेजानी-पानी की माप में 'रेजा' शब्द का क्या अर्थ है?

    'रेजा' शब्द का अर्थ है कि मिट्टी में रिसा हुआ पानी, जिसकी माप अंगुल या सेंटीमीटर में नहीं बल्कि गहराई द्वारा की जाती है।

    चेतरोजे या चेजारों का मुख्य कौशल क्या है?

    चेतरोजे कुंई की खुदाई और निपुण चिनाई का काम करते हैं, जहाँ थोड़ी भी गलती प्राणघाती हो सकती है।

    कुंई की गहराई में मजदूरों को क्यों विशेष कवच पहनने पड़ते हैं?

    ऊपर से फेंकी जाने वाली रेत के कणों से सिर की सुरक्षा के लिए मजदूरों को धातु या पीतल का कटोरी जैसा कवच पहनना पड़ता है।

    कुंई बनाते समय रस्सी से 'बाँधना' क्यों जरूरी है?

    जहाँ ईंट की चिनाई से मिट्टी को रोकना संभव न हो वहाँ कुंई को मजबूत रस्सियों से बाँधा जाता है।

    खई घास के रस्से का क्या महत्व है कुंई निर्माण में?

    खई घास से बने रस्से को कुंई की दीवारों के साथ परतों में लगाया जाता है ताकि मजबूती बढ़े और संरचना टिकाऊ हो।

    पाणीपानी, पाताल-पानी और रेजानी-पानी में कौन सा सबसे शुद्ध होता है?

    रेजानी-पानी सबसे शुद्ध होता है क्योंकि खड़ी पत्थर की परत उसे खारे भूजल से अलग रखती है और वह बारिश का मीठा पानी ही रहता है।

    Important Board Questions

    राजस्थान में कुंई और कुआँ में क्या अंतर है? (2 अंक) [2 marks]

    कुंई = रेजानी-पानी संरक्षण, खड़ी पत्थर की परत के ऊपर; कुआँ = भूजल, गहरा और आमतौर पर खारा। दोनों के निर्माण का उद्देश्य और स्रोत अलग हैं।

    मरुभूमि की रेत में पानी कैसे संरक्षित रहता है? व्याख्या करें कि दोमट/काली मिट्टी के क्षेत्र में दरारें क्यों पड़ती हैं। (5 अंक) [5 marks]

    मरुभूमि: रेत के कण आपस में नहीं चिपकते → सूखने पर अपनी जगह नहीं छोड़ते → नमी बनी रहती है। दोमट: कण चिपकते हैं → सूखने पर अलग होते हैं → खाली जगह → दरारें पड़ती हैं। दोनों कारणों को विस्तार से समझाएँ।

    पाणीपानी, पाताल-पानी और रेजानी-पानी में से कौन सा जल राजस्थान की मरुभूमि में सबसे मूल्यवान है और क्यों? पाठ के आधार पर विस्तृत उत्तर दें। (6 अंक) [6 marks]

    रेजानी-पानी सबसे मूल्यवान है क्योंकि: (1) यह मीठा (शुद्ध बारिश का पानी) है; (2) खड़ी पत्थर की परत इसे खारे भूजल से अलग रखती है; (3) कुंई इसी को संरक्षित करती है; (4) गर्मी में नमी वाष्प न बने इसके लिए पाठ में विशेष उल्लेख है। समाज की बुद्धिमत्ता, इसे बचाने के प्रयास, और अन्य जल स्रोतों से इसका अंतर समझाएँ।

    Assertion-Reason Questions for Rajasthan ki Rajat Bundein

    Q1. Assertion (A):

    राजस्थान में बावड़ियाँ वर्षा के जल को भूजल के साथ मिलने से रोकती हैं।

    Reason (R):

    खड़ी पत्थर की परत रेजानी-पानी को पाताल-पानी से अलग बनाए रखती है और दोनों जलों के मिश्रण को रोकती है।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण कथन को पूरी तरह समझाता है। पाठ में स्पष्ट है कि कुंई की सफलता इसी अलगावन में निहित है और खड़ी पत्थर यही कार्य करती है।

    Q2. Assertion (A):

    मरुस्थली मिट्टी के कण एक दूसरे से चिपकते हैं इसलिए वर्षा का जल आसानी से अंदर नहीं जा सकता।

    Reason (R):

    जहाँ मिट्टी के कण चिपकते हैं वहाँ दरारें पड़ जाती हैं और जल गायब हो जाता है।

    Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है क्योंकि पाठ में कहा गया है कि मरुस्थली मिट्टी के कण परस्पर नहीं चिपकते। कारण सही है पर गलत कथन को समझा नहीं सकता है।

    Q3. Assertion (A):

    कुंई निर्माण में चेजारी का कार्य सबसे आसान होता है।

    Reason (R):

    कुंई के प्राण की सुरक्षा इसी चेजारी में निहित है और छोटी सी भी चूक घातक हो सकती है।

    Answer: D — A is false but R is true — कथन गलत है क्योंकि पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि चेजारी का कार्य सबसे कठिन है। कारण सही है और इसी से साबित होता है कि कथन गलत है।

    Unlock more Assertion-Reason questions in Premium — unlock →

    Case-Based Questions (CBQ) for Rajasthan ki Rajat Bundein

    Case Study:

    कुंई के निर्माण में चेजारो की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे ऊपर से लेकर तीस से साठ-पचास हाथ की गहराई तक कुंई को खोदते और तराशते हैं। चेजारो का कार्य यानी चिनाई कुंई का प्राण है क्योंकि इसमें थोड़ी सी भी चूक कुंई के अस्तित्व को संकट में डाल सकती है। पहले दिन खोदी गई मिट्टी के ऊपर रस्सी का गोला बिछाया जाता है और फिर दूसरे दिन इसी रस्सी को नई खोदी गई जगह में लगाया जाता है।

    Q1. चेजारो द्वारा किया जाने वाला कार्य क्यों कुंई का प्राण माना जाता है?

    • A. क्योंकि वे बहुत तेजी से खोद लेते हैं
    • B. क्योंकि इसमें की गई कोई भी चूक कुंई के प्राणों को ले सकती है और रेजानी-पानी को सही तरीके से सहेजना ही कुंई की सफलता है ✓
    • C. क्योंकि वे महंगे उपकरण इस्तेमाल करते हैं
    • D. क्योंकि वे पत्थरों को तराशते हैं

    Answer: B

    Q2. रस्सी के गोले को दूसरे दिन नई जगह में क्यों लगाया जाता है?

    • A. ताकि रस्सी बर्बाद न हो जाए
    • B. ताकि नई खोदी गई दीवार को सुरक्षित रखा जा सके और चिनाई को सही तरीके से जारी रखा जा सके ✓
    • C. क्योंकि रस्सी का केवल एक ही उपयोग हो सकता है
    • D. ताकि मिट्टी को साफ किया जा सके

    Answer: B

    Q3. पाठ के अनुसार चेजारो के लिए कुंई निर्माण क्यों खतरनाक माना जाता है?

    • A. क्योंकि गहराई में बहुत ठंड होती है
    • B. क्योंकि गहराई में जाते-जाते गर्मी बढ़ती है, हवा कम हो जाती है और छोटी सी चूक से जल का प्रवाह रुक सकता है जिससे चेजारे के प्राण जा सकते हैं ✓
    • C. क्योंकि गहराई में भूतप्रेत होते हैं
    • D. क्योंकि हर दिन अलग-अलग लोगों को काम करना पड़ता है

    Answer: B

    Next chapterAalo-Andhari →
    Found this useful? Share it with your class group.

    You've seen the free preview. Open the full interactive study kit — mind map, instant-graded quiz, progress tracking — free, no sign-in required.

    Open Full Study Kit — Free →

    Premium unlocks the full Question Bank, Daily Practice Papers, Chapter Quiz and Full Mock Papers for every chapter.