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**नेताजी का चश्मा - व्यापक अध्ययन सामग्री**
**लेखक परिचय: स्वयं प्रकाश**
• जन्म: 1947 में बांकुड़ा (मध्य प्रदेश) में
• शिक्षा: मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई
• कार्य क्षेत्र: औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी, राजस्थान में अधिकांश जीवन
• पत्रकारिता: वसुधा पत्रिका के संपादन से जुड़े
• प्रमुख कहानी संग्रह: सूरज कब निकलेगा, आएँगे अच्छे दिन, आदमी जात का आदमी, संधान
• उपन्यास: विनय, ईंधन
• पुरस्कार: पहल सम्मान, बुमेली पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादेमी पुरस्कार
• मृत्यु: 2019
**कहानी का विषय और उद्देश्य**
• मध्यवर्गीय जीवन के कुशल चित्रण में वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना
• सामाजिक जीवन में जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ प्रतिकार का स्वर
• रोचक किस्सागोई शैली में लिखी गई कहानियाँ हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती हैं
• देशभक्ति की भावना को सामान्य जनता के माध्यम से व्यक्त करती है
**कहानी की पृष्ठभूमि**
• देशभक्ति सिर्फ बड़ों का काम नहीं है → बच्चे भी इसमें शामिल हैं
• राष्ट्र के निर्माण में सभी नागरिकों का योगदान महत्वपूर्ण है
• चेतना: भावना का महत्व → रंग-रूप और कद-काठी से अधिक
• नेताजी की प्रतिमा के माध्यम से स्थानीय समुदाय की देशभक्ति का चित्रण
**कहानी की कथावस्तु**
**प्रथम भाग: प्रतिमा की स्थापना**
• छोटे कस्बे में नगरपालिका द्वारा नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की प्रतिमा लगाई जाती है
• मुख्य बाज़ार के चौराहे पर प्रतिमा स्थापित की जाती है
• हालदार साहब (कंपनी के अधिकारी) को हर पंद्रहवें दिन इसी कस्बे से गुजरना पड़ता है
• प्रतिमा का वर्णन: Bust, दो फुट ऊँची, सुंदर, फौजी वर्दी में, कुछ-कुछ मासूम और कमजोर
• समस्या: नेताजी की आँखों पर चश्मा नहीं था → साधारण लोहे का चौड़ा काला फ्रेम वाला चश्मा लगा दिया गया
• हालदार साहब का प्रतिक्रिया: पहली बार आमूलचूल आश्चर्य और मुस्कुराहट
**द्वितीय दर्शन: चश्मा परिवर्तन की खोज**
• दूसरी बार गुजरते समय हालदार साहब को प्रतिमा पर नया चश्मा दिखता है
• पहले मोटे फ्रेम का चौकोर चश्मा था → अब तारों के फ्रेम का गोल चश्मा
• हालदार साहब का अनुमान: प्रतिमा के कपड़े नहीं बदल सकते, पर चश्मा तो बदल सकता है
• प्रश्न: कौन इसे बदल रहा है?
• तीसरी बार फिर नया चश्मा
• हालदार साहब की आदत बन जाती है: हर बार कस्बे से गुजरते समय प्रतिमा को ध्यान से देखना
**तीसरा पड़ाव: पानवाले का रहस्योद्घाटन**
• हालदार साहब द्वारा पानवाले से सीधा सवाल: चश्मा कैसे बदलता है?
• पानवाला (काला, मोटा, खुशमिजाज़ आदमी) आँखों-ही-आँखों में हँसता है
• रहस्य का खुलासा: कैप्टन है जो चश्मे बदल देता है
• पानवाले का व्याख्या:
**रहस्य की गहराई: मास्टर मोतीलाल का प्रयास**
• प्रतिमा के नीचे लिखा: "मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल"
• हालदार साहब का अनुमान: मास्टर मोतीलाल कस्बे का अध्यापक था
• माह भर में प्रतिमा बनाकर पट्ठ देने का वादा किया होगा
• संभावित समस्याएँ:
**कैप्टन की पहचान और उदेश्य**
• बुजुर्ग, लंगड़ा आदमी
• गांधी टोपी पहने हुए
• आँखों पर काला चश्मा
• एक हाथ में छोटी-सी संदूकची
• दूसरे हाथ में बाँस पर टँगे बहुत-से चश्मे
• नई दुकान नहीं → बंद दुकान के सहारे खड़ा रहता है
• देशभक्ति की भावना से प्रेरित कार्य
• गरीब, लाचार, लेकिन महान उद्देश्य में समर्पित
**हालदार साहब की अंतिम समझ**
• देशभक्ति केवल बड़े लोगों का काम नहीं
• साधारण मनुष्य भी अपने-अपने तरीके से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं
• कैप्टन जैसे लंगड़े, गरीब आदमी की देशभक्ति में हृदय और समर्पण का महत्व
• प्रतिमा का महत्व → रंग-रूप और कद में नहीं, बल्कि भावना में
**साहित्यिक विशेषताएँ**
**शैली**: रोचक किस्सागोई, हल्के-फुल्के अंदाज़ में गंभीर विषय
• प्रश्नोत्तर शैली
• संवाद प्रधान
• पात्रों का सजीव चित्रण
• व्यंग्य और विनोद
• हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करने वाली भाषा
**भाषा की विशेषताएँ**
• सरल, सुबोध हिंदी
• स्थानीय बोली का प्रयोग (पानवाले की भाषा)
• मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग
• संवादों में जीवंतता
• विवरणात्मक शैली
**पात्र चरित्र विश्लेषण**
**हालदार साहब**
• कंपनी के अधिकारी
• सामान्य और सहृदय व्यक्ति
• जिज्ञासु स्वभाव
• क्रमश: समझदारी की ओर बढ़ते हैं
• देशभक्ति के वास्तविक अर्थ को समझते हैं
• अंत तक संशय में रहते हैं, लेकिन मूल्यांकन अवश्य करते हैं
**पानवाला**
• गरीब, सामान्य व्यक्ति
• काला, मोटा, खुशमिज़ाज़
• चतुर और बुद्धिमान
• हास्य प्रवण
• कैप्टन का मित्र/सहयोगी
• कहानी का महत्वपूर्ण संदेश वाहक
**कैप्टन**
• बुजुर्ग, लंगड़ा आदमी
• गांधीवादी विचारधारा वाला
• साधारण गरीब आदमी
• महान उद्देश्य में समर्पित
• प्रतीकात्मक चरित्र (देशभक्ति का प्रतीक)
• नाम: कैप्टन (उपनाम, वास्तविक परिचय अज्ञात)
• सामाजिक रूप से सीमांत, पर आदर्शवादी
**मास्टर मोतीलाल**
• कस्बे का अध्यापक
• प्रतिमा का निर्माता
• कला में कुशल, लेकिन तकनीकी सीमाओं से जूझता है
• नगरपालिका का निर्देश पालन करने वाला
• कहानी के दौरान अनुपस्थित, पर महत्वपूर्ण भूमिका
**मुख्य विषय वस्तु और संदेश**
**देशभक्ति की परिभाषा**
**सामाजिक वर्गीकरण की आलोचना**
• गरीब गैर-महत्वपूर्ण नहीं होते
• सीमांत व्यक्ति (लंगड़ा, बूढ़ा, गरीब) भी समाज के अभिन्न अंग
• भारतीय समाज में प्रत्येक का योगदान सम्मानीय है
**स्थानीय पहचान और राष्ट्र निर्माण**
• छोटा कस्बा भी राष्ट्र का महत्वपूर्ण अंग
• स्थानीय नागरिकों का समूहीकृत प्रयास
• नगरपालिका, शिक्षक, गरीब विक्रेता - सब की भूमिका
**प्रमुख घटनाएँ और पल**
१. **प्रथम दर्शन**: प्रतिमा पर चश्मा देखकर हालदार साहब की मुस्कुराहट
२. **द्वितीय दर्शन**: अलग चश्मा देखकर आश्चर्य
३. **तीसरा दर्शन**: नया चश्मा फिर से
४. **पानवाले से संवाद**: रहस्य का आंशिक खुलासा
५. **कैप्टन का दर्शन**: वास्तविकता का ज्ञान
६. **अंतिम प्रश्न**: नेताजी का मूल चश्मा कहाँ गया?
७. **पानवाले का संकेत**: मास्टर को भूल गया
८. **हालदार साहब की समझ**: देशभक्ति का वास्तविक अर्थ
**कहानी का संरचना**
**आरंभ**: हालदार साहब का नियमित परिचय
**विकास**: प्रतिमा पर बार-बार चश्मे का परिवर्तन
**जिज्ञासा**: पानवाले के माध्यम से रहस्य की ओर
**क्रमिक रहस्योद्घाटन**: कैप्टन की पहचान
**चरम बिंदु**: हालदार साहब द्वारा मूल चश्मे के बारे में प्रश्न
**समापन**: अनसुलझा रहस्य, लेकिन महत्वपूर्ण सीख
**प्रतीकवाद**
• **प्रतिमा**: राष्ट्र की महिमा
• **चश्मा**: प्रतिमा को पूर्ण करने का प्रयास, छोटे-बड़े का भेद भुलाकर राष्ट्र निर्माण
• **कैप्टन**: गरीब, सीमांत लेकिन समर्पित नागरिक
• **पानवाला**: सामान्य जन, जो बड़ी सच्चाई को समझते हैं
• **हालदार साहब**: आम पाठक, जो क्रमश: सत्य तक पहुँचते हैं
• **कस्बा**: भारत का सूक्ष्म प्रतिनिधित्व
• **चश्मा बदलना**: नए विचारों को स्वीकारना, परिवर्तन को अपनाना
**CBSE परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु**
**संभावित प्रश्न और उत्तर कोश्ठी**
१. हालदार साहब को कस्बे से गुजरना क्यों पड़ता था?
२. नेताजी की प्रतिमा कहाँ लगाई गई थी?
३. प्रतिमा पर चश्मा कैसे आया?
४. कैप्टन कौन है?
५. कैप्टन चश्मे क्यों बदलते हैं?
६. मास्टर मोतीलाल कौन थे?
७. देशभक्ति का असली अर्थ क्या है?
८. पानवाले की क्या भूमिका है?
९. हालदार साहब को अंत में क्या एहसास हुआ?
१०. कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
**शब्दार्थ और कठिन शब्द**
• संगमरमर: संगमरमर की पत्थर
• बस्ट: गर्दन तक की प्रतिमा
• वर्दी: सैनिक का पोशाक
• नगरपालिका: स्थानीय प्रशासनिक निकाय
• मूर्तिकार: प्रतिमा बनाने वाला कलाकार
• देशभक्ति: राष्ट्र के प्रति प्रेम और समर्पण
• लंगड़ा: पैर में चोट/विकलांग
• कैप्टन: सेना में पद (यहाँ उपनाम)
• संदूकची: छोटी पेटी
• पारदर्शी: जिसमें से दिख जाए
**आलोचनात्मक दृष्टिकोण**
• कहानी का शीर्षक "नेताजी का चश्मा" → वस्तुतः यह एक सामान्य चश्मे की कहानी है
• लेखक का व्यंग्य: सामान्य वस्तु में भी महत्वपूर्ण विचार छिपे होते हैं
• सीमांत वर्ग की गरिमा और सम्मान का प्रश्न
• भारतीय लोकतंत्र में सभी की समान भूमिका
**निष्कर्ष**
कहानी का मूल संदेश यह है कि देशभक्ति केवल बड़े कार्यों या महान व्यक्तित्वों में नहीं, बल्कि सामान्य मनुष्य के छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों में भी निहित है। कैप्टन जैसा गरीब, बुजुर्ग, विकलांग व्यक्ति भी अपने सीमित संसाधनों में अधिकतम योगदान देता है। भारतीय समाज के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका सम्मानीय और महत्वपूर्ण है। इसी विचार को लेखक ने हल्के-फुल्के किस्सागोई अंदाज़ में प्रस्तुत किया है।
Q1. नेताजी की मूर्ति किस चौराहे पर लगाई गई थी?
Answer: A — पाठ में स्पष्ट है कि नगरपालिका ने शहर के मुख्य बाजार के मुख्य चौराहे पर नेताजी की मूर्ति लगवाई थी।
Q2. हलदार साहब को कस्बे से गुजरना क्यों पड़ता था?
Answer: B — पाठ की शुरुआत में कहा गया है कि हलदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरना पड़ता था।
Q3. मूर्ति पर चश्मा लगाने का काम कौन कर रहा था?
Answer: B — पानवाले ने हलदार साहब को बताया कि एक लंगड़ा आदमी कैप्टन अपनी दुकान से चश्मे बदल-बदलकर मूर्ति पर लगाता है।
Q4. पानवाले ने मूर्ति के चश्मे के बारे में हलदार साहब से क्या कहा?
Answer: C — पानवाले ने समझाया कि कैप्टन अपनी दुकान में उपलब्ध फ्रेमों में से एक चश्मा मूर्ति पर फिट कर देता है।
Q5. हलदार साहब को तीसरी बार मूर्ति में कौन-सा अंतर दिखा?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि दूसरी बार मोटे फ्रेम का चौकोर चश्मा था, अब तार के फ्रेम का गोल चश्मा था।
Q6. कैप्टन की दुकान कहाँ थी?
Answer: B — पाठ में कहा गया है कि कैप्टन एक बंद दुकान के सहारे अपना बांस टिकाकर चश्मे बेचता था।
Q7. हलदार साहब को कैप्टन के बारे में किसने पहली बार बताया?
Answer: A — हलदार साहब ने पानवाले से ही पूछा था कि मूर्ति का चश्मा कैसे बदलता है, तब पानवाले ने कैप्टन के बारे में बताया।
Q8. मास्टर मोतीलाल के द्वारा मूर्ति पूरी न कर पाने का संभावित कारण क्या था?
Answer: B — पानवाले ने कहा कि 'माइंड भूल गया' - यानी मास्टर को समझ नहीं आया कि पत्थर में पारदर्शी चश्मा कैसे बनाया जाए।
Q9. कहानी के अंत में हलदार साहब किस निष्कर्ष पर पहुँचे?
Answer: C — हलदार साहब ने समझा कि महत्व मूर्ति के रंग-रूप या कद का नहीं बल्कि कस्बे के नागरिकों की भावना और प्रयास का है।
Q10. यह कहानी मुख्य रूप से किस विषय को प्रतिपादित करती है?
Answer: B — कहानी का मूल संदेश यह है कि देशभक्ति केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है बल्कि साधारण जनता अपने दैनिक कार्यों से भी राष्ट्र निर्माण में योगदान देती है।
नेताजी की मूर्ति पर चश्मा किसने लगाया और क्यों?
कैप्टन (पानवाले की दुकान के पास खड़ा लंगड़ा आदमी) ने नेताजी को अधूरी मानकर अपनी दुकान से चश्मे बदलकर लगाते रहे क्योंकि उसे लगता था कि नेताजी को चश्मे की जरूरत है।
हलदार साहब का कस्बे से गुजरना नियमित क्यों था?
हलदार साहब को कंपनी के काम के सिलसिले में हर पंद्रहवें दिन उस कस्बे से गुजरना पड़ता था।
मास्टर मोतीलाल कौन थे और उन्होंने क्या वादा किया था?
वह कस्बे के स्कूल का ड्राइंग मास्टर था जिसे मूर्ति बनाने का काम सौंपा गया और उसने एक महीने में पत्थर की मूर्ति बनाकर पटक देने का वादा किया।
'नेताजी का चश्मा' कहानी का मूल संदेश क्या है?
देशभक्ति केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है बल्कि साधारण नागरिक अपने दैनिक कार्यों से भी राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।
कैप्टन द्वारा चश्मा बदलना किस बात का प्रतीक है?
यह दिखाता है कि नेताजी को अधूरा देखकर साधारण आदमी को भी बेचैनी होती है और वह अपने स्तर पर उसे पूरा करने का प्रयास करता है।
पानवाले का यह कहना कि 'माइंड भूल गया' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि मास्टर मोतीलाल ने मूर्ति को पारदर्शी चश्मा लगाने का तरीका भूल गए या उसे बना नहीं सके इसलिए वह पत्थर का चश्मा बना पाए।
हलदार साहब को कैप्टन के प्रति शुरुआत में कैसा विचार था?
शुरुआत में हलदार साहब को कैप्टन की देशभक्ति का मजाक उड़ाना लगा पर बाद में वह समझ गए कि उसकी भावना सच्ची और प्रशंसनीय है।
कस्बे के विकास में नगरपालिका की भूमिका कहानी में कैसे दिखी है?
नगरपालिका सड़क पक्की करना, पशुशाला बनाना, कबूतरों की छतरी बनाना और कवि सम्मेलन करवाना जैसे कार्य करती रहती थी पर नेताजी की मूर्ति पूरी नहीं कर सकी।
लेखक स्वयं प्रकाश ने इस कहानी से क्या संदेश देना चाहा है?
कि सच्ची देशभक्ति वंदना और भावनाओं में नहीं बल्कि व्यावहारिक कार्यों और सहयोग में निहित होती है।
हलदार साहब के अंतिम विचार में उन्होंने किस बात को समझा?
हलदार साहब ने समझा कि मूर्ति के रंग-रूप या कद का महत्व नहीं है बल्कि जो भावना और प्रयास कस्बे के नागरिकों ने दिखाया वही वास्तविक देशभक्ति है।
नेताजी की मूर्ति पर चश्मा न होने की समस्या का समाधान कैप्टन ने कैसे किया? अपने शब्दों में समझाइए। [2 marks]
कैप्टन ने देखा कि नेताजी की मूर्ति अधूरी है, इसलिए वह अपनी दुकान से विभिन्न चश्मे लेकर नियमित रूप से मूर्ति पर लगाता था - यह दर्शाता है कि वह नेताजी के प्रति अपनी भावनात्मक देशभक्ति को व्यावहारिक रूप से व्यक्त कर रहा था।
हलदार साहब के विचारों में कैप्टन के संबंध में कैसा परिवर्तन आया? इसका कारण क्या था? [3 marks]
शुरुआत में हलदार साहब को कैप्टन की भावना का मजाक लगा (भ्रम), लेकिन जब उन्होंने पानवाले से जानकारी ली तो समझ गए कि यह एक सामान्य आदमी की सच्ची देशभक्ति है; इसलिए वे कैप्टन को सम्मान देने लगे और महसूस किया कि देशभक्ति का महत्व भावनाओं और सेवा में है, न कि मूर्ति की बाह्य सुंदरता में।
कहानी के आधार पर समझाइए कि 'देशभक्ति' को लेखक ने किस रूप में प्रस्तुत किया है और इस दृष्टिकोण से हमें क्या सीख मिलती है? [5 marks]
लेखक ने दिखाया है कि देशभक्ति केवल आंदोलन, भाषण या बड़े कार्यों तक सीमित नहीं है बल्कि साधारण लोग - पानवाला, दुकानदार, स्कूल का शिक्षक और यहाँ तक कि बेकार माने जाने वाले कैप्टन - भी अपने स्तर पर राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं। इससे सीख मिलती है कि प्रत्येक नागरिक का दैनिक प्रयास, भावनाएँ और कार्य राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण हैं। हलदार साहब का अंतिम विचार - 'महत्व मूर्ति के रंग-रूप का नहीं बल्कि कस्बे के नागरिकों की भावना का है' - यह पुष्टि करता है कि सच्ची देशभक्ति व्यावहारिक और समावेशी होती है।
Q1. Assertion (A):
हलवाई साहब को हर पखवाड़े कस्बे से गुजरना पड़ता था।
Reason (R):
वे कंपनी के काम के सिलसिले में यह यात्रा करते थे।
Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण कथन सही तरीके से कारण प्रस्तुत करता है। हलवाई साहब को नियमित रूप से कंपनी के कार्य के कारण ही इस कस्बे से गुजरना पड़ता था।
Q2. Assertion (A):
नेताजी की मूर्ति पर लगा चश्मा हमेशा एक ही रहता था।
Reason (R):
पत्थर की मूर्ति कपड़े नहीं बदल सकती इसलिए चश्मा भी नहीं बदला जा सकता।
Answer: C — A is true but R is false — कथन गलत है। कहानी में स्पष्ट है कि चश्मा कई बार बदला गया। कारण भी आंशिक रूप से गलत है क्योंकि पत्थर की मूर्ति पर चश्मा तो बदला जा सकता है, जैसा कि कैप्टन करता था।
Q3. Assertion (A):
कैप्टन चश्मेवाला एक धनी व्यापारी था जिसके पास बड़ी दुकान थी।
Reason (R):
उसके पास बहुत सारे चश्मों के फ्रेम और अच्छी आय थी।
Answer: D — A is false but R is true — दोनों कथन गलत हैं। कैप्टन एक गरीब, बूढ़ा और लंगड़ा आदमी था जिसके पास कोई दुकान नहीं थी। वह खुले में बांस पर चश्मे बेचता था। उसके पास कुछ गिने-चुने फ्रेम थे, ज्यादा नहीं।
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Case Study:
हलवाई साहब का प्रश्न सुनकर पानवाला आंखों-ही-आंखों में हंसा। उसकी ताश्जीरी। पीछे घूमकर उसने नीचे पान थूका और अपनी लाल-काली बत्तीसी दिखाकर बोला - वैक्टीन चश्मेवाला करता है। पर हलवाई साहब को यह बात अच्छी नहीं लगी कि एक साधारण व्यक्ति की देशभक्ति का इस तरह मजाक उड़ाया जाए।
Q1. पानवाले के द्वारा कैप्टन को वैक्टीन कहने का क्या अर्थ है?
Answer: B
Q2. पानवाले की 'लाल-काली बत्तीसी दिखाना' क्या दर्शाता है?
Answer: B
Q3. हलवाई साहब को पानवाले की बातें अच्छी क्यों नहीं लगीं?
Answer: B
Real CBSE board exam questions from past papers — free to attempt.
CBSE 2026 · Set 31/1/1 · 1 mark
[Passage in Hindi - skipped]
(i) [Question text in Hindi - skipped]
CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 5 marks
[Diagram/Map-based question — skipped]
CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 5 marks
Swayam Prakash — Netaji Ka Chashma
[Question text not clearly visible in image]
CBSE 2026 · Set 31/3/1 · 1 mark
[Hindi passage - unable to extract English text]
What is the main emotion expressed in this passage?
CBSE 2026 · Set 31/3/1 · 1 mark
[Hindi passage - unable to extract English text]
Which of the following statements are true?
CBSE 2026 · Set 31/3/1 · 4 marks
[Question text in Hindi - English portion not clearly visible]
CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark
[Question about Swayam Prakash - Netaji Ka Chashma - content not clearly visible in extract]
CBSE 2026 · Set 31/4/2 · 1 mark
[Passage from Netaji Ka Chashma - Hindi text content]
(i) In the context of the passage, who is the main character?
CBSE 2026 · Set 31/4/3 · 1 mark
[Passage about Netaji Ka Chashma - text not fully visible in extracted content]
What is the meaning of the phrase 'Netaji Ka Chashma'?
CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 1 mark
The passage describes a character who visits a place regularly but faces certain limitations due to his condition. Despite these challenges, he continues to visit and observe the surroundings with great interest.
Based on the passage, which of the following best describes the main character's condition?
CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 2 marks
What challenge does the protagonist face in 'Netaji Ka Chashma'?
CBSE 2026 · Set 31/5/2 · 1 mark
[Passage about Netaji Ka Chashma - original Hindi passage present]
Who is the subject of the passage?
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