StudyOSStudyOS CBSE Study Material, Class 5–12

Rabindranath Tagore — Aatmtran

NCERT Class 10 · Hindi B Based on NCERT Class 10 Hindi B textbook · Free CBSE study kit

Everything you need to ace this chapter, in one place.
Notes · Mind Map · Quiz · Assertion-Reason · Case Studies · Question Bank · Past Papers

Get Full Study Kit →
Studying with friends? Send them this chapter.

Chapter Notes

**रविंद्रनाथ ठाकुर (1861-1941) - जीवन परिचय**

• जन्म: 6 मई 1861, बंगाल के एक संपन्न परिवार में

• नोबेल पुरस्कार पाने वाले प्रथम भारतीय

• शिक्षा: घर पर ही स्वाध्यार्य से बहुविषयक ज्ञान प्राप्त

• बैरिस्ट्री पढ़ने विदेश भेजे गए लेकिन बिना परीक्षा दिए लौट आए

**रचनाओं की विविधता**

• लगभग हज़ार कविताएँ और दो हज़ार गीत लिखे

• प्रकृति से गहरा लगाव

• कला, संगीत, भवन नृत्य में विशेष अनुराग

• रवीन्द्र संगीत की एक नई धारा का सूत्रपात

• शांति निकेतन की स्थापना (शैक्षिक और सांस्कृतिक संस्था)

**प्रमुख रचनाएँ**

  • गीतांजलि (नोबेल पुरस्कार के लिए सम्मानित)
  • नैवेद्य, पूरबी, बलाका, क्षणिका, चित्र और संध्यगीत
  • कहानियाँ: सैकड़ों कहानियाँ लिखीं
  • उपन्यास: गोरा, घरे बाइरे, रविन्द्र के निबंध
  • **पाठ परिचय - 'आत्मत्राण'**

    **काव्य का मूल भाव**

    कवि कहता है कि प्रभु (ईश्वर) में सब कुछ संभव कराने की शक्ति है, किंतु कवि यह नहीं चाहता कि प्रभु स्वयं सब कुछ करें। कवि की प्रार्थना यह है कि विपत्तियों से बचाव के बजाय विपत्तियों का सामना करने की शक्ति दी जाए।

    **प्रार्थना का स्वरूप**

    • कवि नकारात्मक प्रार्थना करता है

    • परंपरागत पूजा-पाठ की पद्धति नहीं अपनाता

    • स्वयं को सशक्त बनाने की कामना करता है

    • आत्मनिर्भरता पर बल देता है

    **पंक्ति-दर-पंक्ति विश्लेषण**

    **भाग 1: विपत्तियों से सुरक्षा की प्रार्थना नहीं**

    "विपत्तियों से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं"

  • कवि प्रभु से विपत्तियाँ दूर करने को नहीं कहता
  • आशय: जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, उन्हें पूरी तरह रोका नहीं जा सकता
  • भय का सामना करने की शक्ति चाहता है
  • **भाग 2: दुःख सहने की शक्ति**

    "दुःख-ताप से व्यथित चित्त को न दो सांत्वना नहीं सही"

  • कवि झूठी सांत्वना नहीं चाहता
  • दुःख को स्वीकार करके उसे सदा जीता रहे (जय होना चाहता है)
  • मानसिक दृढ़ता की कामना
  • **भाग 3: आत्मबल और आत्मनिर्भरता**

    "कोई कहीं सहायक न मिले तो अपना बल पौरुष न हिले"

  • आत्मविश्वास की महत्ता
  • दूसरों पर निर्भर न रहना
  • हानि उठानी पड़े तो भी हार न मानना
  • **भाग 4: सुख में विनम्रता**

    "नत शिर होकर सुख के दिन में तरो मुख पहचानूँ छिन-छिन में"

  • सुख के समय विनम्र रहना चाहिए
  • सफलता पर अहंकार न करना
  • ईश्वर के प्रति कृतज्ञता बनी रहे
  • **भाग 5: दुःख में साहस**

    "दुःख-रात्रि में करे वंचना मेरी जिस दिन निखिल मही"

  • दुःख भरी रात में भी धोखा न दे जाऊँ
  • कठिन समय में भी साहस बनाए रखना
  • अधूरे संसार को पूरा माना हुआ (निखिल मही)
  • **शीर्षक 'आत्मत्राण' की सार्थकता**

    • आत्मत्राण = आत्म से त्राण (बचाव)

    • आत्मनिर्भरता से ही सच्चा बचाव संभव है

    • प्रभु की शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण स्वयं की शक्ति है

    • संघर्ष करके ही मनुष्य सशक्त बनता है

    • कवि मनुष्य को आत्मविश्वासी बनना सिखाता है

    **काव्य की विशेषताएँ**

  • **विचारधारा**: आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास पर आधारित
  • **भाषा शैली**: सरल, प्रभावशाली, भावपूर्ण
  • **रूप**: गीत काव्य (आत्म चेतना का गान)
  • **भाव**: दार्शनिक और प्रेरणादायक
  • **संदेश**: जीवन में सफल होने के लिए स्वयं पर विश्वास करो
  • **तैराकी का रूपक**

    कवि तैराकी का उदाहरण देते हैं:

    • तैराक को पानी में कोई उतार तो सकता है परंतु तैरना स्वयं को ही सीखना पड़ता है

    • परीक्षा देने वाले को बड़ों का आशीर्वाद मिल सकता है पर परीक्षा स्वयं को ही देनी पड़ती है

    • कुश्ती लड़ने वाले को दर्शकों से उत्साह मिल सकता है पर लड़ना स्वयं को ही पड़ता है

  • आशय: बाहरी सहायता से अधिक महत्वपूर्ण अपना प्रयास है
  • **अनुवाद का महत्व**

    • हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा बंगला से हिंदी में अनुवाद

    • द्विवेदी ने मूल रचना की 'आत्मा' को अक्षुण्ण रखा

    • हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में द्विवेदी का अपूर्व योगदान

    • गुणवत्तापूर्ण अनुवाद की श्रेष्ठता का उदाहरण

    **महत्वपूर्ण शब्दार्थ**

    विपत्ति = विपत्तियाँ/मुसीबत | कृपणमय = दूसरों पर दया करने वाला | दुःख-ताप = कष्ट की पीड़ा | व्यथित = दुखी | सांत्वना = ढाँढस बँधाना | पौरुष = पराक्रम | हानि = नुकसान | ज्ञान = नाश | त्राण = बचाव | अनुदिन = प्रतिदिन | अनामय = रोग रहित/स्वस्थ | सांत्वना = तसल्ली देना | अनुनय = विनय | नत शिर = सिर झुकाकर | दुःख-रात्रि = दुःख से भरी रात | वंचना = धोखा देना | निखिल = संपूर्ण | संशय = संदेह

    **परीक्षोपयोगी बिंदु**

    1. **कवि की प्रार्थना किससे अलग है**: परंपरागत प्रार्थनाओं से यह भिन्न है क्योंकि कवि विपत्तियों को दूर करने नहीं पर उनका सामना करने की शक्ति माँगता है

    2. **काव्य का संदेश**: आत्मनिर्भरता ही सच्ची शक्ति है, बाहरी सहायता पर निर्भर न रहो

    3. **भारतीय दर्शन से संबंध**: उपनिषदों और गीता की परंपरा को अनुसरण करते हुए आत्मबल की महत्ता बताता है

    4. **समसामयिक प्रासंगिकता**: आधुनिक समय में भी यह काव्य प्रेरक है क्योंकि आत्मविश्वास सफलता की कुँजी है

    **अन्य प्रार्थना काव्यों से तुलना**

    महादेवी वर्मा - "क्या पूजा क्या अर्चन रे" (भक्ति और समर्पण पर)

    सूर्यकांत त्रिपाठी निराला - "दलित जन पर करो कृपा" (दलितों के प्रति दया की प्रार्थना)

    आत्मत्राण - आत्मशक्ति और आत्मविश्वास की माँग (अद्वितीय दृष्टिकोण)

  • रविंद्रनाथ की प्रार्थना सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों पहलुओं को संबोधित करती है
  • **नोट्स फॉर स्टूडेंट्स**

    • पूरी कविता को समझने से पहले काव्य के कथ्य को समझो

    • प्रत्येक पंक्ति में गहरा दार्शनिक अर्थ निहित है

    • तैराकी, परीक्षा और कुश्ती के रूपकों को समझना आवश्यक है

    • कवि की नकारात्मक प्रार्थना वास्तव में सकारात्मक संदेश देती है

    • सुख-दुःख दोनों में समान भाव रखने की शिक्षा मिलती है

    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. 'आत्मत्राण' कविता में कवि प्रभु से क्या माँगते हैं?

    • A. सभी विपत्तियों से बचाव
    • B. कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति ✓
    • C. सुख और समृद्धि का वरदान
    • D. दीर्घ जीवन की कामना

    Answer: B — कवि कहते हैं 'विपत्तियों से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं, केवल इतना हो' - अर्थात वह शक्ति माँगते हैं, बचाव नहीं।

    Q2. कविता में 'तैरना' का उदाहरण किस संदेश को दर्शाता है?

    • A. पानी में कूदना चाहिए
    • B. बड़ों का आशीर्वाद आवश्यक है
    • C. स्वयं प्रयास ही सीखने का मार्ग है ✓
    • D. तैरना एक कठिन कला है

    Answer: C — पाठ में कहा गया है कि तैरना सीखने के लिए जल में उतरना स्वयं को ही पड़ता है, कोई बाहर से नहीं सिखा सकता।

    Q3. रवीन्द्रनाथ ठाकुर को किस कृति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला?

    • A. गीतांजलि ✓
    • B. पूरबी
    • C. बलाका
    • D. गोरा

    Answer: A — रवीन्द्रनाथ ठाकुर को उनकी कृति 'गीतांजलि' (गीतों का संग्रह) के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।

    Q4. 'हानि उठानी पड़े जगत में लाभ अगर चाहना रही' का अर्थ क्या है?

    • A. हानि सहना व्यर्थ है
    • B. लाभ के लिए हानि सहना आवश्यक है ✓
    • C. दुनिया में केवल हानि है
    • D. लाभ की कभी चिंता न करें

    Answer: B — यह पंक्ति कहती है कि यदि आप लाभ चाहते हैं तो हानि सहने की तैयारी रखनी चाहिए।

    Q5. कवि 'दुःख-रात्रि में करे व्यंजना मेरी' से क्या कहना चाहते हैं?

    • A. दुःख में रोना चाहिए
    • B. दुःख के समय भी अपनी शक्ति दिखानी चाहिए ✓
    • C. रात में दुःख नहीं होना चाहिए
    • D. व्यंजना (खेल) करना चाहिए

    Answer: B — 'व्यंजना' का अर्थ प्रदर्शन है, अर्थात दुःख के समय भी आत्मबल और निर्भयता प्रदर्शित करनी चाहिए।

    Q6. रवीन्द्रनाथ ठाकुर की शिक्षा-दीक्षा कहाँ हुई?

    • A. विदेश में
    • B. घर पर ✓
    • C. कोलकाता के स्कूल में
    • D. विश्वविद्यालय में

    Answer: B — रवीन्द्रनाथ ठाकुर की शिक्षा घर पर ही हुई और उन्होंने स्वाध्याय से विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त किया।

    Q7. कविता में कवि की कौन सी प्रार्थना परंपरागत भक्ति से भिन्न है?

    • A. ईश्वर से खुशियाँ माँगना
    • B. सहायता न माँगकर शक्ति माँगना ✓
    • C. भक्ति गीत गाना
    • D. मंदिर जाना

    Answer: B — परंपरागत प्रार्थना में सहायता माँगी जाती है, लेकिन कवि केवल आंतरिक शक्ति माँग रहे हैं।

    Q8. रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कौन सी शिक्षा संस्था की स्थापना की?

    • A. शांतिनिकेतन ✓
    • B. नालंदा विश्वविद्यालय
    • C. बनारस विश्वविद्यालय
    • D. दिल्ली विश्वविद्यालय

    Answer: A — रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता के निकट 'शांतिनिकेतन' नामक एक शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना की।

    Q9. 'सहायक न मिले तो अपना बल पौरुष न हिले' का भाव क्या है?

    • A. अकेले नहीं रह सकते
    • B. कोई मदद न मिले तो भी आत्मबल न खोएँ ✓
    • C. सहायक अवश्य मिलना चाहिए
    • D. शारीरिक शक्ति ही सब कुछ है

    Answer: B — यह पंक्ति कहती है कि यदि कोई सहायक न मिले तब भी अपनी आत्मशक्ति को कमजोर न होने दें।

    Q10. कवि 'नत शिर' होकर सुख के दिनों में क्या नहीं चाहते?

    • A. प्रभु का आशीर्वाद
    • B. खुशियाँ मनाना
    • C. अपनी पहचान को भूलना ✓
    • D. दूसरों को मदद देना

    Answer: C — कवि कहते हैं 'नत शिर होकर सुख के दिनों में तो मुख पहचानूँ छिन-छिन में' - अर्थात सुख में भी अपनी असली पहचान न भूलें।

    Flashcards

    कविता 'आत्मत्राण' में कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहे हैं?

    कवि प्रभु से यह प्रार्थना करते हैं कि वह सभी विपत्तियों से न बचाएँ, बल्कि केवल इतना दें कि वह स्वयं कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति रखें।

    'दुःख-रात्रि में करे व्यंजना मेरी' का क्या अर्थ है?

    इसका अर्थ है कि दुःख के समय भी कवि अपनी निर्भयता और सहनशीलता को प्रदर्शित करना चाहते हैं ताकि उनकी सच्ची पहचान उजागर हो।

    कवि को किस बात की चिंता है कि वह खुशियों के दिनों में भूल न जाएँ?

    कवि को चिंता है कि सुख के दिनों में वह अपने आत्मबल और संघर्ष को न भूल जाएँ जिससे वह सफल हुए हैं।

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर को कौन सा पुरस्कार प्राप्त हुआ?

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर को उनकी कृति 'गीतांजलि' के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ और वह प्रथम भारतीय थे।

    पाठ के प्रवेश में दिया गया 'तैरना' का उदाहरण क्या सिखाता है?

    यह उदाहरण सिखाता है कि सीखने के लिए स्वयं प्रयास करना अनिवार्य है, बाहरी सहायता केवल साहस बढ़ा सकती है।

    'हानि उठानी पड़े जगत में लाभ अगर चाहनी रही' से कवि का क्या संदेश है?

    कवि कहते हैं कि यदि आप लाभ के लिए हानि सहने को तैयार रहें तो दुःख के बावजूद मन में विनाश का भय न आए।

    'आत्मत्राण' शीर्षक की सार्थकता क्या है?

    'आत्मत्राण' का अर्थ है आत्म-रक्षा, जो कवि का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को स्वयं अपनी रक्षा और विकास करना चाहिए।

    कवि किन परिस्थितियों में प्रभु से 'निर्भय' होने की शक्ति माँगता है?

    कवि दुःख, संकट, द्वंद्व और विपत्तियों जैसी सभी कठिन परिस्थितियों में निर्भय और आत्मविश्वासी बने रहने की शक्ति माँगता है।

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर की शिक्षा-दीक्षा कहाँ हुई?

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर की शिक्षा घर पर ही हुई और उन्होंने स्वाध्याय से विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त किया।

    कवि को सहायक न मिलने पर क्या प्रार्थना है?

    कवि प्रार्थना करते हैं कि यदि कोई सहायक न मिले तो अपनी शक्ति को पुष्ट रखें और आत्मबल न खोएँ।

    Important Board Questions

    कवि 'विपत्तियों से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं' कहकर क्या समझाना चाहते हैं? अपने शब्दों में बताइए। [2 marks]

    कवि परंपरागत प्रार्थना को नकार रहे हैं। वह सहायता न माँगकर कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति माँग रहे हैं क्योंकि आत्मनिर्भरता ही मनुष्य का सच्चा विकास है।

    पाठ के प्रवेश में दिए गए 'परीक्षा' और 'पहलवान' के उदाहरणों से कवि क्या सीख देना चाहते हैं? समझाइए। [3 marks]

    ये उदाहरण दर्शाते हैं कि बाहरी प्रोत्साहन महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन वास्तविक परीक्षा स्वयं को ही देनी पड़ती है। सफलता के लिए आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत प्रयास आवश्यक हैं।

    'आत्मत्राण' कविता के आधार पर समझाइए कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रार्थना परंपरागत भक्ति गीतों से कैसे भिन्न है? कविता से उदाहरण देते हुए विस्तार से बताइए। [5 marks]

    परंपरागत प्रार्थना में मनुष्य सुख, समृद्धि और सहायता माँगता है। लेकिन रवीन्द्रनाथ केवल आंतरिक शक्ति, निर्भयता और आत्मबल की प्रार्थना करते हैं। वे कहते हैं 'दुःख को मैं सदा जय करूँ' - यह दर्शाता है कि वह समस्याओं के समाधान के स्थान पर उन्हें झेलने की शक्ति माँग रहे हैं। यह आधुनिक, युक्तिसंगत और स्वावलंबी दृष्टिकोण है।

    Assertion-Reason Questions for Rabindranath Tagore — Aatmtran

    Q1. Assertion (A):

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय लेखक थे।

    Reason (R):

    ठाकुर को उनकी काव्य रचना गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण कथन को पूर्णतः समर्थन करता है। गीतांजलि एक अद्भुत काव्य संग्रह है जिसके लिए ठाकुर को यह सम्मान मिला।

    Q2. Assertion (A):

    आत्मत्राण कविता में कवि भगवान से सभी विपदाओं को दूर करने की प्रार्थना करता है।

    Reason (R):

    कविता की पहली पंक्ति - 'विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं' स्पष्ट करती है कि कवि यह प्रार्थना नहीं करता।

    Answer: D — A is false but R is true — कथन गलत है क्योंकि कवि विपत्तियों से बचाने की प्रार्थना नहीं करता बल्कि उन्हें सामना करने की शक्ति माँगता है।

    Q3. Assertion (A):

    शांति निकेतन रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित एक शैक्षिक संस्थान है।

    Reason (R):

    यह एक अनोखी संस्था है जहाँ कला, संगीत और शिक्षा का विशेष महत्व दिया जाता है।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण कथन को उचित रूप से समझाता है। शांति निकेतन वास्तव में ठाकुर द्वारा स्थापित एक विश्वविख्यात संस्थान है।

    Unlock more Assertion-Reason questions in Premium — unlock →

    Case-Based Questions (CBQ) for Rabindranath Tagore — Aatmtran

    Case Study:

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रस्तुत कविता आत्मत्राण में कवि परंपरागत प्रार्थना से हटकर एक नए दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है। वह भगवान से यह नहीं माँगता कि सभी विपत्तियाँ दूर कर दें, बल्कि यह प्रार्थना करता है कि जीवन के संघर्ष में स्वयं को सामना करने की शक्ति और साहस दें। कवि का विश्वास है कि मनुष्य को स्वावलंबी होना चाहिए और अपने बल पर ही जीवन की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

    Q1. कविता में कवि परंपरागत प्रार्थना से क्यों हटकर अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है?

    • A. क्योंकि वह भगवान में विश्वास नहीं करता
    • B. क्योंकि वह आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को महत्व देता है ✓
    • C. क्योंकि वह दुःख पसंद करता है
    • D. क्योंकि वह संघर्ष से डरता है

    Answer: B

    Q2. पाठ के अनुसार, कवि की किस विशेषता को उजागर किया गया है?

    • A. आलस्य और निष्क्रियता
    • B. आत्मविश्वास और स्वावलंबन ✓
    • C. भगवान पर पूर्ण निर्भरता
    • D. दुःख से बचने की इच्छा

    Answer: B

    Q3. इस पाठ का आधुनिक युवाओं के लिए क्या संदेश है?

    • A. सभी समस्याओं का समाधान प्रार्थना में है
    • B. जीवन में कभी संघर्ष नहीं करना चाहिए
    • C. आत्मविश्वास से अपनी समस्याओं का सामना करना चाहिए ✓
    • D. भगवान सब कुछ कर देंगे, चिंता न करो

    Answer: C

    Previous Year Questions (PYQ) for Rabindranath Tagore — Aatmtran

    Real CBSE board exam questions from past papers — free to attempt.

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark

    What is the central theme of 'Atmtran' by Rabindranath Tagore?

    • Political freedom
    • Self-realization and liberation
    • Social equality
    • Romantic love

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark

    The essay discusses the importance of:

    • Material wealth
    • Individual consciousness
    • Government authority
    • Religious dogma

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark

    What message does Tagore convey to his readers?

    • Accept fate passively
    • Awaken to one's true nature
    • Follow societal norms blindly
    • Seek material prosperity

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 2 marks

    How does Tagore define freedom in 'Atmtran'?

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 2 marks

    What role does self-knowledge play in the essay?

    CBSE 2026 · Set 31/4/2 · 5 marks

    What does Rabindranath Tagore express in 'Aatmtran'?

    CBSE 2026 · Set 31/4/3 · 3 marks

    Explain the central idea of Rabindranath Tagore's 'Aatmtran'

    CBSE 2026 · Set 31/5/2 · 5 marks

    Write a detailed analysis of Rabindranath Tagore's 'Aatmatran' (Self-Realization), discussing its philosophical implications and relevance to contemporary society.

    CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 3 marks

    What does Tagore mean by 'Atmatran' (self-translation)?

    CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 3 marks

    How does the text reflect Tagore's philosophy?

    CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 3 marks

    What is the significance of the title?

    CBSE 2025 · Set 31/1/1 · 1 mark

    [Passage text not clearly visible in extracted text]

    (i) [First sub-question of passage-based question 7]

    • [Option A]
    • [Option B]
    • [Option C]
    • [Option D]

    See all 38 board PYQs for this chapter — open PYQ tab →

    Next chapterPremchand — Bade Bhai Sahab →
    Found this useful? Share it with your class group.

    You've seen the free preview. Open the full interactive study kit — mind map, instant-graded quiz, progress tracking — free, no sign-in required.

    Open Full Study Kit — Free →

    Premium unlocks the full Question Bank, Daily Practice Papers, Chapter Quiz and Full Mock Papers for every chapter.