StudyOSStudyOS CBSE Study Material, Class 5–12

Kabir — Saakhi

NCERT Class 10 · Hindi B Based on NCERT Class 10 Hindi B textbook · Free CBSE study kit

Everything you need to ace this chapter, in one place.
Notes · Mind Map · Quiz · Assertion-Reason · Case Studies · Question Bank · Past Papers

Get Full Study Kit →
Studying with friends? Send them this chapter.

Chapter Notes

**कबीर की साखी — संपूर्ण अध्ययन सामग्री**

**कबीर का जीवन परिचय**

• जन्म: 1398 ईस्वी में काशी (वाराणसी) में

• आयु: लगभग 120 वर्ष

• गुरु: रामानंद (संत परंपरा के प्रसिद्ध गुरु)

• अंतिम वर्ष: मगहर में बिताए और वहीं निर्वाण को प्राप्त हुए

• समय: राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक क्रांतियों का स्वर्णयुग

**कबीर की विचारधारा और दर्शन**

• अनुभव ज्ञान को शास्त्रीय ज्ञान से अधिक महत्व → प्रत्यक्ष अनुभव को प्रमाण मानते थे

• सत्संग में विश्वास → सत्पुरुषों की संगति से आत्मबोध संभव

• एकेश्वरवाद: ईश्वर एक है, निर्विकार है, निराकार है

• धर्म के बाहरी आडंबरों की कड़ी आलोचना → पाखंडवाद को नकारना

• आत्मा-परमात्मा का विरह-मिलन → भक्ति का मूल आधार

• व्यापक भ्रमण → विभिन्न क्षेत्रों से सीधा ज्ञान अर्जन

**साखी शब्द की व्याख्या**

• मूल: 'साक्षी' शब्द से तद्भव → साक्षी = प्रत्यक्ष ज्ञान देने वाला

• प्रकार: दोहा (दोहा छंद) जो 13 और 11 मात्राओं के विश्राम से 24 मात्रा का होता है

• अर्थ: सत्य की साक्षी देते हुए गुरु शिष्य को जीवन के तत्वज्ञान की शिक्षा देता है

• विशेषता: प्रभावशाली और स्मरणीय शिक्षा

**कबीर की भाषा की विशेषताएं**

• आधार: पूर्वी उत्तर प्रदेश की बोली

• मिश्रित भाषा: अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी के शब्दों का मिश्रण

• नाम: 'पचमेल खिचड़ी' या 'सधुक्कड़ी' भाषा

• कारण: व्यापक भ्रमण से विभिन्न भाषाई क्षेत्रों का प्रभाव

• उद्देश्य: जन-जन तक पहुंचना, सामान्य लोगों की भाषा में बात करना

**साखियों का विषय-वस्तु विश्लेषण**

**साखी 1: मीठी बाणी (वाणी)**

  • सारांश: मीठी और कोमल भाषा बोलने से दूसरों को सुख मिलता है और अपने मन की शांति प्राप्त होती है
  • • मन का अहंकार (आपा) खोना अनिवार्य है

    • शरीर को शीतल और नियंत्रित रखना चाहिए

    • दूसरों को सुख देना ही आत्मसुख है

    • शिक्षा: विनम्रता और दया भाषण का मूल आधार हो

    **साखी 2: कस्तूरी और मृग**

  • सारानश: ईश्वर कण-कण में व्याप्त है पर हम उसे बाहर ढूंढते हैं
  • • कस्तूरी की सुगंध नाभि में — मृग उसे बाहर खोजता है

    • प्रतीक: आत्मा परमात्मा से मिली हुई है, बाहर नहीं

    • संदेश: आंतरिक खोज की आवश्यकता → बाह्य आडंबरों से परे देखना

    • धार्मिक आलोचना: पूजा-पाठ, यज्ञ-काज, तीर्थ यात्रा बाहरी साधन हैं

    **साखी 3: अहंकार और ईश्वर का मिलन**

  • सारांश: जब तक अहंकार (मैं) है, तब तक ईश्वर नहीं मिल सकता
  • • क्रम: मैं था → तब ईश्वर नहीं; अब ईश्वर है → मैं नहीं

    • प्रतीक: दीप (दिया) का प्रकाश — अंधकार मिट जाता है

    • अर्थ: अहंकार के मिटने से ही ईश्वर का अनुभव होता है

    • दार्शनिक: आत्मविलयन (आत्मार्पण) ही ईश्वरमिलन है

    **साखी 4: सुख-दुःख की सापेक्षता**

  • सारांश: संसार में सुख और दुःख की परिभाषा विपरीत है
  • • सुखी: जो ईश्वर में लीन हो (सोया हुआ = प्रभु-स्मृति में निमज्जित)

    • दुःखी: दास कबीर (संसार में जागा हुआ = सांसारिकता में सचेत)

    • प्रतीक: सोना-जागना = दो अलग मानसिक अवस्थाएं

    • व्यावहारिक: सांसारिक चेतना ही दुःख का कारण

    **साखी 5: विरह और आध्यात्मिकता**

  • सारांश: प्रिय (ईश्वर) से बिछोह की पीड़ा में कोई मंत्र या साधन काम नहीं आता
  • • भुजंग (सांप): विरह की पीड़ा का प्रतीक

    • संदेश: केवल प्रभु-प्रेम ही मुक्ति दे सकता है

    • सीमा: शास्त्रीय साधन या तांत्रिक मंत्र अप्रभावी हैं

    • परिणाम: प्रभु के बिना जीवन असंभव → ईश्वर प्रेम ही एकमात्र पथ

    **साखी 6: आत्मशुद्धि का मार्ग**

  • सारांश: आत्मा को निर्मल रखने के लिए सांसारिक ज्ञान से परे जाना चाहिए
  • • उपाय: रीति-रिवाज और बाहरी शुद्धता से आत्मशुद्धि संभव नहीं

    • तरीका: मन (हृदय) की निर्मलता से ही प्रकृति स्वच्छ होती है

    • साबुन-पानी का महत्व: बाहरी सफाई = आंतरिक शुद्धि का प्रतीक नहीं

    • समाधान: विचार-पवित्रता और आचरण-शुद्धता आवश्यक

    **साखी 7: ज्ञान और पंडिताई**

  • सारांश: अक्षरों को पढ़-पढ़कर लोग पंडित हो गए, पर सज्जनता न आई
  • • आलोचना: बौद्धिक ज्ञान = वास्तविक ज्ञान नहीं

    • विडंबना: बुद्धिमान (अक्षर ज्ञानी) = प्रकृत पंडित नहीं

    • सच्चा ज्ञान: अनुभव-आधारित प्रिय (प्रभु) को जानना

    • संदेश: पुस्तक ज्ञान से आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं

    **साखी 8: त्याग और विषयभोग**

  • सारांश: अपना घर त्याग देना चाहिए; अब ताश खेल (सांसारिकता) साथ चले
  • • पहला चरण: अपने घर (शरीर-मन) को छोड़ना

    • दूसरा चरण: संसार के साथ परिभ्रमण (ताश = खेल = संसार)

    • अर्थ: विषय-भोग से तटस्थता अनिवार्य

    • व्यावहारिक: घर-संसार दोनों से मोह मुक्ति ही लक्ष्य

    **कबीर की समाज-आलोचना**

    • धार्मिक आडंबर: जप, तप, व्रत, पूजा के नाम पर पाखंड

    • वर्ण-व्यवस्था: जन्म से जाति निर्धारण की निंदा

    • तीर्थ-यात्रा: यंत्रवत् अनुष्ठान से मुक्ति नहीं

    • ज्ञान की विकृति: पुस्तकीय ज्ञान से आत्मज्ञान नहीं

    • सामाजिक न्याय: अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का भेद अस्वीकार

    **कबीर की वैचारिक विरासत**

  • प्रभाव: साधु परंपरा, भक्ति आंदोलन, सूफी विचार का समन्वय
  • दर्शन: अद्वैत (एक ईश्वर) + व्यावहारिक आचरण
  • लेखन: साखी + सबद + रमैनी (तीनों रचना शैलियां)
  • भाषा-योगदान: आधुनिक हिंदी का विकास
  • सामाजिक: जातिगत समानता, नारी सम्मान, दलितों के अधिकार
  • **महत्वपूर्ण शब्दार्थ**

    • बाणी = बोली, वाणी

    • आपा = अहंकार, अहम्

    • कुंडली = नाभि

    • घट-घट = कण-कण में

    • भुजंग = सांप, नाग

    • बाउरा = पागल, मतवाला

    • नेड़ा = निकट, पास

    • आंगणी = आंगन, घर

    • साबुन = साबुन, सफाई का साधन

    • अक्षर = अक्षर, अक्षर ज्ञान

    • पीउ = प्रिय (ईश्वर)

    • मुरादा = जलती हुई लकड़ी

    • तास = ताश, सांसारिक खेल

    **साखियों की केंद्रीय शिक्षाएं**

    1. भाषा की शक्ति → विनम्रता और दया से बोलना

    2. आत्मचेतना → आंतरिक खोज से ईश्वर मिलता है

    3. अहंकार का त्याग → ईश्वर-मिलन की पूर्वशर्त

    4. सांसारिकता से मुक्ति → प्रभु-प्रेम एकमात्र पथ

    5. आंतरिक शुद्धता → बाहरी आचरण का आधार

    6. अनुभव-ज्ञान → बौद्धिक ज्ञान से श्रेष्ठ

    7. सर्वव्यापी ईश्वर → सभी में समान

    8. तटस्थता → संसार के बंधनों से मुक्ति

    **परीक्षा में महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर**

    प्रश्न: मीठी बाणी बोलने से क्या लाभ होते हैं?

    उत्तर: मीठी भाषा से दूसरों को सुख मिलता है और मन का अहंकार दूर होता है। अपना शरीर शीतल और नियंत्रित रहता है। इससे आत्मशांति प्राप्त होती है।

    प्रश्न: कस्तूरी वाली साखी का प्रतीकार्थ स्पष्ट करें।

    उत्तर: कस्तूरी की खुशबू मृग की नाभि में है पर वह उसे बाहर खोजता है। इसी तरह ईश्वर हमारे भीतर है पर हम उसे तीर्थ, व्रत आदि बाहरी साधनों से ढूंढते हैं। यह शिक्षा देती है कि आंतरिक खोज आवश्यक है।

    प्रश्न: 'जब मैं था तब हरि नहीं' — इसका क्या अर्थ है?

    उत्तर: जब तक अहंकार (मैं = अहम्) रहता है तब तक ईश्वर का अनुभव नहीं होता। जब अहंकार मिट जाता है (दीप दिखने से अंधकार) तब ईश्वर का अनुभव होता है। यह आत्मविलयन की आवश्यकता दर्शाता है।

    प्रश्न: कबीर की भाषा को 'पचमेल खिचड़ी' क्यों कहा जाता है?

    उत्तर: कबीर का व्यापक भ्रमण विभिन्न क्षेत्रों में था। इससे उनकी भाषा में अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी भाषाओं के शब्द मिल गए। इसी मिश्रित और सरल भाषा को 'पचमेल खिचड़ी' कहते हैं।

    प्रश्न: साखी के लक्षण लिखिए।

    उत्तर: साखी दोहा छंद है जिसमें 13 और 11 मात्राओं के विश्राम से 24 मात्रा होती है। यह सत्य की साक्षी (प्रत्यक्ष ज्ञान) देता है। साखी का अर्थ गुरु द्वारा शिष्य को दी गई प्रभावशाली और स्मरणीय शिक्षा है।

    MCQs — 10 Questions with Answers

    Q1. कबीर के अनुसार प्रत्यक्ष ज्ञान किसे कहते हैं?

    • A. साखी को ✓
    • B. शास्त्रों को
    • C. पंडितई को
    • D. किताबों को

    Answer: A — साखी शब्द साक्षी का तद्भव है जिसका अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान होता है।

    Q2. कस्तूरी की साखी में कबीर ने किसका प्रतीक प्रयोग किया है?

    • A. आत्मा का
    • B. सांसारिक सुख का
    • C. ईश्वर का ✓
    • D. भक्ति का

    Answer: C — कस्तूरी अपने में ही सुगंध रखती है, वैसे ईश्वर हृदय में है पर हम बाहर खोजते हैं।

    Q3. दीपक की साखी में 'दीपक' का प्रतीक क्या है?

    • A. बाहरी ज्ञान
    • B. आत्मबोध ✓
    • C. धार्मिक किताबें
    • D. पंडितई

    Answer: B — दीपक जलने पर अंधकार मिटता है, वैसे आत्मबोध से अहंकार का अंधकार समाप्त हो जाता है।

    Q4. कबीर के अनुसार सुखी व्यक्ति कौन है?

    • A. जो संसार के सुखों में विस्मृत है
    • B. जो ईश्वर में लीन है ✓
    • C. जो बहुत संपत्ति रखता है
    • D. जो पढ़ा-लिखा है

    Answer: B — साखी में कहा गया है कि सुख वह है जो ईश्वर-प्रेम में जागता है, न कि संसार में सोता है।

    Q5. कबीर की भाषा को 'पचमेल खिचड़ी' क्यों कहा जाता है?

    • A. क्योंकि वह मीठी और सरल है
    • B. क्योंकि उसमें अलग-अलग भाषाओं का मिश्रण है ✓
    • C. क्योंकि वह संस्कृत से बनी है
    • D. क्योंकि वह कठिन और जटिल है

    Answer: B — कबीर की भाषा में अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी भाषाओं के शब्द मिलते हैं।

    Q6. पंडितई की साखी का मुख्य संदेश क्या है?

    • A. बहुत पढ़ना चाहिए
    • B. किताबें ज्ञान का स्रोत हैं
    • C. ईश्वर-प्रेम ही सच्चा ज्ञान है ✓
    • D. पंडित लोग सब कुछ जानते हैं

    Answer: C — साखी में कहा गया है कि बहुत किताबें पढ़ने से सच्चा ज्ञान नहीं मिलता, सच्चा ज्ञान तो ईश्वर-प्रेम में है।

    Q7. विरह की साखी में सांप का क्या अर्थ है?

    • A. आत्म-ज्ञान
    • B. ईश्वर-विरह की पीड़ा ✓
    • C. संसार का मोह
    • D. धार्मिक आडंबर

    Answer: B — भुजंग (सांप) ईश्वर से वियोग की पीड़ा का प्रतीक है जो तब तक सहा नहीं जा सकता जब तक मिलन न हो।

    Q8. कबीर के अनुसार 'घटे-घटे राम' का क्या मतलब है?

    • A. घर में राम की मूर्ति रखनी चाहिए
    • B. ईश्वर हर प्राणी में व्याप्त है ✓
    • C. राम को घटे में खोजना चाहिए
    • D. राम का नाम रोज लेना चाहिए

    Answer: B — घटे-घटे अर्थात हर हृदय में ईश्वर विद्यमान है, पर उसे प्रत्यक्ष देखने के लिए अहंकार छोड़ना पड़ता है।

    Q9. नींद रखने और आँगन कुटी बाँधने से कबीर क्या कहना चाहते हैं?

    • A. घर की साफ-सफाई करनी चाहिए
    • B. आत्मा को पवित्र रखना चाहिए ✓
    • C. सांसारिक कामों में लगे रहना चाहिए
    • D. बाहर जाना नहीं चाहिए

    Answer: B — नींद = अज्ञान को दूर करना, आँगन कुटी = हृदय को पवित्र रखना, अर्थात आत्मा को निर्मल रखना चाहिए।

    Q10. कबीर किस संप्रदाय से संबंधित थे?

    • A. शैव संप्रदाय
    • B. शाक्त संप्रदाय
    • C. वैष्णव संप्रदाय ✓
    • D. बौद्ध संप्रदाय

    Answer: C — कबीर रामानंद के शिष्य थे और वैष्णव संप्रदाय से संबंधित थे जो ईश्वर-भक्ति पर बल देता है।

    Flashcards

    साखी शब्द का अर्थ क्या है और यह किस ज्ञान का संदेश देती है?

    साखी का अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान है जो गुरु शिष्य को सीधे अनुभव के माध्यम से देता है, न कि शास्त्रों से।

    कबीर के अनुसार मीठी बोली बोलने से क्या लाभ होता है?

    मीठी बोली से औरों को सुख मिलता है और अपने तन को शीतलता प्राप्त होती है।

    कस्तूरी की कहानी में कबीर क्या संदेश देना चाहते हैं?

    जैसे कस्तूरी सुगंध स्वयं में है पर हिरण बाहर खोजता है, वैसे ईश्वर हृदय में है पर हम बाहर खोजते हैं।

    दीपक की साखी में अंधकार मिटने का क्या अर्थ है?

    अहंकार (मैं-पन) का नाश होने से आत्मा को ईश्वर का दर्शन हो जाता है।

    कबीर सुख और दुख की परिभाषा कैसे देते हैं?

    सुख वह है जहाँ हृदय ईश्वर में लीन होता है और दुख वह है जहाँ भ्रम और अज्ञान रहता है।

    विरह का भूजंग तन पर कैसे बैठता है और उसका समाधान क्या है?

    ईश्वर से वियोग का पीड़ा तब तक सहा नहीं जा सकता जब तक ईश्वर से पुनः मिलन न हो।

    कबीर के अनुसार नির्मल रहने का उपाय क्या है?

    सत्संग में रहकर और ईश्वर के नाम को धारण कर अपने मन को निर्मल रखा जा सकता है।

    पंडितई की साखी में किताब पढ़ने का क्या महत्व बताया गया है?

    बहुत किताबें पढ़ने से ज्ञानी नहीं बन जाते, सच्चा ज्ञान तो ईश्वर-प्रेम में ही है।

    घर जाने से पहले मुराड़ा (जलती लकड़ी) ले जाने का क्या अर्थ है?

    सांसारिक मोह-माया को साथ लेकर जीवन व्यतीत करना, जो अंत में सब कुछ जला देता है।

    कबीर की भाषा को पचमेल खिचड़ी क्यों कहा जाता है?

    कबीर की भाषा में अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी भाषाओं के शब्दों का मिश्रण है।

    Important Board Questions

    मीठी बोली से तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है? 'साखी' के आधार पर समझाइए। [2 marks]

    मीठी बोली = दूसरों को सुख देना, इससे अपना हृदय भी शांत और निर्मल हो जाता है; अहंकार नष्ट होता है।

    कबीर के अनुसार सच्चा ज्ञान कौन सा है और वह शास्त्रीय ज्ञान से भिन्न कैसे है? तीन साखियों के आधार पर व्याख्या कीजिए। [3 marks]

    सच्चा ज्ञान = अनुभव ज्ञान जो गुरु साक्षात् देता है (साखी अर्थ); शास्त्र बाहरी, किताबी ज्ञान है जो यथार्थ तक नहीं पहुँचाता; दीपक साखी में व्यावहारिक प्रमाण है।

    कबीर की साखियों में आत्मा और परमात्मा का संबंध कैसे दर्शाया गया है? इसमें हृदय की शुद्धता का क्या महत्व है? विस्तार से समझाइए। [5 marks]

    आत्मा = कण, परमात्मा = समूची, लेकिन अहंकार रोड़ा है (कस्तूरी साखी); हृदय शुद्ध न हो तो मिलन असंभव (नींद-जागरण प्रतीक); विरह-मिलन आध्यात्मिक यात्रा है जहाँ प्रेम ही साधन है (विरह भुजंग साखी); प्रायोगिक उदाहरण: दीपक-अंधकार, कस्तूरी-सुगंध का संदर्भ।

    Assertion-Reason Questions for Kabir — Saakhi

    Q1. Assertion (A):

    कबीर की भाषा में विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों का मिश्रण है।

    Reason (R):

    कबीर जगह-जगह भ्रमण करके प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करते थे इसलिए उनकी भाषा में अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी भाषाओं का प्रभाव दिखाई देता है।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन पूरी तरह सही हैं और कारण, कथन को पूरी तरह समझाता है। कबीर की यायावरी प्रवृत्ति के कारण ही उनकी भाषा को पचमेली खिचड़ी कहा जाता है।

    Q2. Assertion (A):

    साखी दोहा छंद में रचित की गई है।

    Reason (R):

    साखी में 13 और 11 मात्राओं का विश्राम है जो कुल 24 मात्राओं का दोहा बनाता है।

    Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन पूरी तरह सत्य हैं। पाठ परिचय में स्पष्ट उल्लेख है कि साखी वास्तविक रूप से दोहा छंद ही है जिसकी परिभाषा 13 और 11 मात्राओं के विश्राम से है।

    Q3. Assertion (A):

    मीठी वाणी बोलने से व्यक्ति का अहंकार समाप्त हो जाता है।

    Reason (R):

    कबीर के अनुसार कठोर और तीक्ष्ण वाणी से आत्मा को लाभ मिलता है।

    Answer: C — A is true but R is false — कथन बिल्कुल सत्य है - मीठी वाणी से मन का आपा खोता है अर्थात अहंकार दूर होता है। परंतु कारण गलत है क्योंकि कबीर मीठी वाणी को ही महत्व देते हैं, कठोर वाणी को नहीं।

    Unlock more Assertion-Reason questions in Premium — unlock →

    Case-Based Questions (CBQ) for Kabir — Saakhi

    Case Study:

    कबीर एक ऐसे समय में अवतरित हुए थे जब राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक क्रांतियाँ अपने चरम पर थीं। कबीर क्रांतिदर्शी कवि थे। उनकी कविता में गहरी सामाजिक चेतना प्रकट होती है। एक ओर धर्म के बाहरी आडंबरों पर उन्होंने गहरी और तीखी चोट की है तो दूसरी ओर आत्मा-परमात्मा के विरह-मिलन के भावपूर्ण गीत गाए हैं।

    Q1. कबीर की कविता में गहरी सामाजिक चेतना कहाँ से आई है?

    • A. शास्त्रों के अध्ययन से
    • B. अपने समय की राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक परिस्थितियों से ✓
    • C. बौद्धिक विश्लेषण से
    • D. अन्य कवियों की रचनाओं से

    Answer: B

    Q2. पाठ के अनुसार कबीर ने धर्म के किस पक्ष पर चोट की है?

    • A. आध्यात्मिक तत्वों पर
    • B. वास्तविक भक्ति पर
    • C. धर्म के बाहरी आडंबरों पर ✓
    • D. ईश्वर के स्वरूप पर

    Answer: C

    Q3. कबीर की साखियों का मुख्य विषय क्या है?

    • A. राजनीतिक विद्रोह
    • B. सामाजिक सुधार
    • C. आत्मा-परमात्मा के विरह-मिलन और आध्यात्मिक ज्ञान ✓
    • D. शास्त्रों की व्याख्या

    Answer: C

    Previous Year Questions (PYQ) for Kabir — Saakhi

    Real CBSE board exam questions from past papers — free to attempt.

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark

    Which of the following best describes the theme of the passage?

    • Devotion and surrender
    • Knowledge, wisdom and truth
    • Love and separation
    • Duty and responsibility

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark

    What does the poet emphasize in the given text?

    • Materialism
    • Self-realization
    • Worldly attachments
    • Social status

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 2 marks

    Explain the significance of the phrase 'Naam ke premi' in the context of the poem.

    CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 2 marks

    What is the central message conveyed by the poet?

    CBSE 2026 · Set 31/4/2 · 1 mark

    What does 'Saakhi' mean?

    • Witness
    • Story
    • Poem
    • Song

    CBSE 2026 · Set 31/4/3 · 1 mark

    What is the main idea conveyed by Kabir in his Sakhi?

    CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 1 mark

    [Passage about Kabir's teachings - original Hindi text not translated in source]

    What did the master teach the disciple?

    • Wisdom
    • Devotion
    • Sacrifice
    • Renunciation

    CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 1 mark

    [Passage about Kabir's teachings - original Hindi text not translated in source]

    Which of the following is/are true according to the passage?

    • Only 1 is true
    • Only 3 is true
    • Both 2 and 3 are true
    • Both 1 and 3 are true

    CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 1 mark

    [Passage about Kabir's teachings - original Hindi text not translated in source]

    What is the main theme of the passage?

    • Love and devotion
    • Knowledge and wisdom
    • Duty and responsibility
    • Fear and respect

    CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 2 marks

    [Passage about Kabir's teachings - original Hindi text not translated in source]

    Explain the significance of the master's teaching in the passage.

    CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 2 marks

    [Passage about Kabir's teachings - original Hindi text not translated in source]

    How does the disciple respond to the master's teaching?

    CBSE 2026 · Set 31/5/2 · 1 mark

    [Hindi passage from Kabir's Saakhi — skipped as original text is in Hindi]

    What is the primary message of this Saakhi?

    • (A) Devotion leads to salvation
    • (B) Wealth brings happiness
    • (C) Knowledge is useless
    • (D) Society is corrupt

    See all 50 board PYQs for this chapter — open PYQ tab →

    Next chapterMeerabai — Pad →
    Found this useful? Share it with your class group.

    You've seen the free preview. Open the full interactive study kit — mind map, instant-graded quiz, progress tracking — free, no sign-in required.

    Open Full Study Kit — Free →

    Premium unlocks the full Question Bank, Daily Practice Papers, Chapter Quiz and Full Mock Papers for every chapter.