यह पाठ **अनुपम मिश्र** द्वारा लिखा गया एक वर्णनात्मक गद्य है। इसमें राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में **कुंई (बावली)** नामक जल संरक्षण की परंपरागत तकनीक का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह पाठ जल संरक्षण की पारंपरिक प्रणालियों की महत्ता और मानव समाज के साथ प्रकृति के संतुलन को दर्शाता है।
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**कुंई क्या है?**
कुंई (या बावली) राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में वर्षा के जल को संरक्षित करने के लिए बनाई जाने वाली एक **विशेष कुआँ होती है**। यह सामान्य कुओं से बिल्कुल अलग है।
**कुंई बनाने वाले लोग:**
**कुंई और कुए में अंतर:**
| विशेषता | कुआँ | कुंई |
|---------|------|------|
| उद्देश्य | भूजल को निकालना | वर्षा के जल को संरक्षित करना |
| जल का स्रोत | भूमिगत जल | वर्षा का पानी |
| जल की प्रकृति | खारा होता है | मीठा होता है |
| गहराई | कम गहरी | अधिक गहरी |
| आकार | बड़े व्यास वाली | 4-5 हाथ व्यास वाली छोटी |
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**आकार और आयाम:**
**पहला दिन — खोदाई और रस्सी बिछाना:**
**लेजे का निर्माण (यदि आवश्यक हो):**
**दूसरा दिन — दीवार का निर्माण:**
**गहराई के अनुसार रस्सी की लंबाई:**
**जब पत्थर की परत आए:**
**चिनाई की आवश्यकता:**
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**रेगिस्तानी मिट्टी की संरचना:**
राजस्थान की मिट्टी **दो प्रकार की होती है:**
1. **दोमट (Black soil/काली मिट्टी):**
2. **मरुभूमि की मिट्टी (Sandy soil):**
**पारंपरिक जल विभाजन प्रणाली:**
राजस्थान की मरुभूमि में समाज ने पानी को **तीन रूपों में बाँटा है:**
#### 1. पालरपानी (Surface/Surface Runoff Water)
#### 2. पाताल पानी (Groundwater/Bhujal)
#### 3. रेजानी पानी (Perched Water/Retained Moisture)
**यह सबसे महत्वपूर्ण प्रकार है:**
**राजस्थान की विशेषता:**
**रेजानी पानी का रक्षक:**
**रेजानी पानी का संरक्षण:**
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**गहराई के साथ समस्याएँ:**
**कार्य की परिस्थिति:**
**राहत का साधन:**
**रस्सी की विशेषताएँ:**
**चिनाई के साथ समायोजन:**
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**रेगिस्तान में पानी की कथा:**
**जल संरक्षण का 'शास्त्र':**
लोगों ने **अनुभव के आधार पर एक पूरा 'शास्त्र'** बनाया है:
**मिट्टी के कणों का वैज्ञानिक संचय:**
**दोमट (घनी मिट्टी) में:**
**रेगिस्तानी मिट्टी में:**
**यह प्रकृति की 'उदारता' है** कि:
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**सीमित उपलब्धता:**
**तीन प्रमुख कारण:**
1. **पानी के वाष्पीकरण को रोकना:**
2. **कम व्यास = कम फैलाव:**
3. **जल को सुरक्षित रखना:**
**चड़स (Leather bucket):**
**वर्तनी का वैज्ञानिक उपयोग:**
**कुछ क्षेत्रों में:**
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**खड़ी पत्थर की परत वाले जिले:**
1. **चूरू**
2. **बीकानेर**
3. **जैसलमेर**
4. **बाड़मेर**
**इन क्षेत्रों की विशेषता:**
**पाल (आचीन कुआँ):**
**जैसलमेर जिले का उदाहरण:**
**पाल के कारण आबाद गाँव:**
अलग-अलग स्थानों पर खड़ी पत्थर को **विभिन्न नामों से जानते हैं:**
1. **चारोली**
2. **धाधड़ो**
3. **धड़धड़ो**
4. **बिट्टू रो बल्लीयो**
5. **खड़ी** (सबसे सामान्य नाम)
**अंतिम कथन:**
> "और इसी खड़ी के बल पर, खारे पानी के सागर में मीठा पानी देती खड़ी रहती है कुंई।"
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**कुंई निर्माण के समय सम्मान:**
**कुंई पूरी होने पर विशेष भोज:**
**साल भर का सामाजिक अधिकार:**
**आर्थिक बदलाव:**
**सामाजिक संबंध टूटने के कारण:**
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**एक विचित्र स्थिति:**
कुंई का निर्माण **निजी संपत्ति** के रूप में होता है, लेकिन यह **सार्वजनिक हित** से जुड़ी होती है:
**निजी पक्ष:**
**सार्वजनिक पक्ष:**
**समाज का नियामक भूमिका:**
**उदाहरण:**
यदि मैदान में **कुल 10 इकाई नमी** है और पहले से **5 कुंई (5 इकाई) बनी हैं**, तो:
**सामाजिक सहमति:**
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**'नियति कथा':**
> "हर दिन सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की प्रसिद्ध कहानी को धरती पर उतारती है कुंई। इससे दिन भर में केवल दो-तीन घड़े मीठा पानी निकाला जा सकता है। इसलिए प्रायः पूरा गाँव गोधूलि (गायों के चरने का समय) में कुंईयों पर आता है।"
**प्रतीकात्मक अर्थ:**
1. **सीमित संसाधन:** जैसे मुर्गी **प्रतिदिन एक अंडा** देती है, कुंई **सीमित पानी** देती है
2. **दैनिक आवश्यकता:** यह **सीमा ही संरक्षण है**
3. **सामूहिक उपयोग:** **पूरा गाँव मिलकर** इस सीमित पानी को संभालता है
**गोधूलि का दृश्य:**
Q1. बावड़ी और कुएँ में मुख्य अंतर क्या है?
Answer: A — पाठ में स्पष्ट है कि बावड़ी खड़ी पत्थर की परत के ऊपर रेजानी-पानी को संरक्षित करती है, जबकि कुआँ भूजल को सीधे खोदकर निकालता है।
Q2. मरुभूमि में रेत के कण आपस में नहीं चिपकते, इसलिए क्या फायदा होता है?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि मरुभूमि में कण न चिपकने से वे अपनी जगह नहीं छोड़ते, इसलिए दरारें नहीं बनतीं और नमी संरक्षित रहती है।
Q3. खड़ी पत्थर की परत का राजस्थान की जल प्रणाली में क्या महत्व है?
Answer: B — पाठ स्पष्ट करता है कि खड़ी पत्थर की परत रेजानी-पानी को पाताल-पानी से अलग रखती है और गहरे खारे जल में मिलने से रोकती है।
Q4. रेजानी-पानी की माप में 'रेजा' शब्द का प्रयोग क्यों किया जाता है?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि रेजा की माप अंगुल या सेंटीमीटर से नहीं होती, बल्कि मिट्टी में समाए बारिश के पानी की गहराई से होती है।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
Answer: C — पाठ कहता है कि खड़ी पत्थर की परत रेजानी-पानी को संरक्षित करती है, अर्थात् इसकी उपस्थिति ही जरूरी है, न कि अनुपस्थिति।
Q6. चेतरोजे (बावड़ी बनाने वाले) के लिए सबसे खतरनाक कौन सी परिस्थिति है?
Answer: A — पाठ में बताया गया है कि चेतरोजे को धातु का कवच पहनना पड़ता है क्योंकि ऊपर से फेंकी गई रेत के कण खतरनाक हैं, और गहराई में गर्मी भी समस्या है।
Q7. यदि किसी क्षेत्र में मरुभूमि की मिट्टी न होकर दोमट मिट्टी हो तो क्या समस्या आएगी? (कारण सहित)
Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि दोमट या काली मिट्टी में कण चिपकते हैं, गर्मी में दरारें पड़ती हैं और नमी वाष्प बनकर उड़ जाती है।
Q8. बावड़ी बनाते समय रस्सी से बाँधना किन परिस्थितियों में जरूरी होता है?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि 'कहीं-कहीं ईंट की चिनाई से मिट्टी को रोकना संभव नहीं हो पाता, तब बावड़ी को रस्सों से बाँधा जाता है।'
Q9. दोमट/काली मिट्टी के क्षेत्र में बारिश के बाद खेतों में दरारें पड़ती हैं, जबकि मरुभूमि की रेत में नहीं — इसका कारण क्या है? (द्विस्तरीय विश्लेषण)
Answer: B — यह बहुस्तरीय तर्क है: कण चिपकना → सूखने पर अलग होना → खाली जगह → दरारें। रेत में यह श्रृंखला नहीं घटती।
Q10. निम्नलिखित कथनों को पढ़ें: कथन 1: बावड़ी का निर्माण एक सामान्य कौशल है जो कोई भी कर सकता है। कथन 2: चेतरोजे को गहराई में तापमान, हवा की कमी और ऊपर से गिरने वाली रेत से सुरक्षा की जरूरत है। (A) दोनों कथन सही हैं (B) दोनों कथन गलत हैं (C) कथन 1 सही है, कथन 2 गलत है (D) कथन 1 गलत है, कथन 2 सही है
Answer: D — पाठ स्पष्ट करता है कि बावड़ी निर्माण में 'कुशलता और सावधानी की पूरी ऊँचाई' चाहिए (कथन 1 गलत), और चेतरोजे को कई सुरक्षाएँ पहननी पड़ती हैं (कथन 2 सही)।
राजस्थान में बावड़ी किस विशेष जल को संरक्षित करती है?
बावड़ी रेजानी-पानी को संरक्षित करती है, जो बारिश के जल को रेत और पत्थर की परत के बीच फँसाए रखता है।
खड़ी पत्थर की परत का क्या कार्य है?
खड़ी पत्थर की परत बारिश के पानी को गहरे खारे भूजल से मिलने से रोकती है और रेजानी-पानी को पृथक् रखती है।
मरुभूमि की मिट्टी में दरारें क्यों नहीं पड़ती?
मरुभूमि में रेत के कण आपस में नहीं चिपकते, इसलिए जब पानी सूखता है तो वे अपनी जगह नहीं छोड़ते और दरारें नहीं बनतीं।
पाणीपानी और पाताल-पानी में मुख्य अंतर क्या है?
पाणीपानी सतह पर बरसात से सीधे बहता है, जबकि पाताल-पानी कुओं से निकाला जाने वाला गहरा भूजल है।
रेजानी-पानी की माप में 'रेजा' शब्द का क्या अर्थ है?
'रेजा' शब्द का अर्थ है कि मिट्टी में रिसा हुआ पानी, जिसकी माप अंगुल या सेंटीमीटर में नहीं बल्कि गहराई द्वारा की जाती है।
चेतरोजे या चेजारों का मुख्य कौशल क्या है?
चेतरोजे बावड़ी की खुदाई और निपुण चिनाई का काम करते हैं, जहाँ थोड़ी भी गलती प्राणघाती हो सकती है।
बावड़ी की गहराई में मजदूरों को क्यों विशेष कवच पहनने पड़ते हैं?
ऊपर से फेंकी जाने वाली रेत के कणों से सिर की सुरक्षा के लिए मजदूरों को धातु या पीतल का कटोरी जैसा कवच पहनना पड़ता है।
बावड़ी बनाते समय रस्सी से 'बाँधना' क्यों जरूरी है?
जहाँ ईंट की चिनाई से मिट्टी को रोकना संभव न हो वहाँ बावड़ी को मजबूत रस्सियों से बाँधा जाता है।
खई घास के रस्से का क्या महत्व है बावड़ी निर्माण में?
खई घास से बने रस्से को बावड़ी की दीवारों के साथ परतों में लगाया जाता है ताकि मजबूती बढ़े और संरचना टिकाऊ हो।
पाणीपानी, पाताल-पानी और रेजानी-पानी में कौन सा सबसे शुद्ध होता है?
रेजानी-पानी सबसे शुद्ध होता है क्योंकि खड़ी पत्थर की परत उसे खारे भूजल से अलग रखती है और वह बारिश का मीठा पानी ही रहता है।
राजस्थान में बावड़ी और कुआँ में क्या अंतर है? (2 अंक) [2 marks]
बावड़ी = रेजानी-पानी संरक्षण, खड़ी पत्थर की परत के ऊपर; कुआँ = भूजल, गहरा और आमतौर पर खारा। दोनों के निर्माण का उद्देश्य और स्रोत अलग हैं।
मरुभूमि की रेत में पानी कैसे संरक्षित रहता है? व्याख्या करें कि दोमट/काली मिट्टी के क्षेत्र में दरारें क्यों पड़ती हैं। (5 अंक) [5 marks]
मरुभूमि: रेत के कण आपस में नहीं चिपकते → सूखने पर अपनी जगह नहीं छोड़ते → नमी बनी रहती है। दोमट: कण चिपकते हैं → सूखने पर अलग होते हैं → खाली जगह → दरारें पड़ती हैं। दोनों कारणों को विस्तार से समझाएँ।
पाणीपानी, पाताल-पानी और रेजानी-पानी में से कौन सा जल राजस्थान की मरुभूमि में सबसे मूल्यवान है और क्यों? पाठ के आधार पर विस्तृत उत्तर दें। (6 अंक) [6 marks]
रेजानी-पानी सबसे मूल्यवान है क्योंकि: (1) यह मीठा (शुद्ध बारिश का पानी) है; (2) खड़ी पत्थर की परत इसे खारे भूजल से अलग रखती है; (3) बावड़ी इसी को संरक्षित करती है; (4) गर्मी में नमी वाष्प न बने इसके लिए पाठ में विशेष उल्लेख है। समाज की बुद्धिमत्ता, इसे बचाने के प्रयास, और अन्य जल स्रोतों से इसका अंतर समझाएँ।
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