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Shivpujan Sahay — Mata Ka Anchal

NCERT Class 10 · Hindi A Based on NCERT Class 10 Hindi A textbook · Free CBSE study kit

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Chapter Notes

**माता का अँचल - पाठ का विस्तृत अध्ययन सामग्री**

**पाठ का परिचय और लेखक**

• यह पाठ शिवपूजन सहाय द्वारा लिखी गई आत्मकथा 'माता का अँचल' से उद्धृत है

• यह एक आत्मस्मरणात्मक रचना है जिसमें लेखक ने अपने बचपन की यादों को सजीव किया है

• कहानी बिहार के एक ग्रामीण परिवार के जीवन को दर्शाती है

• भाषा सरल, भावपूर्ण और ग्रामीण जीवन के छवि को जीवंत करती है

**मुख्य पात्र और उनकी भूमिका**

• बाबू जी (पिता) → बालक का पिता, रामायण पाठ करते हैं, बेहद ममतामय हैं, खेल-कूद में बालक साथी

• माता (माँ) → बालक की देखभाल करने वाली, अनुशासन बनाए रखने वाली, स्नेहिल स्वभाव की

• बालक (लेखक) → केंद्रीय पात्र, जिज्ञासु और खेल-प्रिय स्वभाव वाला

• पड़ोस के बालकों का समूह → खेल-कूद के साथी

**घर के माहौल और रहन-सहन**

• परिवार का एक कक्ष जहाँ पिता पूजा-पाठ करते हैं

• खेतों के पास एक चबूतरा जहाँ खेल-कूद होती है

• गाँव का नदी किनारा (गंगा जी) जहाँ पिता आटे की गोलियाँ मछलियों को खिलाते हैं

• झूलों वाले पेड़ → बचपन के सुखद पल बिताने की जगह

• ग्रामीण परिवेश में कृषि आधारित जीवन प्रणाली

**बचपन की दैनिक गतिविधियाँ**

• सुबह की दिनचर्या → पिता के साथ स्नान और पूजा में भाग लेना

• तिलक लगवाना → भभूत का तिलक जिससे 'बम-भोला' बन जाता था

• आइना देखना → पिता के साथ बैठकर अपना चेहरा आइने में निहारना

• दोपहर का समय → खेल-कूद और शरारतें

• दाढ़ी-मूँछों के साथ खेल → पिता की दाढ़ी को पकड़ना, छुड़ाना और चूमना

• खिलाने का तरीका → माता का अनोखा तरीका कौर बनाकर खिलाने का

• घर लौटना और भोजन → पिता के साथ चौके पर खाना

**भोजन और पोषण से जुड़े प्रसंग**

• पिता द्वारा गोरस और भात खिलाना → घी और भात का सरल भोजन

• माता की शिक्षा → बच्चों को भर-मुँह कौर खिलाने का महत्व

• माता का विचार → 'जब खा गा बड़े-बड़े कौर, तब पा गा दुनिया में ठौर'

• खिलवाड़ के समय की प्रतिबंधि → दही-भात के साथ विभिन्न कल्पनाओं वाली कहानियाँ

• कौर के नाम → तोता, मैना, कबूतर, हंस, मोर के बहाने से खिलाना

**भोज-दावत और सामाजिक अनुष्ठान**

• घरौंडा बनाना → मिट्टी से घर बनाने की कल्पना

• दुकान का खेल → बिस्कुट के टुकड़ों से पैसे और मिठाइयों की दुकान

• जेवनार (भोज) की तैयारी → घी, मिट्टी, बालू से खाना बनाना

• पंगत बैठना → सामूहिक भोजन की परंपरा

• पिता का आना → भोज को देखने और शामिल होने के लिए

**बरात के अनुकरण का खेल**

• बरात का जुलूस निकालना → ढोल, रेणु, तुरही बजाना

• बैंड बजाना → शहनाई की नकल

• दूल्हा और दुल्हिन की भूमिका → बालकों का खेल

• यात्रा का मार्ग → चबूतरे के एक कोने से दूसरे कोने तक

• आँगन का अलंकरण → लकड़ी की पटरियों, गोबर, आम और केले की टहनियों से सजाया जाना

• दंडवत प्रणाम की परंपरा

**कृषि खेल और कल्पना**

• खेत बनाना → गाँव की मेड़ से खेत तैयार करना

• बीज बोना → विभिन्न प्रकार के बीज बोने की नकल

• हल चलाना → बैलों की भूमिका में दो लड़कों को मोठ खींचना

• गीत → 'ऊँच नीच में कई किंयारी, जो उपजी सो भई हमारी'

• फसल तैयार करना → पैरों से अनाज रोंदना, तराजू में तौलना

• पिता का सवाल → 'इस साल की खेती कैसी रही'

• खेल की मस्ती → सब कुछ भूलकर खेल में व्यस्त रहना

**नाटक-नाटकी का खेल**

• चबूतरे का एक कोना → नाटक घर के रूप में

• पिता की चौकी → रंगमंच का काम

• कागज के पर्दे → दृश्य परिवर्तन के लिए

• मिठाइयों की दुकान → नाटक का एक दृश्य

• मिठाइयों की व्यवस्था → ताड़ के पत्तों की पूरी, गीली मिट्टी की जलेबियाँ, फूटे घड़े के टुकड़ों के बर्तन

• वास्तविक खेल → नाटक के अंदर नाटक

**सामाजिक त्यौहार और परंपराएँ**

• दंडी (दनादन) का मेला → दूर के लोगों को आकर्षित करने वाला आयोजन

• तुंबा और अमोले → गौण संगीत वाद्य यंत्र

• टूटी बांसुरी की पालकी → राजकीय परंपरा की नकल

• घोड़े पर बैठना → समृद्धि का प्रतीक

• दनादन मेले की पूरी यात्रा → विभिन्न स्थलों पर रुकना और देखना

**धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव**

• रामायण का पाठ → पिता द्वारा रामायण पढ़ना, बचपन में इसका गहरा प्रभाव

• तिलक और भभूत → धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा

• गंगा स्नान → आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक

• पूजा-पाठ में भाग लेना → बचपन से ही धार्मिक संस्कार

• तेल पड़ना → माता द्वारा बालक को शांत करने का तरीका

• काजल और कुर्ता → बचपन की सजधज

**माता-पिता का प्रेम और स्नेह**

• पिता द्वारा 'भोलानाथ' कहकर पुकारना → प्रेम का प्रतीक

• माता द्वारा अनुशासन और देखभाल → कठोरता और प्रेम का मिश्रण

• शारीरिक संपर्क → गोद में बैठना, चुम्बन करना, दाढ़ी के साथ खेलना

• खेल में माता-पिता की भागीदारी → पारिवारिक बंधन को मजबूत करना

• सुरक्षा प्रदान करना → रास्ते में झूला झुलाना, हाथ पकड़कर चलाना

**ग्रामीण संस्कृति की झलकियाँ**

• संयुक्त परिवार की व्यवस्था → सब कुछ साझे में

• पड़ोस के साथ संबंध → बालकों का समूह, सामूहिक खेल

• खेती पर आधारित अर्थव्यवस्था → कृषि केंद्रित जीवन

• त्यौहारों का महत्व → दनादन, बरात, मेले का आयोजन

• परंपरागत खेल → नाटक, कृषि खेल, भोज-भात

• मौखिक साहित्य → गीत और लोक परंपराएँ

**भाषा की विशेषताएँ**

• ग्रामीण शब्दावली का प्रयोग → तोरा, अमोले, कनुस्तर, दनादन

• आंचलिक भाषा → उत्तर भारतीय, विशेषकर बिहार की बोली

• सरल किंतु प्रभावशाली संवाद → बच्चों की बातचीत की सच्चाई

• कहावतें और लोकोक्तियाँ → 'जब खा गा बड़े-बड़े कौर...'

• वर्णनात्मक शैली → दृश्यों को जीवंत करना

• संवेदनात्मक भाषा → भावनाओं को गहराई से व्यक्त करना

**पाठ के मुख्य विषय और संदेश**

• बचपन की निर्मलता → खुशियों और भोलेपन का चित्रण

• पारिवारिक प्रेम → माता-पिता का अटूट स्नेह

• सांस्कृतिक परंपरा → धार्मिक और सामाजिक मूल्य

• ग्रामीण जीवन की सुंदरता → सरल किंतु समृद्ध जीवन

• बचपन की स्मृतियों का महत्व → भूतकाल का चिंतन

• सामूहिक भावना → समूह में खेल और आनंद

• प्राकृतिक परिवेश का प्रभाव → प्रकृति से जुड़ाव

**परीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदु**

• पात्रों के आचरण का विश्लेषण → पिता की कोमलता, माता की दृढ़ता

• संवाद का महत्व → चरित्र और परिस्थितियों को समझना

• वर्णन की सूक्ष्मता → ब्योरेवार विवरण और दृश्य चित्रण

• भावनात्मक आयाम → बचपन की अभिव्यक्ति

• सांस्कृतिक संदर्भ → उत्तर भारतीय ग्रामीण संस्कृति

• साहित्यिक उपकरण → रूपक, उपमा, पुनरावृत्ति

• बचपन के सार्वभौमिक तत्व → हर पाठक से जुड़ाव

**शब्दार्थ सूचकांक**

• अँचल = घाघरा या साड़ी का पल्ला

• तड़क = तड़का, तेजी से उठना-बैठना

• लिलार = माथा

• पीठ के बल लेटना = पीठ के बल सोना

• गूँथना = गूँधना, अलग करना

• भरपेट = पेट भरकर

• करौनी = नृत्य की मुद्रा

• भभूत = विभूति, पवित्र राख

• खस्सा = अच्छा, बेहतरीन

• सरसों का तेल = तेल पड़ाना

• कनुस्तर = तुरही जैसा वाद्य

• अमोले = आम के फूल

• शहनाई = संगीत वाद्य

• जेवनार = भोज, दावत

• खरच = खर्च, व्यय

• काले की बिंदी = नजर की रक्षा के लिए काला तिलक

• गोरस = दूध और घी का मिश्रण

• दही-भात = दही के साथ चावल

• चौका = रसोई की पवित्र जगह

• गोरखपुरी पैसे = प्राचीन सिक्के

• सरकंडे = बाँस जैसा पौधा

• बरात = विवाह का जुलूस

• ढोल = संगीत वाद्य यंत्र

• दंडवत = पूर्ण प्रणाम

• दुल्हिन = दुल्हा की पत्नी

• दरवाजा = प्रवेश द्वार

• कनुस्तर = तुरही

• ढेर = ढेर, बहुत सारा

• हरी = हरियाली, हरे रंग की चीज

• रहरी पुरान = पुरानी परंपरा, सदियों पुरानी रीति

• अर्हर = दालें

• दनादन = दूर के देशों के लिए जाने वाला तीर्थ

• कुल्हे का दस्का = कुल्हे जैसा संगीत यंत्र

• लोज = सड़क

• पौंझ = पेड़

• सोच = विचार

• खेती का ढंग = कृषि की पद्धति

• बटोही = यात्री

• ईंधन = आग के लिए लकड़ी

• पायदान = पद, सीढ़ी

MCQs — 10 Questions with Answers

Q1. लेखक के पिता का असली नाम क्या था?

  • A. राज नारायण मिश्र
  • B. तारकेश्वरनाथ ✓
  • C. भोलानाथ
  • D. शिवपूजन साहय

Answer: B — पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि असली नाम तारकेश्वरनाथ था, पर पिता प्यार से भोलानाथ कहते थे।

Q2. पिता पाँच सौ राम-नाम लिखकर क्या करते थे?

  • A. उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए सुरक्षित रखते थे
  • B. मंदिर में चढ़ाते थे
  • C. आटे की गोलियों में लपेटकर मछलियों को खिलाते थे ✓
  • D. बच्चों को धार्मिक ज्ञान देते थे

Answer: C — पाठ के अनुसार, पिता आटे की गोलियों में राम-नाम लिखे कागज लपेटकर गंगा जी में जाकर मछलियों को खिलाते थे।

Q3. माता तेल मालिश के बहाने लेखक को कौन सी सीख देती थी?

  • A. स्वच्छता का महत्व
  • B. धार्मिक कर्तव्य
  • C. भर-मुँह खाना खाना क्योंकि इससे दुनिया में ठौर मिलता है ✓
  • D. अनुशासन का महत्व

Answer: C — माता कहती थी कि बड़े-बड़े कौर खाने से दुनिया में ठौर मिलता है, इसलिए बच्चों को भर-मुँह कौर देना चाहिए।

Q4. लेखक के घर में खेती के खेल में कौन सा गीत गाया जाता था?

  • A. नदिया किनारे बसत निवास
  • B. ऊँच नीच में ईंई किया, जो उपजी सो भई हमारी ✓
  • C. राम राम फिरत भूप
  • D. भरत को सुख सपने होई

Answer: B — यह गीत खेती के खेल को करते समय गाया जाता था जो जीवन के यथार्थ को प्रकट करता है।

Q5. घरौंदे में मिठाइयाँ बनाने के लिए निम्न में से कौन सी चीज़ का इस्तेमाल नहीं होता था?

  • A. पत्तों की पूरी-कचौड़ी
  • B. गीली मिट्टी की जलेबियाँ
  • C. असली चावल का आटा ✓
  • D. फूलों के रंग

Answer: C — पाठ में केवल प्राकृतिक सामग्री जैसे पत्ते, मिट्टी और फूलों का उल्लेख है, असली आटे का नहीं।

Q6. पिता जब खाना खाते थे तो लेखक क्या करता था?

  • A. शांति से बैठा रहता था
  • B. आयना में अपना चेहरा देखता था
  • C. घरौंदा बिगाड़कर हँसते-हँसते भाग जाता था ✓
  • D. पिता को खिलाता था

Answer: C — पिता खाना खाते समय बालकों के साथ घरौंदा खेल खेलते थे और लेखक उसे बिगाड़कर भाग जाता था।

Q7. पाठ का शीर्षक 'माता का अँचल' क्या व्यक्त करता है?

  • A. माता के कपड़े की एक तह
  • B. माता के प्रेम, सुरक्षा और स्नेह की शरण ✓
  • C. माता की आर्थिक स्थिति
  • D. माता की सामाजिक प्रतिष्ठा

Answer: B — अँचल (आँचल) माता के प्रेम, सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक है जहाँ बालक सुरक्षित रहता है।

Q8. लेखक के पिता बच्चों को किस तरह की शिक्षा देते थे?

  • A. पुस्तकों के माध्यम से
  • B. खेल और व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से ✓
  • C. केवल धार्मिक शिक्षा
  • D. केवल नियम-कानून के माध्यम से

Answer: B — पिता विभिन्न खेलों और व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से बालकों को जीवन की शिक्षा देते थे।

Q9. बरात के जुलूस में लेखक और साथी किस दिशा में चलते हुए गीत गाते थे?

  • A. सीधी दिशा में
  • B. घूमते हुए चारों ओर ✓
  • C. बस्ती से बाहर की ओर
  • D. छत पर चलते हुए

Answer: B — पाठ में कहा गया है कि बरात 'दूसरे कोने में जाकर दरवाज़े लगती थी' - अर्थात घूमते हुए चारों ओर।

Q10. पाठ की भाषा शैली कैसी है?

  • A. औपचारिक और तकनीकी
  • B. जटिल और दार्शनिक
  • C. सरल, बोलचाल और भावनात्मक ✓
  • D. वर्णनात्मक और आलंकारिक

Answer: C — पाठ की भाषा सरल, बोलचाल वाली और भावनात्मक है जो बचपन की यादों को ज़िंदा कर देती है।

Flashcards

लेखक को बचपन में किस भाषा की शिक्षा सबसे पहले मिली?

पिता के साथ रामायण सुनकर और संस्कृत के धार्मिक संस्कार से संस्कृत भाषा की शिक्षा मिली।

पिता पाँच सौ बार राम-नाम लिखकर क्या करते थे?

उन्हें आटे की गोलियों में लपेटकर गंगा जी में मछलियों को खिलाने के लिए ले जाते थे।

माता तेल मालिश के समय लेखक को कौन सी बात समझाती थी?

माता कहती थी कि बड़े-बड़े कौर खाने से दुनिया में ठौर मिलता है, इसलिए भरपूर खाना चाहिए।

लेखक और उसके साथी कौन से नाटक सबसे ज़्यादा खेलते थे?

मिठाई की दुकान, घरौंदा, खेती का खेल, बरात और ढेरों के मेले के नाटक खेलते थे।

घरौंदे में मिठाइयाँ बनाने के लिए कौन कौन सी चीजें इस्तेमाल की जाती थीं?

फूलों के रंग, पत्तों की पूरी-कचौड़ी, गीली मिट्टी की जलेबियाँ और घड़े के टुकड़ों के बतासे बनाए जाते थे।

पिता जब बैठकर खाना खाते थे तो लेखक क्या करता था?

लेखक और उसके साथी हँसते-हँसते घरौंदा बिगाड़कर भाग जाते थे और पिता भी हँसते-हँसते उन्हें पकड़ते थे।

लेखक के पिता का असली नाम क्या था और वह किस नाम से पुकारे जाते थे?

असली नाम तारकेश्वरनाथ था, पर पिता उन्हें प्यार से 'भोलानाथ' कहकर पुकारते थे।

खेती के खेल में गाया जाने वाला गीत क्या था?

गीत था: 'ऊँच नीच में ईंई किया, जो उपजी सो भई हमारी' - यह जीवन के कठोर सत्य को सिखाता था।

माता पिता से क्या शिकायत करती थी जब लेखक भोजन के बारे में कहते थे?

माता कहती थी कि पिता तो चार-चार दाने का कौर बच्चे के मुँह में देते हैं जबकि बच्चे को भर-मुँह कौर देना चाहिए।

बरात का जुलूस निकालते समय लेखक और साथी क्या गाते थे?

वह 'चलो भाइयो दनजी, सतु पिसान की मोटरी' गाते हुए बरात निकालते थे और दूसरे कोने में दनजी की यात्रा करते थे।

Important Board Questions

लेखक के पिता का व्यक्तित्व कैसा था? उन्होंने बच्चों को किन तरीकों से शिक्षित किया? [2 marks]

पिता सख्त अनुशासक पर प्रेमपूर्ण थे; वह धार्मिक संस्कार, खेल-खिलाड़ी बनाना और व्यावहारिक जीवन कौशल सिखाते थे - नाटक, घरौंदा, खेती का खेल आदि।

माता की परवरिश की विधि में प्रेम और अनुशासन का संतुलन कैसे दिखाई देता है? उदाहरण देकर समझाइए। [3 marks]

माता बालक को तेल मालिश, भोजन, स्नान और कपड़े देकर स्नेह दिखाती थीं पर साथ ही उन्हें अनुशासित भी करती थीं; तेल मालिश के समय भोजन की सीख, हठ पर डाँट और व्यावहारिक ज्ञान देना - ये सब प्रेम का ही अंग था।

'माता का अँचल' पाठ में दिखाई देने वाले सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को रेखांकित कीजिए। आधुनिक समय में ये मूल्य कहाँ तक प्रासंगिक हैं? [5 marks]

पाठ में संयुक्त परिवार, सामूहिक खेल, धार्मिक संस्कार, सामाजिक उत्सव (बरात, दनजी के मेले), पड़ोस का परिवार और सामुदायिक जीवन दिखता है। आधुनिकता में व्यक्तिगतता बढ़ी पर पिता-माता का स्नेह, खेल द्वारा शिक्षा और पारिवारिक मूल्य आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बालक विकास में भावनात्मक जुड़ाव अपरिहार्य है।

Assertion-Reason Questions for Shivpujan Sahay — Mata Ka Anchal

Q1. Assertion (A):

लेखक ने पिता के साथ समय बिताना अधिक पसंद किया क्योंकि वह उसके खेलने का साथी थे।

Reason (R):

पिता जी बालक को ले जाते थे, उसे नहलाते थे और पूजा के समय बैठाते थे, फिर खेल में भी उसका साथ देते थे।

Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं और कारण पूरी तरह से प्रमाणित करता है कि पिता केवल धार्मिक पथ-प्रदर्शक ही नहीं बल्कि खेल के साथी भी थे। यह परिवारिक स्नेह और बहुआयामी पितृत्व को दर्शाता है।

Q2. Assertion (A):

माता द्वारा खाना खिलाने की विधि पिता की विधि से बेहतर थी।

Reason (R):

माता मानती थीं कि बच्चे को भर-मुँह कौर देने से उसका पेट भी भरता है और वह यह समझ जाता है कि वह खूब खा गया है।

Answer: A — Both A and R are true, and R is the correct explanation of A — दोनों कथन सही हैं। माता की विधि व्यावहारिक थी - बहुत सारे छोटे कौर देने से बच्चा अधिक खा सकता है और संतुष्ट भी हो जाता है। यह मातृ-अनुभव और बालक-मनोविज्ञान दोनों को दर्शाता है।

Q3. Assertion (A):

बच्चों द्वारा बनाए गए नाटकों में मिठाई की नकली दुकान लगाना उनकी आर्थिक समझ को दर्शाता है।

Reason (R):

बच्चों ने वास्तविक वस्तुओं से मिठाई बनाई और उसे सिक्कों में बेचा, जिससे वे खरीद-बिक्री का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करते थे।

Answer: B — Both A and R are true, but R is NOT the correct explanation of A — कथन और कारण दोनों सत्य हैं लेकिन कारण पूरी तरह से कथन को समर्थित नहीं करता। बच्चों का यह खेल मुख्यतः कल्पना-शक्ति और रचनात्मकता का परिचय देता है, न कि गहरी आर्थिक समझ का। यह बाल-सुलभ नकल है, व्यावहारिक शिक्षा नहीं।

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Case-Based Questions (CBQ) for Shivpujan Sahay — Mata Ka Anchal

Case Study:

जब बाबू जी रामायण का पाठ करते थे तो लेखक उनकी बगल में बैठकर अपने मुँह में आइना निकाल लिया करता था। जब पिता उसकी ओर देखते तो वह कुछ लजाकर और मुस्कुराकर आइना नीचे रख देता था। पिता जी भी मुस्करा पड़ते थे। यह छोटी सी घटना बताती है कि पिता-पुत्र के बीच कितना स्नेह और समझ थी।

Q1. लेखक पिता की रामायण के पाठ के समय में आइना क्यों निकालता था?

  • A. पिता को परेशान करने के लिए
  • B. अपना चेहरा देखने की बाल-सुलभ जिज्ञासा के कारण ✓
  • C. पिता का मजाक उड़ाने के लिए
  • D. रामायण को अनदेखा करने के लिए

Answer: B

Q2. जब पिता लेखक की ओर देखते थे तो वह आइना नीचे क्यों रख देता था?

  • A. डर के कारण
  • B. शर्मिंदगी और पिता के प्रति सम्मान के कारण ✓
  • C. ऊबकर
  • D. आइना टूट जाने के डर से

Answer: B

Q3. इस घटना से पाठ के संदर्भ में कौन सा भाव उभरता है?

  • A. पिता की कठोरता
  • B. पिता-पुत्र के बीच आपसी विश्वास, प्रेम और सहज मानवीय संबंध ✓
  • C. बालक की नासमझी
  • D. धार्मिक शिक्षा का महत्व

Answer: B

Previous Year Questions (PYQ) for Shivpujan Sahay — Mata Ka Anchal

Real CBSE board exam questions from past papers — free to attempt.

CBSE 2026 · Set 31/1/1 · 5 marks

(i) [Question text in Hindi - skipped]

CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 4 marks

[Diagram/Map-based question — skipped]

CBSE 2026 · Set 31/2/1 · 8 marks

[Question text not clearly visible in image]

CBSE 2026 · Set 31/3/1 · 6 marks

[Question text in Hindi - English portion not clearly visible]

CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 1 mark

[Passage from 'Mata Ka Anchal' - Hindi text not extracted]

What is the mother's concern in the passage?

  • Education
  • Health
  • Safety
  • Wealth

CBSE 2026 · Set 31/4/1 · 5 marks

Analyze the narrative style and themes in Shivpujan Sahay's 'Mata Ka Anchal'.

CBSE 2026 · Set 31/4/2 · 5 marks

(i) Write a summary or extract a passage (100 words, 1×5=5) based on 'Mata Ka Anchal' highlighting key moments.

CBSE 2026 · Set 31/4/3 · 1 mark

[Passage about Mata Ka Anchal - text not fully visible in extracted content]

Who is the author of the text?

  • A
  • B
  • C
  • D

CBSE 2026 · Set 31/4/3 · 5 marks

Write a book review or summary (80 words) based on a chapter

CBSE 2026 · Set 31/5/1 · 5 marks

Write an essay on the portrayal of rural life in 'Mata Ka Anchal'.

CBSE 2026 · Set 31/5/2 · 4 marks

How does 'Mata Ka Anchal' (Shivpujan Sahay) depict the mother-child relationship and its emotional significance?

CBSE 2026 · Set 31/5/3 · 1 mark

Who is the narrator of 'Mata Ka Anchal'?

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