**यशपाल का परिचय:** जन्म सन् 1903, फिरोजपुर; स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारी; मृत्यु सन् 1976
**साहित्य शैली:** यथार्थवादी, सामाजिक विषमता और राजनीतिक पहलू पर तीव्र व्यंग्य; भाषा में सजीवता और स्वाभाविकता
**लखनवी अंदाज़ का अर्थ:** दिखावटी सभ्यता और नकलबाज़ी की संस्कृति जहाँ वास्तविक आनंद से अधिक महत्वपूर्ण सौकीनता का प्रदर्शन है
**कहानी का मुख्य विषय:** सामाजिक विडंबना - सफेदपोश वर्ग की कृत्रिमता, जहाँ नवाब साहब खीरे को सूँघते और देखते हैं पर वास्तव में खाते नहीं
**व्यंग्य का लक्ष्य:** ऐतिहासिक सामंती वर्ग जो वास्तविकता से बेखबर, बनावटी जीवन शैली को अपनाए रहते हैं
**महत्वपूर्ण सूत्र:** बिना कथा के कहानी नहीं, पर लेखक की इच्छा मात्र से भी कहानी संभव नहीं - विचार, घटना और पात्र आवश्यक हैं
Q1. यशपाल का जन्म किस वर्ष हुआ?
Answer: A — पाठ में स्पष्ट लिखा है कि यशपाल का जन्म सन् 1903 ईस्वी में पंजाब के फिरोजपुर नवाही में हुआ।
Q2. लेखक ने सेकंड क्लास की टिकट खरीदने का प्रमुख कारण क्या था?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि लेखक नई कहानी के संबंध में सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए सेकंड क्लास की टिकट लेते हैं।
Q3. नवाब साहब के खीरे धोने का सबसे संभावित कारण क्या था?
Answer: B — पाठ से अनुमान होता है कि नवाब साहब शहर के किसी सफेदपोश को सेकंड क्लास में अकेले सफर करते हुए नहीं देखना चाहते थे।
Q4. यशपाल के साहित्य का प्रमुख विषय कौन-सा है?
Answer: C — पाठ में कहा गया है कि यशपाल की रचनाओं में सामाजिक विषमता, राजनीतिक पहलू और रूढ़ियों के खिलाफ व्यंग्य प्रमुख विषय हैं।
Q5. निम्नलिखित में से कौन-सी यशपाल की कृति नहीं है?
Answer: B — शतरंज के खिलाड़ी प्रेमचंद की कृति है, यशपाल की नहीं। झूठा सच, ज्ञानकूंज और तर्क का तूफान यशपाल की प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।
Q6. लखनवी अंदाज़ की व्यंग्य दृष्टि किस सामाजिक समस्या पर केंद्रित है?
Answer: B — कहानी सफेदपोश सामंती वर्ग की दिखावटी जीवन शैली और पश्चिमी सभ्यता की अंधानुकरण पर व्यंग्य करती है।
Q7. नवाब साहब के व्यवहार से लेखक को क्या संदेश मिलता है?
Answer: B — कहानी में नवाब साहब केवल खीरों को सूँघते और देखते हैं, वास्तव में नहीं खाते - यह दिखाता है कि दिखावा वास्तविकता से बड़ा हो गया है।
Q8. यशपाल के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
Answer: C — पाठ में यशपाल कहते हैं कि लेखक की इच्छा मात्र पर्याप्त नहीं - विचार, घटना और पात्र सभी आवश्यक हैं।
Q9. रेल के डिब्बे में बैठकर लेखक किस बारे में सोचते हैं?
Answer: B — पाठ में स्पष्ट है कि लेखक अकेले बैठकर नई कहानी के बारे में सोचते हैं और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखते हैं।
Q10. निम्नलिखित कथन पर विचार करें: 'खीरा लश्कर होता है लेकिन बिना सोचे-समझे पेट को भर नहीं सकता।' इस कथन से नवाब साहब की किस मानसिकता का संकेत मिलता है?
Answer: B — नवाब साहब खीरों को केवल सूँघते, देखते और कल्पना से आनंद लेते हैं - यह दिखाता है कि उनके लिए दिखावा और सांस्कृतिक प्रदर्शन वास्तविक भोग से अधिक महत्वपूर्ण है।
यशपाल का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1903 में पंजाब के फिरोजपुर नवाही में यशपाल का जन्म हुआ।
लेखक ने सेकंड क्लास की टिकट क्यों खरीदी?
अकेले बैठकर नई कहानी के विषय पर सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए लेखक ने सेकंड क्लास की टिकट खरीदी।
नवाब साहब ने खीरे तैयार करने में क्या प्रक्रिया अपनाई?
नवाब साहब ने खीरे को काटा, जीरा-मिली नमक और लाल मिर्च लगाई, सूँघे, स्वाद लिया और खिड़की से बाहर फेंक दिया।
'लखनवी अंदाज़' कहानी का मुख्य व्यंग्य क्या है?
यह व्यंग्य दिखावटी संस्कृति पर है जहाँ सौकीनता की नकल वास्तविक आनंद से महत्वपूर्ण हो जाती है।
यशपाल के अनुसार बिना कथा के कहानी लिखी जा सकती है?
नहीं, यशपाल मानते हैं कि बिना कथा के कहानी नहीं लिखी जा सकती, लेकिन यह एक स्वतंत्र रचना के रूप में पढ़ी जा सकती है।
नवाब साहब के दो खीरे धोने का असली कारण क्या था?
नवाब साहब के अनुमान के अनुसार वह अकेले यात्रा कर सकते हों इसलिए सेकंड क्लास में थे, और शहर का कोई सफेदपोश उन्हें इस दर्जे में न देखे।
लेखक को नवाब साहब के किन भावों से पता चला कि वह संगति नहीं चाहते?
नवाब साहब की असुविधा, संकोच, आँखों में विघ्न का असंतोष और उनके शरारक व्यवहार से लेखक को समझ आया कि वह संगति नहीं चाहते।
खीरा 'लश्कर' कहा जाता है पर यह क्या करता है?
खीरा खस्ता तो होता है लेकिन बिना सोचे पेट को भर देने में असक्षम होता है और मेदे पर बोझ डालता है।
यशपाल किस वर्ग की आलोचना करते हैं?
यशपाल उस ऐतिहासिक सामंती वर्ग की आलोचना करते हैं जो वास्तविकता से बेखबर, बनावटी जीवन शैली का आदी है।
लेखक का ज्ञान-चक्षु खुलने का क्षण कब आया?
जब नवाब साहब ने खीरे खिड़की से बाहर फेंक दिए और खुद को उनके रसास्वादन की कल्पना से संतुष्ट किया, तब लेखक को समझा कि वह नई कहानी के लेखक हैं।
लेखक को नवाब साहब के किन व्यवहार से पता चला कि वह उनसे संगति (बातचीत) नहीं करना चाहते? [2 marks]
नवाब साहब की आँखों में विघ्न का असंतोष, शरारक भाव-परिवर्तन और सलाम देने पर उनकी शीतल प्रतिक्रिया देखें।
नवाब साहब ने खीरों को इतने यत्न से तैयार करने के बाद उन्हें खिड़की से बाहर क्यों फेंक दिया? इससे उनके किस स्वभाव का परिचय मिलता है? [3 marks]
उनका उद्देश्य खीरे को खाना नहीं, बल्कि उनकी सुगंध और स्वाद की कल्पना से संतुष्ट होना था; यह दिखावटी जीवन शैली का प्रतीक है।
यशपाल के अनुसार 'लखनवी अंदाज़' से नई कहानी के नाम का संबंध कैसे बनता है? इस कहानी के माध्यम से यशपाल समाज के किस वर्ग पर क्या व्यंग्य करते हैं? [5 marks]
नवाब साहब का खीरे खाने का तरीका दिखावटी संस्कृति का प्रतीक है; यशपाल उस सामंती वर्ग की आलोचना करते हैं जो वास्तविकता से बेखबर, बनावटी सभ्यता का अनुसरण करता है। यह पश्चिमी अंधानुकरण और भारतीय मूल्यों से दूरी को दर्शाता है।
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