📚 StudyOS CBSE Class 5–12 AI Tutor

Patjhar mein Tooti Pattiyaan

NCERT Class 10 · Hindi B Based on NCERT Class 10 Hindi B textbook · Free CBSE study kit

Chapter Notes

**पाठ परिचय: पत्थर में टूटी पत्तियाँ**

**लेखक परिचय: जोहान्स केलेसकर (1925-2010)**

• जन्म: 7 मार्च 1925, कोंकण क्षेत्र में

• गोवा मुक्ति आंदोलन में छात्र जीवन से शामिल

• गांधीवादी चिंतक के रूप में विख्यात

• प्रमुख भाषाएँ: कोंकणी (25 पुस्तकें), मराठी (3 पुस्तकें), हिंदी, गुजराती

• प्रमुख कृतियाँ: उजवाडाचे सूर, सत्मिध, साँघली, आठबोस (कोंकणी); कोंकणीचा राजकरण, जापान तसा दिसला (मराठी); पत्थर में टूटी पत्तियाँ (हिंदी)

• पुरस्कार: गोवा कला अकादेमी का साहित्य पुरस्कार

• मुख्य विशेषता: सरल भाषा में गहरे अर्थ प्रस्तुत करना

**पाठ का महत्व**

• थोड़ों में बहुत कहना: काव्य गुण का उदाहरण

• सूक्ति कथाएँ, आगम कथाएँ, जातक कथाएँ, पंचतंत्र की परंपरा

• पाठक को जागरूक और सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा

• व्यावहारिक जीवन के साथ आदर्शों का संतुलन

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**खंड 1: गिन्नी का सोना**

**मूल तुलना**

• शुद्ध सोना → शुद्ध आदर्श

• गिन्नी का सोना → व्यावहारिक आदर्श

**गिन्नी का सोना क्या है**

• शुद्ध सोने में तांबे की मिलावट होती है

• अधिक चमकदार और मजबूत होता है

• गहने बनाने के लिए उपयुक्त होता है

• लेकिन यह गिन्नी का ही सोना रहता है, सोना ही रहता है

**आदर्श और व्यावहारिकता की तुलना**

• शुद्ध आदर्श → आदर्शवादी लोग

• गिन्नी का आदर्श → व्यावहारिक आदर्शवादी (Practical Idealist)

• व्यावहारिकता का मिश्रण → आदर्शों को व्यावहारिक रूप देना

**प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट की परिभाषा**

• वे लोग जो शुद्ध आदर्शों में व्यावहारिकता का तांबा मिलाते हैं

• समाज को आदर्शों का पालन करते हुए व्यावहारिकता से लाभ पहुँचाते हैं

• आदर्शों को समझदारी के साथ लागू करते हैं

• गांधीजी इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं

**ध्यान देने योग्य बातें**

• बख्शान आदर्शों का नहीं, व्यावहारिकता का होता है

• जब व्यावहारिकता की बख्शान होने लगे, तो आदर्श पीछे छूट जाते हैं

• सोना ही आगे आता है, तांबा पीछे रह जाता है

**गांधीजी का दृष्टिकोण**

• गांधीजी कभी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतरने देते थे

• व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर ले जाते थे

• तांबे में सोना मिलाते थे, न कि सोने में तांबा

• व्यावहारिकता को सोना बनाकर पेश करते थे

• इसीलिए सोना हमेशा आगे आता रहा

**आदर्शवादी बनाम व्यावहारवादी**

• व्यावहारवादी लोग: हमेशा सजग, लाभ-हानि का हिसाब लगाते हैं

• जीवन में सफल होते हैं, दूसरों से आगे भी जाते हैं

• लेकिन खुद ऊपर चढ़ना और दूसरों को भी ऊपर ले जाना → महत्वपूर्ण है

• यह काम आदर्शवादी लोगों ने किया है

**महत्वपूर्ण निष्कर्ष**

• शाश्वत मूल्य समाज को आदर्शवादियों ने दिए हैं

• व्यावहारवादियों ने तो समाज को गिराया है

• शुद्ध आदर्श ही हमेशा प्रासंगिक रहते हैं

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**खंड 2: ध्यान की देन (चाय की समारोह)**

**जापान में मानसिक रोग**

• 80 प्रतिशत लोग मानसिक रूप से रोगी हैं

• कारण: जीवन की गति में वृद्धि

• नई प्रतिस्पर्धा संस्कृति

**आधुनिक जीवन की समस्याएँ**

• कोई नहीं चलता, दौड़ता है

• कोई नहीं बोलता, चिल्लाता है

• अकेले होने पर अपने आप से बड़बड़ाते हैं

• अमेरिका से प्रतिस्पर्धा की मानसिकता

• एक महीने का काम एक दिन में करने का प्रयास

• मस्तिष्क में हमेशा तनाव (Tension)

• गति (Speed) के इंजन से मस्तिष्क हजार गुना अधिक तेजी से दौड़ता है

• एक समय पर तनाव इतना बढ़ जाता है कि पूरा इंजन टूट जाता है

• मानसिक रोग बढ़ते हैं

**चाय की परंपरा (चा-नो-यु)**

**स्थान की विशेषताएँ**

• छः मंजिली इमारत

• छत पर दफ्न की दीवारों वाली और तातमी (चटाई) की फर्श वाली सुंदर पर्णकुटी

• बाहर बेढब मिट्टी का बर्तन

• उसमें पानी भरा हुआ

• हाथ-पाँव धोने की परंपरा

**चाय समारोह की प्रक्रिया**

• चाकू (परिचारक) खड़े होकर प्रणाम करता है

• 'दोज़ो' (आइए, तशरीफ लाइए) कहकर स्वागत

• बैठने की जगह दिखाई

• अँगीठी सुलगाई

• बर्तन सकी किए

• सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण तरीके से की जाती हैं

• हर भंगिमा से ऐसा लगता है कि जयजयवंती के सुर गूँज रहे हैं

• वातावरण शांत था

• चाय की पत्तियों का खदबदाना भी सुनाई दे रहा था

**चाय समारोह की शर्तें**

• शांति मुख्य बात है

• तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं

• प्याले में दो घूँट से अधिक चाय नहीं

• होंठों से प्याला लगाकर बूँद-बूँद चाय पीते हैं

• 45 मिनट तक यह क्रिया चलती है

**ध्यान पद्धति और उसके प्रभाव**

• पहले 10-15 मिनट भ्रम में पड़ना

• फिर धीरे-धीरे मस्तिष्क की गति कम होना

• अंततः पूरी तरह बंद हो जाना

• अनंतकाल का अनुभव

• सनक़ा (आवाज़) भी सुनाई देना

**वर्तमान क्षण की महत्ता**

• हम आमतौर पर अतीत या भविष्य में रहते हैं

• अतीत → गुजरे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादें

• भविष्य → रंगीन सपने

• दोनों ही मिथ्या हैं

• अतीत चला गया, भविष्य आया नहीं

• हमारे सामने केवल वर्तमान क्षण है

• यही सत्य है

• इसी में जीना चाहिए

**चाय पीते-पीते परिवर्तन**

• मस्तिष्क की गति धीरे-धीरे कम होना

• भूत और भविष्य दोनों कालों का मस्तिष्क से उड़ जाना

• केवल वर्तमान क्षण सामने रहना

• अनंतकाल जितना विस्तृत होना

• जीवन का असली अर्थ समझना

**ध्यान की देन (जेन परंपरा)**

• जापान को यह मूल्यवान देन मिली है

• शांति का अनुभव

• वर्तमान क्षण में जीने की कला

• मानसिक शांति पाने का तरीका

• आधुनिक जीवन की भाग-दौड़ से बचने का माध्यम

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**महत्वपूर्ण बिंदु**

**आदर्श और व्यावहारिकता का संतुलन**

  • शुद्ध आदर्श भी अव्यावहारिक हो सकते हैं
  • शुद्ध व्यावहारिकता आदर्शहीन हो सकती है
  • गांधीजी का रास्ता: आदर्शों में व्यावहारिकता जोड़ना, न कि व्यावहारिकता में आदर्श
  • **आधुनिक समाज की समस्या**

  • गति और प्रतिस्पर्धा में मानवीयता खोना
  • भविष्य की चिंता में वर्तमान खोना
  • मानसिक शांति का अभाव
  • ध्यान और आत्मचिंतन की आवश्यकता
  • **जीवन जीने की कला**

  • वर्तमान क्षण में पूरी तरह जीना
  • अतीत की यादों में न उलझना
  • भविष्य की चिंताओं से न दबना
  • हर क्षण को पूरी सचेतता से जीना
  • सामान्य कार्यों को गरिमा के साथ करना
  • **शाश्वत मूल्य**

  • सोना (आदर्श) हमेशा आगे आता है
  • तांबा (व्यावहारिकता) सहायक होता है
  • समाज को आदर्शवादियों से शाश्वत मूल्य मिलते हैं
  • व्यावहारवादियों ने समाज को गिराया है
  • संतुलन ही सफलता की कुंजी है
  • MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. गुण्णी के सोने में तांबा क्यों मिलाया जाता है?

    • A. सोने को सस्ता बनाने के लिए
    • B. सोने को अधिक चमकदार और मजबूत बनाने के लिए ✓
    • C. सोने का वजन बढ़ाने के लिए
    • D. सोने के रंग को बदलने के लिए

    Answer: B — पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि गुण्णी के सोने में तांबे की मिलावट से वह ज्यादा चमकता है और मजबूत भी होता है।

    Q2. प्रैक्टिकल आइडिएलिस्ट को लेखक किस उदाहरण से समझाते हैं?

    • A. व्यावहारी व्यक्ति जो कभी आदर्श नहीं मानते
    • B. आदर्शवादी व्यक्ति जो कभी व्यावहारिकता नहीं मानते
    • C. आदर्शों में व्यावहारिकता की मिलावट करने वाले ✓
    • D. जो सिर्फ लाभ-हानि की गणना करते हैं

    Answer: C — लेखक कहते हैं कि आदर्शों में व्यावहारिकता की मिलावट करके उन्हें यथार्थ में चलाने वाले प्रैक्टिकल आइडिएलिस्ट होते हैं।

    Q3. गांधीजी ने आदर्शों और व्यावहारिकता को किस तरीके से संभाला?

    • A. सोने में तांबा मिलाकर (आदर्श को नीचे लाकर)
    • B. तांबे में सोना मिलाकर (व्यावहारिकता को ऊपर उठाकर) ✓
    • C. शुद्ध सोना ही रखकर व्यावहारिकता को नकारकर
    • D. केवल व्यावहारिकता पर ध्यान देकर आदर्श भूलकर

    Answer: B — पाठ में कहा गया है कि गांधीजी तांबे में सोना मिलाते थे यानी व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर उठाते थे।

    Q4. समाज को शाश्वत मूल्य किन लोगों ने दिए हैं?

    • A. व्यवहारवादी लोगों ने
    • B. आदर्शवादी लोगों ने ✓
    • C. व्यावहारिक आइडिएलिस्टों ने
    • D. व्यावसायिक लोगों ने

    Answer: B — लेखक कहते हैं कि अगर समाज के पास कोई शाश्वत मूल्य है तो वह आदर्शवादी लोगों का दिया हुआ है।

    Q5. जापान में मानसिक रोग की मुख्य वजह क्या बताई गई है?

    • A. जलवायु परिवर्तन
    • B. आर्थिक गरीबी
    • C. जीवन की तेज गति और भूत-भविष्य में उलझना ✓
    • D. कम खाना खाना

    Answer: C — लेखक के मित्र ने बताया कि जापान में लोग दौड़ते हैं न कि चलते हैं और हमेशा तनाव में रहते हैं।

    Q6. चा-नो-यु (टी सेरेमनी) की विशेषता क्या है?

    • A. जल्दी से चाय पीना
    • B. चाय को महंगे बर्तनों में परोसना
    • C. शांति के साथ गरिमापूर्ण ढंग से चाय की विधि निभाना ✓
    • D. अधिक से अधिक लोगों को साथ बैठाना

    Answer: C — टी सेरेमनी में हर क्रिया गरिमापूर्ण ढंग से की जाती है और शांति को मुख्य बात माना जाता है।

    Q7. टी सेरेमनी में केवल तीन लोग ही क्यों बैठते हैं?

    • A. बर्तन कम हों इसलिए
    • B. अधिक लोग होने से शांति भंग हो जाती है ✓
    • C. तीन लोग ही चाय पी सकते हैं
    • D. परंपरा के नियम से

    Answer: B — पाठ में लिखा है कि शांति मुख्य बात होती है इसलिए तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता।

    Q8. लेखक को चाय पीते समय किस बात का आभास हुआ?

    • A. अतीत की यादों में खो जाना
    • B. भविष्य के सपने देखना
    • C. अनंतकाल में जीना और वर्तमान क्षण में पूरी तरह रहना ✓
    • D. चाय का स्वाद भूल जाना

    Answer: C — लेखक कहते हैं कि चाय पीते समय मन की रफ्तार धीमी हुई, भूत-भविष्य मन से निकल गए और वर्तमान रह गया।

    Q9. व्यवहारवादी लोग समाज को क्यों नहीं उठा पाते?

    • A. वे ताकतवर नहीं होते
    • B. वे केवल अपनी सफलता और लाभ के बारे में सोचते हैं ✓
    • C. वे पढ़े-लिखे नहीं होते
    • D. वे आदर्श नहीं मानते इसलिए कमजोर होते हैं

    Answer: B — लेखक कहते हैं कि व्यवहारवादी खुद ऊपर चढ़ते हैं पर दूसरों को साथ नहीं ले जाते।

    Q10. पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

    • A. शुद्ध आदर्शवाद ही जीवन में सफलता देता है
    • B. शुद्ध व्यावहारिकता ही सफलता की कुंजी है
    • C. आदर्शवाद और व्यावहारिकता दोनों का संतुलन जरूरी है ✓
    • D. सोना सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है

    Answer: C — पूरा पाठ दिखाता है कि आदर्शों में व्यावहारिकता की मिलावट और व्यावहारिकता में आदर्शों का समावेश होना चाहिए।

    Flashcards

    गुण्णी का सोना किसे कहते हैं और वह शुद्ध सोने से अलग कैसे है?

    गुण्णी के सोने में तांबे की मिलावट होती है जिससे वह अधिक चमकदार और मजबूत होता है लेकिन शुद्ध सोना नहीं रहता।

    प्रैक्टिकल आइडिएलिस्ट किसे कहते हैं?

    जो लोग आदर्शों में व्यावहारिकता की मिलावट करके उन्हें यथार्थ के धरातल पर चलाते हैं वे प्रैक्टिकल आइडिएलिस्ट कहलाते हैं।

    गांधीजी ने आदर्शों और व्यावहारिकता के साथ कैसा व्यवहार किया?

    गांधीजी तांबे में सोना मिलाते थे अर्थात व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर उठाते थे, उसे नीचे नहीं लाते थे।

    जापान के लोगों में मानसिक रोग की मुख्य वजह क्या है?

    जीवन की गति बहुत तेज है, लोग दौड़ते हैं न कि चलते हैं, और वे हमेशा भूत-भविष्य में उलझे रहते हैं।

    चा-नो-यु (टी सेरेमनी) में शांति मुख्य बात कैसे है?

    इस विधि में हर क्रिया गरिमापूर्ण ढंग से की जाती है, एक-एक बूंद चाय को आस्वाद से पिया जाता है जिससे मन वर्तमान क्षण में रहता है।

    लेखक को चाय पीने के बाद क्या अनुभूति हुई?

    मन की अस्थिरता दूर हुई, भूत और भविष्य दोनों विचार मन से निकल गए और केवल वर्तमान क्षण रह गया।

    समाज के पास शाश्वत मूल्य किन लोगों से मिले हैं?

    आदर्शवादी लोगों ने समाज को शाश्वत मूल्य दिए हैं क्योंकि वे दूसरों को भी अपने साथ ऊपर ले जाते हैं।

    व्यवहारवादी लोग क्यों सफल होते हैं लेकिन महत्वपूर्ण नहीं माने जाते?

    वे केवल अपनी सफलता और लाभ के बारे में सोचते हैं, दूसरों को साथ लेकर नहीं जाते इसलिए समाज का विकास नहीं करते।

    टी सेरेमनी में तीन से अधिक लोगों को प्रवेश क्यों नहीं दिया जाता?

    क्योंकि इस विधि में शांति मुख्य बात है और अधिक लोग होने से वह शांति भंग हो जाती है।

    लेखक का मुख्य संदेश क्या है - आदर्शवाद या व्यावहारिकता में से कौन जरूरी है?

    दोनों जरूरी हैं लेकिन आदर्शवाद को प्रमुखता देनी चाहिए और व्यावहारिकता उसे यथार्थ में उतारने का माध्यम हो।

    Important Board Questions

    गुण्णी का सोना और शुद्ध सोना अलग-अलग क्यों होते हैं? इस रूपक से लेखक क्या समझाना चाहते हैं? [2 marks]

    शुद्ध सोना = शुद्ध आदर्श (कमजोर); गुण्णी का सोना = आदर्श + व्यावहारिकता (मजबूत); लेखक कहते हैं कि आदर्शों में व्यावहारिकता की मिलावट आवश्यक है ताकि वे व्यावहारिक और प्रभावी बन सकें।

    गांधीजी के नेतृत्व की विशेषता क्या थी? वे आदर्शों और व्यावहारिकता को कैसे संभालते थे? [3 marks]

    गांधीजी तांबे में सोना मिलाते थे (व्यावहारिकता को ऊपर उठाते थे), न कि सोने में तांबा (आदर्शों को नीचे नहीं लाते थे); वे आदर्शों को हमेशा आदर्श रखते हुए उन्हें व्यावहारिक बनाते थे; इसी वजह से देश उन्हें मानता था और उनके पीछे चलता था।

    जेन की चाय पीने की विधि (चा-नो-यु) से लेखक को क्या सीख मिली? इसका आधुनिक जीवन से क्या संबंध है? [5 marks]

    चा-नो-यु में हर क्रिया धीरे-धीरे, गरिमापूर्ण तरीके से की जाती है जिससे मन वर्तमान क्षण में रहता है; लेखक को इस विधि से एहसास हुआ कि असली जीवन वर्तमान में है, न कि भूत-भविष्य में; आधुनिक जीवन में लोग हमेशा दौड़ते हैं, जल्दबाजी में रहते हैं, भूत की यादों और भविष्य की चिंता में उलझे रहते हैं जिससे मानसिक रोग बढ़ रहे हैं; जेन की यह विधि सिखाती है कि अगर हम प्रत्येक क्षण को पूरी सचेतता से जिएं तो शांति और संतुष्टि मिल सकती है।

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